RBSE Solutions Class 11 Hindi Chapter 1 चंदवरदायी

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Detailed Chapter 1 चंदवरदायी RBSE Solutions for Class 11 Hindi

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Class 11 Hindi Chapter 1 चंदवरदायी RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. चंदवरदायी की रचना का नाम है
(क) पद्मावत
(ख) पृथ्वीराज रासो
(ग) खुमान रासो
(घ) रामायण
Answer: (ख) पृथ्वीराज रासो
In simple words: चंदवरदायी की सबसे प्रसिद्ध रचना का नाम 'पृथ्वीराज रासो' है, जो एक महाकाव्य है।

🎯 Exam Tip: जब भी किसी कवि या लेखक की प्रमुख रचना पूछी जाए, तो उसका सही नाम याद रखें, खासकर अगर वह किसी प्रसिद्ध ऐतिहासिक व्यक्ति से संबंधित हो.

 

Question 2. पृथ्वीराज का युद्ध किसके साथ हुआ ?
(क) कुमोद मणि
Answer: पृथ्वीराज का युद्ध शहाबुद्दीन गौरी के साथ हुआ था, जैसा कि बाद के अध्यायों में वर्णित है। दिए गए विकल्प में कुमोद मणि से उनका विवाह तय किया गया था, युद्ध नहीं.
In simple words: पृथ्वीराज ने शहाबुद्दीन गौरी से युद्ध किया था.

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित प्रश्नों में, घटनाक्रम और पात्रों के सही संबंधों को याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है ताकि भ्रम से बचा जा सके.

RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 1 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. क्या 'पृथ्वीराज रासो' प्रामाणिक रचना है?
Answer: पृथ्वीराज रासो को पूरी तरह से प्रामाणिक रचना नहीं माना जाता है. इसका कारण यह है कि इसमें लिखी गई तिथियाँ, स्थान और घटनाएँ अक्सर ऐतिहासिक तथ्यों से मेल नहीं खातीं.
In simple words: नहीं, 'पृथ्वीराज रासो' को पूरी तरह सही नहीं माना जाता क्योंकि इसकी बातें इतिहास से मेल नहीं खातीं.

🎯 Exam Tip: किसी भी साहित्यिक रचना की प्रामाणिकता पर सवाल होने पर, उसके कारणों को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए जैसे ऐतिहासिक विसंगतियाँ या बाद में किए गए संपादन.

 

Question 2. चंदवरदायी किसके सभाकवि थे?
Answer: चंदवरदायी सम्राट पृथ्वीराज चौहान के सभाकवि और उनके करीबी मित्र भी थे.
In simple words: चंदवरदायी सम्राट पृथ्वीराज चौहान के कवि थे.

🎯 Exam Tip: कवियों और उनके आश्रयदाताओं (जिस राजा के दरबार में वे रहते थे) के संबंध को याद रखें, क्योंकि यह उनके कार्यों की पृष्ठभूमि को समझने में मदद करता है.

 

Question 3. तोता पृथ्वीराज से किस नगर में मिला?
Answer: तोता पृथ्वीराज से दिल्ली नगर में मिला था.
In simple words: तोता पृथ्वीराज से दिल्ली में मिला.

🎯 Exam Tip: कहानी के प्रमुख पात्रों के मिलने के स्थानों को याद रखें, क्योंकि यह कहानी के महत्वपूर्ण मोड़ों को दर्शाता है.

 

Question 4. पृथ्वीराज रासो का प्रधान रस कौन-सा है?
Answer: पृथ्वीराज रासो का प्रधान रस 'वीर रस' है. यह काव्य वीरता और युद्ध के वर्णन से भरा हुआ है.
In simple words: पृथ्वीराज रासो में सबसे मुख्य 'वीर रस' है.

🎯 Exam Tip: किसी भी काव्य की मुख्य भावना (रस) को पहचानना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह काव्य के विषय और शैली को समझने में मदद करता है.

RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 1 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. पद्मावती ने तोते से क्या पूछा?
Answer: पद्मावती ने तोते से सबसे पहले उसका परिचय पूछा. तोते ने जवाब में उन्हें राजा पृथ्वीराज के पराक्रम (बहादुरी), वैभव (धन-दौलत) और उनकी सुंदरता के बारे में विस्तार से बताया.
In simple words: पद्मावती ने तोते से पूछा कि वह कौन है. तोते ने फिर राजा पृथ्वीराज की ताकत और सुंदरता बताई.

🎯 Exam Tip: संवाद आधारित प्रश्नों में, कौन किससे क्या पूछता है और उसका क्या जवाब मिलता है, इन दोनों बातों को स्पष्ट रूप से लिखना चाहिए.

 

Question 2. 'पदमसेन कुँवर सुधर' किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
Answer: 'पदमसेन कुँवर सुधर' यह नाम समुद्र शिखर गढ़ के गढ़पति के राजकुमार के लिए प्रयोग किया गया है. यह राजकुमार राजा पदमसेन के पुत्र थे.
In simple words: 'पदमसेन कुँवर सुधर' नाम समुद्र शिखर गढ़ के राजा के राजकुमार के लिए इस्तेमाल हुआ है.

🎯 Exam Tip: साहित्यिक रचनाओं में पात्रों के नामों और विशेषणों को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि वे अक्सर उनके वंश या पद को दर्शाते हैं.

 

Question 4. पृथ्वीराज ने गौरी को किस प्रकार पकड़ लिया?
Answer: जब पृथ्वीराज और गौरी के बीच युद्ध शुरू हुआ, तो पृथ्वीराज ने अपनी तलवार से शत्रु का सामना किया. इसी बीच पृथ्वीराज को मौका मिला और उन्होंने अपने धनुष में गौरी के सिर को फंसाकर अपनी ओर खींच लिया. उन्होंने गौरी को इस तरह पकड़ा जैसे एक बाज अपने शिकार को पकड़ता है.
In simple words: युद्ध में पृथ्वीराज ने गौरी को अपने धनुष से सिर फंसाकर पकड़ा, जैसे एक बाज शिकार को पकड़ता है.

🎯 Exam Tip: युद्ध के दृश्यों में प्रमुख घटनाओं और नायकों द्वारा अपनाई गई रणनीति को विस्तार से समझाना चाहिए.

 

Question 5. पृथ्वीराज ने शत्रुओं का सामना किस तरह किया?
Answer: जब पृथ्वीराज पद्मावती को लेकर दिल्ली की ओर जा रहे थे, तब शहाबुद्दीन गौरी ने उन पर अचानक हमला कर दिया. गौरी की सेना हथियारों, जैसे नालि, हथनालि, तोप आदि से लैस होकर पृथ्वीराज को घेर लिया था. पृथ्वीराज इस अचानक हमले से बिलकुल नहीं घबराए. उन्होंने अपनी तलवार लेकर बहादुरी से शत्रुओं का सामना किया. अपनी समझदारी और रणकौशल से उन्होंने गौरी को बंदी बना लिया और पद्मावती के साथ दिल्ली पहुँच गए. गौरी के सैनिक, जो क्रोध में भरे हुए थे, नाल, हथनाल, बाण और तोपों से पृथ्वीराज की सेना पर हमला कर रहे थे. वे सैनिक लोहे के पर्वतों जैसे विशाल और शक्तिशाली दिख रहे थे, और उनकी भुजाओं में हाथियों जैसा बल था. युद्ध के मैदान में चारों ओर युद्ध के नगाड़े बज रहे थे. इस स्थिति में पृथ्वीराज ने अपनी तलवार उठाई और शत्रु सेना पर ऐसे टूट पड़े जैसे एक शेर हाथियों के झुंड पर हमला करता है. आखिर में, पृथ्वीराज ने अपनी युद्ध कुशलता से गौरी को बंदी बना लिया.
In simple words: पृथ्वीराज ने अचानक हुए गौरी के हमले का सामना बहादुरी से किया. हथियारों से घिरे होने पर भी, उन्होंने अपनी तलवार और चतुराई से युद्ध लड़ा और गौरी को बंदी बना लिया.

🎯 Exam Tip: युद्ध के वर्णन में, नायक की बहादुरी, रणनीति और शत्रु की सेना का विवरण देना महत्वपूर्ण होता है.

RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 1 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. 'पद्मावती समय' के आधार पर इस काव्य के महत्व पर प्रकाश डालिए।”
Answer: 'पद्मावती समय' कविवर चंदवरदायी के प्रसिद्ध काव्य 'पृथ्वीराज रासो' का एक महत्वपूर्ण हिस्सा या अध्याय है. इस महाकाव्य में कुल 69 'समय' (अध्याय) हैं. हमारी पाठ्यपुस्तक में 'पद्मावती समय' का कुछ भाग शामिल है, जिसमें वर्णित घटनाएँ और विवरण 'पृथ्वीराज रासो' के महत्व को दर्शाते हैं. सम्राट पृथ्वीराज अंतिम हिंदू शासक थे, जिन्होंने अपनी बहादुरी से कई बार विदेशी हमलावरों को हराया और भारत की वीर परंपरा को सम्मान दिलाया. 'पद्मावती समय' में कवि ने पृथ्वीराज की वीरता और उदारता को दिखाया है. उन्होंने पृथ्वीराज को एक भारतीय संस्कृति के रक्षक, वीरता के अद्वितीय आदर्श और कई अच्छे गुणों वाले राष्ट्रीय नायक के रूप में प्रस्तुत किया है. 'पद्मावती समय' में पृथ्वीराज का यह रूप सामने आता है कि उन्होंने गौरी की हथियारों से लैस शक्तिशाली सेना को हराकर उसे बंदी बनाया और फिर दंडित करके रिहा कर दिया. इस तरह, 'पद्मावती समय' इस महाकाव्य के महत्व को दिखाता है. लेकिन पृथ्वीराज ने अपनी युद्ध कला से गौरी को ही बंदी बना लिया और उसे दिल्ली ले गए. दिल्ली पहुँचकर पृथ्वीराज ने पद्मावती से विधि-विधान से विवाह किया और शहाबुद्दीन को दंडित किया, फिर दोनों राजभवन में खुशी से रहने लगे.
In simple words: 'पद्मावती समय' चंदवरदायी के काव्य 'पृथ्वीराज रासो' का एक हिस्सा है. यह पृथ्वीराज की बहादुरी और उदारता को दिखाता है, जिसने गौरी को हराया था. यह भारतीय संस्कृति और वीरता का आदर्श पेश करता है, और पृथ्वीराज ने गौरी को बंदी बनाकर दंडित किया और पद्मावती से विवाह किया था.

🎯 Exam Tip: किसी भी साहित्यिक अंश के महत्व का वर्णन करते समय, उसके मुख्य विषय, पात्रों के गुण, ऐतिहासिक संदर्भ और लेखक के संदेश को स्पष्ट रूप से उजागर करना चाहिए.

