Class 12 Hindi Solved Question Papers: ISC Class 12 Hindi Board Exam Question Paper 2026 with Solutions
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ISC Class 12 Hindi Board Exam Question Paper with Solutions
SECTION - A
Question 1
Write a composition in approximately 400 words on any one of the topics given below. [15 Marks]
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 400 शब्दों में एक निबन्ध लिखिए।
(i) अधिकांश लोग अपने घरों को साफ रखते हैं, लेकिन सड़क, बाजार और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा - कचरा फेंक देते हैं। इस व्यवहार के पीछे उनकी क्या मानसिकता है? इस मानसिकता से समाज और पर्यावरण को किस तरह नुकसान पहुँचता है? अपने सुझाव देते हुए लिखिए कि लोगों की इस आदत को कैसे बदला जा सकता है?
(ii) कल्पना कीजिए कि आप एक व्यस्त महानगर में रहते हैं और अचानक एक दिन वहाँ संचार नेटवर्क 48 घंटों के लिए बंद हो गया - न फोन, न इंटरनेट, न कोई डिजिटल सुविधा। इस दौरान जनजीवन कैसे प्रभावित हुआ और लोगों के व्यवहार में क्या बदलाव आए? समझाकर लिखिए।
(iii) 'जिस देश में बच्चे अपने देश और संस्कारों का सम्मान नहीं करते, वह देश अपनी असली पहचान खो देता है।' इस विषय पर अपने विचार स्पष्ट करते हुए लिखिए कि एक विद्यार्थी के जीवन में देश और संस्कारों का क्या महत्व होता है? लोगों में देश के प्रेम जगाने और बढ़ाने के लिए आप किस प्रकार योगदान दे सकते हैं?
(iv) 'सड़क सुरक्षा को प्रभावी बनाने के लिए यातायात के नियमों के उल्लंघन पर केवल जुर्माना ही नहीं बल्कि कठोर दंड भी लागू किया जाना चाहिए।' इस विषय के पक्ष अथवा विपक्ष पर अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।
(v) आप अपने मित्रों के साथ सर्दियों की छुट्टियों में कहीं घूमने गए थे। घने कोहरे तथा यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अचानक कई रेलगाड़ियों को स्थगित कर दिया गया। इससे आपको तथा आपके मित्रों किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ा? इस स्थिति को संभालते हुए आप कैसे घर वापस आए? वर्णन कीजिए।
(vi) निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर मौलिक कहानी लिखिए।
(a) 'खुद से लिए गए फैसले घबराहट तो देते हैं पर कभी हारने नहीं देते।'
(b) निम्नलिखित वाक्य से अंत करते हुए एक कहानी लिखिए।
.......... और मुझे खुशी हुई कि अब-मौ भी समझने लगी कि परिवार के साथ - ही - साथ अपने लिए समय निकालना भी आवश्यक है।
Answer:
(i) सार्वजनिक स्वच्छता और हमारी मानसिकता
स्वच्छता को लेकर हमारे समाज का दोहरा चरित्र बहुत ही चिंतनीय विषय है। लोग अपने घरों के कोने-कोने को चमका कर रखते हैं, कचरे को बाहर फेंकने में जरा भी संकोच नहीं करते। इस संकुचित मानसिकता के पीछे यह भावना काम करती है कि हमारा घर हमारा अपना है और सार्वजनिक स्थल किसी के नहीं हैं। लोग यह भूल जाते हैं कि सार्वजनिक स्थल भी हमारे ही देश और परिवेश का हिस्सा हैं।
इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये से समाज और पर्यावरण दोनों को भारी नुकसान पहुँचता है। सड़कों और नालियों में फैले कचरे से बीमारियाँ फैलती हैं, जलभराव होता है और पर्यावरण प्रदूषित होता है। प्लास्टिक और अन्य कचरे से मिट्टी की उर्वरता नष्ट होती है और बेजुबान जानवर इसे खाकर अपनी जान गँवा बैठते हैं।
इस आदत को बदलने के लिए सबसे पहले हमें अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। विद्यालयों और महाविद्यालयों में स्वच्छता के पाठ केवल किताबों तक सीमित न रहकर व्यावहारिक रूप में सिखाए जाने चाहिए। कड़े कानून और भारी जुर्माने का प्रावधान होना चाहिए ताकि लोग कचरा फेंकने से पहले डरें। इसके अतिरिक्त, सामुदायिक सहभागिता और जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों में यह भावना जगानी होगी कि 'स्वच्छ भारत' ही 'स्वस्थ भारत' की नींव है।
Teacher's Note:
a) निबंध में विषय के सभी पहलुओं (मानसिकता, नुकसान और समाधान) को तार्किक रूप से क्रमिक रूप से प्रस्तुत करना आवश्यक है।
b) छात्रों को शब्दों की सीमा का ध्यान रखते हुए भाषा को सरल, प्रभावशाली और व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध रखना चाहिए।
Question 2
Read the passage given below carefully and then answer the questions that follow, using your own words. [15 Marks]
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने शब्दों में लिखिए।
उफ़! तुम कब जाओगे अतिथि!
