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Detailed Chapter 4 भूषण RBSE Solutions for Class 11 Hindi
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Class 11 Hindi Chapter 4 भूषण RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 4 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. भूषण ने किसे श्रेष्ठ वीर माना है –
(क) अल्लाउद्दीन
(ख) औरंगजेब
(ग) मानसिंह
(घ) शिवाजी
Answer: (घ) शिवाजी
In simple words: कवि भूषण ने महाराज शिवाजी को सबसे महान और बहादुर योद्धा माना है।
🎯 Exam Tip: जब किसी कवि की रचनाओं में किसी विशेष व्यक्ति की प्रशंसा हो, तो उस व्यक्ति को पहचानना महत्वपूर्ण होता है।
Question 2. 'चमू' का अर्थ है –
(क) चक्र
Answer: (क) चक्र
In simple words: 'चमू' शब्द का मतलब 'चक्र' होता है।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक ग्रंथों में प्रयुक्त कठिन शब्दों के अर्थ याद रखना महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 4 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. शिवाजी ने किसे आतंकित कर रखा था ?
Answer: शिवाजी ने अपने शत्रुओं की स्त्रियों को बहुत डरा रखा था। उनका आतंक इतना था कि शत्रु पक्ष की स्त्रियाँ भयभीत रहती थीं।
In simple words: शिवाजी ने दुश्मनों की औरतों को डरा रखा था।
🎯 Exam Tip: सीधे-सीधे पूछे गए प्रश्नों का उत्तर कम शब्दों में और सटीक देना चाहिए।
Question 2. 'तीन बेर खाती ते वें तीन बेर खाती हैं।' पटरानियों की ऐसी दशा किस कारण हुई ?
Answer: शिवाजी के आतंक के कारण मुगल बादशाहों की बेगमों की हालत ऐसी हो गई थी। वे जो परदे में रहती थीं और दिन में तीन बार अच्छा भोजन करती थीं, वे अब जंगल में भटकती हुई बेर खाकर गुजारा कर रही थीं। उन्हें पेट भर खाना भी नहीं मिल पा रहा था।
In simple words: शिवाजी के डर से रानियाँ जंगल में तीन बेर के फल खाकर गुजारा कर रही थीं, जबकि पहले वे तीन बार अच्छा खाना खाती थीं।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में 'क्या' और 'क्यों' दोनों पहलुओं को स्पष्ट करना चाहिए।
Question 3. 'कंदमूल भोग करें कंदमूल भोग करें' पंक्ति में कौन सा अलंकार है ?
Answer: इस पंक्ति में यमक अलंकार है क्योंकि 'कंदमूल भोग करें' शब्द दो बार आया है और हर बार इसका अर्थ अलग है। एक 'कंदमूल भोग करें' का मतलब स्वादिष्ट भोजन करना है, और दूसरे का मतलब जंगली कंदमूल खाकर गुजारा करना है।
In simple words: इस पंक्ति में 'यमक अलंकार' है, क्योंकि एक ही शब्द दो अलग-अलग मतलब के साथ आया है।
🎯 Exam Tip: यमक अलंकार में एक शब्द या शब्दांश दो या अधिक बार आता है और हर बार उसका अर्थ भिन्न होता है।
Question 4. शिवाजी ने गढ़पतियों के साथ कैसा व्यवहार किया ?
Answer: शिवाजी ने गढ़पतियों के साथ बहुत कठोर व्यवहार किया। उन्होंने कई गढ़ों को तोड़ दिया, गढ़पतियों को दंडित किया और कुछ को तो गढ़ों से निकालकर भिखारी जैसा बना दिया।
In simple words: शिवाजी ने गढ़ों को तोड़ा, गढ़पतियों को सजा दी और कुछ को भिखारी बना दिया।
🎯 Exam Tip: चरित्र-चित्रण वाले प्रश्नों में नायक के विभिन्न व्यवहारों का उल्लेख करें।
Question 5. भूषण ने छत्रसाल की भुजाओं की समता किससे की है ?
Answer: कवि भूषण ने छत्रसाल की भुजाओं की तुलना भुजगेश, यानी शेषनाग से की है। इसका मतलब है कि उनकी भुजाएँ शेषनाग जितनी शक्तिशाली थीं।
In simple words: भूषण ने छत्रसाल की भुजाओं की तुलना शेषनाग से की है, जो उनकी ताकत दिखाते हैं।
🎯 Exam Tip: उपमा वाले प्रश्नों में यह स्पष्ट करें कि किसकी तुलना किससे की गई है और क्यों।
RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 4 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. 'भुज भुजगेस की बैसंगिनी भुजंगिनी' से क्या तात्पर्य है ?
Answer: इस पंक्ति में कवि भूषण ने छत्रसाल की बरछी (भाले) की घातक शक्ति का वर्णन किया है। कवि कहते हैं कि छत्रसाल की बरछी उनकी भुजाओं में ऐसे रहती थी जैसे शेषनाग के साथ उसकी पत्नी नागिन हमेशा रहती है। यह बरछी दुश्मनों को बहुत नुकसान पहुँचाती थी, जैसे नागिन डसती है।
In simple words: इस पंक्ति का मतलब है कि छत्रसाल की बरछी उनकी भुजाओं में नागिन की तरह हमेशा रहती थी और दुश्मनों को बहुत मारती थी।
🎯 Exam Tip: किसी मुहावरे या उपमा का अर्थ बताते समय उसके पीछे का भाव और उद्देश्य स्पष्ट करें।
Question 3. शिवाजी के डर के कारण बेगमों पर क्या प्रभाव पड़ा ?
Answer: शिवाजी के डर से मुगल बेगमों का सारा शाही जीवन बिखर गया। जो बेगम हरम में आराम से रहती थीं और कभी महलों से बाहर नहीं निकली थीं, वे अब बिना किसी सवारी के नंगे पैर रास्तों पर भाग रही थीं। जिन बेगमों को कभी हवा भी नहीं लगती थी, वे अस्त-व्यस्त कपड़ों में भीड़ में अपनी छाती भी ढक नहीं पा रही थीं। शिवाजी का आतंक सभी बेगमों पर हावी था।
In simple words: शिवाजी के डर से मुगल बेगमों का शाही जीवन खत्म हो गया। वे महलों से निकलकर नंगे पैर भाग रही थीं और अपने शरीर को ढक भी नहीं पा रही थीं।
🎯 Exam Tip: किसी घटना के प्रभावों का वर्णन करते समय विभिन्न पहलुओं (मानसिक, शारीरिक, सामाजिक) को शामिल करें।
Question 4. 'नासपाती खाती तें वनासपाती खाती हैं।' पंक्ति को अर्थ लिखिए।
Answer: नाशपाती एक मशहूर फल है। कवि इस पंक्ति से मुगल बेगमों की शिवाजी के डर से हुई बुरी हालत को दिखाते हैं। जो बेगम पहले बड़े शाही तरीके से नाशपाती खाया करती थीं, आज वे जंगल में पेड़-पौधे, घास और जड़ें खाकर अपनी भूख मिटा रही हैं। शिवाजी के आतंक से सभी मुगल हरम की औरतों की हालत खराब हो गई है।
In simple words: इस पंक्ति का मतलब है कि जो बेगम पहले नाशपाती खाती थीं, वे अब शिवाजी के डर से जंगल में घास-पत्ते खाकर जी रही हैं।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक पंक्तियों का अर्थ लिखते समय, उनके प्रतीकात्मक महत्व और संदर्भ को स्पष्ट करें।
Question 5. छत्रसाल के प्रताप का वर्णन तीन पंक्तियों में कीजिए।
Answer: छत्रसाल एक बहुत ही ताकतवर और प्रतापी राजा थे। उनकी वीरता को सुनकर सूर्य का तेज भी कम लगने लगता था। उनके प्रताप से बुरे लोग मन ही मन बहुत डरते थे। वे किसी को भी परेशान करने की हिम्मत नहीं करते थे।
In simple words: छत्रसाल बहुत शक्तिशाली और प्रतापी राजा थे। उनके डर से बुरे लोग हमेशा भयभीत रहते थे।
🎯 Exam Tip: किसी राजा या व्यक्ति के प्रताप का वर्णन करते समय उनके गुणों और उनके प्रभावों को संक्षेप में लिखें।
RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 4 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. भूषण का काव्य वीर रस प्रधान है' उक्त कथन की सार्थकता पर विचार कीजिए।
Answer: कवि भूषण की कविता वीर रस का ही दूसरा नाम बन गई है। जब भी वीर रस की बात होती है, भूषण की कविता सबसे पहले याद आती है। हमारी पाठ्य-पुस्तक में जो भूषण के छंद हैं, उनमें भी वीर रस की ही मुख्यता है। भूषण के नायक महाराज शिवाजी और वीर छत्रसाल थे। ये दोनों इतिहास में अपनी बहादुरी, निडरता और युद्ध कला के लिए मशहूर हैं। ये दोनों बहादुर कवि भूषण की वीर आक्रमण और युद्ध, उनकी बरछी के कमाल आदि घटनाओं से वीर रस उत्पन्न करने में मदद करते हैं। इसलिए यह कहना बिल्कुल सही है कि भूषण का काव्य वीर रस से भरा हुआ है। उनके छंदों में शिवाजी से डरी हुई स्त्रियों की दशा, शिवाजी का हिंदू धर्म रक्षक रूप और छत्रसाल की उदारता का वर्णन कुछ अपवाद हो सकते हैं।