 

Question 2. 'पृथ्वीराज रासो' हिन्दी का आदि महाकाव्य है।' इस कथन की सार्थकता प्रमाणित कीजिए।
Answer: 'पृथ्वीराज रासो' जिस रूप में आज मिलता है, उस पर कई विद्वानों ने संदेह किया है. इसे पूरी तरह प्रामाणिक नहीं माना जाता. यह एक बहुत बड़ा ग्रंथ है. इसमें महाकाव्य के सभी लक्षण मिलते हैं. यह 'सर्गबद्ध' या 'समय' नामक अध्यायों से युक्त है.
In simple words: 'पृथ्वीराज रासो' हिन्दी का पहला बड़ा काव्य है, पर इसकी प्रमाणिकता पर संदेह है. इसमें महाकाव्य के सभी गुण मिलते हैं, जैसे कि यह अलग-अलग अध्यायों में बँटा है.

🎯 Exam Tip: किसी काव्य को 'आदि महाकाव्य' सिद्ध करते समय, उसके आकार, अध्याय संरचना और उसमें पाए जाने वाले साहित्यिक लक्षणों का उल्लेख करना जरूरी है.

 

Question 3. पद्मावती के रूप-सौन्दर्य की विशेषताएँ लिखिए।
Answer: 'पद्मावती समय' नामक काव्य खंड में कवि ने समुद्र शिखर गढ़ के स्वामी की पुत्री राजकुमारी पद्मावती के रूप-सौंदर्य का वर्णन करते हुए कहा है कि वह 'पद्मिनिय रूप पदमावतिय. मनहु काम कामिनि रचिय' अर्थात् पद्मावती पद्मिनी श्रेणी की स्त्री थीं, जिसे कामदेव की पत्नी रति ने स्वयं रचा हो. भारतीय सौंदर्य शास्त्र में स्त्रियों के चार वर्ग (शंखिनी, पद्मिनी, हस्तिनी और चित्रिणी) बताए गए हैं, जिनमें 'पद्मिनी' को सभी स्त्री-सुंदरता के गुणों का खजाना माना गया है. चंदवरदायी ने पद्मावती में सिर्फ सुंदरता ही नहीं, बल्कि उन्हें सभी कलाओं और विधाओं के साथ-साथ वेद-वेदांगों के ज्ञान से भी संपन्न बताया है. कवि पद्मावती की सुंदरता का वर्णन करते हुए कहते हैं कि ऐसा लगता था जैसे ब्रह्मा ने पद्मावती की रचना चंद्रमा की सोलह कलाओं से की हो. उनके नेत्रों की सुंदरता के सामने खिले हुए कमल, मछली, भौंरे, खंजन, हिरण आदि सभी सुंदरता के प्रतीक फीके लगते थे. उनके दाँतों के सामने हीरे, नाक के सामने तोते की चोंच, होंठों के सामने बिंबाफल और नाखूनों के सामने मोती भी शर्माते थे. उनकी सुंदर चाल के सामने हाथी, सिंह और हंस की चाल भी लज्जित होकर छिप जाती थी. सच में, पद्मावती 'पद्मिनी' नारी का ही साक्षात् रूप थीं. ऐसा लगता था कि कामदेव की सबसे सुंदर पत्नी रति की ही रचना पद्मावती के रूप में हुई थी. इतना ही नहीं, पद्मावती में सामुद्रिक शास्त्र के सभी शुभ लक्षण भी थे. वह चौंसठ कलाओं, चौदह विद्याओं और छह वेदांगों का भी ज्ञान रखती थीं. इस प्रकार, कवि चंदवरदायी ने पद्मावती में सुंदरता, विद्वत्ता और कलाओं का अद्भुत मेल दिखाया है.
In simple words: पद्मावती इतनी सुंदर थीं कि उन्हें चंद्रमा की सोलह कलाओं से बना बताया गया है. उनकी सुंदरता के सामने कमल, हीरे, मोती भी फीके पड़ते थे. वह केवल सुंदर ही नहीं, बल्कि सभी कलाओं और वेदों का ज्ञान भी रखती थीं.

🎯 Exam Tip: किसी पात्र के सौंदर्य वर्णन में, उसकी शारीरिक विशेषताओं के साथ-साथ उसके गुणों और कलाओं का भी उल्लेख करें, और तुलनात्मक उपमानों का उपयोग करें.

RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 1 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. पृथ्वीराज राजा था
(क) मेवाड़ का
(ख) जयपुर का
(ग) दिल्ली का
(घ) आगरे का
Answer: (ग) दिल्ली का
In simple words: राजा पृथ्वीराज दिल्ली के शासक थे.

🎯 Exam Tip: राजाओं और उनसे संबंधित राज्यों के नाम सही से याद रखें.

 

Question 3. तोते ने पदमिनी के होंठों को समझा
(क) गुलाब के फूल
(ख) सेव का फल
(ग) लाल मिर्च
(घ) बिंबाफल
Answer: (घ) बिंबाफल
In simple words: तोते ने पद्मावती के होंठों को बिंबाफल समझा.

🎯 Exam Tip: काव्य में किए गए उपमानों और तुलनाओं पर ध्यान दें, क्योंकि वे पात्रों की विशेषताओं को दर्शाते हैं.

 

Question 4. पद्मावती का पिता पद्मावती का विवाह करना चाहता था
(क) पृथ्वीराज से
(ख) कुमाऊँ के राजा कुमोद मणि से
(ग) जोधपुर के राजा से
(घ) कश्मीर के राजकुमार से
Answer: (ख) कुमाऊँ के राजा कुमोद मणि से
In simple words: पद्मावती के पिता उसका विवाह कुमाऊँ के राजा कुमोद मणि से करना चाहते थे.

🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य मोड़, जैसे विवाह संबंधी निर्णय, पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि वे आगे की घटनाओं को प्रभावित करते हैं.

 

Question 5. पद्मावती को लेकर जा रहे पृथ्वीराज को घेर लिया
(क) समुद्र शिखर दुर्ग के गढ़पति की सेना ने
(ख) कुमोदमणि के योद्धाओं ने
(ग) वनवासी लुटेरों ने
(घ) शहाबुद्दीन गोरी की सेना ने
Answer: (घ) शहाबुद्दीन गोरी की सेना ने
In simple words: पद्मावती के साथ जा रहे पृथ्वीराज को शहाबुद्दीन गौरी की सेना ने घेर लिया था.

🎯 Exam Tip: कहानी में होने वाले संघर्षों और उसमें शामिल पक्षों को याद रखना महत्वपूर्ण है.

RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 1 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 2. समुद्र शिखर दुर्ग की रक्षा में कितने घुड़सवार नियुक्त थे?
Answer: समुद्र शिखर दुर्ग की रक्षा के लिए दस हजार (10,000) घुड़सवार सैनिक तैनात थे.
In simple words: दुर्ग की रक्षा के लिए दस हजार घुड़सवार थे.

🎯 Exam Tip: संख्यात्मक विवरणों को सही से याद रखें, क्योंकि वे स्थान या सेना की शक्ति को दर्शाते हैं.

 

Question 3. पद्मावती के नेत्रों ने किनकी शोभा को कान्तिहीन बना दिया था?
Answer: पद्मावती के नेत्रों ने कमल, मछली, भौंरे, खंजन पक्षी और हिरण के नेत्रों जैसी सभी सुंदर चीज़ों की चमक को फीका कर दिया था. उनकी आँखें इतनी खूबसूरत थीं कि ये सभी उपमान उनके सामने साधारण लगते थे.
In simple words: पद्मावती की आँखों ने कमल, मछली और हिरण जैसे सुंदर उपमानों की चमक को कम कर दिया था.

🎯 Exam Tip: सौंदर्य वर्णन के प्रश्नों में, तुलना के लिए उपयोग किए गए उपमानों और उनके प्रभाव को स्पष्ट रूप से लिखें.

 

Question 4. हीरा, तोता, बिंबाफल तथा मोती की सुंदरता को पद्मावती के किन अंगों ने फीका कर दिया था ?
Answer: पद्मावती के अंगों की सुंदरता ने इन्हें फीका कर दिया था:
दाँतों की चमक ने हीरे की, नुकीली नाक ने तोते की चोंच की, लाल होंठों ने बिंबाफल की, और नाखूनों ने मोतियों की सुंदरता को फीका कर दिया था.
In simple words: पद्मावती के दाँतों ने हीरे को, नाक ने तोते की चोंच को, होंठों ने बिंबाफल को और नाखूनों ने मोतियों को फीका कर दिया.

🎯 Exam Tip: जब कई चीजों की तुलना पूछी जाए, तो हर अंग और उससे संबंधित उपमान को अलग-अलग और स्पष्ट रूप से बताएं.

 

Question 5. पद्मावती किन-किन विषयों का ज्ञान रखती थी?
Answer: पद्मावती चौंसठ कलाओं, चौदह विद्याओं और छह वेदांगों का गहरा ज्ञान रखती थीं. वह केवल सुंदर ही नहीं, बल्कि बहुत बुद्धिमान भी थीं.
In simple words: पद्मावती को चौंसठ कलाओं, चौदह विद्याओं और छह वेदों का ज्ञान था.

🎯 Exam Tip: पात्रों के गुणों और ज्ञान क्षेत्रों का उल्लेख करते समय, संख्यात्मक विवरणों (जैसे चौंसठ कलाएँ) को सही से याद रखें.

 

Question 6. पद्मावती ने तोते को कैसे पकड़ा?
Answer: जब तोते ने पद्मावती के लाल होंठों को एक बिंबाफल समझा और उन पर चोंच चलाने की कोशिश की, तो पद्मावती ने तुरंत अपने हाथों से उसे पकड़ लिया.
In simple words: तोते ने पद्मावती के होंठों पर चोंच चलाने की कोशिश की, तो पद्मावती ने उसे पकड़ लिया.

🎯 Exam Tip: कहानी के महत्वपूर्ण प्रसंगों में पात्रों की क्रियाओं और उनके पीछे के कारणों को स्पष्ट रूप से समझाएं.

 

Question 7. पद्मावती ने पृथ्वीराज के पास संदेश क्यों भिजवाया?
Answer: जब पद्मावती के पिता ने उनका विवाह कुमाऊँ के राजा कुमोद मणि से करना चाहा, तो पद्मावती बहुत व्याकुल हो गईं. वह केवल पृथ्वीराज से ही विवाह करना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने पृथ्वीराज के पास तोते के माध्यम से संदेश भिजवाया.
In simple words: पद्मावती के पिता ने जब उसका विवाह कुमोद मणि से तय किया, तो उसने पृथ्वीराज से शादी करने के लिए उनके पास संदेश भेजा.

🎯 Exam Tip: पात्रों के निर्णयों और उनके पीछे की प्रेरणाओं को स्पष्ट रूप से बताएं, क्योंकि यह कहानी के विकास को समझने में मदद करता है.

 

Question 8. जब तोते ने पृथ्वीराज को पद्मावती का पत्र सौंपा तो पृथ्वीराज ने क्या किया?
Answer: जब तोते ने पृथ्वीराज को पद्मावती का पत्र सौंपा, तो पृथ्वीराज ने उसे खोलकर पढ़ा. पत्र पढ़कर वह तोते की ओर देखकर मन ही मन मुस्कुराए और प्रसन्न हुए. इसके बाद, उन्होंने समुद्र शिखर की ओर जाने की तैयारी शुरू कर दी.
In simple words: तोते ने जब पद्मावती का पत्र दिया, तो पृथ्वीराज ने उसे पढ़ा और मन ही मन हँसते हुए समुद्र शिखर जाने की तैयारी की.