तुम्हारे आने के ठक चौथे दिन, बार - बार यह प्रश्न मेरे मन में उमड़ रहा है, तुम कब जाओगे अतिथि! तुम कब घर से निकलोगे मेरे मेहमान!
तुम जिस सोफे पर टाँगें पसारे बैठे हो, उसके ठीक सामने एक कैलेंडर लगा है जिसकी फड़फड़ाती तारीखें मैं तुम्हें रोज दिखा कर बदल रहा हूँ। यह मेहमानवाज़ी का चौथा दिन है। मगर तुम्हारे जाने की कोई संभावना नज़र नहीं आती। लाखों मील लंबी यात्रा कर 'एस्ट्रोनॉट्स' भी चाँद पर इतने दिन नहीं रुकते जितना तुम रुके। उन्होंने भी चाँद की इतनी मिट्टी नहीं खोदी जितनी तुम मेरी खोद चुके हो। क्या तुम्हें अपना घर याद नहीं आता? क्या तुम्हें तुम्हारी मिट्टी नहीं पुकारती?
जिस दिन तुम आए थे, कहाँ अंदर - ही - अंदर मेरा बग़ीचा क्रॉप उठा था। फिर भी मैं मुस्कुराता हुआ उठा और तुम्हारे गले मिला। मेरी पत्नी ने तुम्हें सादर नमस्ते की। तुम्हारी शान में ओ मेहमान, हमने दोपहर के भोजन को 'लंच' में बदला और रात के खाने को 'डिनर' में। हमने तुम्हारे लिए सलाद बनवाया, रायता बनवाया और मिठाइयाँ मँगवाईं। इस उम्मीद में कि दूसरे दिन शानदार मेहमाननवाज़ी की छाप लिए तुम रेल के डिब्बे में बैठ जाओगे। मगर, आज चौथा दिन है और तुम यहीं हो। कल रात हमने खिचड़ी बनाई, फिर भी तुम यहीं हो। आज हम उपवास करेंगे और तुम यहीं हो। तुम्हारी उपस्थिति यूँ रबर की तरह खンिचेगी, कभी सोचा न था।
सुबह तुम आए और बोले, "लॉन्ड्री को कपड़े देने हैं।" मतलब? मतलब यह कि जब तक कपड़े धुल कर नहीं आएँगे, तुम नहीं जाओगे? यह चोट मर्मिक थी, यह आघात अप्रत्याशित था। मैंने पहली बार जाना कि अतिथि केवल देवता नहीं होता। वह मानव और कई बार दानव भी हो सकता है। कपड़े धुल कर आ गए और तुम यहीं हो। पलंग की चादर दो बार बदली जा चुकी और तुम यहीं हो। अब इस कमरे के आकाश में ठहराकों के रंगीन गुब्बारे नहीं उड़ते। शब्दों का लेन-देन मिट गया। अब करने को चर्चा नहीं रही। परिवार, बच्चे, नौकरी, राजनीति, रिश्तेदार, पुराने दोस्त, फिल्म, साहित्य, यहाँ तक कि हमने अपने पुराने प्रेम-प्रसंगों का भी जिक्र कर लिया। सारे विषय खत्म हो गए। तुम्हारे प्रति मेरी प्रेमभावना अब अपशब्दों में बदल रही है। मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि तुम कौन-सा 'फेविकॉल' लगा कर मेरे घर में आए हो?
पत्नी पूछती है, "कब तक रहेंगे ये?" जवाब में मैं कंधे उचका देता हूँ। जब वह प्रश्न पूछती है, मैं उत्तर नहीं दे पाता। जब मैं पूछता हूँ, वह चुप रह जाती है।
तुम्हारा बिस्तर कब गोल होगा अतिथि? मैं जानता हूँ कि तुम्हें मेरे घर में रहना अच्छा लग रहा है। सबको दूसरों के घर में अच्छा लगता है। यदि लोगों का बस चलता तो किसी और के घर में ही रहते। मगर घर को सुंदर और 'होम' को 'स्मीट होम' इसीलिए कहा गया है कि मेहमान आएँ और अपने घर वापिस लौट जाएँ। मेरी रातों को अपने खर्राटों से गूंजाने के बाद अब चले जाओ मेरे दोस्त! शराफत की भी एक सीमा होती है। कल का सूरज तुम्हारे आगमन का चौथा सूरज होगा और मेरी सहनशीलता की अंतिम सुबह होगी। उसके बाद मैं लड़खड़ा जाऊँगा।
यह सच है कि अतिथि होने के नाते तुम देवता हो, मगर मैं भी आखिर मनुष्य हूँ। एक मनुष्य ज़्यादा दिनों तक देवता के साथ नहीं रह सकता। देवता का काम है कि वह दर्शन दे और लौट जाए। तुम लौट जाओ अतिथि। इसके पूर्व कि मैं अपने चेहरे का नकाव उतारूँ, तुम लौट जाओ।
उफ़! तुम कब जाओगे, अतिथि!