In simple words: भूषण की कविता में मुख्य रूप से वीर रस है। उन्होंने शिवाजी और छत्रसाल जैसे बहादुर राजाओं के कारनामों का वर्णन किया, जिससे पढ़ने वालों में वीरता का भाव पैदा होता है।
🎯 Exam Tip: निबंधात्मक प्रश्नों में, दिए गए कथन को उदाहरणों और तर्कों के साथ समझाना चाहिए।
Question 2. भूषण की काव्य कला की विशेषताएँ बताइए।
Answer: भूषण हिंदी कविता के रीतिकाल के कवि थे, लेकिन उन्होंने सबसे अलग हटकर कविताएँ लिखीं। उन्होंने कहा था कि कलियुग के कवियों ने अपनी वाणी (कविता) को सामान्य लोगों की तारीफ करके गंदा कर दिया है। उन्होंने अपनी कविता को शिवाजी और छत्रसाल जैसे महान नायकों की कहानी सुनाकर फिर से पवित्र किया। उन्होंने श्रृंगार रस को छोड़कर वीर रस को अपनी कविता का मुख्य विषय बनाया। फिर भी, उनकी काव्य-कला पर रीतिकाल की कुछ बातों का असर देखा जा सकता है।
**भाषा:** भूषण की भाषा पर पूरी पकड़ थी। उन्होंने व्याकरण के नियमों की चिंता न करके शब्दों को अपनी जरूरत के हिसाब से बदला ताकि भाव अच्छे से प्रकट हो सकें। उन्होंने अरबी, फारसी, बुंदेली आदि भाषाओं के शब्दों का आसानी से प्रयोग किया। उनकी भाषा वीर रस की कविताओं के लिए एकदम सही थी।
**शैली:** भूषण ने मुक्तक छंदों में रचना की और रीतिकाल की तरह अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन भी किया है। शिवाजी के आतंक से डरी हुई मुगल बेगमों का वर्णन इसका अच्छा उदाहरण है।
**अलंकार:** भूषण को अनुप्रास और यमक अलंकार बहुत पसंद थे। इन अलंकारों से उन्होंने अपनी भाषा को वीर रस के हिसाब से बनाया।
**रस योजना:** भूषण की कविता का मुख्य रस वीर रस ही है। उन्होंने युद्धवीर, दानवीर, धर्मवीर आदि वीरों के कई रूपों और कामों का वर्णन किया है। उनकी भाषा और शैली वीर रस के अनुकूल हैं।
**भाव वैभव:** भूषण की कविता का मुख्य मकसद शिवाजी महाराज और छत्रसाल जैसे अन्याय के खिलाफ लड़ने वाले वीर पुरुषों को सबके सामने लाना था। उन्होंने इन दोनों को राष्ट्रीय नायक के रूप में स्थापित करने की पूरी कोशिश की है। कवि इंसान के मन को अच्छे से समझते थे। शिवाजी के डर से व्याकुल मुगल बेगमों की दशा का वर्णन अतिशयोक्तिपूर्ण होते हुए भी बहुत सजीव लगता है। शिवाजी और छत्रसाल दोनों ही दानवीर और कमजोर लोगों के रक्षक थे। इस तरह भूषण की काव्य-कला की कई विशेषताएँ मन को मोह लेती हैं।
In simple words: भूषण ने रीतिकाल में होते हुए भी अलग तरह की कविताएँ लिखीं। उनकी भाषा में अरबी, फारसी और बुंदेली शब्दों का मेल था, वीर रस उनकी कविताओं का मुख्य भाव था, और उन्होंने शिवाजी व छत्रसाल जैसे वीर राजाओं का वर्णन करके लोगों को प्रेरित किया।
🎯 Exam Tip: काव्य कला की विशेषताओं में भाषा, शैली, रस, अलंकार और कवि के उद्देश्य को अलग-अलग बिंदुओं में समझाना चाहिए।
Question 3. निम्नलिखित पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।
(क) ऊँचे घोर .............. जड़ाती हैं।
(ख) चाक चक .............. महिपाल की
(ग) भुज भुजगेस .............. खलन के
(घ) अंदर तें .............. खाती हैं।
Answer:
(क) ऊँचे घोर .............. जड़ाती हैं।
यह पंक्ति शिवाजी के आतंक से डरी हुई मुगल बेगमों की दयनीय हालत का वर्णन करती है। जो बेगम पहले ऊँचे महलों में रहती थीं और अच्छा भोजन करती थीं, वे अब जंगल की गुफाओं में छिपकर रहती हैं और कंदमूल (जंगली जड़ें) खाकर गुजारा करती हैं। वे ठंड से काँप रही हैं क्योंकि उनके पास कपड़े नहीं हैं।
(ख) चाक चक .............. महिपाल की
यह पंक्ति छत्रसाल की जबरदस्त धाक और बहादुरी का वर्णन करती है। कवि कहते हैं कि छत्रसाल की शक्ति और प्रभाव चक्र की तरह चारों ओर घूमता रहता था, जिससे शत्रु सेनाएँ हैरान और भयभीत रहती थीं।
(ग) भुज भुजगेस .............. खलन के
इस पंक्ति में छत्रसाल की बरछी (भाला) की तुलना शेषनाग की नागिन से की गई है। कवि कहते हैं कि छत्रसाल की भुजाओं में रहने वाली बरछी इतनी घातक थी कि वह दुश्मनों को घेर-घेर कर मारती थी, जैसे नागिन डसती है।
(घ) अंदर तें .............. खाती हैं।
यह पंक्ति भी शिवाजी के डर से मुगल बेगमों की बुरी हालत का वर्णन करती है। जो बेगम पहले महलों के अंदर रहती थीं और कभी बाहर का दरवाजा भी नहीं देखती थीं, वे अब बिना किसी सवारी के नंगे पैर रास्तों पर भाग रही हैं। जिन बेगमों को कभी हवा भी नहीं लगती थी, वे अब परेशान होकर हवा में अपने अस्त-व्यस्त कपड़ों को संभाल रही हैं।
In simple words: इन पंक्तियों में कवि ने शिवाजी और छत्रसाल के पराक्रम से दुश्मनों, खास कर मुगल बेगमों और शत्रु सेना की दुर्दशा का वर्णन किया है।
🎯 Exam Tip: पद्यांश की व्याख्या करते समय, प्रसंग (संदर्भ), अर्थ और विशेष बातों को संक्षिप्त और स्पष्ट रूप से बताना चाहिए।
RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 4 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. 'कन्दमूल भोग करे, कन्दमूल भोग करें' में अलंकार हे –
(क) उपमा
(ख) अनुप्रास
(ग) यमक
(घ) रूपक
Answer: (ग) यमक
In simple words: इस पंक्ति में 'यमक अलंकार' है क्योंकि 'कंदमूल भोग करे' शब्द दो बार आया है और दोनों बार उसके अर्थ अलग हैं।
🎯 Exam Tip: जब एक शब्द या वाक्यांश दोबारा आता है और हर बार उसका अर्थ अलग होता है, तो वह यमक अलंकार होता है।
Question 2. शिवाजी की जीत के नगाड़े की ध्वनि सुनकर कर्नाटक के राजा।
(क) उत्साह से भर गए,
(ख) युद्ध की तैयारी करने लगे।
(ग) सिंहल द्वीप के पास जा पहुँचे
(घ) किलों में बंद हो गए।
Answer: (ग) सिंहल द्वीप के पास जा पहुँचे
In simple words: शिवाजी की जीत के नगाड़े सुनकर कर्नाटक के राजा डरकर श्रीलंका के पास भाग गए।
🎯 Exam Tip: युद्ध से संबंधित प्रश्नों में, घटनाओं के प्रभावों को सटीक रूप से याद रखना चाहिए।
Question 3. 'बेद राखे विदित पुरान परसिद्ध राखे' का अर्थ है
(क) वेदों और पुराणों का प्रचार किया।
(ख) वेदों और पुराणों को प्रसिद्ध बनाए रखा।
(ग) वेदों और पुराणों का लोप नहीं होने दिया।
(घ) वेदों और पुराणों की शिक्षा का प्रबंध किया।
Answer: (ग) वेदों और पुराणों का लोप नहीं होने दिया।
In simple words: इस पंक्ति का मतलब है कि वेदों और पुराणों को खत्म होने से बचाया गया।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक पंक्तियों के अर्थ को समझने के लिए, उसके मूल भाव पर ध्यान दें।
Question 4. छत्रसाल की सेवा कौन करने लगे ?
(क) युद्ध में पराजित शत्रु
(ख) गुणों पर मुग्ध राजा लोग
(ग) दान से संतुष्ट लोग
(घ) बन्दी बनाए गए सैनिक
Answer: (ख) गुणों पर मुग्ध राजा लोग
In simple words: छत्रसाल के अच्छे गुणों से प्रभावित होकर कई राजा उनकी सेवा करने लगे।
🎯 Exam Tip: किसी शासक के प्रभाव का वर्णन करते समय, उनके व्यक्तिगत गुणों के महत्व पर ध्यान दें।
RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 4 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. 'ऊँचे घोर मंदर के अंदर रहनवारी' का क्या अर्थ है ?
Answer: इस पंक्ति का अर्थ है, ऊँचे-ऊँचे भवनों या महलों में निवास करने वाली मुगल बादशाहों की बेगमों से है।
In simple words: इसका मतलब है कि मुगल बादशाहों की बेगम जो बड़े महलों में रहती थीं।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक पंक्तियों का अर्थ लिखते समय, मूल शब्दार्थ के साथ उसका भावार्थ भी बताएं।
Question 2. आभूषण के भार से जिनके अंग शिथिल रहते थे, उनका शिवाजी के आतंक से क्या हाल हो गया ?
