Step-by-Step Textbook Solutions for Class 11 Hindi Chapter 01 मित्रता
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RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह गद्य Chapter 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. जब कोई युवा घर से निकलकर बाहरी संसार में आता है, तो उसे पहली कठिनाई होती है -
(क) रहने की
(ख) भोजन की
(ग) काम-धन्धे की
(घ) मित्र चुनने की
Answer: (घ) मित्र चुनने की
In simple words: जब कोई नौजवान अपने घर से बाहर की दुनिया में कदम रखता है, तो उसे सबसे पहले अच्छे दोस्त चुनने में दिक्कत आती है।
🎯 Exam Tip: वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में, सही विकल्प का चुनाव करते समय सभी विकल्पों पर ध्यान दें और सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें।
Question 2. किसी को मित्र बनाने से पूर्व हमें विचार और अनुसंधान करना चाहिए -
(क) उसकी बुद्धि का
Answer: (क) उसकी बुद्धि का
In simple words: किसी को दोस्त बनाने से पहले, हमें उसकी बुद्धिमत्ता, स्वभाव और आदतों को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए।
🎯 Exam Tip: मित्रता से जुड़े प्रश्नों में, गहरी सोच और समझदारी वाले पहलुओं को उजागर करें।
Question 3. मित्रता की धुन सवार रहती है –
(क) बाल्यावस्था में
(ख) युवावस्था में
(ग) प्रौढावस्था में
(घ) छात्रावस्था में
Answer: (घ) छात्रावस्था में
In simple words: दोस्ती करने का जुनून या इच्छा आमतौर पर छात्र जीवन में सबसे ज्यादा होती है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, अलग-अलग अवस्थाओं की विशेषताओं को ध्यान में रखकर सही विकल्प चुनें।
Question 4. कुसंग के ज्वर के कारण क्षय होता है –
(क) समय का
(ख) श्रम का
(ग) साहस का
(घ) नीति, सवृत्ति एवं बुद्धि को
Answer: (घ) नीति, सद्वृत्ति एवं बुद्धि को
In simple words: बुरी संगति के कारण हमारे अच्छे विचार, चरित्र और समझदारी कम हो जाती है।
🎯 Exam Tip: कुसंगति के दुष्परिणामों को हमेशा याद रखें और अपने उत्तर में स्पष्ट रूप से बताएं।
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह गद्य Chapter 1 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. लोगों से हेलमेले का सिलसिला किसमें बदल जाता है?
Answer: लोगों से हेलमेल का सिलसिला धीरे-धीरे मित्रता में बदल जाता है।
In simple words: जब लोग आपस में मिलते-जुलते हैं, तो उनकी जान-पहचान दोस्ती में बदल जाती है।
🎯 Exam Tip: प्रश्न के मुख्य विचार को पहचानें और सीधे, संक्षिप्त उत्तर दें।
Question 2. विश्वासपात्र मित्र हमारी सहायता कैसे करेंगे?
Answer: विश्वासपात्र मित्र हमारी सुरक्षा करते हैं और सही रास्ता दिखाते हैं। वे मुश्किल समय में हमारा सहारा बनते हैं।
In simple words: भरोसेमंद दोस्त हमें सहारा देते हैं और सही सलाह देकर मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: विश्वासपात्र मित्र की विशेषताओं और भूमिका को स्पष्ट रूप से उजागर करें।
Question 3. युवा पुरुष की मित्रता कैसी होती हैं?
Answer: लेखक ने युवा पुरुष की बुरी संगति को पैरों में बंधी पत्थर की चक्की के समान बताया है। इसका मतलब है कि बुरी दोस्ती युवा के जीवन को धीरे-धीरे खत्म कर देती है।
In simple words: लेखक के अनुसार, गलत दोस्ती युवा व्यक्ति को नीचे गिरा देती है, जैसे पैर में बंधी चक्की।
🎯 Exam Tip: जब उपमा या तुलना का प्रयोग हो, तो उसका अर्थ स्पष्ट करें।
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह गद्य Chapter 1 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. मित्रों के चुनाव की उपयुक्तता का जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: दोस्तों का चुनाव हमारे जीवन पर बहुत गहरा असर डालता है। इसी चुनाव पर जीवन की सफलता निर्भर करती है। क्योंकि संगति का गुप्त प्रभाव हमारे व्यवहार को बहुत प्रभावित करता है। अगर दोस्त भरोसेमंद होंगे, तो वे जीवन में रक्षक, दवा और माँ के समान होंगे। सच्चे दोस्त हमें सही रास्ता दिखाते हैं। वे हमें अच्छे विचार देते हैं और गलतियों से बचाते हैं।
In simple words: सही दोस्त चुनने से जीवन सफल होता है, क्योंकि अच्छी संगति हमें सही रास्ते पर ले जाती है और गलतियों से बचाती है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में, अच्छी मित्रता के सकारात्मक प्रभावों को स्पष्ट और विस्तृत तरीके से समझाएं।
Question 2. जो हमारी बात को ऊपर रखते हैं, उनका साथ हमारे लिए ज्यादा बुरा है। कैसे?
Answer: लेखक के अनुसार, उन लोगों की संगति बुरी है जो हर बात में हमारी हाँ में हाँ मिलाते हैं। ऐसे लोग हमारी सही-गलत हर बात का आँख मूँदकर समर्थन करते हैं। ऐसे में हमारे व्यवहार पर कोई नियंत्रण नहीं रहता। यदि हमें किसी मदद की ज़रूरत पड़े, तो उनसे मदद की उम्मीद करना बेकार है।
In simple words: जो लोग हमेशा हमारी बात मानते हैं, वे हमारे लिए बुरे होते हैं क्योंकि वे हमें सही-गलत नहीं समझाते और हमें गलत रास्ते पर जाने देते हैं।
🎯 Exam Tip: मित्र की आलोचना करने की क्षमता को मित्रता के महत्वपूर्ण गुण के रूप में बताएं।
Question 3. प्राचीन विद्वान के मित्रता को लेकर क्या विचार हैं? लिखिए।
Answer: प्राचीन विद्वानों ने दोस्त को एक बड़े खजाने जैसा माना है। वे कहते हैं कि भरोसेमंद दोस्त मिलना दुनिया की सबसे बड़ी दौलत है। ऐसा दोस्त हमें अच्छे विचारों पर टिके रहने में मदद करता है और बुराइयों से दूर रखता है। वह हमारे जीवन में दवा जैसा होता है। वह हमें गलत रास्ते से बचाकर सच्चाई, पवित्रता, सम्मान और प्यार का रास्ता दिखाता है।
In simple words: पुराने समय के विद्वान दोस्त को खजाना मानते थे, जो हमें अच्छी राह दिखाता है और बुराइयों से बचाता है।
🎯 Exam Tip: उत्तर में प्राचीन विचारों को उद्धृत करते समय, उनके मुख्य संदेश को स्पष्ट करें।
Question 4. मित्र का कर्तव्य क्या है?