🎯 Exam Tip: पात्रों की प्रतिक्रियाओं और उनके द्वारा किए गए अगले कदमों को कहानी के संदर्भ में स्पष्ट रूप से बताएं.

 

Question 10. शहाबुद्दीन गोरी ने पृथ्वीराज को ललकारते हुए क्या कहा?
Answer: शहाबुद्दीन गौरी ने बड़े घमंड में भरकर पृथ्वीराज को ललकारते हुए कहा कि वह उन्हें बंदी बनाकर ले जाएगा. उसने अपनी पूरी शक्ति से पृथ्वीराज को चुनौती दी.
In simple words: शहाबुद्दीन गौरी ने घमंड से कहा कि वह पृथ्वीराज को बंदी बना लेगा.

🎯 Exam Tip: संवाद आधारित प्रश्नों में, कही गई बात को यथासंभव सटीक रूप से प्रस्तुत करें और वक्ता के भाव को भी दर्शाएं.

 

Question 11. पृथ्वीराज को घेरने वाले गोरी के योद्धाओं को कवि ने कैसा बताया है?
Answer: कवि ने गौरी के उन योद्धाओं को लोहे के पहाड़ के समान विशाल और बहुत शक्तिशाली बताया है. उनकी भुजाओं में हाथियों जैसा बल था, जिससे वे अत्यंत पराक्रमी प्रतीत होते थे.
In simple words: कवि ने गौरी के योद्धाओं को लोहे के पहाड़ जैसा विशाल और हाथियों जितना बलशाली बताया है.

🎯 Exam Tip: किसी पात्र या सेना के वर्णन में, कवि द्वारा उपयोग किए गए विशेषणों और उपमाओं को ध्यान से लिखें, क्योंकि वे उनके स्वरूप को दर्शाते हैं.

 

Question 12. गोरी और पृथ्वीराज के बीच युद्ध का क्या परिणाम निकला?
Answer: गौरी और पृथ्वीराज के बीच हुए युद्ध का परिणाम यह निकला कि पृथ्वीराज ने अपनी युद्ध कुशलता से गौरी को बंदी बना लिया और उसे लेकर दिल्ली की ओर चल दिए.
In simple words: पृथ्वीराज ने युद्ध में गौरी को हरा दिया, उसे बंदी बना लिया और दिल्ली ले गए.

🎯 Exam Tip: युद्ध के परिणाम को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से बताएं, जिसमें विजेता और हारे हुए पक्ष का उल्लेख हो.

 

Question 13. दिल्ली पहुँचकर पृथ्वीराज ने पहला काम क्या किया?
Answer: दिल्ली पहुँचकर पृथ्वीराज ने सबसे पहले ब्राह्मणों को बुलाया और पद्मावती के साथ अपने विवाह की शुभ तिथि और लग्न निकलवाई. फिर उन्होंने हरे बाँसों से बने मंडप में पद्मावती के साथ सात फेरे लिए.
In simple words: दिल्ली पहुँचकर पृथ्वीराज ने पद्मावती से शादी करने की तैयारी की, ब्राह्मणों से शुभ मुहूर्त निकलवाया और मंडप में सात फेरे लिए.

🎯 Exam Tip: कहानी में किसी पात्र द्वारा किसी नए स्थान पर किए गए पहले महत्वपूर्ण कार्य को क्रमबद्ध तरीके से बताएं.

 

Question 14. विवाह के पश्चात् पृथ्वीराज ने क्या किया?
Answer: विवाह के बाद पृथ्वीराज ने ब्राह्मणों को दान और सम्मान से संतुष्ट करके विदा किया. इसके बाद, वह और पद्मावती दुर्ग (महल) में चले गए.
In simple words: शादी के बाद पृथ्वीराज ने ब्राह्मणों को दान देकर विदा किया, और फिर वह पद्मावती के साथ महल चले गए.

🎯 Exam Tip: कहानी के महत्वपूर्ण प्रसंगों के बाद पात्रों के अगले कार्यों और उनके उद्देश्य को स्पष्ट रूप से लिखें.

RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 1 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. समुद्र शिखर गढ़ के गढ़पति का और उसके वैभव का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
Answer: समुद्र शिखर गढ़ सभी गढ़ों में सबसे अच्छा और दुर्गम (जहाँ पहुँचना मुश्किल हो) था. इसका स्वामी ऐसा राजा था जो शत्रुओं पर जीत हासिल करता था, इंद्र के समान प्रतापी था और यादव कुल का था. उसके गढ़ पर दिनभर नगाड़े और अन्य मधुर संगीत बजते रहते थे. दस हजार घुड़सवार उसकी रक्षा में हमेशा तैनात रहते थे. उसकी सेना बहुत बड़ी थी और उसके पास हजारों खरब से भी ज़्यादा धन-संपत्ति थी. समुद्र शिखर गढ़ के गढ़पति के नेत्रों की सुंदरता के सामने खिले हुए कमल, मछली, भौंरे, खंजन और हिरण के नेत्र आदि सभी सुंदरता के उपमान फीके पड़ते थे. पद्मावती के दाँत हीरों से, नाक तोते की चोंच से, होंठ बिंबाफल से, नाखून मोतियों से और केश सर्पिणी से भी ज़्यादा काले और सुंदर बताए गए हैं. उसकी मनमोहक चाल के सामने हाथी, सिंह और हंस की चाल भी शर्मा जाती थी. वह सभी कलाओं और विद्याओं में निपुण थी. इसी आधार पर कवि ने पद्मावती को 'पद्मिनी' नारी के समान बताया है.
In simple words: समुद्र शिखर गढ़ बहुत मज़बूत और शानदार था. उसका राजा बहादुर, इंद्र जैसा प्रतापी और यादव वंश का था. गढ़ में दिनभर संगीत बजता था और दस हजार घुड़सवार उसकी रक्षा करते थे. राजा के पास बहुत धन और विशाल सेना थी, और उसकी बेटी पद्मावती बहुत सुंदर और गुणी थी.

🎯 Exam Tip: किसी स्थान या पात्र का परिचय देते समय, उसके मुख्य गुणों, शक्ति और महत्व को संक्षेप में और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करें.

 

Question 3. तोते को देखकर पद्मावती पर और पद्मावती को देखकर तोते पर क्या प्रभाव हुआ?
Answer: तोते को देखकर पद्मावती का हृदय खुशी से भर गया, जैसे सूर्य की किरणें देखकर लाल कमल खिल गया हो. दूसरी ओर, पद्मावती के लाल-लाल होंठों को देखकर तोता भ्रम में पड़ गया. उसे लगा कि वे उसके सबसे प्यारे बिंबाफल हैं. पद्मावती तोते को देखकर हैरान थी और तोते ने उनके होंठों को चोंच से पकड़ना चाहा. यह देखकर पद्मावती ने तुरंत अपने हाथों से तोते को पकड़ लिया.
In simple words: तोते को देखकर पद्मावती खुश हुईं, जैसे फूल खिलता है. तोता पद्मावती के लाल होंठों को फल समझकर उस पर चोंच मारने लगा, तब पद्मावती ने उसे पकड़ लिया.

🎯 Exam Tip: कहानी में पात्रों के बीच पहली मुलाकात के प्रभाव को स्पष्ट करें, जिसमें दोनों पक्षों की भावनाओं और प्रतिक्रियाओं का वर्णन हो.

 

Question 4. जब पद्मावती के पिता ने उसका विवाह कुमाऊँ के राजा कुमोदमणि से करना चाहा तो पद्मावती ने क्या किया?
Answer: पद्मावती को तोते ने राजा पृथ्वीराज चौहान की बहादुरी, सुंदरता और धन-संपत्ति के बारे में विस्तार से बताया था. यह सुनकर पद्मावती को पृथ्वीराज से प्रेम हो गया और वह उन्हीं से विवाह करना चाहती थी. लेकिन जब पिता ने उनसे बिना पूछे ही उनका विवाह किसी और राजा से तय करना चाहा, तो वह बहुत परेशान हो गईं. तब उन्होंने पृथ्वीराज को बुलाने के लिए तोते के ज़रिये अपना संदेश भिजवाया.
In simple words: पद्मावती पृथ्वीराज से प्यार करती थीं. जब उनके पिता ने उनका विवाह किसी और राजा से तय किया, तो वह बहुत परेशान हुईं और उन्होंने पृथ्वीराज को बुलाने के लिए तोते से संदेश भेजा.

🎯 Exam Tip: पात्रों के भावनात्मक संकट और उनके द्वारा ऐसे समय में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें.

 

Question 5. पृथ्वीराज चौहान को पद्मावती का संदेश कैसे प्राप्त हुआ और उसने संदेश को पढ़कर क्या किया?
Answer: जब पद्मावती को यह पता चला कि उसका विवाह कुमोद मणि से होने वाला है, तो वह डरकर रोने लगी. उस समय उसे केवल तोता ही संकट में साथी लगा. वह पृथ्वीराज को अच्छी तरह जानता था, इसलिए उसने उसी के द्वारा अपना संदेश भिजवाना सही समझा. तोता भी आठ पहर में दिल्ली पहुँचने का संकल्प लेकर हवा से बातें करने लगा. सही समय पर पहुँचकर उसने पद्मावती का संदेश-पत्र पृथ्वीराज को सौंप दिया. पृथ्वीराज ने तुरंत अपनी सेना लेकर समुद्र शिखर की ओर प्रस्थान किया और नगर के बाहर शिव की पूजा करने आयी पद्मावती को घोड़े पर बिठाकर दिल्ली ले चला.
In simple words: पद्मावती ने तोते के ज़रिये पृथ्वीराज को अपनी शादी का संदेश भेजा. तोते ने दिल्ली पहुँचकर पृथ्वीराज को पत्र दिया. पृथ्वीराज ने पत्र पढ़कर तुरंत अपनी सेना के साथ पद्मावती को लेने समुद्र शिखर की ओर प्रस्थान किया और उसे दिल्ली ले गए.

🎯 Exam Tip: कहानी में संदेशों के आदान-प्रदान और उनके परिणामस्वरूप हुई महत्वपूर्ण घटनाओं को क्रमबद्ध तरीके से बताएं.

 

Question 6. जब पद्मावती के हरण की सूचना समुद्र शिखर गढ़ के स्वामी को मिली तो क्या हुआ?
Answer: पद्मावती के हरण की सूचना मिलते ही गढ़पति अपनी सेना के साथ पृथ्वीराज को पकड़ने निकल पड़ा. दोनों ओर से बाण चलने लगे. घायल और मृत सैनिकों के शरीर से बहने वाले खून से पास की नदी की धारा खून की धारा जैसी लगने लगी. इस भयंकर युद्ध में सैकड़ों बहादुर सैनिक मारे गए और रणभूमि की रेत लाल हो गई.
In simple words: जब गढ़पति को पद्मावती के हरण की खबर मिली, तो उसने पृथ्वीराज को पकड़ने के लिए सेना भेजी. भयंकर युद्ध हुआ, बाण चले, और खून बहने से नदी लाल हो गई.