Answer: शिवाजी के आतंक के कारण उन बेगमों को भोजन मिलना भी मुश्किल हो गया और भूख के मारे उनके शरीर बहुत कमजोर हो गए।
In simple words: शिवाजी के डर से वे बेगम इतनी कमजोर हो गईं कि उन्हें खाना भी नहीं मिल पा रहा था।
🎯 Exam Tip: किसी स्थिति के परिणाम का वर्णन करते समय, शारीरिक और मानसिक प्रभावों को स्पष्ट करें।
Question 3. महाराज शिवाजी ने मुगल गढ़पतियों को भिखारी जैसा बनाकर छोड़ दिया।
Answer: शिवाजी महाराज ने मुगल गढ़पतियों को भिखारी जैसा बनाकर छोड़ दिया।
In simple words: शिवाजी ने मुगल किलेदारों को भिखारी बना दिया।
🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक घटनाओं का वर्णन करते समय, नायक के कार्यों का सटीक उल्लेख करें।
Question 4. अहंकारी पठानों का शिवाजी ने क्या हाल किया ?
Answer: शिवाजी ने अहंकारी पठानों को गाँव के पटवारियों जैसा बना डाला। यह उनकी शक्ति को कम करने का प्रतीक है।
In simple words: शिवाजी ने घमंडी पठानों को पटवारी जैसा बना दिया, यानी उनकी सारी शक्ति छीन ली।
🎯 Exam Tip: प्रतीकात्मक भाषा वाले प्रश्नों में, प्रतीकों के पीछे के अर्थ को समझाना चाहिए।
Question 5. 'दुग्ग पर दुग्गे जीते सरजा शिवाजी गाजी' का आशय क्या है ?
Answer: इस पंक्ति का मतलब है कि गर्जना करने वाले और विजेता शिवाजी ने मुगलों के एक के बाद एक कई किले जीत लिए।
In simple words: इसका मतलब है कि बहादुर शिवाजी ने एक के बाद एक बहुत सारे किले जीते।
🎯 Exam Tip: किसी युद्ध या विजय का वर्णन करते समय, जीत की व्यापकता को स्पष्ट करें।
Question 6. बीजापुर, गोलकुण्डा और दिल्ली के सरदारों और शासकों का शिवाजी की विजयों को सुनकर क्या हाल हुआ ?
Answer: शिवाजी की धाक सुनकर, मुगल बादशाहों की बेगमों सारे शाही ठाट-बाट भूलकर आम औरतों की तरह रहने को मजबूर हो गईं। यह उनके भय और चिंता को दर्शाता है।
In simple words: शिवाजी की जीत सुनकर बीजापुर, गोलकुण्डा और दिल्ली के शासक और सरदार बहुत डर गए और उनका शाही जीवन प्रभावित हुआ।
🎯 Exam Tip: किसी घटना के प्रभावों का वर्णन करते समय, अलग-अलग स्थानों पर उसके असर को बताएं।
Question 8. शिवाजी ने हिन्दुओं की किन-किन वस्तुओं की रक्षा की ?
Answer: शिवाजी महाराज ने वेदों, पुराणों, राम नाम, हिन्दुओं की चोटी और हिन्दू सैनिकों की आजीविका (रोजगार) की रक्षा की।
In simple words: शिवाजी ने हिंदुओं के धर्म ग्रंथों, राम नाम, उनकी चोटी और सैनिकों के रोजगार की रक्षा की।
🎯 Exam Tip: धर्म और संस्कृति से संबंधित प्रश्नों में, मुख्य बिंदुओं को सूचीबद्ध करें।
Question 9. शिवाजी ने अपनी तेग (तलवार) के बल पर किसकी रक्षा की ?
Answer: शिवाजी ने मुगल शासकों द्वारा हड़पे जा रहे छोटे-छोटे राजाओं के राज्यों की सीमा को अपनी तलवार के बल पर बचाया।
In simple words: शिवाजी ने अपनी तलवार से छोटे राजाओं के राज्यों की सीमाओं को बचाया, जिन्हें मुगल हड़प रहे थे।
🎯 Exam Tip: किसी नायक के कार्य का वर्णन करते समय, उनके तरीकों और परिणामों को स्पष्ट करें।
Question 10. वीर छत्रसाल की विजय के नगाड़े की ध्वनि का शत्रुओं की स्त्रियों पर क्या प्रभाव पड़ा ?
Answer: छत्रसाल की विजय के संकेत देने वाले नगाड़ों की आवाज सुनकर शत्रुओं की स्त्रियाँ अपने घरों के परकोटे (दीवारों) को फांद-फांद कर भागने लगीं।
In simple words: छत्रसाल की जीत के नगाड़े सुनकर दुश्मनों की औरतें डर के मारे घरों की दीवारों से कूदकर भागने लगीं।
🎯 Exam Tip: युद्ध या विजय के मनोवैज्ञानिक प्रभावों को बताते समय, स्त्रियों या कमजोर वर्ग पर पड़ने वाले असर को लिखें।
Question 11. चाकचकचम् के अचाकचक चह ओर' पंक्ति में कौन सा अलंकार है ? स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस पंक्ति में अनुप्रास अलंकार है, क्योंकि 'च' वर्ण की अनेक बार आवृत्ति हुई है। 'च' ध्वनि के बार-बार आने से कविता सुंदर और लयबद्ध हो जाती है।
In simple words: इस पंक्ति में 'च' अक्षर बार-बार आया है, इसलिए इसमें अनुप्रास अलंकार है।
🎯 Exam Tip: अनुप्रास अलंकार में एक ही वर्ण या अक्षर की आवृत्ति होती है।
Question 12. जंग में जीत सकने वाले राजा भी भेंट आदि देकर छत्रसाल की सेवा क्यों करने लगे ?
Answer: छत्रसाल के बड़े दिल और छोटे राजाओं को संरक्षण देने की नीति को देखकर अनेक ताकतवर राजा भी छत्रसाल का सम्मान करने लगे और उन्हें भेंट आदि देकर उनकी सेवा करने को तैयार हो गए।
In simple words: छत्रसाल की उदारता और छोटे राजाओं को मदद करने की आदत देखकर ताकतवर राजा भी उन्हें भेंट देकर उनकी सेवा करने लगे।
🎯 Exam Tip: किसी शासक की लोकप्रियता के कारणों का विश्लेषण करते समय, उनके गुणों और नीतियों पर ध्यान दें।
Question 13. कवि ने 'कबड़ी के खेलवारन लौं' किसके लिए कहा है ?
Answer: कवि ने छत्रसाल के आगे बढ़कर शत्रुओं पर हमला करने वाले, उनके साहसी सैनिकों को कबड्डी के खिलाड़ियों जैसा बताया है। जिस तरह कबड्डी के खिलाड़ी विरोधी पाले में घुसकर हमला करते हैं, वैसे ही छत्रसाल के सैनिक दुश्मनों पर टूट पड़ते थे।
In simple words: कवि ने छत्रसाल के बहादुर सैनिकों को कबड्डी के खिलाड़ी कहा है, क्योंकि वे दुश्मनों पर निडर होकर हमला करते थे।
🎯 Exam Tip: उपमा वाले प्रश्नों में, उपमा के पीछे का तर्क और तुलना का आधार स्पष्ट करें।
Question 15. महाराजा छत्रसाल के हाथियों की गर्जना से किनके हृदयों को चोट लग रही है ?
Answer: छत्रसाल के हाथियों की गर्जना सुनकर, चारों दिशाओं में स्थित कल्पित 'दिग्गजों' (हाथियों) के हृदयों को शर्म के कारण चोट-सी लग रही थी। इसका मतलब है कि उनकी गर्जना इतनी प्रभावशाली थी कि बड़े-बड़े शक्तिशाली भी उससे दब जाते थे।
In simple words: छत्रसाल के हाथियों की आवाज सुनकर सभी दिशाओं के शक्तिशाली हाथी भी शर्मिंदा हो रहे थे।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक प्रश्नों में, प्रतीकात्मक अर्थ को समझना और स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question 16. आफताब किसके प्रताप से मलीन हो रहा है ?
Answer: आफताब, यानी सूर्य, छत्रसाल के प्रताप के सामने कान्तिहीन-सा लगता है। इसका मतलब है कि छत्रसाल का तेज और प्रभाव सूर्य से भी बढ़कर था।
In simple words: सूर्य भी छत्रसाल के तेज के आगे फीका पड़ रहा था।
🎯 Exam Tip: अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन को पहचानें और उसके भाव को सरल शब्दों में व्यक्त करें।
Question 17. छत्रसाल की दानवीरता का कवि भूषण ने क्या उदाहरण दिया है ?
Answer: कवि ने कहा है कि छत्रसाल ने सजे-धजे हाथियों, घोड़ों और पैदल सैनिकों की पूरी पंक्तियाँ दान में दी हैं। यह उनकी अद्भुत दानवीरता को दिखाता है।
In simple words: कवि भूषण ने बताया है कि छत्रसाल ने सजे हुए हाथी, घोड़े और पैदल सैनिकों की पूरी कतारें दान में दीं।
🎯 Exam Tip: किसी व्यक्ति के गुण का वर्णन करते समय, ठोस उदाहरण देना प्रभावी होता है।
Question 18. कवि भूषण ने 'साह कों सराहों के सराहौं छत्रसाल को' ऐसा क्यों कहा है ?