Answer: दोस्त हमें बड़े और अच्छे काम करने में पूरी तरह से मदद करते हैं। वे हमें हर तरह से सहायता देते हैं ताकि हम अपनी क्षमता से बढ़कर काम कर सकें। वे हमें गलत रास्ते से बचाकर सही रास्ते पर चलने में मदद करते हैं। वे हमारे जीवन में सच्चाई, पवित्रता और सम्मान के प्यार को मजबूत करते हैं।
In simple words: दोस्त का काम है कि वह हमें अच्छे कामों में मदद करे, सही रास्ता दिखाए और हमारे अच्छे गुणों को बढ़ाए।
🎯 Exam Tip: मित्र के कर्तव्यों को विस्तार से लिखें, जिसमें नैतिक और भावनात्मक समर्थन शामिल हो।
Question 1. मित्र बनाते समय मैत्री का उद्देश्य क्या होना चाहिए? विस्तार से लिखिए।
Answer: दोस्त बनाते समय हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि दोस्ती एक ऐसा आसान तरीका हो जिससे हम खुद को बेहतर बना सकें। युवाओं को, जो अपने चरित्र को सुधारने में लगे हैं, यह याद रखना चाहिए कि उनका दोस्त भरोसेमंद हो। ऐसा दोस्त जो उनके जीवन को अच्छा और खुशहाल बनाने में मदद कर सके। वह ऐसा व्यक्ति हो जो हमारा सच्चा मार्गदर्शक बन सके, जिस पर हम पूरा भरोसा कर सकें। वह हमारे भाई जैसा होना चाहिए, जिसे हम प्यार कर सकें। हमारे और हमारे दोस्त के बीच सच्ची हमदर्दी होनी चाहिए। जिससे हम एक-दूसरे के फायदे-नुकसान को समझ सकें और मिलकर काम कर सकें।
In simple words: दोस्त ऐसे होने चाहिए जो हमें आत्म-सुधार में मदद करें, भरोसेमंद हों, सही रास्ता दिखाएँ और जिनसे हम सच्ची हमदर्दी साझा कर सकें।
🎯 Exam Tip: मैत्री के उद्देश्य को जीवन के विकास और चरित्र निर्माण के संदर्भ में समझाएं।
Question 2. विश्वासपात्र मित्र को खजाना, औषध और माता के समान क्यों माना है?
Answer: आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने भरोसेमंद दोस्त को जीवन की अनमोल संपत्ति बताया है। क्योंकि ऐसे दोस्त हमें अच्छे विचारों पर मजबूत करते हैं, गलतियों से बचाते हैं। वे हमारे जीवन में सच्चाई, पवित्रता और सम्मान के प्यार को मजबूत करते हैं। सच्चे दोस्त सबसे अच्छी दवा की तरह भी होते हैं, जो हमें बुरी संगति के बुखार से बचाते हैं। उनमें एक कुशल वैद्य जैसी परख होती है। भरोसेमंद दोस्त एक अच्छी माँ की तरह भी होते हैं, उनमें माँ जैसा धैर्य और स्वभाव में कोमलता होती है। वे हमेशा हमारा भला चाहते हैं। सच्चा दोस्त एक कुशल वैद्य और अच्छी माँ की तरह हमारे जीवन को संभालता और संवारता है।
In simple words: भरोसेमंद दोस्त खजाने, दवा और माँ जैसे होते हैं क्योंकि वे हमें सही रास्ता दिखाते हैं, बुराइयों से बचाते हैं और जीवन को बेहतर बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: उत्तर में खजाने, औषध और माता की उपमाओं को विस्तृत रूप से व्याख्यायित करें।
Question 3. अच्छे मित्र की क्या-क्या विशेषताएँ बताई गई हैं? पठित पाठ के आधार पर लिखिए।
Answer: मित्रता निबंध में आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अच्छे दोस्त की कई विशेषताएँ बताई हैं, जो इस प्रकार हैं –
1. अच्छा दोस्त दृढ़ मन वाला और अपने वादों का पक्का होता है।
2. अच्छा दोस्त आत्म-विश्वास से भरा होता है।
3. अच्छा दोस्त प्रतिष्ठित और शुद्ध हृदय का होता है।
4. वह नरम स्वभाव का और मेहनती होता है।
5. सच्चाई और शिष्टाचार अच्छे दोस्त के गुण हैं।
6. अच्छा दोस्त भरोसेमंद होता है।
7. अच्छा दोस्त सहारा देने वाला हाथ या भाई के समान होता है।
8. अच्छे दोस्त सच्चे मार्गदर्शक होते हैं, जिन पर हम पूरा भरोसा कर सकते हैं।
9. दोस्त का हृदय सहानुभूति से भरा और हमेशा मददगार होता है।
10. एक अच्छा दोस्त सुग्रीव के मित्र राम के समान होता है।
In simple words: अच्छे दोस्त मजबूत विचारों वाले, भरोसेमंद, दयालु, सच्चे और सहायक होते हैं, जो हमें सही रास्ते पर ले जाते हैं।
🎯 Exam Tip: विशेषताओं को बिंदुवार लिखें और प्रत्येक बिंदु को संक्षिप्त में स्पष्ट करें।
Question 5. इतिहास में वर्णित किसी मित्र का ऐसा प्रसंग लिखिए जो मित्र के जीवन में सकारात्मक सोच या परिवर्तन लाया हो।
Answer: इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जहाँ एक दोस्त ने अपने दोस्त की ज़िंदगी पूरी तरह बदल दी और उसे महान बना दिया। उदाहरण के लिए, राजा घनानंद के यहाँ एक 'मुरा' नाम की दासी थी, जिसे महल से निकाल दिया गया था। वह अपने बेटे के साथ जंगल में रहने लगी। वह अपनी रोज़ी-रोटी के लिए मोर पालती थी और उनके पंख बेचती थी। वह एकाग्रता, लगन और बहादुरी के साथ मोरों को जंगली जानवरों से बचाती थी।