🎯 Exam Tip: युद्ध के दृश्यों का वर्णन करते समय, उसमें शामिल पक्षों, हथियारों के उपयोग और युद्ध के परिणामों को जीवंत रूप से प्रस्तुत करें.

 

Question 8. पृथ्वीराज और गोरी के बीच युद्ध का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer: क्रोध से भरे गौरी के सैनिकों ने नाल, हथनाल, बाण और तोप जैसे हथियारों से पृथ्वीराज की सेना पर हमला कर दिया. उस समय गौरी के योद्धा लोहे के पहाड़ों जैसे विशाल और शक्तिशाली दिख रहे थे, और उनकी भुजाओं में हाथियों जैसा बल था. पुरासान के सुल्तान गौरी के योद्धा हुँकार भरते हुए पृथ्वीराज पर हमला कर रहे थे. उन्होंने पृथ्वीराज को चारों ओर से घेर लिया. युद्ध के मैदान में चारों ओर युद्ध के वाद्य (नगाड़े आदि) बज रहे थे. इस स्थिति में पृथ्वीराज ने अपनी तलवार उठाई और शत्रु सेना पर ऐसे टूट पड़े जैसे एक शेर हाथियों के झुंड पर हमला करता है. अंत में, पृथ्वीराज ने अपनी युद्ध कुशलता से गौरी को बंदी बना लिया.
In simple words: गौरी के सैनिकों ने गुस्से में हथियारों से पृथ्वीराज पर हमला किया. गौरी के योद्धा बहुत ताकतवर दिख रहे थे. पृथ्वीराज ने अपनी तलवार से शेर की तरह जवाब दिया और गौरी को बंदी बना लिया.

🎯 Exam Tip: किसी युद्ध के संक्षिप्त वर्णन में, उसमें शामिल पक्षों, उनकी शक्ति, युद्ध के तरीके और अंतिम परिणाम को संक्षेप में बताएं.

 

Question 9. पृथ्वीराज और पद्मावती के विवाह का संकलित काव्यांश के आधार पर वर्णन कीजिए।
Answer: दिल्ली पहुँचकर पृथ्वीराज ने पद्मावती से अपने विवाह की तैयारी शुरू की. उन्होंने ब्राह्मणों को बुलाकर विवाह की शुभ लग्न निकलवाई. हरे-हरे बाँसों से एक मंडप बनाया गया, जिसमें पद्मावती के साथ सात फेरे लिए गए. वेद-मंत्रों के उच्चारण और हवन आदि क्रियाओं के साथ पृथ्वीराज ने पद्मावती का पाणिग्रहण (विवाह) किया. विवाह के बाद उन्होंने ब्राह्मणों को दान-मान से सम्मानित करके विदा किया.
In simple words: दिल्ली पहुँचकर पृथ्वीराज ने पद्मावती से विवाह करने की तैयारी की. उन्होंने ब्राह्मणों से शुभ मुहूर्त निकलवाकर बाँसों का मंडप बनवाया और पद्मावती के साथ सात फेरे लिए. विवाह के बाद ब्राह्मणों को दान देकर विदा किया.

🎯 Exam Tip: विवाह जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक अनुष्ठानों का वर्णन करते समय, उसकी सभी प्रमुख रस्मों और परंपराओं का उल्लेख करें.

RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 1 निबंधात्मक प्रश्न

 

Question 1. 'पद्मावती समय' काव्यांश में वर्णित प्रमुख घटनाओं को संक्षेप में विवरण दीजिए।
Answer: 'पद्मावती समय' कवि चंदवरदायी द्वारा रचित महाकाव्य 'पृथ्वीराज रासो' का एक हिस्सा है. इसकी मुख्य घटनाएँ इस प्रकार हैं: पूर्व दिशा में समुद्र शिखर नाम का एक बहुत बड़ा और मजबूत किला था. उसके स्वामी की एक बहुत सुंदर बेटी पद्मावती थी, जिसमें सभी अच्छे गुण थे. एक बार एक तोता पद्मावती के शाही बगीचे में आया. पद्मावती ने उसे पकड़कर एक सुंदर सोने के पिंजरे में रख लिया. तोते ने उसे दिल्ली के प्रतापी राजा पृथ्वीराज चौहान के बारे में बताया. पृथ्वीराज की बहादुरी और आकर्षक व्यक्तित्व के बारे में जानने पर पद्मावती उनसे प्रेम करने लगीं और उन्हीं से विवाह करना चाहती थीं. पद्मावती के पिता ने उसका विवाह कुमाऊँ के राजा कुमोद मणि से करने का निश्चय किया. इससे पद्मावती बहुत परेशान हो गईं. लेकिन पृथ्वीराज ने अपने युद्ध कौशल से गौरी को बंदी बना लिया और उसे दिल्ली ले गए. दिल्ली पहुँचकर पृथ्वीराज ने पद्मावती से विधिपूर्वक विवाह किया और शहाबुद्दीन को दंडित करके दोनों राजभवन में आनंद से रहने लगे.
In simple words: 'पद्मावती समय' में पद्मावती की कहानी है. वह पृथ्वीराज से प्यार करती थी. जब उसके पिता ने उसकी शादी कुमोद मणि से तय की, तो उसने पृथ्वीराज को संदेश भेजा. पृथ्वीराज ने गौरी को हराकर पद्मावती से शादी की और वे खुशी से रहने लगे.

🎯 Exam Tip: किसी काव्यांश की प्रमुख घटनाओं का विवरण देते समय, उन्हें क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करें और हर घटना के मुख्य बिंदुओं को शामिल करें.

 

Question 2. आपकी पाठ्य-पुस्तक में संकलित 'पद्मावती समय' काव्यांश किस काव्य-ग्रन्थ से लिया गया है ? काव्य ग्रन्थ तथा उसके रचयिता का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
Answer: हमारी पाठ्य-पुस्तक में दिया गया 'पद्मावती समय' नामक काव्यांश कवि चंदवरदायी द्वारा रचित 'पृथ्वीराज रासो' नामक महाकाव्य से लिया गया है. कवि चंदवरदायी अंतिम हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान के दरबार के कवि थे. वह पृथ्वीराज के बहुत करीबी मित्र और युद्ध में भी साथ देने वाले योद्धा थे. 'पृथ्वीराज रासो' आज जिस विशाल रूप में हमें मिलता है, उसे प्रामाणिक नहीं माना जाता है. इसमें वर्णित पात्र, स्थान, घटनाएँ और समय आदि ऐतिहासिक तथ्यों से मेल नहीं खाते. मूल रूप से यह काव्य शायद छोटा रहा होगा. इस महाकाव्य के नायक पृथ्वीराज चौहान में कवि ने सभी श्रेष्ठ गुणों को दिखाया है. यह काव्य 'वीर रस' से भरा है. इसके अलावा, 'शृंगार', 'भयानक', 'वीभत्स' आदि रस भी इसमें सही जगह पर आते हैं. इस काव्य की भाषा में संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश और अरबी-फारसी शब्दों का मिश्रण है. इसमें संस्कृत और प्राकृत जैसी भाषाओं के छंदों का उपयोग किया गया है. कवि ने छप्पय छंदों का प्रयोग युद्ध के दृश्यों का वर्णन करने में सफलतापूर्वक किया है. अलंकारों का उपयोग करके कवि ने अपनी रचना को आकर्षक बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी है.
In simple words: 'पद्मावती समय' चंदवरदायी के 'पृथ्वीराज रासो' महाकाव्य से लिया गया है. चंदवरदायी पृथ्वीराज चौहान के मित्र और कवि थे. 'पृथ्वीराज रासो' वीर रस का काव्य है, जिसमें कई भाषाओं का मिश्रण है.

🎯 Exam Tip: किसी साहित्यिक अंश के स्रोत, लेखक का परिचय और काव्य की प्रमुख विशेषताओं (जैसे रस, भाषा, छंद) का उल्लेख स्पष्ट रूप से करें.

 

Question 3. 'पद्मावती समय' नामक काव्यांश के आधार पर पद्मावती के व्यक्तित्व और उसकी चरित्रगत विशेषताओं का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए।
Answer: पद्मावती समुद्र शिखर दुर्ग के गढ़पति की पुत्री थीं. वह बचपन से ही बहुत सुंदर थीं. धीरे-धीरे उनकी सुंदरता और गुणों का विकास होता गया. उनकी आँखें, होंठ, और चाल की सुंदरता कवियों द्वारा दिए गए उपमानों को भी शर्मा देती थी. सुंदर होने के अलावा, पद्मावती सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार शुभ लक्षणों वाली स्त्री थीं. वह चौंसठ कलाओं, चौदह विद्याओं और वेदों के छह अंगों या छह शास्त्रों का पूरा ज्ञान रखती थीं. पद्मावती ने अपने जैसे सुंदर और पराक्रमी योद्धा पृथ्वीराज को अपने पति के रूप में चुना था. वह एक साहसी नारी थीं. जब उनके पिता ने उनका विवाह कुमोद मणि से कराने का फैसला किया, तो उन्होंने अपने प्रिय पृथ्वीराज को संदेश भेजा और उनके साथ चल दीं. इस प्रकार, पद्मावती को एक आदर्श नारी के सभी गुणों वाली युवती के रूप में दिखाया गया है.
In simple words: पद्मावती समुद्र शिखर के राजा की सुंदर और गुणी बेटी थीं. वह सभी कलाओं और शास्त्रों का ज्ञान रखती थीं. उन्होंने पृथ्वीराज को अपना पति चुना और अपने पिता के मना करने पर भी पृथ्वीराज के साथ जाने का साहस दिखाया. वह एक आदर्श और बहादुर नारी थीं.

🎯 Exam Tip: किसी पात्र के व्यक्तित्व का वर्णन करते समय, उसकी शारीरिक सुंदरता के साथ-साथ उसके आंतरिक गुणों, ज्ञान और साहस जैसी चरित्रगत विशेषताओं को भी शामिल करें.

 

Question 4. 'पद्मावती समय' नामक काव्यांश के आधार पर पृथ्वीराज चौहान की चरित्रगत विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Answer: 'पद्मावती समय' नामक काव्यांश के आधार पर पृथ्वीराज चौहान की चरित्रगत विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
2. पराक्रमी योद्धा – वह राजा की सेना से युद्ध करके शत्रुओं को हरा देते थे और आगे बढ़ जाते थे. जब शहाबुद्दीन गौरी अपनी सेना के साथ उन पर हमला करता है, तो पृथ्वीराज बिल्कुल विचलित नहीं होते और पूरी शक्ति से शत्रुओं पर टूट पड़ते हैं.
3. युद्ध कौशल में निपुण – पृथ्वीराज पराक्रमी होने के साथ-साथ युद्ध-विद्या में भी बहुत कुशल थे. वह अपनी कमान से गौरी को ऐसे पकड़ लेते हैं, जैसे एक बाज अपने शिकार को अपने चंगुल में जकड़ लेता है.
4. विद्वानों का सम्मान करने वाले – पृथ्वीराज विद्वत्ता का सम्मान करते थे. विवाह के बाद उन्होंने विद्वान ब्राह्मणों को दान और सम्मान देकर संतुष्ट किया.
In simple words: पृथ्वीराज एक बहादुर योद्धा थे जो युद्ध में बहुत निपुण थे. उन्होंने गौरी को आसानी से हरा दिया. वह विद्वानों का सम्मान करते थे और अपनी पूरी शक्ति से शत्रुओं का सामना करते थे.