Answer: साहू (शिवाजी) और छत्रसाल दोनों ने कवि भूषण को सम्मान देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसी कारण भूषण ने कहा है कि वे इन दोनों की ही प्रशंसा करेंगे, किसी और की नहीं।
In simple words: भूषण ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि शिवाजी और छत्रसाल दोनों ने कवि का बहुत सम्मान किया था।
🎯 Exam Tip: कवियों और उनके संरक्षकों के संबंधों पर आधारित प्रश्नों में, कवि के भावों को स्पष्ट करें।
RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 4 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. शिवाजी के आतंक से मुगले घरानों की स्त्रियों पर क्या संकट आ गया ?
Answer: शिवाजी की मुगल बादशाह औरंगजेब के खिलाफ लगातार हो रही जीत से मुगल बेगमों में बहुत डर फैल गया। उन्हें लगा कि शिवाजी का हमला उन पर भी हो सकता है। इसलिए वे महलों को छोड़कर पहाड़ों और जंगलों में छिपने लगीं। शाही हरमों में आराम का जीवन बिताने वाली ये बेगम जंगल में बेर जैसे फल खाकर गुजारा करने लगीं। भूख के मारे उनके शरीर बहुत कमजोर हो गए। ठंड के मौसम में पूरे कपड़े न होने के कारण वे ठंड से काँप-काँप कर समय बिता रही थीं।
In simple words: शिवाजी के डर से मुगल बेगम महलों से निकलकर जंगलों में छिप गईं। उन्हें ठीक से खाना और कपड़े नहीं मिल रहे थे, जिससे वे कमजोर और ठंडी से काँपती रहती थीं।
🎯 Exam Tip: किसी घटना के व्यापक प्रभावों का वर्णन करते समय, विभिन्न सामाजिक वर्गों पर पड़ने वाले असर को लिखें।
Question 2. शिवाजी ने मुगल साम्राज्य के किलेदारों, सरदारों, घमंडी मुगलों, पठानों और सहायक राजाओं का क्या हाल किया ?
Answer: शिवाजी ने अनेक गढ़ों (किले) को तोड़ दिया। उन्होंने गढ़ों के मालिकों को दंडित किया और बहुतों को भिखारी जैसा बना दिया। शेख, सैयद, घमंडी मुगल, पठान और अन्य सहायक राजा, जो औरंगजेब के अधीन थे, उन सबको शिवाजी ने पकड़-पकड़ कर जेल में डाल दिया। उन्होंने इन सभी के घमंड को चूर कर दिया।
In simple words: शिवाजी ने मुगल किलेदारों और सरदारों के किले तोड़ दिए, उन्हें दंडित किया और बहुतों को जेल में डाल दिया।
🎯 Exam Tip: नायक के विरोधियों के साथ व्यवहार का वर्णन करते समय, उनके कार्यों की कठोरता और परिणामों को स्पष्ट करें।
Question 3. उत्तर तथा दक्षिण भारत में औरंगजेब के अधीन प्रशासन करने वाले सूबदारों, राजाओं और सरदारों पर शिवाजी की निरंतर होती विजयों का क्या प्रभाव पड़ा ?
Answer: लगातार किले जीतने वाले वीर शिवाजी की जीत की खबर देने वाले नगाड़ों की आवाज सुनकर दक्षिण में कर्नाटक प्रदेश के सभी राजा डरकर श्रीलंका के पास जा पहुँचे। शिवाजी ने पराक्रमी योद्धाओं को भी ठिकाने लगा दिया। यह खबर सुनकर सितारागढ़ के मालिक की आँखों की पुतलियाँ डर से घूमने लगीं। बीजापुर, गोलकुण्डा ही नहीं, दिल्ली के अमीर और सरदारों के दिल भी पके अनार की तरह चटकने लगे, यानी वे बहुत डर गए।
In simple words: शिवाजी की लगातार जीत से औरंगजेब के अधीन सूबेदार, राजा और सरदार बहुत डर गए। कर्नाटक के राजा श्रीलंका भाग गए और दिल्ली के अमीर भी भयभीत हो गए।
🎯 Exam Tip: किसी नायक की विजयों के दूरगामी प्रभावों का वर्णन करते समय, भौगोलिक विस्तार और विभिन्न शासकों पर पड़ने वाले असर को शामिल करें।
Question 4. बादशाहों के हरमों में सदा परदे में रहने वाली और नाशपातियों का स्वाद लेने वाली बेगमें 'वनासपाती' खाकर क्यों गुजारा करने लगीं ?
Answer: मुगल बादशाहों के हरमों में शाही जिंदगी बिताने वाली बेगमों ने जब शिवाजी की लगातार जीतें सुनीं, तो वे हरमों से जान बचाने के लिए भागने लगीं। जिन मुगल स्त्रियों ने कभी महल का दरवाजा तक नहीं देखा था और कभी पैदल नहीं चली थीं, वे अब नंगे पैर भाग रही थीं। उन्हें अपने अस्त-व्यस्त कपड़ों को संभालने का भी होश नहीं था। उनकी ऐसी बुरी हालत हो रही थी कि स्वादिष्ट फल खाने वाली वे स्त्रियाँ घास-पत्ते खाकर अपनी भूख मिटा रही थीं। कवि ने इस दृश्य का अलंकारिक वर्णन किया है। वह कहते हैं कि यदि समुद्र की सेना सागर के समान थी, तो बुंदेलों की तलवारों और भालों से युक्त सेना, समुद्र के जल को जलाने वाली आग (बड़वाग्नि) की लपटों के समान लग रही थी।
In simple words: शिवाजी की जीत से डरकर शाही बेगमों को महल छोड़ना पड़ा। जो हमेशा परदे में रहती थीं और अच्छे फल खाती थीं, वे अब जंगल में घास-पत्ते खाकर अपनी भूख मिटा रही थीं।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, घटनाक्रम और उसके परिणामों को स्पष्ट रूप से दर्शाना चाहिए।
Question 5. भूषण ने शिवाजी को हिन्दू धर्म-संस्कृति का संरक्षक कैसे बताया है ?
Answer: औरंगजेब एक कट्टर मुगल बादशाह था जिसने हिंदू प्रजा को कष्ट देने में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। शिवाजी ने औरंगजेब के अत्याचारों का जोरदार विरोध किया। उन्होंने हिंदुओं के धर्म ग्रंथ वेदों और पुराणों को नष्ट होने से बचाया। उन्होंने राम का नाम लेने की स्वतंत्रता दी। हिंदुओं को अपने धार्मिक चिह्न जैसे चोटी, जनेऊ, माला आदि पहनने का अधिकार दिया और हिंदू सैनिकों को सेना में जगह देकर उनकी आजीविका (रोजगार) की रक्षा की। इस तरह भूषण ने शिवाजी को हिन्दू धर्म-संस्कृति का रक्षक बताया है।
In simple words: भूषण ने शिवाजी को हिन्दू धर्म का रक्षक कहा क्योंकि उन्होंने वेदों, पुराणों, राम नाम, धार्मिक चिह्नों और हिन्दू सैनिकों के रोजगार को औरंगजेब के अत्याचारों से बचाया।
🎯 Exam Tip: किसी व्यक्ति के गुणों को सिद्ध करने के लिए, उनके विशिष्ट कार्यों और निर्णयों का उल्लेख करें।
Question 6. शिवाजी ने अपनी तलवार के बल पर पीड़ितों की रक्षा कैसे की ? संकलित काव्यांश के आधार पर लिखिए।
Answer: शिवाजी ने औरंगजेब के शासन में निरंकुश हो चुके मुगलों को कमजोर कर दिया। उनका पूरी तरह सफाया कर दिया। उन्होंने बादशाहों को भी अपने आतंक से नियंत्रण में रहने के लिए मजबूर कर दिया। दुश्मनों को कठोर दंड देकर उन्हें कमजोर बना दिया। साथ ही, योग्य लोगों की सहायता करके उन्हें स्थापित किया। इस प्रकार शिवाजी ने अपनी तलवार के दम पर पीड़ितों की रक्षा की।
In simple words: शिवाजी ने अपनी तलवार के बल पर मुगलों को कमजोर किया, बादशाहों को नियंत्रित किया और दुश्मनों को दंडित करके पीड़ितों की रक्षा की।
🎯 Exam Tip: काव्यांश के आधार पर उत्तर लिखते समय, कविता में दिए गए तथ्यों और भावों पर ही केंद्रित रहें।
Question 8. छत्रसाल की सेना के साथ बजते चल रहे नगाड़ों की ध्वनि का, शत्रुओं पर क्या प्रभाव पड़ रहा था ?