एक बार चाणक्य ने उसे देखा और बहुत प्रभावित हुए। चाणक्य ने उसे अपना दोस्त बना लिया। धीरे-धीरे, चाणक्य ने उस दासी पुत्र को विद्वान, कुशल राजनीतिज्ञ, श्रेष्ठ वीर और पराक्रमी व्यक्ति बनाया। उनके कुशल मार्गदर्शन से सैनिक शक्ति जमा की गई और एक दिन उसी दासीपुत्र युवक को सच्चे मित्र चाणक्य ने नंदवंश को खत्म करके राजसिंहासन पर बिठाया। वह दोस्त चंद्रगुप्त मौर्य कहलाया और मौर्य साम्राज्य का संस्थापक सम्राट बना।
In simple words: चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य को अपना दोस्त बनाकर, उन्हें एक साधारण दासीपुत्र से सम्राट बना दिया और मौर्य साम्राज्य की स्थापना करवाई।
🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक प्रसंगों को क्रमबद्ध और स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें, मुख्य पात्रों की भूमिका पर जोर दें।
Question 6. अगर आप मित्र बनाते हैं तो मित्र में किन बातों का ध्यान रखेंगे तथा आपके मित्र के प्रति क्या-क्या कर्तव्य होंगे? अपने विचार लिखिए।
Answer: अगर मैं दोस्त बनाऊँगा, तो यह ध्यान रखूँगा कि मेरा दोस्त अच्छे आचरण वाला, सच्चा, पवित्र हृदय वाला और मर्यादित जीवन जीने वाला हो। वह भरोसेमंद हो और मेरा सच्चा मार्गदर्शक व भाई जैसा हो, जिसे मैं प्यार कर सकूँ। एक अच्छा दोस्त मिल जाने पर मेरा भी कर्तव्य बनता है कि मैं उसके जीवन को सफल और खुशहाल बना सकूँ। इस लक्ष्य को पाने के लिए मैं अपने दोस्त को बुरी संगति से बचाकर हमेशा उन्नति के रास्ते पर आगे बढ़ने की कोशिश करूँगा। मैं अपने दोस्त के अच्छे और महान कामों में मदद करूँगा और हिम्मत दूँगा। मैं उसके आत्म-विश्वास को कभी कम नहीं होने दूँगा। मैं अपने दोस्त के प्रति पूरी हमदर्दी रखूँगा और उसके जीवन में अच्छी आदतें बनाने में सक्रिय रहूँगा।
In simple words: मैं एक दोस्त में सच्चाई, अच्छे गुण और भरोसेमंद होने की तलाश करूँगा, और बदले में मैं उसका समर्थन करूँगा, गलतियों से बचाऊँगा और उसकी तरक्की में मदद करूँगा।
🎯 Exam Tip: अपने कर्तव्यों और अपेक्षाओं को व्यावहारिक और नैतिक दृष्टिकोण से समझाएं।
व्याख्यात्मक प्रश्न
Question 1.
Answer: यहां प्रश्न नोट के रूप में है, जिसका उत्तर 'सप्रसंग महत्त्वपूर्ण व्याख्याएँ' शीर्षक के अंतर्गत दिया जाएगा।
In simple words: यह एक निर्देश है, कोई प्रश्न नहीं जिसका सीधे उत्तर दिया जा सके।
🎯 Exam Tip: ऐसे निर्देशों को पहचानने का अभ्यास करें जो प्रश्न नहीं होते हैं, ताकि आप अपना समय बचा सकें।
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह गद्य Chapter 1 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
Question 1.
(ख) संगति
(ग) गुरु
(घ) धन-दौलत
Answer: (ख) संगति
In simple words: यहाँ सवाल अधूरा है, लेकिन विकल्पों से लग रहा है कि यह संगति के महत्व से संबंधित है।
🎯 Exam Tip: यदि प्रश्न अधूरा हो, तो भी विकल्पों और उत्तर के आधार पर मुख्य विषय को समझने का प्रयास करें।
Question 2. 'जब हम कुमार्ग पर पैर रखेंगे तब हमें सचेत करेंगे।' –
(क) परिवार के लोग
(ख) सहपाठी
(ग) विश्वासपात्र मित्र
(घ) पुलिस वाले
Answer: (ग) विश्वासपात्र मित्र
In simple words: जब हम गलत रास्ते पर जाते हैं, तो भरोसेमंद दोस्त ही हमें सावधान करते हैं।
🎯 Exam Tip: उद्धरणों वाले प्रश्नों में, उद्धरण के अर्थ और संदर्भ को सही विकल्प से मिलाएं।
Question 3. किस अवस्था की मित्रता दृढ़, शान्त और गम्भीर होती है
(क) युवावस्था की
(ख) छात्रावस्था की
Answer: (क) युवावस्था की
In simple words: युवावस्था में दोस्ती मजबूत, शांत और गहरी होती है, क्योंकि इस उम्र में लोग अधिक समझदार होते हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न अवस्थाओं में मित्रता के स्वरूप को समझें और तदनुसार उत्तर दें।
Question 4. शुक्लजी के अनुसार सबसे भयानक ज्वर कौनसा है -
(क) मैत्री का ज्वर
(ख) प्रेम का ज्वर
(ग) शत्रुता का ज्वर
(घ) कुसंग को ज्वर
Answer: (घ) कुसंग को ज्वर
In simple words: शुक्लजी के अनुसार, बुरी संगति का बुखार सबसे खतरनाक होता है।
🎯 Exam Tip: लेखक के विशिष्ट विचारों या तुलनाओं को याद रखें और उन्हें सही विकल्प के साथ जोड़ें।
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह गद्य Chapter 1 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 2. हमसे अधिक दृढ़संकल्प के लोगों का साथ करना क्यों बुरा है?