🎯 Exam Tip: किसी ऐतिहासिक पात्र की विशेषताओं का वर्णन करते समय, उनके युद्ध कौशल, नैतिकता और वीरता के उदाहरणों को शामिल करें.

चंदवरदायी कवि-परिचय

जीवन परिचय-

Answer: हिन्दी काव्य के आदिकाल के प्रसिद्ध महाकाव्य 'पृथ्वीराज रासो' के रचयिता कविवर चंदवरदायी का जन्म लाहौर (जो अब पाकिस्तान में है) में सन् 1168 ईस्वी में हुआ था. चंदवरदायी दिल्ली के अंतिम हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान के राजकवि और उनके परम मित्र थे. ऐसा माना जाता है कि पृथ्वीराज और चंदवरदायी का जन्म और मृत्यु एक ही दिन हुई थी. जब मोहम्मद गौरी पृथ्वीराज को बंदी बनाकर गजनी ले गया, तो चंदवरदायी भी वहाँ पहुँचे. उन्होंने पृथ्वीराज द्वारा 'शब्द भेदी बाण' चलाए जाने की बात कही. इस परीक्षा में गौरी मारा गया और दोनों मित्रों ने एक-दूसरे को तलवार मारकर स्वतंत्र मृत्यु को प्राप्त किया. साहित्यिक परिचय के रूप में, चंदवरदायी की केवल एक ही रचना 'पृथ्वीराज रासो' प्राप्त होती है.
'पृथ्वीराज रासो' का वर्तमान स्वरूप प्रामाणिक नहीं माना जाता है. इसके नाम, स्थान, घटना-समय ऐतिहासिक तथ्यों से मेल नहीं खाते. कुछ विद्वान एक नए कैलेंडर की कल्पना करके नाम और घटना आदि की संगति बिठाते हैं. कवि ने इस विशाल काव्य-ग्रंथ में अपने नायक पृथ्वीराज को सभी श्रेष्ठ गुणों से युक्त दिखाया है.
कवि चंद एक रससिद्ध रचनाकार हैं. 'पृथ्वीराज रासो' में सभी रसों का प्रभावशाली चित्रण हुआ है. चंद की भाषा में संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश, अरबी, फारसी आदि भाषाओं का अद्भुत मिश्रण पाया जाता है. इस भाषा को 'डिंगल' नाम दिया गया है. 'छप्पय' कवि चंद का प्रसिद्ध छंद है.
कवि चंदवरदायी द्वारा निर्मित सम्राट पृथ्वीराज चौहान की भव्य छवि ने उन्हें भारतीय संस्कृति के आदर्श पुरुष के रूप में जन-जन में प्रसिद्ध कर दिया है.
In simple words: चंदवरदायी 'पृथ्वीराज रासो' के लेखक थे, जिनका जन्म 1168 ईस्वी में लाहौर में हुआ था. वह पृथ्वीराज चौहान के मित्र और दरबारी कवि थे. उनकी मृत्यु भी पृथ्वीराज के साथ ही हुई मानी जाती है. 'पृथ्वीराज रासो' एक बड़ा काव्य है, जो वीर रस में लिखा गया है, इसकी भाषा में कई भाषाओं का मिश्रण है.

🎯 Exam Tip: कवियों के जीवन परिचय में उनके जन्म स्थान, समय, प्रमुख रचनाएँ और भाषा शैली का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है.

पाठ-परिचय

Answer: पाठ्य-पुस्तक में संकलित यह अंश 'पृथ्वीराज रासो' के 'पद्मावती समय' से लिया गया है. इस अंश में कवि ने समुद्र शिखर दुर्ग के अधिपति की पुत्री पद्मावती के पृथ्वीराज पर मोहित होने और पृथ्वीराज द्वारा उसके हरण और विवाह का वर्णन किया है.
In simple words: यह अंश 'पृथ्वीराज रासो' के 'पद्मावती समय' से है. इसमें पद्मावती के पृथ्वीराज पर मोहित होने और पृथ्वीराज द्वारा उसके विवाह का वर्णन है.

🎯 Exam Tip: किसी भी पाठ के परिचय में उसके स्रोत, मुख्य विषयवस्तु और प्रमुख घटनाओं का संक्षेप में उल्लेख करें.

पद्यांशों की संप्रसंग व्याख्याएँ

 

Question 1. पूरब दिस गढ़ गढ़नपति। समुद सिषर अति दुग्ग।
तहँ सु विजय सुर राज पति। जादू कुलह अभंग॥
धुनि निसान बहु साद। नाद सुरपंच बजत दीन।
दस हजार हय चढ़त। हेम नग जटित साज तिन॥
गंज असंष गजपतिय। मुहर सेना तिय संघह।
इक नायक कर धरी। पिनाक धरभर रज राष्षह॥
दस पुत्र पुत्रिय एक सम। रथ सुरङ्ग अम्मर डमर।
भंडार लछिय अगनित पदम। सो पदम सेन कुँवर सुधर ॥
Answer: **कठिन शब्दार्थ:** गढ़ = किला; गढ़नपति = गढ़ों का स्वामी; समुद्र सिषर = समुद्र शिखर (नाम); अति = अत्यंत; दुग्ग = दुर्ग; सुविजय = श्रेष्ठ विजेता; सुर राज पति = इंद्र; जादू = यादव; कुलह = कुल या वंश का; अभंग = अडिग; धुनि = ध्वनि, शब्द; निसात = नगाड़े; साद = एक साथ; नाद = शब्द; सुरपंच = पाँच सुरों में, पाँच प्रकार के बाजों की ध्वनि; हय = घोड़ा; हेम = सोना; नग = रत्न; साज = घोड़े की सजावट, जीन; असंष = असंख्य, अनगिनती; गजपतिय = श्रेष्ठ हाथी; मुहर = हरावल, सेना का आगे चलने वाला भाग; तिय संषह = तीन शंख, एक बड़ी संख्या (दस पद्म से आगे की गिनती); नायक = योद्धा, सेनापति; पिनाक = धनुष; धरभर = धैर्य सहित; रज्य = राज्य; रष्षह = रक्षा करता है; सुरङ्ग = सुंदर; अम्मर = आकाश; डमर (अमर) = चंदोवा, ऊपर ताना जाने वाला वस्त्र; लछिय = लक्ष्मी, संपत्ति; अगनित = जो गिना न जा सके; पदम = पद्म (दस नील के आगे की संख्या) (अरब, खरब, नील, पद्म, शंख आदि बड़ी संख्याएँ हैं); सुधर = सुंदर.
**प्रसंग तथा संदर्भ:** यह काव्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'अपरा' में संकलित कवि चंदवरदायी रचित 'पृथ्वीराज रासो' काव्य के 'पद्मावती समय' नामक प्रकरण से लिया गया है. इस अंश में कवि ने 'समुद्र शिखर' नामक दुर्ग के स्वामी के व्यक्तित्व और दुर्ग में होने वाले क्रिया-कलापों का वर्णन किया है.
**व्याख्या:** कवि कहते हैं कि पूरब दिशा में समुद्र शिखर नाम का एक बहुत दुर्गम और सभी दुर्गों में श्रेष्ठ गढ़ है. वहाँ एक महान विजेता और इंद्र के समान प्रतापी, यादव कुल का एक अडिग रहने वाला राजा राज करता है.
उस दुर्ग में दिनभर कई नगाड़े और पाँच प्रकार के मधुर बाजे बजते रहते हैं. उस दुर्ग की रक्षा के लिए स्वर्ण और रत्नों से सजे घोड़ों पर दस हजार घुड़सवार नियुक्त रहते हैं. उस गढ़ की सेना के हरावल (आगे बढ़ने वाले हिस्से) में असंख्य और श्रेष्ठ हाथी होते हैं. एक योद्धा (नायक) अपने हाथ में धनुष धारण करके धैर्य के साथ राज्य की रक्षा करता है.
उस राजा के दस पुत्र और पुत्रियाँ समान थे. वहाँ सुंदर रथ, आकाश जैसे चंदोवे (छत) और डमरू जैसे वाद्य थे. उस राजा के पास अगणित पद्म (बहुत अधिक) लक्ष्मी का भंडार था. वह राजा पदमसेन का सुंदर राजकुमार था.
**विशेष:**
(i) इस काव्यांश में समुद्र शिखर नाम के एक दुर्गपति के वैभव का वर्णन किया गया है.
(ii) कवि ने संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश तथा विदेशी भाषा की शब्दावली का प्रयोग किया है.
(iii) इसमें अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन शैली का उपयोग किया गया है.
(iv) 'मुहर सेना तिय संषह' तथा 'भंडार लछिये अगनित पदम' में अतिशयोक्ति अलंकार का प्रयोग हुआ है.
(v) कवि ने अपने प्रिय छंद 'छप्पय' का प्रयोग किया है.
In simple words: कवि समुद्र शिखर नाम के एक मज़बूत गढ़ का वर्णन करते हैं, जहाँ एक शक्तिशाली राजा राज करता है. गढ़ में हमेशा संगीत बजता रहता है और उसकी रक्षा दस हजार घुड़सवार करते हैं. राजा के पास बहुत धन और विशाल सेना थी, और उसके सुंदर पुत्र-पुत्रियाँ थीं.

🎯 Exam Tip: पद्यांश की व्याख्या करते समय, कठिन शब्दों के अर्थ, प्रसंग-संदर्भ, फिर व्याख्या और अंत में काव्यगत विशेषताओं को स्पष्ट रूप से लिखें.