Answer: सैनिकों का उत्साह बढ़ाने के लिए छत्रसाल की सेना के साथ नगाड़े बजते चल रहे थे। उन नगाड़ों की धमक से शत्रुओं में खलबली मच गई और राजाओं के दिलों पर नगाड़ों की धमक बड़े हथौड़े की चोटों के समान लग रही थी। शत्रुओं की, भवनों के अंदर रहने वाली स्त्रियाँ उन धमकों से घबराकर घरों के बाहर बने परकोटों (दीवारों) को फांद-फांदकर भाग रही थीं।
In simple words: छत्रसाल की सेना के नगाड़ों की आवाज सुनकर दुश्मन राजा डर गए और उनकी औरतें घरों की दीवारों से कूदकर भागने लगीं।
🎯 Exam Tip: युद्ध के ध्वनि प्रभावों का वर्णन करते समय, उनके मनोवैज्ञानिक और शारीरिक प्रभावों को स्पष्ट करें।
Question 9. 'वीर छत्रसाल की धाक से ही शत्रु घबराए रहते थे।' संकलित छंदों में कवि भूषण ने इस विषय में क्या कहा है ? अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: कवि भूषण ने वीर छत्रसाल की धाक के प्रभाव का वर्णन करते हुए कहा है कि शत्रुओं की सब ओर से सुरक्षित सेना भी विचलित और डरी रहती थी। छत्रसाल की धाक या आतंक चारों ओर फैला रहता था। शत्रु खुद को असुरक्षित महसूस करते थे। छत्रसाल की धाक ने बादशाह तक को शक्तिहीन बना दिया था। अमीर-उमरावों का तो कहना ही क्या था, वे तो छत्रसाल की घातक बरछी का सामना करने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाते थे।
In simple words: भूषण ने कहा कि छत्रसाल की धाक इतनी थी कि दुश्मन हर तरफ डरे रहते थे, बादशाह भी शक्तिहीन हो गए थे, और कोई उनकी बरछी का सामना करने की हिम्मत नहीं करता था।
🎯 Exam Tip: किसी कथन की व्याख्या करते समय, उसे कविता के संदर्भ में उदाहरणों के साथ समझाएं।
Question 10. 'हवै कै दाम देवा भूप' से कवि भूषण का क्या आशय है ? संकलित छंद के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Answer: कवि का मतलब है कि जो राजा लोग शूरवीर थे और युद्ध में विजयी रहते थे, उन्होंने अब छत्रसाल की उदारता के बारे में जाना तो वे भी छत्रसाल के प्रशंसक हो गए। छत्रसाल छोटे राजाओं को स्थापित होने में और उनके विकास में सहायता करते थे। छत्रसाल के इस बड़प्पन को देखकर पराक्रमी राजा भी उन्हें भेंट या कर देकर उनके अधीन हो गए।
In simple words: कवि का मतलब है कि बड़े राजा भी छत्रसाल की उदारता से प्रभावित होकर उन्हें भेंट देने लगे और उनके अधीन हो गए।
🎯 Exam Tip: साहित्यिक पंक्तियों के गहरे अर्थ को समझाने के लिए, कवि के संदेश और उसके संदर्भ को स्पष्ट करें।
Question 11. पठानों से युद्ध में, छत्रसाल और उनके सैनिकों ने किस प्रकार अपने साहस और युद्ध-कौशल का परिचय दिया?
Answer: बेतवा के युद्ध क्षेत्र में छत्रसाल का अब्दुस्समद नामक पठान की सेना से सामना हुआ। इस युद्ध में छत्रसाल ने पठानों पर गुस्सा होकर हमला किया। उधर पठानों ने भी छत्रसाल की सेना पर घात लगाकर हमला किया। छत्रसाल के सैनिकों ने भी अपनी अनोखी बहादुरी का परिचय देते हुए, कबड्डी के खिलाड़ियों की तरह समद की सौ हजार की सेना पर हजारों बार अंदर घुसकर चोटें कीं। युद्ध की देवी महाकाली भी इससे प्रसन्न हो गईं और आशीर्वाद दिया।
In simple words: छत्रसाल और उनके सैनिकों ने पठानों से युद्ध में कबड्डी के खिलाड़ियों की तरह बहादुरी दिखाई। उन्होंने दुश्मन सेना पर हजारों बार हमला किया और युद्ध की देवी को भी प्रसन्न किया।
🎯 Exam Tip: युद्ध के वर्णन में, सैनिकों के साहस और युद्ध-रणनीति को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
Question 13. कवि भूषण ने वीर छत्रसाल के बरछी चलाने के घातक स्वरूप का किस प्रकार वर्णन किया है? अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: भूषण कहते हैं कि छत्रसाल के हाथ में हमेशा रहने वाली उनकी बरछी, शेषनाग के साथ आजीवन रहने वाली नागिन के समान लगती थी। वह शत्रु-सैनिकों को घेर-घेर कर डसती (मारती) थी। छत्रसाल बरछी को इतनी ताकत से चलाते थे कि वह लोहे के कवचों और हाथियों की झूलों को चीरती हुई शरीर के पास वैसे ही निकल जाती थी जैसे मछली पानी के बहाव को चीरती हुई तैर कर पार निकल जाती है। महाराज छत्रसाल के पराक्रम का वर्णन कर पाना संभव नहीं था। उनकी बरछी से घायल होकर, दुष्ट शत्रु, युद्धभूमि पर, पंख कटे पक्षियों के समान कमजोर पड़े हुए दिखाई देते थे।
In simple words: कवि ने छत्रसाल की बरछी को नागिन जैसा घातक बताया है। वह दुश्मनों को घेर-घेर कर मारती थी, लोहे के कवच और हाथियों की झूलों को चीर देती थी, और युद्धभूमि में दुश्मनों को कमजोर बना देती थी।
🎯 Exam Tip: किसी हथियार या युद्ध कौशल का वर्णन करते समय, उसकी शक्ति और प्रभाव को स्पष्ट करें।
Question 14. कवि भूषण ने छत्रसाल के गुणों का वर्णन किस प्रकार किया है ? पाठ्य-पुस्तक में संकलित छंद के आधार पर लिखिए।
Answer: कवि भूषण कहते हैं कि महाराज छत्रसाल परम तेजस्वी, यशस्वी और प्रतापी शासक हैं। उनके प्रताप के सामने सूर्य का प्रताप भी कम चमकने वाला दिखाई देता है। उनके प्रताप से दुष्ट लोग हमेशा डरे रहते हैं। छत्रसाल बड़े उदार दिल वाले दानी हैं। उन्होंने सजे हुए हाथियों, घोड़ों और पैदल सैनिकों की पंक्तियाँ दान में दी हैं। छत्रसाल के गुणों पर मुग्ध होकर भूषण कहते हैं कि अब वह केवल शिवाजी महाराज और छत्रसाल की ही प्रशंसा करेंगे, किसी और की नहीं।
In simple words: भूषण ने छत्रसाल को तेजस्वी, यशस्वी, प्रतापी और दानी बताया है। उन्होंने कहा कि छत्रसाल इतने महान हैं कि वे केवल उन्हीं की प्रशंसा करेंगे, किसी और की नहीं।
🎯 Exam Tip: किसी व्यक्ति के गुणों का वर्णन करते समय, प्रत्येक गुण के लिए विशिष्ट उदाहरण और प्रभाव बताएं।
RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 4 निबंधात्मक प्रश्न
Question 1. पाठ्य-पुस्तक में संकलित छंदों के आधार पर महाराज शिवाजी के चरित्र की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Answer: संकलित छंदों में कवि भूषण ने शिवाजी महाराज को एक जुझारू योद्धा, युद्ध में कुशल, अत्याचारियों के कट्टर विरोधी, अच्छे शासक और हिंदू धर्म के रक्षक के रूप में प्रस्तुत किया है। शिवाजी बाढ़ की तरह गढ़ जीतकर औरंगजेब की बादशाहत को चुनौती देने वाले जुझारू योद्धा थे। उन्होंने तानाशाह किलेदारों को दंडित किया और जनता को परेशान करने वाले शेख, सैयद, पठान और राजाओं को पकड़-पकड़ कर जेल में डाल दिया। शिवाजी की युद्ध कला से, दिल्ली से लेकर दक्षिण में बीजापुर, गोलकुण्डा और कर्नाटक तक के शासक और सूबेदार हमेशा डरे रहते थे।
In simple words: शिवाजी एक बहादुर योद्धा, कुशल सेनापति और अत्याचारियों के खिलाफ थे। उन्होंने कई किले जीते, दुश्मनों को दंडित किया और हिंदू धर्म की रक्षा की, जिससे मुगल शासक उनसे हमेशा डरते थे।
🎯 Exam Tip: निबंधात्मक प्रश्नों में, व्यक्ति के चरित्र की विशेषताओं को विभिन्न पहलुओं में समझाएं और कविता से उदाहरण दें।
Question 2. पाठ्य-पुस्तक में संकलित छंदों के आधार पर वीर छत्रसाल के व्यक्तित्व का परिचय दीजिए।
Answer: छत्रसाल राजा चंपतिराय के पुत्र थे। उन्होंने अपनी बहादुरी से शत्रुओं को हराकर अपने राज्य और प्रभाव को बढ़ाया। छत्रसाल एक बहादुर योद्धा थे। उनसे सामना होने पर शक्तिशाली शत्रु भी डरे रहते थे। उन्होंने पठानों की विशाल सेना पर अपने युद्ध कौशल से जीत हासिल की। छत्रसाल उदार दिल वाले शासक थे। उन्होंने छोटे हिंदू राजाओं की मदद करके उन्हें शत्रुओं के खिलाफ खड़ा किया। छत्रसाल के बड़प्पन से प्रभावित होकर अनेक राजाओं ने उनकी अधीनता स्वीकार कर ली।