Answer: हमसे ज्यादा मजबूत इरादों वाले लोगों का साथ करना बुरा है। ऐसा इसलिए क्योंकि, हमें उनकी हर अच्छी-बुरी बात को बिना किसी विरोध के मानना पड़ता है। इससे हम अपनी समझ का इस्तेमाल नहीं कर पाते।
In simple words: ऐसे लोगों से दोस्ती करना अच्छा नहीं, जिनके इरादे हमसे ज्यादा मजबूत हों, क्योंकि तब हमें उनकी हर बात माननी पड़ती है।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, व्यक्ति की स्वतंत्रता और आत्म-निर्णय के महत्व को स्पष्ट करें।
Question 3. युवा किस आधार पर किसी को तुरन्त अपना मित्र बना लेते हैं?
Answer: युवा लोग बिना सोचे-समझे किसी के हंसमुख चेहरे, बातचीत के तरीके, थोड़ी-सी होशियारी या हिम्मत जैसी कुछ बातें देखकर उसे झटपट अपना दोस्त बना लेते हैं। वे व्यक्ति के गहरे गुणों पर ध्यान नहीं देते।
In simple words: युवा लोग अक्सर किसी की बाहरी बनावट और बातों से प्रभावित होकर तुरंत दोस्त बना लेते हैं।
🎯 Exam Tip: युवाओं द्वारा मित्र चुनने में जल्दबाजी और उसके संभावित परिणामों को बताएं।
Question 4. हमें उत्तमतापूर्वक जीवन-निर्वाह करने में कौन सहायक होता है?
Answer: सोच-समझकर बनाया गया भरोसेमंद दोस्त हमें एक बेहतरीन जीवन जीने में मदद करता है।
In simple words: सही सोच-समझ से चुना गया सच्चा दोस्त हमें बेहतर जीवन जीने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: जीवन में मित्र के सकारात्मक प्रभाव को संक्षेप में स्पष्ट करें।
Question 5. शुक्लजी के अनुसार हमारी जान-पहचान के लोग कैसे होने चाहिए?
Answer: शुक्लजी के अनुसार, हमारी जान-पहचान के लोग ऐसे होने चाहिए जिनसे हमें अपने चरित्र को बनाने में कुछ फायदा हो सके। साथ ही, जो हमारे जीवन को अच्छा और खुशहाल बनाने में कुछ मदद कर सकें।
In simple words: शुक्लजी कहते हैं कि हमें ऐसे लोगों से दोस्ती करनी चाहिए जो हमें खुद को बेहतर बनाने और जीवन को खुशहाल बनाने में मदद करें।
🎯 Exam Tip: लेखक के विचारों को सटीक शब्दों में प्रस्तुत करें।
Question 6. कोई युवा पुरुष कैसे युवाओं को आसानी से पा सकता है?
Answer: कोई युवा ऐसा युवा पुरुषों को आसानी से दोस्त बना सकता है, जो उसके साथ थिएटर देखने जाएँगे, नाच-गाने में शामिल होंगे, घूमने-फिरने जाएँगे और खाने पर बुलाने को तैयार होंगे।
In simple words: युवा पुरुष उन लोगों को आसानी से दोस्त बना सकते हैं जो उनके साथ मनोरंजन और घूमने-फिरने में शामिल हों।
🎯 Exam Tip: युवाओं के बीच मित्रता के शुरुआती कारणों को व्यवहारिक उदाहरणों से समझाएं।
Question 7. कैसी भावनाएँ बार-बार हृदय में उठती और बेंधती हैं?
Answer: शुक्लजी के शब्दों में, हृदय को साफ और बेदाग रखने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि हम बुरी संगति से बचें। ऐसी भावनाएँ जो मन को दुखी करती हैं और परेशान करती हैं, बुरी संगति से पैदा होती हैं।
In simple words: बुरी संगति से मन में बार-बार उठने वाली परेशान करने वाली भावनाएँ हृदय को दुखी करती हैं।
🎯 Exam Tip: बुरी संगति के मानसिक और भावनात्मक प्रभावों को संक्षेप में बताएं।
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह गद्य Chapter 1 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. "यदि विवेक से काम लिया जाये तो यह भय नहीं रहता।” लेखक यहाँ किस भय की बात कर रहा है? समझाइये।
Answer: लेखक कहता है कि युवा लोग दोस्त बनाने में समझदारी का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि भावनाओं में बहकर गलत लोगों को दोस्त बना लेते हैं। ऐसे लोग अगर मजबूत इरादों वाले हों, तो हमें उनकी हर अच्छी-बुरी बात को बिना विरोध के मानना पड़ता है। इसलिए उनकी संगति बुरी होती है। लेकिन ऐसे लोगों का साथ और भी बुरा है जो हमारी ही बात को हमेशा ऊपर रखते हैं, क्योंकि ऐसी स्थिति में हमें नियंत्रण करने वाला कोई सहारा नहीं मिलता। लेखक को यही भय है कि गलत मित्र चुनने से जीवन गलत दिशा में जा सकता है।
In simple words: लेखक को डर है कि बिना सोचे-समझे गलत लोगों से दोस्ती करने पर जीवन में कोई सही मार्गदर्शक नहीं रहेगा।
🎯 Exam Tip: उद्धरण वाले प्रश्नों में, उद्धरण का गहरा अर्थ और लेखक का उद्देश्य स्पष्ट करें।
Question 2. “ऐसी ही मित्रता करने का प्रयत्न प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिए।” लेखक कैसी मित्रता करने के लिए कहता है?
Answer: शुक्लजी कहते हैं कि हमें दोस्त बनाने में समझदारी से काम लेना चाहिए। किसी को दोस्त बनाने से पहले उसके व्यवहार, स्वभाव, और सोच-विचार को अच्छी तरह जानना-परखना चाहिए। अच्छी तरह जानकर-समझकर बनाया गया दोस्त हमारा बहुत बड़ा रक्षक होता है। वह हमें बुराइयों से बचाकर सही रास्ते पर चलाता है। हमारे जीवन को खुशहाल, उत्साहपूर्ण, सच्चा और मर्यादित बनाने में भरोसेमंद दोस्त बहुत सहायक होता है।
In simple words: लेखक हमें ऐसी दोस्ती करने को कहते हैं जो समझदारी से चुनी गई हो, जो हमें बुराइयों से बचाकर सही रास्ते पर ले जाए और जीवन को बेहतर बनाए।
🎯 Exam Tip: लेखक के आदर्श मित्रता के मापदंडों को स्पष्ट और तर्कपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करें।
Question 3. ................ ईश्वर हमें उनसे दूर ही रखे।” लेखक किन लोगों से दूर रहने की बात कहता है?