 

Question 2. मनहुँ कलां ससिभान। कला सोलह सो बन्निय।
बाल बैस ससिता समीप। अम्रित रस पिन्निय॥
बिंगसि कमल म्रिग भमर। वैन षंजन मृग लुट्टिय॥
हीर कीर अरु बिंब। मोति नष सिष अहि घुट्टिय॥
छप्पति गयंद हरि हंस गति। विह बनाय संचै सचिय॥
पदमिनिय रूप पदमावतिय। मनहु काम कामिनि रचिय॥
Answer: **कठिन शब्दार्थ:** मनहुँ = मानो; कला सोलह = चंद्रमा की सोलह कलाएँ; बन्निय = बनी या बनाई गई; बाल बैस = बचपन; ससिता = शिशुता, शैशव की अवस्था; अम्रित = अमृत; पिन्निय = पिया था; बिगसि कमल = खिला हुआ कमल; म्रिग = मकर राशि अर्थात् मछली; भमर = भौंरा; वैन = वेणु (वंशी), बाँस की गाँठ; पंजन = खंजन पक्षी; लुट्टिय = लूट लिया, कांतिहीन कर दिया; हीर = हीरा (दाँत); कीर = तोता (नाक); बिंब = बिंबाफल जो लाल रंग का होता है, (होंठ); मोति = मोती; नष = नाखून; सिष = शिख, चोटी या केश; छिप्पती = छिपती है; गयंद = हाथी; हरि = सिंह; विह = विधि, विधाता, ब्रह्मा; संचै संचिय = साँचे में ढालकर; पदमिनिय = पद्मिनी नायक-नायिका (स्त्री) जो अत्यंत सुंदर मानी गई है; काम = कामदेव; कामिनि = पत्नी; रचिय = बनाई थी.
**प्रसंग तथा संदर्भ:** प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'अपरा' में संकलित कवि चंदवरदायी रचित 'पृथ्वीराज रासो' नामक काव्य के 'पद्मावती समय' नामक प्रकरण से लिया गया है. इस अंश में कवि ने समुद्र शिखर गढ़ के स्वामी की पुत्री राजकुमारी पद्मावती की सुंदरता का वर्णन किया है.
**व्याख्या:** कवि कहते हैं कि राजकुमारी पद्मावती मानो चंद्रमा की सोलह कलाओं से बनी थीं. चंद्रमा की कलाओं के समान उनकी सुंदरता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी. इसी कारण उनकी शिशु अवस्था और बाल्यावस्था मानो चंद्रमा के अमृत रस से सिंची हुई थी.
उनके चंचल और विशाल नेत्रों ने अपनी शोभा से, खिले हुए कमल, मकर राशि (मछली), भरवंशी (बाँस की गाँठ जो आँख जैसी प्रतीत होती है) या वंश लोचन, खंजन पक्षी और हरिणों के नेत्रों की शोभा को कांतिहीन बना दिया है. इन सभी से सुंदर नेत्रों की तुलना की जाती है.
उनके शुभ्र दाँतों के सामने हीरे की, सुंदर नाक के सामने तोते की चोंच की, लाल-लाल कोमल होंठों के सामने बिंबाफल की, नाखूनों के सामने मोतियों की सुंदरता फीकी लगती है. उनके लंबे केश देखकर लगता था मानो उनके शरीर से काले सर्प लिपटे हुए हों.
**विशेष:**
(i) कवि ने पारंपरिक उपमानों को पद्मावती के अंगों की सुंदरता के सामने हीन दिखाया है. सुंदर नेत्रों की तुलना कवि खिले कमल, मछली, भौंरा, खंजन पक्षी, हिरण के नेत्र आदि से करते आए हैं. लेकिन पद्मावती के नेत्रों ने इन सभी को अपनी सुंदरता से लज्जित कर दिया है.
(ii) 'बाल बैस ससिता समीप', 'हीर कीर', 'नष सिष' तथा 'काम कामिनि', 'हरि हंस', 'संचै सचिय' आदि में अनुप्रास अलंकार है. अंग सौंदर्य के वर्णन में अतिशयोक्ति अलंकार है.
(iii) भाषा डिंगल है. मिश्रित शब्दावली का प्रयोग है.
(iv) इसमें श्रृंगार रस का स्पर्श है.
In simple words: कवि कहते हैं कि पद्मावती चंद्रमा की सोलह कलाओं जितनी सुंदर थीं और उनकी सुंदरता बचपन से ही बढ़ रही थी. उनकी आँखें कमल और हिरण की आँखों से भी सुंदर थीं. उनके दाँत हीरे से, नाक तोते की चोंच से, और होंठ बिंबाफल से भी सुंदर थे. उनकी सुंदरता ने सभी चीजों को फीका कर दिया था.

🎯 Exam Tip: सौंदर्य वर्णन की व्याख्या में, उपमानों की तुलना करते हुए काव्य की सुंदरता और कवि के विचारों को स्पष्ट करें, साथ ही अलंकारों का भी उल्लेख करें.

 

Question 3. सामुद्रिक लच्छन सकल। चौसठ कला सुजान ॥
जानि चतुर दस अंग षट। रति बसंत परमान॥
सषियन सँग खेलत फिरत। महलनि बाग निवास।
कीर इक्क दिष्षिय नयन। तब मन भयौ हुलास॥
मन अति भयो हुलास। विगसि जनु कोक किरण रवि॥
अरुण अधर तिय सुघर। बिंब फल जानि कीर छबि॥
यह चाहत चष चकित। उहजु तक्किय झरप्पि झर॥
चंच चहुटिय लोभ्। लियौ तब गहित अप्प कर॥
हरषत अनंद मन महि हुलस। लै जु महल भीतर गइय॥
पंजर अनूप नग मनि जटित। सो तिहि मँह रष्षत भइय॥
Answer: **कठिन शब्दार्थ:** सामुद्रिक लच्छन = हाथ, पैर तथा मुख की आकृति देखकर शुभ-अशुभ लक्षणों का निर्णय; सकल = सारे, सभी; चौंसठ कला = संगीत, नृत्य, चतुराई, चित्रकला आदि चौंसठ प्रकार की कलाएँ; चतुर दस = चौदह, चौदह प्रकार की विद्याएँ; अंग षट = छह अंग, वेद के छह अंग-शिक्षा, छंद, व्याकरण, निरुक्त, ज्योतिष और कल्प, अथवा छह शास्त्र; रति = प्रेम, विलास; बसंत = बसंत ऋतु बसते हैं; परमान = प्रमाण, समान; कीर = तोता; इक्क = एक; दिष्षिय = दिखाई दिया; हुलास = प्रसन्नता; विगसि = खिला, विकसित हुआ; जनु = मानो; कोक (कोक नद) = कमल; तिय = नारी; सुघर = सुंदर; बिंब फल = लाल रंग का एक फल जो सुंदर होंठों को उपमान माना गया है; चष = नेत्र; चकित = आश्चर्ययुक्त; उहजु = और वह; तक्किय = तक रहा; झरप्पि झर = झट से झपटना; चंच = चोंच; चहुट्टिय = पकड़ा; गहित = ग्रहण किया, पकड़ लिया; अप्प = अपने; कर = हाथ से; पंजर = पिंजरा; अनूप = अनोखा, अद्वितीय; नग मनि = रत्न और मणियाँ; जटित = जड़ा हुआ; सो तिहि मँह = उसमें; रष्षत भइय = रख दिया.
**प्रसंग तथा संदर्भ:** प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'अपरा' में संकलित कवि चंदवरदायी रचित 'पृथ्वीराज रासो' काव्य के 'पद्मावती समय' नामक प्रकरण से लिया गया है. इस अंश में कवि ने पद्मावती के शुभ लक्षणों से युक्त शरीर और उसके तोते से मिलने के प्रसंग का वर्णन किया है.
**व्याख्या:** कवि बताते हैं कि पद्मावती के शरीर पर सभी शुभ लक्षण थे. वह चौंसठ कलाओं, चौदह विद्याओं और छह वेदांगों का ज्ञान रखती थीं, मानो प्रेम और वसंत उनके भीतर निवास करते हों.
वह अपनी सखियों के साथ महल के बगीचे में खेल रही थीं. उसी समय उन्हें एक तोता दिखाई दिया, जिससे उनका मन बहुत प्रसन्न हो गया. उनका मन इतना खुश हो गया, मानो कमल सूर्य की किरणें देखकर खिल उठा हो.
तोता उनके सुंदर लाल होंठों को बिंबाफल जानकर उस पर चोंच चलाने लगा. पद्मावती ने आश्चर्य से उसे देखा और तोता तुरंत लपक कर उनके होंठों पर चोंच मारने लगा. तोते के लोभ में चोंच मारने पर पद्मावती ने उसे हाथ से पकड़ लिया.
खुशी और आनंद से मन पुलकित होकर वह तोते को लेकर महल के भीतर गईं. वहाँ उन्होंने उसे रत्नों और मणियों से जड़े एक अनोखे पिंजरे में रख दिया.
**विशेष:**
(i) इस काव्यांश में कवि ने अपने ज्योतिष शास्त्र, कलाओं, विद्या और वेदांग संबंधी ज्ञान का परिचय कराया है.
(ii) भाषा डिंगल, मिश्रित शब्दावली से युक्त है.
(iii) 'सखियन सँग', 'कोक किरण', 'अरुण अधर' झरप्पि झर', 'चंच चहुट्टिय' में अनुप्रास अलंकार है.
(iv) 'विगसि जनु कोक किरण रवि' में उत्प्रेक्षा अलंकार है.
In simple words: पद्मावती सभी शुभ गुणों और कलाओं का ज्ञान रखती थीं. एक दिन बगीचे में खेलते हुए उन्हें एक तोता मिला. तोते ने उनके होंठों को फल समझकर चोंच मारी, तो पद्मावती ने उसे पकड़ लिया. वह खुश होकर तोते को महल ले गईं और एक सुंदर पिंजरे में रख दिया.

🎯 Exam Tip: पद्यांश की व्याख्या में, पात्र के गुणों, घटनाओं के क्रम और उसके पीछे के भावों को स्पष्ट करें. छंद और अलंकार पहचानना भी महत्वपूर्ण है.

 

Question 3. सामुद्रिक लच्छन सकल। चौसठ कला सुजान ॥ जानि चतुर दस अंग षट। रति बसंत परमान॥ सषियन सँग खेलत फिरत। महलनि बाग निवास। कीर इक्क दिष्षिय नयन। तब मन भयौ हुलास॥ मन अति भयो हुलास। विगसि जनु कोक किरण रवि॥ अरुण अधर तिय सुघर। बिंब फल जानि कीर छबि॥ यह चाहत चष चकित। उहजु तक्किय झरप्पि झर॥ चंच चहुटिय लोभ्। लियौ तब गहित अप्प कर॥ हरषत अनंद मन महि हुलस। लै जु महल भीतर गइय॥ पंजर अनूप नग मनि जटित। सो तिहि मँह रष्षत भइय॥
Answer:
कठिन शब्दार्थ:
सामुद्रिक लच्छन = हाथ, पैर तथा मुख की आकृति देखकर शुभ-अशुभ लक्षणों का निर्णय।
सकल = सारे, सभी।
चौंसठ कला = संगीत, नृत्य, चतुराई, चित्रकला आदि चौंसठ प्रकार की कलाएँ।
चतुर दस = चौदह, चौदह प्रकार की विद्याएँ।
अंग षट = छह अंग, वेद के छह अंग-शिक्षा, छंद, व्याकरण, निरुक्त, ज्योतिष और कल्प, अथवा छह शास्त्र।
रति = प्रेम, विलास।
बसंत = बसंत ऋतु बसते हैं।
परमान = प्रमाण, समान।
कीर = तोता।
इक्क = एक।
दिष्षिय = दिखाई दिया।
हुलास = प्रसन्नता।
विगसि = खिला, विकसित हुआ।
जनु = मानो।
कोक (कोक नद) = कमल।
तिय = नारी।
सुघर = सुंदर।
बिंब फल = लाल रंग का एक फल जो सुंदर होंठों को उपमान माना गया है।
चष = नेत्र।
चकित = आश्चर्ययुक्त।
उहजु = और वह।
तक्किय = तक रहा।
झरप्पि झर = झट से झपटना।
चंच = चोंच।
चहुट्टिय = पकड़ा।
गहित = ग्रहण किया, पकड़ लिया।
अप्प = अपने।
कर = हाथ से।
पंजर = पिंजरा।
अनूप = अनोखा, अद्वितीय।
नग मनि = रत्न और मणियाँ।
जटित = जड़ा हुआ।
सो तिहि मँह = उसमें।
रेष्षत भइय = रख दिया।