(साभार : शरद जोशी)
(i) कैलेंडर की फड़फड़ाती तारीखें अतिथि को दिखाते हुए बदलने के पीछे लेखक की क्या मंशा थी? इस बात को उन्होंने किस उदाहरण द्वारा स्पष्ट करने की कोशिश की है? [3 Marks]
Answer:
1. लेखक की मंशा अतिथि को यह अहसास कराना था कि उनके प्रवास को चार दिन बीत चुके हैं और अब उन्हें चले जाना चाहिए।
2. लेखक ने 'एस्ट्रोनॉट्स' का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया है कि वे भी चाँद पर इतने लंबे समय तक नहीं रुकते जितना यह अतिथि उनके घर पर रुका हुआ है।
3. लेखक ने यह भी दर्शाया कि अतिथि ने उनके घर में जितनी मानसिक शांति और चैन की मिट्टी खोदी है, उतनी तो चाँद पर अंतरिक्ष यात्रियों ने भी नहीं खोदी होगी।
Teacher's Note:
a) उत्तर में गद्यांश के प्रसंग के अनुसार लेखक की व्यंग्यात्मक शैली को स्पष्ट करना आवश्यक है।
b) छात्रों को अपने शब्दों में सटीक उत्तर लिखना चाहिए और अंतरिक्ष यात्री वाले उदाहरण का उल्लेख अवश्य करना चाहिए।
(ii) 'बग़ीचा काँप उठा' वाक्यांश का आशय स्पष्ट करते हुए बताइए कि यह वाक्यांश किस संदर्भ में कहा गया है और क्यों? [3 Marks]
Answer:
1. 'बग़ीचा काँप उठा' वाक्यांश का आशय अतिथि के अचानक आगमन से लेखक के मन में उत्पन्न आंतरिक असमंजस, सिहरन और चिंता से है।
2. यह वाक्यांश अतिथि के आगमन के पहले दिन के संदर्भ में कहा गया है।
3. ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि अतिथि के आते ही लेखक को भविष्य में होने वाले आर्थिक और मानसिक बोझ का पूर्वाभास हो गया था, जिससे उनका मन अंदर ही अंदर सहम गया था।
Teacher's Note:
a) लाक्षणिक अर्थ को समझते हुए आंतरिक भावनाओं को स्पष्ट करना चाहिए।
b) प्रसंग स्पष्ट करते समय अतिथि के अचानक और बिना बुलाए आने के यथार्थ को दर्शाना न भूलें।
(iii) 'अतिथि देवो भव' की परंपरा को बदलकर लोग आज अतिथियों को बोझ क्यों समझ रहे हैं? उनकी सोच में आए इस परिवर्तन का क्या कारण है? किन्हीं तीन बिंदुओं के माध्यम से अपने विचार व्यक्त कीजिए। [3 Marks]
Answer:
1. आधुनिक जीवनशैली की व्यस्तता, समय की कमी और सीमित संसाधनों के कारण लोग अब लंबे समय तक मेहमानों का बोझ उठाने में असमर्थ हैं।
2. आज के दौर में पारिवारिक और व्यक्तिगत निजता (privacy) को बहुत अधिक महत्व दिया जाता है, जिसमें अनचाहा और लंबा हस्तक्षेप असहजता पैदा करता है।
3. कई बार अतिथियों द्वारा मेहमाननवाज़ी की सीमा लांघकर अधिकार जताने और बिना किसी संकोच के दिनों-दिन टिके रहने की प्रवृत्ति लोगों की सहनशीलता समाप्त कर देती है।
Teacher's Note:
a) आधुनिक समाज की वास्तविकताओं और बदलती पारिवारिक संरचना के आधार पर उत्तर लिखें।
b) बिंदुओं को स्पष्ट और तार्किक रूप से प्रस्तुत करना परीक्षा में अच्छे अंक दिलाता है।
(iv) निम्नलिखित पंक्तियों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प चुनिए।
''यह चोट मर्मिक थी, यह आघात अप्रत्याशित था। मैंने पहली बार जाना कि अतिथि केवल देवता नहीं होता। वह मानव और कई बार दानव भी हो सकता है।''
(a) कौन-सी चोट मर्मिक थी? [1 Mark]
(1) पलंग की चादर बदलवाना
(2) लॉन्ड्री को कपड़े देना
(3) रबर की तरह बातें खींचना
(4) ठहाकों के गुब्बारे उड़ाना
Answer: (2) लॉन्ड्री को कपड़े देना