छत्रसाल अस्त्र-शस्त्र चलाने में बहुत कुशल थे। उनकी बरछी के अचूक वारों से शत्रु सेना कमजोर होकर बिखर जाती थी। वीर योद्धा होने के साथ-साथ छत्रसाल महान दानी भी थे। उन्होंने हाथी, घोड़े और पैदल सैनिकों की कतारें दान में दीं। वे अपने दान से गरीब लोगों का पालन-पोषण करते थे। उनके प्रताप और धाक से बुरे लोग डरते थे। इस प्रकार छत्रसाल कई मानवीय गुणों का भंडार थे।
In simple words: छत्रसाल एक बहादुर, कुशल योद्धा और दानी राजा थे। उन्होंने शत्रुओं को हराया, छोटे राजाओं की मदद की और अपनी वीरता तथा उदारता से कई राजाओं को प्रभावित किया।
🎯 Exam Tip: किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व का परिचय देते समय, उनके प्रमुख गुणों, कार्यों और उनके प्रभावों को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करें।
भूषण कवि परिचय
जीवन परिचय-रीतिकालीन श्रृंगार प्रधान रचनाओं के बीच वीरता की गर्जना और शस्त्रों की झंकार सुनाने वाले कवि भूषण का जन्म सन् 1613 ई. में हुआ था। कवि चिंतामणि तथा मतिराम इनके भाई माने जाते हैं। भूषण का असली नाम तो घनश्याम माना जाता है। 'भूषण' इनकी उपाधि थी। आज यह भूषण नाम से ही प्रसिद्ध हैं।
भूषण अनेक राजाओं के दरबार में रहे लेकिन महाराज शिवाजी तथा राजा छत्रसाल से भूषण को विशेष सम्मान मिला। इसी कारण इन दो वीरों को भूषण की रचनाओं में सबसे महत्वपूर्ण स्थान मिला। अन्याय करने वाले मुगल बादशाह औरंगजेब को चुनौती देने वाले ये दोनों वीर भूषण के काव्य में राष्ट्रीय नायकों के रूप में प्रतिष्ठित हैं। इनका निधन सन् 1715 ई. में माना जाता है।
साहित्यिक परिचय-रचनाएँ-कवि भूषण की तीन काव्य रचनाएँ मिली हैं-शिवबावनी, शिवराज भूषण तथा छत्रसाल दशक। भूषण का सारा काव्य ब्रज भाषा में है। उन्होंने अरबी-फारसी शब्दों का खुलकर प्रयोग किया है। जरूरत के हिसाब से शब्दों के रूप को खूब बदला है।
भूषण का काव्य वीर रस से भरा है। उसमें पढ़ने वालों और सुनने वालों के दिलों में वीरता का भाव जगाने की ऐसी स्वाभाविक क्षमता है कि जब भी वीर रस की बात होती है, ध्यान भूषण पर ही जाता है।
भूषण की कविता का मुख्य विषय शिवाजी महाराज की वीरता, दानशीलता और धर्म की रक्षा आदि और वीर छत्रसाल की युद्ध कुशलता का वर्णन करना रहा है।
शिवाजी का शौर्य
पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ
Question 1. ऊँचे घोर मंदर के अंदर रहनवारी,
ऊँचे घोर मंदर के अंदर रहती हैं।
कंदमूल भोग करें, कन्दमूल भोग करें,
तीन बेर खाती ते वै तीन बेर खाती हैं।
भूषन सिथिल अंग, भूषन सिथिल अंग,
बिजन डुलाती ते वै बिजन डुलाती हैं।
'भूषन' भनत सिवराज वीर तेरे त्रास,
नगन जड़ाती है वै नगन जड़ाती है।
Answer: कवि भूषण कहते हैं- हे शिवाजी महाराज! आपके डर और आतंक से मुगल बादशाह की स्त्रियाँ बहुत दुखी हो गई हैं। जो बेगम पहले ऊँचे महलों में रहती थीं, वे अब ऊँचे पहाड़ों की गुफाओं में छिपकर रह रही हैं। जो स्त्रियाँ पहले स्वादिष्ट मिठाई और अन्य चीजें खाती थीं, वे आज जंगलों में खोद-खोद कर कंदमूल (जड़ों) को खा रही हैं। जो स्त्रियाँ दिन में तीन-तीन बार भोजन करती थीं, वे आज केवल तीन बेर के फल खाकर गुजारा कर रही हैं। जिनके शरीर पहले गहनों के भार से कमजोर पड़ जाते थे, वे आज भूख के मारे दुर्बल हो गए हैं। जो स्त्रियाँ पहले दासियों से पंखा झलवाती थीं, वे आज जंगलों में मारी-मारी फिर रही हैं।
In simple words: शिवाजी के डर से मुगल बेगमों का जीवन पूरी तरह बदल गया। वे महलों से निकलकर गुफाओं में रहने लगीं, अच्छा खाना छोड़कर कंदमूल खाने लगीं, और ठंड तथा भूख से कमजोर होकर भटक रही थीं।
🎯 Exam Tip: पद्यांश की व्याख्या में, कठिन शब्दों का अर्थ बताएं, प्रसंग स्पष्ट करें और मूल भाव को सरल भाषा में समझाएं।
Question 2. गढून गॅजाय, गढ़धरन सजाय करि,
छाँडि केते धरम दुवार दै भिखारी से।
साहि के सपूत पूत वीर सिवराजसिंह,
केते गढ़धारी किये वन वनचारी से।
'भूषन' बखानैं केते दीन्हें बन्दीखानेसेख,
सैयद हजारी गहे रैयत बजारी से।
महतो से मुगल महाजन से महाराज,
डाँडि लीन्हें पकरि पठान पटवारी से॥
Answer: शिवाजी महाराज ने मुगल बादशाह औरंगजेब के कई किलों को ध्वस्त कर दिया और उनके किलेदारों को दंडित किया। उन्होंने कई किलेदारों को दया-धर्म के कारण किलों के द्वारों से भिखारियों की तरह निकाल दिया। शाहू जी के योग्य पुत्र वीर शिवाजी ने कई दुर्गपतियों को गढ़ों से बाहर निकालकर जंगल-जंगल भटकने वाले वनवासी बना दिया। उन्होंने कई शेख मुसलमानों को जेल में डाल दिया। सैयदों और पंचहजारी मनसबदारों को बाजार के आम आदमियों की तरह पकड़वा लिया। अहंकारी मुगलों को गाँव के मुखिया (महतो) जैसा बना दिया। औरंगजेब के समर्थक राजाओं को महाजनों जैसा और पठानों को पटवारियों जैसा बना डाला। इस तरह उन्होंने सभी का अहंकार चूर-चूर कर दिया।
In simple words: शिवाजी ने औरंगजेब के कई किले तोड़े, किलेदारों को दंडित किया, और कई मुगल अधिकारियों को भिखारी, कैदी, या सामान्य लोगों जैसा बना दिया, जिससे उनका अहंकार खत्म हो गया।
🎯 Exam Tip: पद्यांश की व्याख्या में, कवि के वर्णन के माध्यम से नायक के कार्यों और उसके प्रभाव को स्पष्ट करें।
Question 1. निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।
ऊँचे घोर मंदर के अंदर रहनवारी,
ऊँचे घोर मंदर के अंदर रहती हैं।
कंदमूल भोग करें, कन्दमूल भोग करें,
तीन बेर खाती ते वै तीन बेर खाती हैं।
भूषन सिथिल अंग, भूषन सिथिल अंग,
बिजन डुलाती ते वै बिजन डुलाती हैं।
'भूषन' भनत सिवराज वीर तेरे त्रास,
नगन जड़ाती है वै नगन जड़ाती है।
Answer:
कठिन शब्दार्थ: ऊँचे घोर= अत्यन्त ऊँचे। मन्दर = भवन, महल। मंदर = पर्वत की गुफा। कंदमूल = मिष्ठान्न, स्वादिष्ट वस्तुएँ। कन्दमूल = भूमि के अंदर से प्राप्त कंद और जड़े। तीन बेर = तीन बार। तीन बेर = तीन बेर के फल। भूषन = आभूषण, गहने। भूषन = भूख से। सिथिल अंग = दुर्बल अंग। बिजन = पंखे। डुलाती = हवा कराती। बिजन = निर्जन, जंगल। डुलाती = भटकती। भनत = कहते हैं। सिवराज = शिवाजी महाराज। त्रास = भय, आतंक। लगन = रत्नों की माला। जड़ती = गहनों को जड़वाती थी। ते = वे। नगन = नग्न, वस्त्र न होने से। जड़ाती = जाड़े में काँपती रहती है।
प्रसंग तथा संदर्भ: यह छंद हमारी पाठ्य-पुस्तक 'अपरा' में 'शिवाजी का शौर्य' शीर्षक से लिया गया है। इस छंद में कवि भूषण ने शिवाजी के डर से शत्रु-नारियों की बहुत बुरी हालत का वर्णन किया है।
व्याख्या: कवि भूषण कहते हैं कि हे शिवाजी महाराज! आपके डर और भय से दुश्मनों की पत्नियों का हाल बहुत बुरा हो गया है। जो रानियाँ कभी बड़े-बड़े महलों में रहती थीं, अब वे पहाड़ों की गुफाओं में छिपी हुई हैं। जो औरतें कभी मिठाई और स्वादिष्ट चीजें खाती थीं, आज वे जंगलों में कंदमूल (जड़ों और फल) खोदकर खा रही हैं। जो दिन में तीन बार खाना खाती थीं, अब वे सिर्फ तीन बेर के फल खाकर गुजारा कर रही हैं। जिनके शरीर पहले गहनों के वजन से कोमल रहते थे, आज वे भूख से कमजोर हो गए हैं। जो पहले दासियों से पंखे झलवाती थीं, वे अब जंगलों में इधर-उधर भटक रही हैं।