Answer: शुक्लजी हमारी जान-पहचान के ऐसे लोगों से दूर रहने की बात कहते हैं जो हमारे लिए न तो कोई समझदारी या मजेदार बातचीत कर सकते हैं, न कोई अच्छी बात बता सकते हैं, न हमदर्दी से हमें दिलासा दे सकते हैं, न हमारी खुशी में शामिल हो सकते हैं, और न ही हमें कर्तव्य का ध्यान दिला सकते हैं। ऐसे लोग केवल दिखावा करते हैं और कोई वास्तविक मूल्य नहीं जोड़ते।
In simple words: लेखक उन लोगों से दूर रहने को कहते हैं जो न तो हमें अच्छी सलाह दे सकते हैं, न हमारा साथ दे सकते हैं और न ही हमें सही राह दिखा सकते हैं।
🎯 Exam Tip: उन गुणों को सूचीबद्ध करें जो एक अच्छे मित्र में नहीं होने चाहिए, जिनके कारण लेखक दूरी बनाने को कहते हैं।
Question 4. “कुसंग का ज्वर सबसे भयानक होता है।” कैसे?
Answer: बुरी संगति, खासकर युवाओं के जीवन में, सबसे भयानक बुराई है। यह उनकी नैतिकता, अच्छे विचारों और बुद्धि को नष्ट कर देती है। बुरी संगति व्यक्ति को लगातार गिरावट की ओर ले जाती है। यह व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति में बाधा डालती है और उसके मन की पवित्रता को खत्म कर देती है। बुरे लोगों के साथ पल भर रहने से भी बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है। विवेक कुंठित हो जाता है, हमें भले-बुरे की पहचान नहीं रह जाती और हम बुराई के भक्त बन जाते हैं।
In simple words: बुरी संगति युवाओं की नैतिकता, बुद्धि और अच्छे विचारों को नष्ट कर देती है, जिससे व्यक्ति बुराई का गुलाम बन जाता है।
🎯 Exam Tip: कुसंगति के व्यापक और विनाशकारी प्रभावों को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
Question 6. हमारी जान-पहचान के लोग कैसे होने चाहिए?
Answer: हमारी जान-पहचान के लोग ऐसे होने चाहिए जिनसे हम अपने चरित्र निर्माण में कुछ लाभ उठा सकें। जो हमारे जीवन को उत्तम और आनन्दमय बनाने में कुछ सहायता कर सकें, जिनका आचरण सही हो, शुद्ध हृदय के हों और जिनसे किसी प्रकार का धोखा होने की आशंका न हो। ऐसे लोग हमें सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं।
In simple words: हमें ऐसे लोगों से दोस्ती करनी चाहिए जो हमारे चरित्र को सुधारें, जीवन को बेहतर बनाएं, ईमानदार हों और धोखेबाज न हों।
🎯 Exam Tip: सामाजिक दायरे में सही लोगों को चुनने के महत्व पर जोर दें।
RBSE Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह गद्य Chapter 1 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. किसी युवा को घर से बाहर निकलकर मित्र चुनने में कठिनता क्यों महसूस होती है?
Answer: मनुष्य के जीवन को संस्कारी, सफल और सुखमय बनाने में दोस्तों का बड़ा योगदान होता है। एक युवा पुरुष को बाहरी दुनिया में निकलकर सच्चा दोस्त चुनने में एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता है। किसी युवा को केवल बाहरी रंग-रूप, बातचीत की चतुराई आदि से प्रभावित होकर दोस्त नहीं बनाया जा सकता, बल्कि उसका अतीत, उसका आचरण, चरित्र, स्वभाव आदि को अच्छी तरह जाँच-परखना होता है। सच्चा और भरोसेमंद दोस्त मिलना बड़े भाग्य की बात होती है। किसी युवा का मन कोमल, अपरिपक्व और संस्कार ग्रहण करने योग्य होता है। उसकी अवस्था कच्ची मिट्टी की तरह होती है, जिसे राक्षस या देवता, किसी भी रूप में ढाला जा सकता है। इसलिए ऐसी कोमल अवस्था में साफ मन और अच्छे संस्कार वाले दोस्त की ज़रूरत होती है, जिसे चुनना बहुत चुनौतीपूर्ण काम है।
In simple words: युवावस्था में सच्चे और अच्छे दोस्त चुनना मुश्किल होता है, क्योंकि इस उम्र में व्यक्ति बाहरी दिखावे से जल्दी प्रभावित हो जाता है और चरित्र व स्वभाव की परख करना कठिन होता है।
🎯 Exam Tip: युवावस्था की विशेषताओं (कोमलता, अपरिपक्वता) को मित्र चुनने की कठिनाई से जोड़कर व्याख्या करें।
Question 2. मित्र बनाने के सन्दर्भ में लेखक को किस बात का आश्चर्य होता है और क्यों?