अतिथि का यह कहना कि अभी कपड़े लॉन्ड्री से धुल कर आने हैं, यह दर्शाता है कि वे अभी और रुकेंगे।
Teacher's Note:
a) गद्यांश के सटीक संदर्भ से सही विकल्प का चयन करें।
b) गद्यांश में इस प्रसंग का विशेष महत्व है क्योंकि इसके बाद अतिथि के प्रति दृष्टिकोण बदल जाता है।
(b) प्रसंग के आधार पर 'अप्रत्याशित' शब्द का अर्थ है : [1 Mark]
(1) जब किसी बात की आशा न की गई हो
(2) जब आशा से अधिक मिला हो
(3) जब आशा निराशा में बदल गई हो
(4) जब आशा की हल्की-सी किरण दिखती हो
Answer: (1) जब किसी बात की आशा न की गई हो
अप्रत्याशित का अर्थ होता है जिसकी कोई उम्मीद या संभावना न हो।
Teacher's Note:
a) शब्द के मूल अर्थ और गद्यांश के संदर्भ दोनों को ध्यान में रखें।
b) गलत विकल्पों से भ्रमित न हों।
(c) लेखक को कब अहसास हुआ कि अतिथि देवता ही नहीं मानव और दानव भी हो सकता है? [1 Mark]
(1) जब अतिथि ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया
(2) जब अतिथि ने उनका कीमती सामान तोड़ दिया
(3) जब अतिथि लम्बे समय तक उनके घर पर रहा
(4) जब अतिथि प्रेम-प्रसंगों पर चर्चा करने लगा
Answer: (3) जब अतिथि लम्बे समय तक उनके घर पर रहा
*(Note: The marking scheme accepts option (3) based on the context of prolonged stay).*
अतिथि के लंबे ठहराव और उसके असहज व्यवहार से लेखक को यह अहसास हुआ।
Teacher's Note:
a) गद्यांश की घटनाओं के क्रम को समझकर उत्तर चुनें।
b) लेखक के मानसिक बदलाव को रेखांकित करें।
निम्नलिखित पंक्तियों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प चुनिए।
"कल का सूरज तुम्हारे आगमन का चौथा सूरज होगा और मेरी सहनशीलता की अंतिम सुबह होगी। उसके बाद मैं लड़खड़ा जाऊँगा।"
(a) गद्यांश के अनुसार 'लड़खड़ाने की स्थिति' कब उत्पन्न होती है? [1 Mark]
(1) जब संतुलन बिगड़ जाता है
(2) जब सामंजस्य स्थापित हो जाता है
(3) जब अराजकता का बोलबाला होता है
(4) जब मन में स्थिरता का भाव होता है
Answer: (1) जब संतुलन बिगड़ जाता है
मानसिक और शारीरिक संतुलन बिगड़ने पर व्यक्ति लड़खड़ा जाता है।
Teacher's Note:
a) शब्द के प्रतीकात्मक और वास्तविक अर्थ को समझें।
b) सहनशीलता की सीमा समाप्त होने पर संतुलन बिगड़ता है।
(b) 'सहनशीलता की अंतिम सुबह' से क्या अभिप्राय है? [1 Mark]
(1) मेहमान के जाने की अंतिम सुबह का आना
(2) सहनशीलता से सूरज का स्वागत करना
(3) उगते हुए सूर्य की प्रतीक्षा करना
(4) धैर्य की सीमा समाप्त होना
Answer: (4) धैर्य की सीमा समाप्त होना
इसका अर्थ है कि अब लेखक का धैर्य पूरी तरह से चुक चुका है।
Teacher's Note:
a) मुहावरेदार और व्यंग्यात्मक प्रयोगों का अर्थ समझें।
b) धैर्य टूटने की स्थिति को यह वाक्यांश दर्शाता है।
(c) इस समय लेखक के मनोभाव क्या हैं? [1 Mark]
(1) भावुकता और तटस्थता
(2) क्रोध और घृणा
(3) उदासीनता और अकेलापन
(4) आक्रोश और झुंझलाहट
Answer: (4) आक्रोश और झुंझलाहट
अतिथि के न जाने के कारण लेखक के मन में तीव्र आक्रोश और झुंझलाहट है।
Teacher's Note:
a) गद्यांश के अंत में लेखक की मनोदशा का सटीक विश्लेषण करें।
b) व्यंग्य रचनाओं में पात्रों के मानसिक द्वंद्व को समझें।
Question 3
(A) Do as directed.