विशेष:
(i) कवि ने शाही घरानों की औरतों पर शिवाजी के आतंक का मनोवैज्ञानिक और रोचक शब्द-चित्र प्रस्तुत किया है।
(ii) भाषा में अरबी-फारसी शब्दों का मिश्रण है।
(iii) शैली अतिशयोक्तिपूर्ण है।
(iv) अनुप्रास के प्रयोग से कथन को प्रभावशाली बनाया गया है।
In simple words: कवि भूषण शिवाजी की वीरता बताते हुए कहते हैं कि उनके डर से दुश्मन राजाओं की रानियां अब महलों से निकलकर जंगल में भटक रही हैं। वे पहले सुख-सुविधा में रहती थीं, लेकिन अब भूख और ठंड से परेशान हैं।
🎯 Exam Tip: सप्रसंग व्याख्या करते समय, कठिन शब्दों का अर्थ, प्रसंग, व्याख्या और काव्य सौंदर्य (विशेष) को क्रम से लिखें।
Question 2. निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।
बेद राखे विदित पुरान परसिद्ध राखे,
राम नाम राख्यो अति रसना सुधर में।
हिन्दन की चोटी रोटी राखी है सिपाहिन की
काँधे में जनेऊ राख्यो माल राखी गर में।
मीड़ि राखे मुगल मरोड़ि राखे पातसाहि,
बैरी पीसि राखे बरदान राख्यो, कर में।
राजन की हद्द राखी तेगबल सिवराज,
देवराखे देवल स्वधर्म राख्यो घर में॥
Answer:
कठिन शब्दार्थ: विदित = ज्ञात, सुरक्षित। परसिद्ध = प्रसिद्ध। रसना = जीभ, मुख। सुघर = सुन्दर, सहज। रोटी = वृत्ति, रोजगार। काँधे में = कंधे पर। गर = गला। मीडि राखे = नियंत्रण में रखे। पातसाहि = मुगल बादशाह। बैरी = शत्रु। कर = हाथ। हद्द = राज्यों की सीमाएँ।
प्रसंग तथा संदर्भ: यह छंद हमारी पाठ्य-पुस्तक 'अपरा' में 'शिवाजी का शौर्य' शीर्षक से लिया गया है। इस छंद में कवि भूषण ने शिवाजी को हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति का रक्षक बताया है।
व्याख्या: कवि भूषण कहते हैं कि हे वीर शिवाजी! आपने हिंदुओं के धर्मग्रंथों (वेद और पुराणों) को मिटने से बचाया और उन्हें प्रसिद्ध रखा। मुगल बादशाह औरंगजेब के राज में, आपने हिंदुओं को अपना धर्म मानने की और राम का नाम जपने की आज़ादी दी। आपने हिंदुओं की चोटी को बचाया, ताकि उनका जबरन धर्म न बदला जा सके। सैनिकों को काम देकर उनकी रोजी-रोटी सुरक्षित की। हिंदुओं को अपने धार्मिक चिह्न जैसे जनेऊ और माला पहनने में कोई रुकावट नहीं आने दी। आपने मुगल शासकों का घमंड तोड़ा और मनमानी करने से रोका। दुश्मनों को खत्म किया और अच्छे लोगों की हमेशा मदद की। हे शिवाजी! आपने अपनी तलवार के दम पर हिंदू राजाओं के राज्यों की सीमाएँ मुगलों से बचाईं और मंदिरों व हिंदू धर्म की हर तरह से रक्षा की।
विशेष:
(i) कवि ने शिवाजी को हिन्दू प्रजाओं के धर्म, आजीविका और संस्कृति के संरक्षक और एक राष्ट्रीय नायक के रूप में प्रस्तुत किया है।
(ii) औरंगजेब के शासन काल में हिन्दू प्रजा पर क्या-क्या अत्याचार हो रहे थे, इसका भी ज्ञान कराया है।
(iii) अनुप्रास अलंकार का सहज भाव से प्रयोग हुआ है।
(4) मुहावरों के प्रयोग से कथन को प्रभावशाली बनाया है।
In simple words: शिवाजी ने वेदों, पुराणों और राम नाम की रक्षा की। उन्होंने हिंदुओं की चोटी और सैनिकों की रोजी-रोटी बचाई। मुगलों का घमंड तोड़कर राज्यों की सीमाएं सुरक्षित कीं और मंदिरों की रक्षा की।
🎯 Exam Tip: काव्य सौंदर्य लिखते समय अलंकार, भाषा शैली और विषय वस्तु के प्रभाव का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
छत्रसाल की वीरता
Question 3. निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।
रैयारावे चंपति को चढ़ो छत्रसाल सिंह भूषण भनत गजराज जोम जमके।
भाद की घटा सी उड़ि गरद गगन घिरे सेलैंसमसेरें फिरें दामिनि सी दमके।
खान उमरावन के आन राजारावन के सुनि-सुनि उर आर्गे घन कैसे घमके।
बैयर बगारन की अरिके आगरन की लाँधती पगारन नगारन के धमके।
Answer:
कठिन शब्दार्थ: रैयाराव = छोटा राजा, सरदार। चंपति = चंपतिराय, छत्रसाल के पिता। जोम = उत्साह, जोश। जमके = जम जाना। गरद = गर्द, धूल। सेलें = भाले। समसेरै = तलवारें। फिरें = चलती हुईं। दामिनि = बिजली। उमरावे = अमीर लोग, सरदार। आन = अन्य। घन = बड़ा हथौड़ा। धमकें = धमक। बैयर = स्त्रियाँ। बगारन की = भवनों की। अरि = शत्रु। अगारन की = घरों की। पगारन = परकोटों को। धमके = ध्वनि, धक्का।
प्रसंग तथा संदर्भ: यह छंद हमारी पाठ्य-पुस्तक 'अपरा' में 'छत्रसाल की वीरता' शीर्षक से लिया गया है। इस छंद में कवि भूषण ने छत्रसाल द्वारा शत्रु सेना पर आक्रमण के समय का दृश्य दिखाया है।
व्याख्या: जब राजा चंपतिराय के बेटे वीर छत्रसाल ने दुश्मन पर हमला किया, तो उनकी बड़ी सेना के हाथी जोश से भरे हुए थे। सेना के चलने से इतनी धूल उड़ी कि आसमान में भादों महीने के बादलों जैसी घटा छा गई। योद्धाओं के हाथों में जो भाले और तलवारें थीं, वे उस घटा में बिजली की तरह चमक रही थीं। छत्रसाल के नगाड़ों की आवाज़ सुनकर मुगल सेना के सेनापतियों, सरदारों, राजाओं और रावों के दिलों पर भारी हथौड़े जैसी चोट लग रही थी। नगाड़ों की धमक सुनकर दुश्मनों के घरों की औरतें अपने घरों की चारदीवारी फांदकर भागने लगीं।
In simple words: जब छत्रसाल ने हमला किया, तो उनकी सेना के हाथी जोश से भरे थे और धूल से आसमान ढक गया। योद्धाओं के भाले और तलवारें बिजली सी चमक रही थीं। नगाड़ों की आवाज़ से दुश्मनों के दिल दहल गए और उनकी औरतें डर के मारे घरों से भागने लगीं।
🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक प्रसंगों पर आधारित पद्यांशों में तत्कालीन युद्ध शैली और सामाजिक स्थिति को समझाना चाहिए।
Question 4. निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।
चाकचकचमू के अचाकचक चहुँ ओर, चाक सी फिरति धाक चंपति के लाल की।
भूषन भनत पातसाही मारि जेर कीन्ही, काहू उमराव ना करेरी करवाल थी।
सुनि सुनि रीति बिरुदैत के बड़प्पन की, थप्पन उथप्पन की बानि छत्रसाल की।
जंग जीतिलेवा, तेऊ है कै दामदेवा भूप, सेवा लागे करन महेवा महिपाल की ॥
Answer:
कठिन शब्दार्थ: चाकचक = चारों ओर से सुरक्षित। चमू = सेना (शत्रु-सेना)। अचाकचक = आशंकित अचानक होने वाली घटना में शंकित। चहुँ ओर = चारों ओर। चाक = चक्र, कुम्हार का चाक। पातसाही = बादशाहत, मुगल बादशाह औरंगजेब का घमंड। जेर = हीन, प्रभावहीन। काहू = किसी भी। उमराव = अमीर, सरदार। करेरी = दृढ़, कठोर। करवाल = तलवारें। विरुदैत = विख्यात योद्धा, छत्रसाल। बड़प्पन = उदारता, बड़ाई। थप्पन = स्थापन, स्थापित या सुरक्षित करना। उथप्पन = उत्थान, ऊँचा उठाना। बानि = स्वभाव, रीति । जंग = युद्ध। जीतिलेवा = (युद्ध में) विजयी होने वाले। तेऊ = वे भी। हवैकै = होकर। दानदेवा = कर या भेट देने वाले। महेवा महिपाल = महाराज छत्रसाल।
प्रसंग तथा संदर्भ: यह छंद हमारी पाठ्य-पुस्तक 'अपरा' में 'छत्रसाल की वीरता' शीर्षक से लिया गया है। इस छंद में कवि भूषण ने महाराज छत्रसाल की शक्ति, वीरता, उदारता और गुणों का वर्णन किया है।