प्रसंग तथा संदर्भ:
यह काव्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'अपरा' में कवि चंदवरदायी द्वारा रचित 'पृथ्वीराज रासो' काव्य के 'पद्मावती समय' नामक भाग से लिया गया है। इस हिस्से में कवि ने पद्मावती के शुभ लक्षणों वाले शरीर और उसके तोते से मिलने की कहानी बताई है। यह दर्शाता है कि पद्मावती कितनी खास थी।

व्याख्या:
सुंदर पद्मावती के लाल होंठों को तोते ने बिंबा फल समझा। पद्मावती तोते को देखकर हैरान थी और तोता उसके होंठों पर झपटने की तैयारी में था। आखिर, तोते ने होंठों को फल समझकर चोंच मारी और पद्मावती ने उसे पकड़ लिया। तोते को पाकर पद्मावती बहुत खुश हुई और उसे अपने महल में ले गई। उसने तोते को रत्नों और मणियों से जड़े एक अनोखे पिंजरे में बिठा दिया।

विशेष:
(i) कवि ने इस काव्यांश में ज्योतिष शास्त्र, कलाओं, विद्या और वेदांगों के ज्ञान को दर्शाया है।
(ii) भाषा डिंगल है, जिसमें कई भाषाओं के शब्द मिले हुए हैं।
(iii) 'सषियन सँग', 'कोक किरण', 'अरुण अधर' झरप्पि झर', 'चंच चहुट्टिय' में अनुप्रास अलंकार का प्रयोग हुआ है।
(iv) 'विगसि जनु कोक किरण रवि' में उत्प्रेक्षा अलंकार है।
In simple words: पद्मावती के लाल होंठों को तोता फल समझकर चोंच मारने चला। पद्मावती ने उसे पकड़ लिया और बहुत खुश होकर अपने महल में एक सुंदर पिंजरे में रख दिया। यह हिस्सा पद्मावती के गुणों और उस घटना का वर्णन करता है।

🎯 Exam Tip: जब पद्यांश की व्याख्या करें, तो पहले कठिन शब्दों का अर्थ बताएं, फिर प्रसंग और संदर्भ लिखें, और अंत में सरल भाषा में व्याख्या करें। विशेष बिंदुओं को अलग से प्रस्तुत करें।

 

Question 4. सवालष्ष उत्तर सयल। कमऊँ गड्डू दूरंग॥ राजत राज कुमोदमनि। हय गय ट्रिब्ब अभंग॥7॥ नारिकेल फल परठि दुज। चौक पूरि मनि मुत्ति ॥ दई जु कन्यसा बचन बर। अति अनंद करि जुत्ति॥४॥ पदमावति विलषि बर बाल बेली। कही कीर सों बात तब हो अकेली॥ झटं जाहु तुम्ह कीर दिल्ली सुदेस। बरं चाहुवानं जु आनौ नरेस ॥9॥ आँनो तुम्ह चाहुवानं बर। अरु कहि इहै संदेस॥ सांस सरीरहि जो रहै। प्रिय प्रथिराज नरेस॥10॥
Answer:
कठिन शब्दार्थ:
सवालष्ष = सवालाख (एक लाख पच्चीस हज़ार) (यह धन या उपज को दर्शाता है)।
सयल = शैल, पर्वत।
कमऊँ = कुमायूँ।
दूरंग = दुर्गम (जहाँ पहुँचना मुश्किल हो)।
राजत = विराजता है, शोभा पाता है।
राज = राजा।
कुमोदमनि = कुमोदमणि (एक नाम)।
हय = घोड़े।
गये = हाथी।
दिब्बे = द्रव्य, सम्पत्ति।
अभंग = अपार (बहुत अधिक)।
नारिकेल = नारियल।
दुज = द्विज, ब्राह्मण।
चौक = शुभ कामों में बनाई जाने वाली चौकोर आकृति।
पूरि = बनाकर।
मनि = मणि।
मुत्ति = मोती।
दई न कन्या बचन बर = कन्या के विवाह का वचन दे दिया था, विवाह कर दिया।
जुत्ति = गाँठजोड़ (रिश्ता तय करना)।
विलषि = रोकर।
झटं = शीघ्र (जल्दी)।
चाहुवानं = चौहान (पृथ्वीराज चौहान)।
आँनौ = लाओ।
नरेस = राजा।

प्रसंग तथा संदर्भ:
यह काव्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'अपरा' में कवि चंदवरदायी रचित 'पृथ्वीराज रासो' काव्य के 'पद्मावती समय' नामक हिस्से से लिया गया है। इसमें कवि ने पद्मावती के पिता द्वारा उसका विवाह कुमाऊँ के राजा कुमोदमणि से तय करने और पद्मावती द्वारा तोते से पृथ्वीराज चौहान को संदेश भेजने का वर्णन किया है। यह कहानी का एक महत्वपूर्ण मोड़ है।

व्याख्या:
पद्मावती ने तोते से कहा कि वह पृथ्वीराज को जल्दी से ले आए और यह संदेश दे कि "हे प्रिय राजा पृथ्वीराज! जब तक मेरे शरीर में प्राण हैं, आप मुझे लेने आ जाओ।" राजकुमारी की इच्छा जाने बिना पिता ने उसका विवाह दूसरे राजा से तय कर दिया, जिससे उसे बहुत दुख हुआ। कवि ने अपनी इस रचना में अलग-अलग भाषाओं के शब्दों का प्रयोग किया है और इसमें 'छप्पय छंद' का प्रभावशाली इस्तेमाल हुआ है। 'हय गय ट्रिब्ब', 'मनि मुत्ति' और 'विलषि बरं बाल बेली' जैसे शब्दों में अनुप्रास अलंकार है।
In simple words: पद्मावती के पिता ने उसका विवाह कुमाऊँ के राजा कुमोदमणि से तय कर दिया। पद्मावती दुखी होकर तोते से पृथ्वीराज चौहान को संदेश भेजती है कि वह उसे जल्द से जल्द लेने आ जाए।

🎯 Exam Tip: पद्यांश की व्याख्या करते समय, कविता की मुख्य भावनाओं और पात्रों की स्थिति पर ध्यान दें। छंद और अलंकार जैसे साहित्यिक तत्वों को भी स्पष्ट करें।

 

Question 5. लै पत्री सुक यों चल्यौ। उड्यौ गगनि गहि बाव॥ जहँ दिल्ली प्रथिराज नर। अट्ठ जाम में जाव॥11॥ दिय कग्गर नृप राज कर। पुलि बंचिय प्रथिराज॥ सुक देखत मन में हँसे। कियौ चलन को साज॥12॥ कर पकरि पीठ हय परि चढ़ाय। लै चल्यौ नपति दिल्ली सुराय॥ भइ षबरि नगर बाहिर सुनाय। पदमावतीय हरि लीय जय ॥13॥ कम्मान बन छुट्टहि अपार। लागंत लोह इम सारि धार॥ घमसान घाँन सब बीर घेत। घन श्रोन बहेत अरु रकत रेत ॥14॥
Answer:
कठिन शब्दार्थ:
पत्री = पत्र, संदेश।
गगनि = आकाश।
गहि = पकड़कर, साथ में।
बाव = वायु।
अट्ठ जाम = आठ पहर, लगभग चौबीस घंटे (एक दिन)।
दिय = दिया।
कग्गर = कागज, पत्र।
नृपराज = राजाओं का राजा, श्रेष्ठ राजा।
पुलि = (खुलि) खोलकर।
बंचिय = बाँची, पढ़ी।
चलन कौ = चलने का।
साज = तैयारी।
सुराय = श्रेष्ठ राजा।
षबरि = खबर।
हरी लीय जाय = हरण करके लिए जा रहा है।
कम्मान = धनुष।
लागंत = लगती है।
लोह = लोहू, रक्त।
इम = जैसी, समान।
सारि = छोटी नदी या नहर।
धार = धारा।
घेत = (खेत) रणभूमि।
घन = घना, बहुत।
श्रोन = रक्त।
रकत = लाल।

प्रसंग तथा संदर्भ:
यह काव्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'अपरा' में कवि चंदवरदायी रचित 'पृथ्वीराज रासो' काव्य के 'पद्मावती समय' नामक हिस्से से लिया गया है। इस अंश में कवि ने तोते के पद्मावती का पत्र लेकर पृथ्वीराज तक पहुँचने और पृथ्वीराज द्वारा पद्मावती के हरण की घटना का वर्णन किया है।

व्याख्या:
पद्मावती का संदेश-पत्र लेकर तोता ऐसे चला जैसे वह हवा को पकड़कर या हवा के साथ उड़ता जा रहा हो। वह पृथ्वीराज की राजधानी दिल्ली में लगभग चौबीस घंटे में पहुँच गया। दिल्ली पहुँचकर तोते ने पद्मावती का पत्र पृथ्वीराज को दिया। पृथ्वीराज ने पत्र को खोलकर पढ़ा और तोते की ओर देखकर मन ही मन हँसने लगे। उन्होंने समुद्र शिखर की ओर जाने की तैयारी शुरू कर दी। समुद्र शिखर पहुँचकर (शिव मंदिर में पूजा करने गई) पद्मावती का अपहरण कर दिल्ली लौटते हैं। युद्ध में राजा की सेना हार जाती है। रास्ते में शहाबुद्दीन गौरी पृथ्वीराज पर हमला करता है और गौरी को बंदी बना लिया जाता है। दिल्ली पहुँचकर पृथ्वीराज और पद्मावती का विवाह शुभ मुहूर्त में होता है।

विशेष:
(i) युद्ध का बहुत ही सजीव वर्णन किया गया है।
(ii) यह छंद वीर रस के लिए उपयुक्त है।
(iii) 'गगन गहि' पक्षी जीव' और 'रकत रेत' में अनुप्रास अलंकार है।
(iv) 'लागंत लोह इम सारि धार' में उपमा अलंकार है।
In simple words: तोता पद्मावती का पत्र लेकर दिल्ली में पृथ्वीराज के पास पहुँचा। पृथ्वीराज पत्र पढ़कर मुस्कुराए और पद्मावती को लेने निकल पड़े। रास्ते में युद्ध हुआ, जिसमें पृथ्वीराज ने गौरी को हरा दिया और उसे बंदी बना लिया। बाद में पृथ्वीराज ने पद्मावती से दिल्ली में विवाह किया।

🎯 Exam Tip: किसी युद्ध या घटना का वर्णन करते समय, उसकी शुरुआत, प्रमुख बिंदु, और परिणाम को क्रम से लिखें। वीर रस के वर्णन में सही शब्दों का चुनाव महत्वपूर्ण होता है।

 