निर्देशानुसार उत्तर दीजिए।
(i) निम्नलिखित वाक्य का शुद्ध रूप लिखिए।
मंत्री जो ने एक छात्रों की सभा में भाषण दिया। [1 Mark]
Answer:
मंत्री जी ने छात्रों की एक सभा में भाषण दिया।
Teacher's Note:
a) वाक्य में पदक्रम (word order) और सम्मानसूचक शब्दों की शुद्धि पर ध्यान दें।
b) 'जो' के स्थान पर 'जी' और 'एक छात्रों' के स्थान पर 'छात्रों की एक' का प्रयोग होगा।
(ii) रिक्त स्थान में सही शब्द भरिए।
अनपढ़ श्याम की सरकारी नौकरी क्या लग गई मानो अंधे के हाथ __________ लग गई। [1 Mark]
Answer:
बटेर
Teacher's Note:
a) यह एक प्रसिद्ध हिंदी लोकोक्ति है 'अंधे के हाथ बटेर लगना'।
b) इसका अर्थ है बिना प्रयास के बड़ी वस्तु या सफलता मिल जाना।
(iii) निम्नलिखित वाक्यों में से शुद्ध वाक्य का चयन कीजिए। [1 Mark]
(a) अधिकारियों ने कागजात का निरीक्षण किया।
(b) अधिकारियों ने कागजात का परीक्षण किया।
(c) अधिकारियों ने कागजात की जाँच की।
(d) अधिकारियों ने कागजात का अन्वेषण किया।
Answer: (c) अधिकारियों ने कागजात की जाँच की।
कागजातों या दस्तावेजों की 'जाँच' की जाती है।
Teacher's Note:
a) उचित क्रियापद का चयन वाक्य की शुद्धि के लिए अनिवार्य है।
b) 'निरीक्षण' कार्यस्थल का और 'परीक्षण' प्रयोगशाला आदि में होता है।
(iv) निम्नलिखित वाक्यों में से अशुद्ध वाक्य का चयन कीजिए। [1 Mark]
(a) अपनी क्षमता से अधिक खर्च नहीं करना चाहिए।
(b) दु:खी को और दु:खी नहीं करना चाहिए।
(c) बुरा वक्त आने पर अपने भी आँखें फेर लेते हैं।
(d) दोनों बेटियों का विवाह करके वह यमुना नहा गया।
Answer: (c) बुरा वक्त आने पर अपने भी आँखें फेर लेते हैं।
यहाँ मुहावरे का गलत प्रयोग हुआ है - 'आँखें फेरना' के स्थान पर 'आँखें चुराना' या मुहावरे का सही रूप 'मुँह मोड़ लेना' होता है (यद्यपि 'आँखें फेर लेना' भी प्रचलित है, किंतु व्याकरणिक दृष्टि से विकल्प c अशुद्ध माना गया है)।
Teacher's Note:
a) मुहावरों के सटीक प्रयोग और उनके रूप की पहचान करना सीखें।
b) विकल्पों को ध्यानपूर्वक पढ़कर अशुद्धि को पहचानें।
(v) निम्नलिखित वाक्य में रेखांकित शब्द के लिए सही शब्द का चयन कीजिए।
युद्ध में पीठ दिखाकर भागने वाला सैनिक कायर कहलाता है। [1 Mark]
(a) भगोड़ा
(b) हिंसक
(c) जुझारू
(d) शहीद
Answer: (a) भगोड़ा
युद्ध के मैदान से भागने वाले व्यक्ति को भगोड़ा कहा जाता है।
Teacher's Note:
a) वाक्यांश के लिए एक शब्द का यह सटीक उदाहरण है।
b) सभी विकल्पों के अर्थ की स्पष्टता होना आवश्यक है।
(B) Do as directed.
निर्देशानुसार उत्तर दीजिए।
(i) निम्नलिखित मुहावरे से वाक्य बनाइए।
धुन का पक्का होना [1 Mark]
Answer:
मोहन अपनी पढ़ाई को लेकर धुन का पक्का है, वह आईएएस बनकर ही रहेगा।
Teacher's Note:
a) वाक्य ऐसा होना चाहिए जिससे मुहावरे का अर्थ स्पष्ट झलके।
b) धुन का पक्का होना अर्थात अपने निश्चय या ध्येय पर अडिग रहना।
(ii) निम्नलिखित मुहावरे को शुद्ध कीजिए।
पानी में रहकर मछली से बैर [1 Mark]
Answer:
पानी में रहकर मगर से बैर
Teacher's Note:
a) यह एक प्रसिद्ध लोकोक्ति है जिसमें सही शब्द 'मगर' है।
b) इसका अर्थ है जिस के साथ रहना उसी से शत्रुता मोल लेना।
(iii) निम्नलिखित वाक्य में रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए एक सटीक मुहावरे का चयन कीजिए।
मैंने सौ रूपए देकर मोहित की मदद की तो उसने कहा ________________ बहुत होता है। [1 Mark]
(a) अंधों में काना राजा
(b) उड़ते को पंख का सहारा
(c) अपना हाथ जगन्नाथ
(d) डूबते को तिनके का सहारा
Answer: (d) डूबते को तिनके का सहारा
संकट के समय थोड़ी सी मदद भी बहुत बड़ी राहत देती है।
Teacher's Note:
a) प्रसंग के अनुसार उचित मुहावरे या लोकोक्ति का चयन करें।
b) संकटग्रस्त व्यक्ति के लिए छोटी सहायता इस लोकोक्ति से दर्शाई जाती है।
(iv) निम्नलिखित वाक्य के लिए एक सटीक मुहावरे का चयन कीजिए।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बातें ध्यानपूर्वक सुनकर 'उचित फैसला' सुना दिया। [1 Mark]
(a) दो टूक बात कहना
(b) दूध का दूध और पानी का पानी
(c) खूब खरी-खोटी सुनाना
(d) मोहर लगाना
Answer: (b) दूध का दूध और पानी का पानी
इसका अर्थ है सही न्याय करना और सच्चाई सामने लाना।
Teacher's Note:
a) निष्पक्ष न्याय और सच्चाई को साबित करने के लिए इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है।
b) विकल्पों के सटीक अर्थ को समझें।
(v) निम्नलिखित मुहावरे के सही अर्थ का चयन कीजिए।
फूँक - फूँक कर कदम रखना [1 Mark]
(a) किसी काम को पूरा करना
(b) आगे कदम बढ़ाना
(c) सोच समझ कर काम करना
(d) फूँकते हुए चलना
Answer: (c) सोच समझ कर काम करना
सावधानीपूर्वक और विचार करके कार्य करना इसका अर्थ है।
Teacher's Note:
a) मुहावरे का लक्ष्यार्थ समझना आवश्यक है, literal meaning नहीं।
b) सावधानी बरतने के संदर्भ में इसका प्रयोग होता है।
SECTION - B
(LITERATURE - 40 MARKS)
Answer four questions from this section on any three out of the four prescribed textbooks.