Answer: आचार्य शुक्ल कहते हैं कि यह कितने आश्चर्य की बात है कि लोग घोड़ा खरीदते समय तो उसके गुण-दोष परख लेते हैं, पर किसी को दोस्त बनाते समय उसके पुराने व्यवहार और स्वभाव आदि का कुछ भी विचार या जाँच-पड़ताल नहीं करते। वे उसमें सब अच्छी बातें मानकर भरोसा कर लेते हैं। यह स्थिति लेखक को ठीक नहीं लगती। उनके अनुसार युवाओं को दोस्त बनाते समय विवेक से काम लेना चाहिए। जीवन में दोस्त का बहुत बड़ा योगदान होता है। यदि दोस्त सही आचरण और भरोसेमंद है, तो वह एक युवा की आत्म-शिक्षा के लिए बहुत लाभदायक होगा। सच्चा दोस्त उसके जीवन को सफल और खुशहाल बनाने में बहुत सहायक होगा। यदि उसका आचरण अच्छा नहीं है, तो वह जीवन में बहुत बड़ी हानि पहुँचाएगा।
In simple words: लेखक को आश्चर्य होता है कि लोग घोड़े खरीदने में तो परख करते हैं, पर दोस्त बनाने में बिना सोचे-समझे भरोसा कर लेते हैं, जो गलत है क्योंकि गलत दोस्ती बहुत हानिकारक हो सकती है।
🎯 Exam Tip: लेखक के आश्चर्य का कारण और उसके पीछे के तर्क को उदाहरण सहित प्रस्तुत करें।
Question 3. “बाल-मैत्री में जो मग्न करने वाला आनन्द होता है, वह और कहाँ?” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: बाल-मैत्री में गहरा आनंद होता है। बच्चों के मन में एक-दूसरे के प्रति बहुत अधिक प्रेम होता है, और वे तुरंत एक-दूसरे की बातें मान लेते हैं। इस प्रकार, बचपन की दोस्ती का जुनून उनके मन पर हमेशा सवार रहता है। ऐसी मधुरता और प्यार बड़े लोगों की दोस्ती में देखने को नहीं मिलती। बच्चों का मन साफ और बिना किसी छल-कपट के होता है, इसलिए उनकी दोस्ती में एक खास तरह की मिठास और उत्साह होता है।
In simple words: बचपन की दोस्ती में एक अलग ही खुशी और गहरा प्यार होता है, जो बड़ों की दोस्ती में नहीं मिलता, क्योंकि बच्चों का मन साफ और निष्कपट होता है।
🎯 Exam Tip: बाल-मैत्री की विशेषताओं (निष्कपटता, विश्वास) को स्पष्ट करें और उसे बड़ों की दोस्ती से अलग बताएं।
Question 4. स्कूल के बालक की मित्रता और एक युवा पुरुष की मित्रता में क्या भिन्नता है? समझाइये।
Answer: एक सहपाठी बालक की मित्रता हृदय से उमड़ पड़ती है, जिसमें मन को खुश कर देने वाला आनंद होता है। उसमें हृदय की मिठास भरी होती है और असीम विश्वास होता है। मित्र की बातों को तुरंत मान लेने का भाव होता है। दूसरी ओर एक युवा पुरुष की मित्रता एक स्कूली बालक की मित्रता से ज्यादा दृढ़, शांत और गंभीर होती है। जीवन-संघर्ष में साथ देने वाले युवा मित्रों में इनसे कुछ खास बातें होती हैं। वे मित्र सच्चे पथ-प्रदर्शक होते हैं, जिन पर पूरी तरह भरोसा किया जाता है। ये मित्र भाई के समान होते हैं जिन्हें हम अपना प्रिय बना सकते हैं। ऐसे मित्र एक-दूसरे के सच्चे हितैषी एवं सहानुभूति से भरे हृदय वाले होते हैं।
In simple words: स्कूल के बच्चों की दोस्ती भावुक और आनंददायक होती है, जबकि युवा पुरुषों की दोस्ती ज्यादा मजबूत, शांत, गंभीर और जीवन के संघर्षों में सहायक होती है।
🎯 Exam Tip: दोनों प्रकार की मित्रता की तुलना करते समय, उनकी मुख्य विशेषताओं और गहरे अर्थों को स्पष्ट करें।
Question 5. आचार्य शुक्ल के अनुसार हमें कैसे मित्रों की खोज में रहना चाहिए?
Answer: आचार्य शुक्ल के अनुसार हमें ऐसे मित्रों की खोज में रहना चाहिए जिनमें हमसे ज्यादा आत्म-विश्वास हो, जो हमें बड़े और महान कार्यों में इस तरह मदद दे सकें कि हम अपनी क्षमता से बढ़कर काम कर सकें। हमें ऐसे मित्रों की आवश्यकता है, जो दृढ़-निश्चय और सत्य-संकल्प वाले हों। हमें ऐसे मित्रों का पल्ला उसी तरह पकड़ना चाहिए जिस तरह सुग्रीव ने राम को पकड़ा था। शुक्लजी कहते हैं कि मित्र ऐसे हों जो प्रतिष्ठित और शुद्ध हृदय के हों, नरम स्वभाव वाले और मेहनती हों, शिष्ट और सच्चे हों, जिससे हम अपने आप को उन पर छोड़ सकें और यह विश्वास कर सकें कि उनसे किसी प्रकार का धोखा नहीं होगा। इसलिए मित्रों की खोज करते समय या किसी से मित्रता करते समय इन बातों पर अच्छी तरह विचार कर लेना चाहिए।
In simple words: हमें ऐसे दोस्त खोजने चाहिए जो आत्मविश्वासी, दृढ-संकल्पी, प्रतिष्ठित, शुद्ध हृदय वाले, मेहनती और सच्चे हों, जिन पर हम पूरा भरोसा कर सकें और जो हमें बेहतर बनने में मदद करें।
🎯 Exam Tip: आचार्य शुक्ल द्वारा सुझाए गए मित्र के आदर्श गुणों को विस्तार से बताएं और उदाहरण भी दें।
Question 6. जान-पहचान वालों के सम्बन्ध में आचार्य शुक्ल के क्या विचार हैं? समझाइये।
Answer: शुक्लजी के अनुसार आजकल जान-पहचान बढ़ाना कोई मुश्किल काम नहीं है। हर किसी से आसानी से जान-पहचान हो सकती है। परंतु हमारी जान-पहचान के लोग ऐसे हों जिनसे हम अपने जीवन को उत्तम और खुशहाल बनाने में कुछ लाभ उठा सकें। उनका चरित्र अच्छा हो, जो शिष्ट और सच्चा हो, जिसका आचरण हमें प्रेरणा दे और जीवन में अपनाने योग्य हो। कोई भी युवा पुरुष ऐसे अनेक युवा पुरुषों से जान-पहचान बढ़ा सकता है जो उसके साथ मौज-मस्ती के कामों में भाग लेने को तैयार रहते हैं। लेकिन ऐसे जान-पहचान के लोगों से कुछ हानि न होगी तो लाभ भी नहीं होगा। परंतु यदि हानि हुई तो बहुत अधिक होगी। अतः हमें उन्हीं लोगों से जान-पहचान रखनी चाहिए जिनका आचरण उत्तम हो और जो बुरी आदतों से दूर हों।
In simple words: शुक्लजी मानते हैं कि जान-पहचान बढ़ाना आसान है, पर हमें ऐसे लोग चुनने चाहिए जो अच्छे चरित्र वाले हों, सच्चे हों, प्रेरणादायक हों और हमें बुरी आदतों से दूर रखें, क्योंकि गलत जान-पहचान बहुत हानिकारक हो सकती है।
🎯 Exam Tip: जान-पहचान और सच्ची मित्रता के बीच अंतर स्पष्ट करें और अच्छे लोगों के चुनाव के महत्व पर जोर दें।
Question 7. 'बुराई अटल भाव धारण करके बैठती है।' कैसे?