Question 6. पदमावति इम लै चल्यौ। हरषि राज प्रिथिराज॥ एते परि पतिसाह की। भई जु आनि अवाज ॥15॥ भई जु आँनि अवाज। आय साहाबदीन सुर॥ आज गहौं प्रथिराज। बोला बुल्लंत गजत धुर॥ क्रोध जोध जोधा अनंद। करिय पती अनि गज्जिये॥ बांन नालि, हथनालि। तुपक तीरह स्रव सज्जिय॥ पव्वै पहार मनों सार के। भिरि भुजांन गजनेस बल॥ आये हकरि हकार करि। घुरासान सुलतान दल॥16॥
Answer:
कठिन शब्दार्थ:
एते परि = इसी बीच।
पतिसाह = शाहबुद्दीन गौरी।
गहौं = पकडूंगा, बंदी बनाऊँगा।
बोल = बोली, बात।
बुल्लंत = बोलता।
गजत = गरजता।
जोध = युद्ध।
करिय = पंक्ति में खड़ी थी।
अनि = सेना।
बांन नालि = नावक, नली में रखकर चलाए जाने वाले बाण।
हथनालि = बन्दूक।
तुपक = तोप।
तीरह = बाण।
सार के = लोहे के (समान)।
भुजांन = भुजाओं में।
गजनेस = बड़ा हाथी।
हरकि हकार = हुंकार भरते हुए।
घुरासान = एक देश।
दल = सेना या सैनिक।

प्रसंग तथा संदर्भ:
यह काव्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'अपरा' में कवि चंदवरदायी रचित 'पृथ्वीराज रासो' काव्य के 'पद्मावती समय' नामक हिस्से से लिया गया है। इस भाग में पद्मावती का हरण करके उसे दिल्ली ले जा रहे पृथ्वीराज पर शहाबुद्दीन गौरी के आक्रमण और उनके बीच हुए युद्ध का वर्णन है।

व्याख्या:
राजा पृथ्वीराज बहुत खुश मन से पद्मावती को लेकर दिल्ली की ओर चले। इसी बीच शहाबुद्दीन गौरी ने आकर आवाज़ लगाई। उसने बड़े घमंड में कहा कि वह पृथ्वीराज को बंदी बनाएगा। उसके योद्धा क्रोधित और युद्ध के लिए उत्साहित थे। गौरी ने अपनी सेना को पंक्तियों में खड़ा किया। उसके सैनिक बाण, बंदूक, तोप और तीरों से लैस थे। वे योद्धा लोहे के पर्वत जैसे विशाल और मजबूत लग रहे थे। उनकी भुजाओं में हाथियों जैसा बल था। खुरासान के सुल्तान गौरी के योद्धा हुंकार भरते हुए पृथ्वीराज के सामने आ पहुँचे।

विशेष:
(i) कवि ने कहानी में नाटकीयता लाई है। पद्मावती का हरण करके खुश हो रहे पृथ्वीराज को अचानक गौरी की ललकार सुनाई देती है।
(ii) यह भाग युद्ध के वातावरण को बहुत अच्छे से दिखाता है।
In simple words: पृथ्वीराज पद्मावती को लेकर दिल्ली जा रहे थे, तभी शहाबुद्दीन गौरी ने उन्हें रोका और बंदी बनाने की चुनौती दी। गौरी के सैनिक बहुत मजबूत थे और उन्होंने पृथ्वीराज पर हमला कर दिया।

🎯 Exam Tip: युद्ध के दृश्यों का वर्णन करते समय, पात्रों की भावनाएँ, सैनिकों की ताकत और इस्तेमाल किए गए हथियारों का उल्लेख करें। इससे विवरण अधिक सजीव लगता है।

 

Question 7. तिन घेरिय राज प्रथिराज राजं। चिहौ ओर घन घोर निसाँन बाज॥ गही तेग चहुँवान हिंदवांन रिनं। गजं जूथ परि कोप केहरि समानं ॥ गिरदं उड़ी भाँन अंधार रैनं। गई सूधि सुज्झै नहीं मज्झि नैनं ॥ सिरं नाय कम्मान प्रथिराज राजें। पकरियै साहि जिम कुलिंगबाजे॥ जीति भई प्रथिराज की। पकरि साह लै संग॥ दिल्ली दिंसी मारगि लगौ। उतरि घाट गिर गंग॥
Answer:
कठिन शब्दार्थ:
तिन = उन, गौरी के सैनिकों ने।
घेरिय = घेर लिया।
चिहौ = चारों।
घनघोर = बादलों के गर्जन (की तरह)।
निसाँन = युद्ध बाजे, धोंसा या नगाड़ा।
तेग = तलवार।
चहुँवान = चौहान।
हिंदवान = हिन्दुओं (के)।
रानं = राजा।
गिरदं = गर्द, धूल।
कोप = क्रोध।
केहरि = सिंह।
भाँन = सूर्य सा हो गया।
अंधार = अँधेरा।
रैनं = रात।
सूधि = सुध (होश)।
सुज्झै = सूझको (समझ में आना)।
मज्झि = मध्य में (बीच में)।
नाय = डालकर या झुकाकर।
कम्मान = धनुष।
कुलिंग = पक्षी।
बाजं = बाज पक्षी जो अन्य पक्षियों का शिकार करता है।
हिंसी = दिशा, ओर।
मारगि = मार्ग।
लगौ = लग लिया (मार्ग पर चल दिया)।
गिर = पर्वत।

प्रसंग तथा संदर्भ:
यह काव्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'अपरा' में संकलित कवि चंदवरदायी रचित 'पृथ्वीराज रासो' नामक काव्य के 'पद्मावती समय' नामक प्रसंग से लिया गया है। इस अंश में कवि ने पृथ्वीराज और शहाबुद्दीन गौरी के बीच हुए युद्ध का वर्णन किया है।

व्याख्या:
गौरी की सेना ने राजा पृथ्वीराज को चारों ओर से घेर लिया। चारों ओर से नगाड़ों और युद्ध के बाजों की घनघोर आवाज आने लगी। तब हिन्दुओं के प्रिय सम्राट पृथ्वीराज ने अपनी तलवार उठाई। ऐसा लगा मानो क्रोधित सिंह ने हाथियों के झुंड पर हमला कर दिया हो। चारों ओर धूल उड़ने लगी और इतना अँधेरा हो गया कि रात जैसा लगने लगा। धूल और अँधेरे के कारण सैनिकों को होश नहीं रहा। उन्हें कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। तब राजा पृथ्वीराज ने गौरी के गले में अपना धनुष फँसाकर, उसे ऐसे पकड़ लिया जैसे बाज पक्षी अपने शिकार को पकड़ता है। इस प्रकार युद्ध में पृथ्वीराज जीत गए और उन्होंने गौरी को बंदी बनाकर अपने साथ ले लिया। फिर घाटों, पहाड़ों और गंगा जैसी नदियों को पार करते हुए दिल्ली के रास्ते पर चल दिए।

विशेष:
(i) पृथ्वीराज और शहाबुद्दीन गौरी के बीच युद्ध का बहुत सजीव और चित्रात्मक वर्णन हुआ है।
(ii) इसमें वीर रस का संचार करने वाली भाषा-शैली का प्रयोग हुआ है।
(iii) 'राज प्रथिराज राजं', 'चहुंवान हिंदवन रानं' में अनुप्रास अलंकार है और 'पकरियै साहि जिम कुलिंगबाज' में उपमा अलंकार है।
In simple words: गौरी की सेना ने पृथ्वीराज को घेर लिया, लेकिन पृथ्वीराज ने अपनी तलवार उठाई और सिंह की तरह लड़े। उन्होंने गौरी को अपने धनुष से पकड़कर बंदी बना लिया, जैसे बाज शिकार को पकड़ता है। पृथ्वीराज युद्ध जीतकर गौरी को साथ लेकर दिल्ली की ओर चले गए।

🎯 Exam Tip: जब युद्ध के दृश्यों का वर्णन करें, तो वीर रस और उपमा अलंकार का प्रभावी ढंग से उपयोग करें। सैनिकों की गतिविधियों और वातावरण का सजीव चित्रण करें।

 

Question 8. बोलि विप्र सोधे लगन्न। सुभ घरी परट्ठिय॥ हर बासह मंडप बनाय। करि भांवरि गंठिय॥
Answer:
कठिन शब्दार्थ:
विप्र = ब्राह्मण।
सोधे = शोधित की (तय की)।
लगन्न = लग्न (शुभ समय)।
घरी = घड़ी, समय।
परिटिठ्य = निश्चित की गई।
हर = हरे।
बांसह = बाँसों से।
भांवरि गंठिय = भाँवर डाली गई (विवाह की रस्म)।
ब्रह्म = ब्राह्मण।
उच्चसिंह = उच्चारण कर रहे थे।
होम चौरी = हवन की वेदी।
दुल्लह = दूलह, वर।
डंडयौ = दण्डित किया।
अट्ठ = आठ।
सहस = हजार।
षट भेष = अध्ययन, अध्यापन, यज्ञ करना, यज्ञ कराना, दान देना, दान लेना ये छह कर्म करने वाले, ब्राह्मण।
दूग्गा = दुर्ग।

प्रसंग तथा संदर्भ:
यह काव्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'अपरा' में संकलित, कवि चंदवरदायी रचित 'पृथ्वीराज रासो' नामक काव्य के 'पद्मावती समय' नामक प्रकरण से लिया गया है। इस अंश में कवि ने पद्मावती और पृथ्वीराज के विवाह का वर्णन किया है।

व्याख्या:
कवि कहते हैं कि राजा पृथ्वीराज ने ब्राह्मणों को बुलाया और उनसे पद्मावती के साथ अपने विवाह के लिए शुभ लग्न और सही समय तय करवाया। हरे बाँसों का मंडप बनवाया गया और उसमें राजा पृथ्वीराज ने पद्मावती के साथ भाँवरें डालीं। उस समय ब्राह्मण वेद मंत्रों का उच्चारण कर रहे थे और हवन की वेदी पर अग्नि जल रही थी। इस दौरान दुलहन के रूप में पद्मावती और दुलहे के रूप में पृथ्वीराज की जोड़ी बहुत सुंदर लग रही थी। पृथ्वीराज ने शहाबुद्दीन गौरी को दंडित किया। इसके बाद पृथ्वीराज ने ब्राह्मणों को दान देकर सम्मानित किया और फिर दुलहन पद्मावती के साथ अपने किले या राजभवन में प्रवेश किया।

विशेष:
(i) वैवाहिक क्रिया का सजीव चित्रण हुआ है।
(ii) इसमें वीरगाथा काल की भाषा का सुंदर प्रयोग है।
(iii) 'साह साहबदी' तथा 'दीन मनि' में अनुप्रास अलंकार है।
In simple words: पृथ्वीराज ने ब्राह्मणों से विवाह का शुभ समय निकलवाया। हरे बाँसों का मंडप बनवाकर पद्मावती के साथ सात फेरे लिए। ब्राह्मण वेद मंत्र पढ़ रहे थे। विवाह के बाद, पृथ्वीराज ने ब्राह्मणों को दान देकर पद्मावती के साथ अपने महल में प्रवेश किया।

🎯 Exam Tip: विवाह या अन्य शुभ अवसरों का वर्णन करते समय, सांस्कृतिक और धार्मिक रीति-रिवाजों का उल्लेख करें। भाषा को सरल और प्रभावपूर्ण रखें।

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