पाठ्यक्रम में निर्धारित चार पुस्तकों में से किन्हीं तीन पुस्तकों के चार प्रश्नों के उत्तर इस भाग से दीजिए।
गद्य संकलन (Gadya Sanklan)
Question 4
"उस विरक्तावस्था में उनके मन में यह कल्पना उठ रही थी - संभव है, इ틀ी जाकर प्रभुदास स्वस्थ हो जाता। हाय! मैंने तीन हज़ार का मुँह देखा और पुत्र - रत्न को हाथ से खो दिया।" [1 Mark]
(i) प्रस्तुत पंक्तियाँ किस कहानी से ली गई हैं? इसके कहानीकार कौन हैं?
(ii) चैतयदास किस घाट पर बैठे थे? वे इस समय क्या सोच रहे थे?
(iii) 'तीन हज़ार का मुँह देखा' - इस वाक्य का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।
(iv) बाबू चैतयदास को अपनी हृदयहीनता का अहसास कब और कैसे हुआ? अंत में अपने मन की शांति के लिए उन्होंने क्या किया?
Answer:
(i) प्रस्तुत पंक्तियाँ 'विश्वासपात्र' (या पाठ्यक्रमानुसार संबंधित गद्य पाठ, यथा 'आचार्य रामचंद्र शुक्ल' / प्रेमचंद रचित कहानी, यहाँ 'मजबूरी' या अन्य पाठ के संदर्भ में) कहानी से ली गई हैं। *(Note: As per standard ISC curriculum, this relates to Premchand's story).*
(ii) चैतयदास घाट पर बैठे अपने पुत्र प्रभुदास की मृत्यु के पश्चात उसके इलाज में हुई अपनी कंजूसी और हृदयहीनता पर पछतावा कर रहे थे।
(iii) इसका संदर्भ यह है कि बाबू चैतयदास ने अपने पुत्र प्रभुदास को बेहतर इलाज के लिए इटली भेजने के लिए तीन हजार रुपये खर्च करने में संकोच किया था और पैसे बचाने का विचार किया था।
(iv) उन्हें अपनी हृदयहीनता का अहसास तब हुआ जब उनके पुत्र की मृत्यु हो गई और वे समझ गए कि धन से बढ़कर संतान का जीवन था। मन की शांति के लिए उन्होंने अपनी सारी संपत्ति या उसका बड़ा हिस्सा दान कर दिया / प्रायश्चित किया।
Teacher's Note:
a) कहानी के मुख्य पात्रों और उनके मनोवैज्ञानिक द्वंद्व को समझकर उत्तर लिखें।
b) धन और पुत्र प्रेम के बीच के संघर्ष को स्पष्ट करना आवश्यक है।
Question 5
'मन्नू भंडारी की कहानी 'मजबूरी' एक माँ के त्याग, ममता और अकेलेपन की गहरी संवेदना को उजागर करती है।' इस कथन को कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए। [10 Marks]
Answer:
1. मन्नू भंडारी की कहानी 'मजबूरी' एक ऐसी माँ के जीवन पर आधारित है जो पारिवारिक उपेक्षा और अकेलेपन का शिकार है लेकिन अपनी ममता और त्याग से कभी पीछे नहीं हटती।
2. कहानी में माँ की विवशता को बहुत ही संवेदनशील ढंग से उकेरा गया है जहाँ वह अपनों के बीच रहकर भी अकेली महसूस करती है।
3. उसके मन में बच्चों के प्रति अथाह प्रेम और समर्पण है, परंतु परिवार के अन्य सदस्यों की उदासीनता के कारण उसकी भावनाओं को वह स्थान नहीं मिलता जिसकी वह अधिकारी है।
4. लेखिका ने समाज में वृद्धों और विशेषकर माताओं की स्थिति का यथार्थ चित्रण किया है जो अपनी हर चाहत को परिवार की खातिर कुर्बान कर देती हैं।
5. इस प्रकार यह कहानी माँ के त्याग, वात्सल्य और उसकी लाचारी का अत्यंत मर्मस्पर्शी दस्तावेज बन जाती है।
Teacher's Note:
a) विश्लेषणात्मक प्रश्नों में कहानी की मूल संवेदना और चरित्र के मनोवैज्ञानिक पहलुओं को लिखना चाहिए।
b) माँ के त्याग और अकेलेपन के बिंदुओं को उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
Question 6
हजारी प्रसाद द्विवेद्वी के अनुसार भारतीय समाज में बढ़ते भ्रष्टाचार और पतन का मूल कारण क्या है? लेखक को ऐसा क्यों लगता है कि चाहे ऊपर से कितनी भी उथल-पुथल है, पर भीतर से भारत अब भी महान है, अनुकरणीय है? निबन्ध के आधार पर इसका विश्लेषण कीजिए। [10 Marks]
Answer:
1. हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबंध 'क्या निराश हुआ जाए' के अनुसार समाज में बढ़ते भ्रष्टाचार और पतन का मूल कारण कानून को धर्म से बड़ा मान लेना और मानवीय मूल्यों की उपेक्षा करना है।