Answer: जब एक बार कोई युवा बुराई में पड़ जाता है, तो उससे बचना मुश्किल हो जाता है। यह इसलिए क्योंकि एक बार जब कोई व्यक्ति कीचड़ में पैर डालता है, तो वह फिर यह नहीं देखता कि वह कहाँ और कैसी जगह पैर रख रहा है। वह धीरे-धीरे उन बुरी बातों का आदी हो जाता है और उसकी नफरत कम होती चली जाती है। उसके बाद उसे बुराई से चिढ़ नहीं होती, उसका विवेक कुंठित हो जाता है, उसे सही-गलत की पहचान नहीं रहती और वह बुराई का भक्त बन जाता है। हमारी आत्मा और हृदय को अपवित्र कर देगी और मन पर छायी रहेगी। इसलिए यह कहना पूरी तरह सच है कि बुराई अटल भाव धारण करके बैठती है।
In simple words: बुरी आदतें एक बार लग जाने पर आसानी से नहीं छूटतीं, क्योंकि व्यक्ति धीरे-धीरे उनका आदी हो जाता है और सही-गलत का फर्क भूलकर बुराई को अपना लेता है।
🎯 Exam Tip: मानव मनोविज्ञान के आधार पर समझाएं कि बुराई कैसे जड़ें जमा लेती है और उससे बचना क्यों मुश्किल होता है।
Question 8. बुरी संगत की छूत से बचने के लिए शुक्लजी ने कौन-कौन-से तर्क दिए हैं? समझाकर लिखिए।
Answer: शुक्लजी युवाओं को बुरी संगति से बचने के लिए जोर देकर कहते हैं कि इससे दूर रहो। यदि एक बार कोई युवा बुराई में लिप्त हो गया तो आगे चलकर उससे बचना मुश्किल है, क्योंकि एक बार मनुष्य अपना पैर कीचड़ में डाल देता है, तब फिर यह नहीं देखता है कि वह कहाँ और कैसी जगह पैर रखता है। वह धीरे-धीरे उन बुरी बातों का अभ्यस्त हो जाता है और उसकी घृणा कम होती चली जाती है। तत्पश्चात् उसे बुराई से चिढ़ नहीं होती है, उसका विवेक कुण्ठित हो जाता है, उसे भले-बुरे की पहचान नहीं रह जाती है और वह बुराई का भक्त बन जाता है। अतः बुरी संगत की छूत से बचो, यह पुरानी कहावत सत्य ही है कि "काजल की कोठरी में कैसो ही सयानो जाय। एक लीक काजल की लालि है पै लागि है।” इसका अर्थ है कि बुरी जगह का असर तो पड़कर ही रहता है।
In simple words: शुक्लजी बुरी संगति से बचने की सलाह देते हैं क्योंकि एक बार इसमें फंसने पर व्यक्ति धीरे-धीरे बुराई का आदी हो जाता है, सही-गलत का फर्क भूल जाता है, और बुरी जगह का असर हमेशा रहता है।
🎯 Exam Tip: शुक्लजी के तर्कों को स्पष्ट करें और उदाहरण या कहावत का उपयोग कर प्रभावी ढंग से समझाएं।
रचनाकार का परिचय सम्बन्धी प्रश्न –
Question 1. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का साहित्यिक परिचय दीजिए। अथवा “आचार्य रामचन्द्र शुक्ल हिन्दी साहित्य के महान् निबन्धकार हैं। इस कथन की समीक्षा कीजिए। अथवा “शुक्लजी हिन्दी साहित्य के बेजोड़ निबन्धकार और उच्च कोटि के समालोचक हैं।” उक्त कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: आचार्य रामचन्द्र शुक्ल हिन्दी साहित्य के सर्वश्रेष्ठ निबंधकार हैं, इस तथ्य का प्रमाण उनकी प्रसिद्ध रचना 'चिन्तामणि' है। उनके निबंधों में विचारों की नवीनता, सूक्ष्म विवेचना, गम्भीरता, मनोविकारों का सटीक एवं मनोवैज्ञानिक विश्लेषण आदि विशेषताएँ एक साथ देखी जा सकती हैं। विषय की मौलिकता, रसात्मकता तथा हास्य-व्यंग्य का समावेश शुक्लजी के निबंधों में पर्याप्त मात्रा में दिखाई देता है। इनके निबंधों में व्यक्तित्व एवं विषय का समन्वय बहुत सहज रूप में हुआ है। शुक्लजी जैसे महान् निबंधकार व आलोचक शताब्दियों के बाद एक-दो दिखाई देते हैं। इनकी भाषा में प्रौढ़ता, गम्भीरता, परिष्कृत शब्दावली एवं प्राञ्जलता का गुण विद्यमान है।
निबंधकार के साथ ही शुक्लजी उच्चकोटि के साहित्य-समालोचक भी हैं। इनके समीक्षात्मक लेखों में इनकी विद्वत्ता एवं बहुज्ञता के दर्शन होते हैं। इनके 'रस मीमांसा' नामक ग्रन्थ में यह विशेषता स्पष्टतः परिलक्षित होती है। शुक्लजी की कृतियाँ चिन्तामणि, रस मीमांसा, त्रिवेणी, हिन्दी साहित्य का इतिहास, जायसी, ग्रन्थावली आदि हमारे साहित्य की अनमोल धरोहर हैं। के प्रसिद्ध निबन्धकार बेकन की भाँति आचार्य शुक्ल हिन्दी साहित्य के बेजोड़ निबंधकार हैं। शुक्लजी ने चिन्तामणि', 'रस मीमांसा', 'त्रिवेणी', हिन्दी साहित्य का इतिहास', 'जायसी ग्रन्थावली की भूमिका' जैसी अनुपम कृतियों से हिन्दी साहित्य की महान् सेवा की है।
In simple words: आचार्य रामचन्द्र शुक्ल हिन्दी साहित्य के एक महान निबंधकार और आलोचक थे। उनकी रचनाएँ जैसे 'चिन्तामणि' विचारों की गहराई, सटीक विश्लेषण और सुंदर भाषा के लिए प्रसिद्ध हैं, जो उन्हें एक अद्वितीय साहित्यकार बनाती हैं।