व्याख्या: कवि भूषण कहते हैं कि रणभूमि में चारों तरफ से सुरक्षित दुश्मन सेना भी हैरान और डरी रहती है, क्योंकि राजा छत्रसाल का प्रभाव चक्र की तरह चारों ओर घूमता रहता है। इसका मतलब है कि पूरी तरह सुरक्षित होने पर भी दुश्मन सैनिक छत्रसाल के हमले से डरे रहते हैं। वीर छत्रसाल ने बादशाह औरंगजेब को कई बार हराकर उसका शाही घमंड तोड़ दिया है। बादशाह के किसी भी सरदार में छत्रसाल की तेज़ तलवार का सामना करने की हिम्मत नहीं है। सिर्फ युद्ध में अपनी बहादुरी से ही नहीं, बल्कि अपनी महानता और उदारता से भी छत्रसाल ने लोगों का दिल जीत लिया है। छत्रसाल की यह नीति कि वे छोटे राजाओं को स्थापित करते थे और उनका भला करते थे, इससे युद्ध जीतने वाले राजा भी उनके अधीन हो गए। अब वे शक्तिशाली राजा भी महाराज छत्रसाल को भेंट देकर उनकी सेवा करने लगे हैं।
विशेष:
(i) छत्रसाल की शक्ति का, चकाचौंध कर देने वाला, अनुप्रास, यमक और उपमा अलंकारों से सुसज्जित वर्णन है। ('चाकचक चमू के अचाकचक चहुँ ओर' में अनुप्रास तथा यमक और 'चाक सी फिरति धाक' में उपमा है।)
(ii) 'सुनि-सुनि' में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है तथा 'लेवा, देवा, सेवा और महेवा' में ध्वनि समानता से उत्पन्न आकर्षण है।
(iii) ब्रजभाषा के साथ अरबी, फारसी, बुंदेलखंडी आदि की शब्दावली का सहज तालमेल है।
(iv) वीररस का संचार करती प्रवाहपूर्ण भाषा-शैली है।
In simple words: छत्रसाल का प्रभाव इतना अधिक था कि दुश्मन सेना भी डरती थी। उन्होंने औरंगजेब का घमंड तोड़ दिया। छत्रसाल की उदारता और बहादुरी ने युद्ध जीतने वाले राजाओं को भी उनका सेवक बना दिया।
🎯 Exam Tip: पद्यांश के अर्थ को स्पष्ट करते समय उसके मुख्य भाव और कवि के संदेश को संक्षेप में बताएं।
Question 5. निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।
भुज-भुजनेस की बैसंगिनी भुजंगिनी सी खेदि खेदि खाती दीह दारुन दलन के।
बखतर पाखरन बीच धंसि जाति मीन पैरि पारे जात परबाह ज्यों जलन के।
रैयाराव चंपति के छत्रसाल महाराज भूषन सकै करि बाखान को बलन के।
पच्छी पर छीने, ऐसे परे परछीने बीर, तेरी बरछी ने बर छीने हैं खलन के॥
Answer:
कठिन शब्दार्थ: अस्त्र = दूर से चलाए जाने वाले हथियार, बाण, चक्र, शक्ति आदि। गहि = पकड़कर, लेकर। खिभयो = क्रुद्ध हुआ। खेत = रणक्षेत्र। बेतवे के = बेतवा का। झपटें = प्रहार। हिम्मति = साहस। कबड़ी = कबड्डी का खेल। खेलवार = खिलाड़ी। सै = सौ। हजारन = हजारों की संख्या में। चपर्दै = चपेट, चोट पहुँचाना। काली = युद्ध की देवी महाकाली। हुलसी = प्रसन्न हो गई। असीसन कों = आशीर्वाद देने के। सीसन क = कटे सिरों के लिए। ईस = शिव। जमाति = गण, सेवक। जोर = बल प्रयोग। जपटें = झपटना। समदलों = समुद्र के समान। समद = अब्दुस्समद, पठानों का सरदार या राजा। सेलें = भाले। समसेरै = शमशीर, तलवार। बाड़व = बडवाग्नि, पानी में लगने वाली आग। लपटें = ज्वाला, आग की लपट।
प्रसंग तथा संदर्भ: यह छंद हमारी पाठ्य-पुस्तक 'अपरा' में 'छत्रसाल की वीरता' शीर्षक से लिया गया है। इस छंद में कवि भूषण ने छत्रसाल की बरछी के युद्ध-कौशल और उसके घातक प्रभाव का वर्णन किया है।
व्याख्या: हे महाराज चंपतिराय के पुत्र वीर छत्रसाल! आपकी बरछी आपकी भुजाओं में रहने वाली नागिन जैसी है। यह भयानक दुश्मनों की सेनाओं को चारों ओर से घेरकर मार डालती है। यह बरछी दुश्मन सैनिकों के पहने हुए लोहे के कवच और हाथियों की झूलों को वैसे ही चीरती हुई अंदर चली जाती है, जैसे मछली पानी के बहाव को चीरकर आगे निकल जाती है। आपके साहस का वर्णन कोई नहीं कर सकता। आपकी बरछी ने दुश्मन सैनिकों की सारी ताकत छीन ली है, उन्हें कमजोर या मुर्दा बना दिया है। ये सैनिक युद्ध के मैदान में कटे हुए पंखों वाले पक्षियों की तरह पड़े हैं, या ऐसे ही बेजान होकर पड़े हैं।
विशेष:
(i) छत्रसाल के बरछी चलाने की कुशलता का अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन हुआ है।
(ii) भाषा ओज और प्रवाह से परिपूर्ण तथा वीररस का संचार करने वाली है।
(iii) अनुप्रासों के अतिरिक्त 'भुज-भुजगेस' में रूपक, 'भुजंगिनी सी' तथा 'परछीने-परछीने ओर बरछी ने-बरछीने' में यमक अलंकार है।
(i) रचना वीररस का संचार करने वाली है।
In simple words: कवि भूषण कहते हैं कि छत्रसाल की बरछी एक नागिन की तरह दुश्मन सैनिकों को मारती है। यह लोहे के कवच और हाथियों की झूलों को चीरकर निकल जाती है, जिससे दुश्मन पंख कटे पक्षियों की तरह बेजान होकर रणभूमि में गिर जाते हैं।
🎯 Exam Tip: युद्ध संबंधी वर्णन वाले पद्यांशों में कवि की भाषा शैली और प्रयोग किए गए अलंकारों पर ध्यान दें।
Question 6. निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।
राजत अखंड तेज, छाजत सुजस बड़ो, गाजत गयंद दिग्गजन हिय साल को।
जाहि के प्रताप सों अलीन आफताब होत, ताप तजि दुज्जन करन बहुत ख्याल को।
साजि-सजि गज, तुरी, पैदर कतार दीन्हे, भूषन भनत ऐसो दीन प्रतिपाल को।
आन रावराजा एक मन में न लाऊँ अब, साहू को सराहों कै सराह छत्रसाल को।
Answer:
कठिन शब्दार्थ: राजत = शोभा पा रहा है।। अखंड = निरंतर। छाजत = छाया हुआ। सुजस = सुंदर यश। गाजत = गरजते हैं। गयंद = हाथी। दिग्गजन = दिशाओं में स्थित कल्पित हाथियों के। हिद = हृदय। साल को = सालने को, पीड़ित करने को। जाहिके = जिसके। मलीन = तेजहीन। आफताब = सूर्य। ताप = क्रोध, घमंड। तजि = त्याग कर। दुज्जन = दुष्ट व्यक्ति। ख्याल = विचार, सोचना-समझना। साजि = सजाकर। गज = हाथी। तुरी = घोड़े। पैदर = पैदल, सेवक । कतार = पंक्ति। दीन प्रतिपाल = दीन व्यक्तियों का पालनकर्ता। आन = अन्य, दूसरे। राव = छोटे राजा, सामंत। साहू = शिवाजी। सराह = प्रशंसा करूंगा।
प्रसंग तथा संदर्भ: यह छंद हमारी पाठ्य-पुस्तक 'अपरा' में 'छत्रसाल की वीरता' शीर्षक से लिया गया है। इस छंद में कवि भूषण ने राजा छत्रसाल के प्रताप, वैभव और दानशीलता आदि गुणों का वर्णन किया है।
व्याख्या: कवि भूषण कहते हैं कि महाराज छत्रसाल का तेज हमेशा चमकता रहता है। उनकी प्रसिद्धि चारों ओर फैली हुई है। उनके दरबार में शक्तिशाली हाथी गर्जना करते हैं। इन हाथियों की गर्जना सुनकर पृथ्वी का भार उठाने वाले चारों दिशाओं के हाथी भी शर्मिंदा हो जाते हैं। छत्रसाल के प्रताप (तेज) के सामने सूर्य भी अपनी चमक खो देता है। बुरे और अत्याचारी लोग मन ही मन उनसे डरते हैं। महाराज छत्रसाल बहुत ही उदार और दानवीर राजा हैं, जिन्होंने हाथियों, घोड़ों और पैदल सैनिकों की पंक्तियों का दान किया है। कवि भूषण कहते हैं कि अब वे किसी और छोटे राजा की प्रशंसा नहीं करेंगे, सिर्फ शिवाजी और छत्रसाल की ही प्रशंसा करेंगे।
विशेष:
(i) वीर छत्रसाल के गुणों का कवि ने हृदय खोलकर वर्णन किया है। छत्रसाल ने कवि भूषण की पालकी में कंधा लगाकर अपनी गुणग्राहकता और उदारता कर परिचय दिया था।
(ii) ब्रज भाषा का समृद्ध स्वरूप सारे छंद में विद्यमान है।
(iii) वीर छत्रसाल के गुणों की अतिशयोक्तिपूर्ण प्रशंसा की है-'जाहि के प्रताप मलीन आफताब होत'।
(iv) 'गजत गयंद', 'ताप तजि', 'राज सजि गात' तथा साहू को सराहों कै, सराहों 'छत्रसाल को' में अनुप्रास अलंकार है।
In simple words: छत्रसाल का तेज और यश हमेशा चमकता रहता है। उनके प्रताप के आगे सूर्य भी फीका लगता है और बुरे लोग उनसे डरते हैं। छत्रसाल बड़े दानी राजा हैं जिन्होंने हाथी, घोड़े और सैनिक दान में दिए। कवि भूषण कहते हैं कि अब वे सिर्फ शिवाजी और छत्रसाल की ही प्रशंसा करेंगे।
🎯 Exam Tip: दानवीरता या प्रताप जैसे गुणों का वर्णन करते समय, दिए गए उदाहरणों को स्पष्ट रूप से समझाएं।
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