2. लोग धर्म की आड़ में छल-कपट कर रहे हैं और ईमानदारी को मूर्खता समझा जाने लगा है, यही पतन की जड़ है।
3. इसके बावजूद लेखक का मानना है कि भारत की मूल संस्कृति में दया, प्रेम, सच्चाई और परोपकार की भावना आज भी जीवित है।
4. समाज में ऐसी अनेक घटनाएँ और लोग हैं जो निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करते हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि भारत भीतर से महान और अनुकरणीय है।
5. कानून चाहे जितना भी असफल दिखे, भारतीय जनता के अंतर्मन में नैतिकता और मानवीय मूल्य आज भी सुरक्षित हैं।
Teacher's Note:
a) निबंध के केंद्रीय भाव और लेखक के आशावादी दृष्टिकोण को स्पष्ट करें।
b) भ्रष्टाचार के कारणों के साथ-साथ भारतीय संस्कृति की अच्छाइयों का उल्लेख करना न भूलें।
काव्य मंजरी (Kavya Manjari)
Question 7
द्वीप हैं हम। यह नहीं है शाप, यह अपनी नियति है।
हम नदी के पुत्र हैं, बैठे नदी की क्रोड में,
वह वृहत् भूखंड से हमको मिलाती है,
और वह भूखंड अपना पितर है।
(i) प्रस्तुत पंक्तियों के कवि और कविता का नाम लिखिए। [1 Mark]
Answer:
कवि: अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरायन वात्स्यायन 'अज्ञेय')
कविता: 'यह दंतुरित मुस्कान' / 'द्वीप' (अज्ञेय की प्रसिद्ध कविता 'द्वीप')
Teacher's Note:
a) कवि और कविता का नाम सटीक होना चाहिए।
b) स्पेलिंग की अशुद्धि से अंक कट सकते हैं।
(ii) द्वीप किसे अपनी माता कह रहा है और क्यों? [2 Marks]
Answer:
1. द्वीप नदी को अपनी माता कह रहा है।
2. ऐसा इसलिए क्योंकि नदी उसकी जननी और पालनहार है, जिसकी गोद (क्रोड) में वह बैठता है और जो उसे मुख्य भूखंड से जोड़ती है।
Teacher's Note:
a) काव्यांश के प्रतीकात्मक अर्थ को समझें।
b) नदी को माता और भूखंड को पिता के रूप में चित्रित किया गया है।
(iii) भूखंड और द्वीप का क्या सम्बन्ध है? द्वीप अपने अस्तित्व को शाप न मानकर अपनी नियति क्यों मानता है? [2 Marks]
Answer:
1. भूखंड मुख्य समाज या राष्ट्र का प्रतीक है और द्वीप व्यक्ति या इकाई का प्रतीक है।
2. द्वीप अपनी अलग भौगोलिक स्थिति या अकेलेपन को अभिशाप नहीं मानता, बल्कि उसे अपनी स्वाभाविक नियति और विशिष्ट पहचान मानता है जो मुख्य भूमि से जुड़ी है।
Teacher's Note:
a) प्रतीकात्मकता (symbolism) को स्पष्ट करें।
b) व्यक्ति और समाज के अंतर्संबंध को समझाएं।
(iv) कविता में वर्णित प्रतीकों के सांकेतिक अर्थ लिखते हुए उनके पारस्परिक सम्बन्धों पर प्रकाश डालिए। कवि अपनी व्यक्तिगत सत्ता को सुरक्षित क्यों रखना चाहता है? [5 Marks]
Answer:
1. कविता में 'द्वीप' व्यक्तिगत चेतना या मनुष्य का प्रतीक है, 'नदी' प्रवाह, संस्कृति या परंपरा का प्रतीक है और 'भूखंड' विशाल समाज या राष्ट्र का प्रतीक है।
2. ये सभी प्रतीक आपस में घनिष्ठ रूप से जुड़े हैं क्योंकि व्यक्ति समाज से कटकर जीवित नहीं रह सकता, किंतु अपनी मौलिकता बनाए रखना भी आवश्यक है।
3. कवि अपनी व्यक्तिगत सत्ता को इसलिए सुरक्षित रखना चाहता है ताकि वह अपनी स्वतंत्र पहचान, मौलिक चिंतन और मानवीय संवेदनाओं को बचाए रख सके।
4. समाज में विलीन होकर व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता न खो दे, इसलिए व्यक्तिगत सत्ता का ह्रास नहीं होना चाहिए।
5. यह कविता व्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जुड़ाव के बीच संतुलन का सुंदर संदेश देती है।
Teacher's Note:
a) अज्ञेय की कविताओं में व्यक्तिवाद और समाज के द्वंद्व को मुख्य रूप से समझा जाता है।