🎯 Exam Tip: लेखक के साहित्यिक योगदान और उनकी प्रमुख रचनाओं को क्रमबद्ध तरीके से उल्लेख करें।
मित्रता लेखक परिचय-
पाठ-सार
सही मित्रों का चुनाव-आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का मानना है कि जब कोई युवा घर से बाहर निकलकर समाज में प्रवेश करता है तब अनेक लोगों से उसका मिलना-जुलना होता है, उनसे परिचय बढ़ता है और यह हेल-मेल मित्रता में बदल जाता है। शुक्लजी कहते हैं कि युवाओं को मित्रता करने से पहले उनके आचरण, व्यवहार, चरित्र आदि की पूर्ण जानकारी कर लेनी चाहिए। मित्रों के सही चुनाव से ही जीवन सफल हो पाता है।
युवा मन पर संगति का प्रभाव-युवाओं का चित्त बहुत ही कोमल और हर तरह के भाव ग्रहण करने योग्य होता है। इस अपरिपक्व अवस्था में बाहरी चीजों का प्रभाव बहुत शीघ्र और स्थायी रूप से पड़ता है। युवा प्रायः कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं, जिन्हें राक्षस या देवता, किसी भी रूप में ढाला जा सकता है। अतः संगति करते समय बड़े विवेक की आवश्यकता होती है।
अच्छा या विश्वासपात्र मित्र-मैत्री का हमारे जीवन में बड़ा महत्व होता है। जीवन के व्यवहार में उसका बहुत बड़ा योगदान रहता है। इससे आत्मशिक्षा का कार्य बड़ी आसानी से हो जाता है। शुक्लजी ने एक प्राचीन विद्वान् का कथन उद्धृत करके स्पष्ट किया है कि “विश्वासपात्र मित्र से बड़ी भारी रक्षा रहती है। जिसे ऐसा मित्र मिल जाये उसे समझना चाहिए कि खजाना मिल गया।” विश्वासपात्र मित्र हमारे चित्त को दृढ़ संकल्पों से युक्त बनाता है, सत्य, पवित्रता और मर्यादा के प्रेम को पुष्ट करते हैं तथा जब हम कुमार्ग पर पैर रखते हैं तो हमें सचेत करते हैं।
छात्रावस्था की मित्रता और युवावस्था की मित्रता-विद्यालयी छात्र में मित्रता की धुन सवार रहती है। बालकों के मन में मित्रता की उमंग रहती और मग्न कर देने वाला आनन्द होता है। उनके हृदय में मित्र के प्रति अत्यधिक मधुरता, अनुरक्ति, अपार विश्वास और भविष्य के प्रति लुभावनी कल्पनाएँ होती हैं। मित्र की बातें हृदय पर तुरन्त प्रभाव डालती हैं और शीघ्र ही मान ली जाती हैं।
युवा पुरुष की मित्रता बालक की मित्रता से भिन्न दृढ़, शान्त और गम्भीर होती है। केवल बाहरी सुन्दरता या आकर्षक रूप, चाल-ढाल आदि के आधार पर बनाये गये मित्रों से जीवन के संघर्षों में उचित साथ नहीं मिल पाता है। सच्चे मित्र तो सच्चे पथ-प्रदर्शक, भाई के समान प्रीति-पात्र, सहानुभूतिपूर्ण हृदय वाले एवं विश्वसनीय होने चाहिए।
मित्र का कर्तव्य-शुक्लजी के अनुसार सच्चा मित्र हमें अच्छे कार्यों में इस प्रकार सहायता देता है और हमारा मनोबल बढ़ाता है कि हम अपनी सामर्थ्य से भी बढ़कर काम कर जाते हैं। मित्र हमारा आत्मबल बढ़ाकर सुग्रीव के मित्र राम की तरह बड़े सहायक सिद्ध होते हैं तथा शुद्ध हृदय और विश्वसनीय होते हैं जो हमारे जीवन को सफल बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हमारी जान-पहचान के लोग कैसे हों-आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार आजकल जान-पहचान बढ़ाना कोई बड़ी बात नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि हमारी जान-पहचान के लोग ऐसे हों, जिनसे हमें हमारे जीवन को उत्तम और आनन्दमय बनाने में कुछ सहायता मिल सके।
कठिन शब्दार्थ-
परिणत = बदला हुआ। अपरिमार्जित = अशुद्ध, संस्कार रहित। अपरिपक्व = अविकसित, नादान। अनुसंधान = खोज करना, जानकारी प्राप्त करना। सुगम = आसान। त्रुटियों = गलतियों। पुष्ट = पोषित। कुमार्ग = गलत रास्ता। हतोत्साहित = उत्साहहीन। धुन सवार होना = किसी कार्य की लगन या उमंग होना। बाल-मैत्री = बचपन की मित्रता। खिन्नता = दुःख या उदासीनता। अनुरक्ति = प्रेम। उद्गार = हृदय के भाव। कल्पित = कल्पना किये गये। प्रतिभा = प्रखर बुद्धि। प्रीति-पात्र = स्नेह के योग्य। मृदुल = कोमल। सत्यनिष्ठ = सच्चाई में निष्ठा रखने वाला। विनोद = मनोरंजन, हास्यपूर्ण। कुसंग = बुरी संगति। क्षय = नाश। बाहु = भुजा। फूहड़ = भद्दी। कुण्ठित = विफलताजन्य घोर निराशा। निष्कलंक = कलंक रहित, उज्ज्वल। लीक = रेखा, निशान॥
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