b) सभी प्रतीकों के अर्थ स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 8
'अंधे का दीपक' कविता में कवि हरिवंशराय बच्चन ने 'अंधे' और 'दीपक' को किन-किन भावों का प्रतीक माना है? इस प्रतीकात्मकता के माध्यम से कवि ने मनुष्य का संघर्ष, आत्म - विश्वास और जीवन - ध्येय के विषय में क्या संदेश दिया है? कविता की शीर्षक की सार्थकता पर भी अपने विचार स्पष्ट कीजिए। [10 Marks]
Answer:
1. हरिवंशराय बच्चन की कविता 'अंधे का दीपक' में 'अंधा' प्रतिकूल परिस्थितियों, अज्ञान, असमर्थता या समाज की उदासीनता का प्रतीक है, तथा 'दीपक' आशा, आत्मबल, ज्ञान और संघर्ष का प्रतीक है।
2. इस प्रतीकात्मकता के माध्यम से कवि यह संदेश देते हैं कि जीवन में चाहे कितनी भी निराशा और कठिनाइयाँ (अंधकार) क्यों न हों, मनुष्य को अपने भीतर के आत्मविश्वास और उम्मीद का दीया बुझने नहीं देना चाहिए।
3. संघर्ष ही जीवन है और व्यक्ति को अपनी आंतरिक शक्ति के बल पर हर अंधेरे का सामना करना चाहिए।
4. कविता का शीर्षक अत्यंत सार्थक है क्योंकि यह अंधेरे के बीच भी अपनी रोशनी बिखेरने वाले छोटे से दीपक के माध्यम से अटूट जिजीविषा को उजागर करता है।
5. यह शीर्षक प्रतिकूल परिस्थितियों में भी हार न मानने वाले मानवीय साहस का परिचायक है।
Teacher's Note:
a) बच्चन जी की कविताओं के प्रेरणादायक और संघर्षशील पक्ष को रेखांकित करें।
b) शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट करते समय प्रतीकों के मेल को समझाएं।
Question 9
'आः धरती कितना देती है' कविता में कवि सुमित्रानंदन पंत को कब समझ में आया कि 'वसुधा रत्न प्रसविनो' है? बचपन में उन्होंने किस भावना के वशीभूत होकर, क्या नादानी की थी? दोनों स्थितियों में हुए अनुभवों को उन्होंने किस प्रकार वर्णित किया है? समझाकर लिखिए। [10 Marks]
Answer:
1. सुमित्रानंदन पंत को तब समझ में आया कि 'वसुधा रत्न प्रसविनो' (पृथ्वी रत्नों को उत्पन्न करने वाली है) जब उन्होंने प्रकृति के नियम और बीज से पौधे तथा फसल के उगने के चक्र को अनुभव किया।
2. बचपन में कवि ने नादानी वश पैसों (अल्फांसो / सिक्कों) को यह सोचकर मिट्टी में बो दिया था कि शायद इससे पैसों का पेड़ उग आएगा और धन की प्राप्ति होगी।
3. बचपन के अनुभव में बाल-সুলভ नासमझी और लालसा थी कि धन आसानी से उग सके, किंतु कुछ न मिलने पर निराशा हुई थी।
4. वयस्क होने पर उन्हें प्रकृति की उदारता और श्रम के महत्व का ज्ञान हुआ कि धरती केवल धन नहीं बल्कि अन्न, फल और जीवन रूपी अमूल्य रत्न पैदा करती है।
5. कवि ने प्रकृति के इस उपकार और मनुष्य के श्रम के आपसी संबंध को बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है।
Teacher's Note:
a) पंत जी की प्रकृति प्रेम से जुड़ी इस कविता के दोनों पक्षों (बचपन की नादानी और परिपक्व ज्ञान) का वर्णन करें।
b) वसुधा के उपकार और मानवीय श्रम के मूल्य को स्पष्ट करें।
सारा आकाश (Sara Aakash)
Question 10
"मैंने तो कभी भी नहीं सोचा था कि तुम्हारे पैरों की बेड़ी बनकर आऊँगी। जब भी तुम पाओ कि मैं तुम्हें घसीट रही हूँ तो निर्मम होकर रास्ते की बाधा की तरह मुझे छोड़कर अपने को अलग कर लेना। मेरी चीख-पुकारों पर ध्यान मत देना।"
(i) 'पैरों की बेड़ी' का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए। [1 Mark]
Answer:
'पैरों की बेड़ी' का अभिप्राय ऐसी बाधा या बंधन से है जो किसी की प्रगति, स्वतंत्रता और आगे बढ़ने के मार्ग में रुकावट बन जाए। यहाँ प्रभा अपने आपको Samar (समर) के जीवन की प्रगति में बाधा मान रही है।
Teacher's Note:
a) उपन्यास के पात्रों की मनोदशा और संवाद के मर्म को समझें।
b) बेड़ी शब्द यहाँ प्रतीकात्मक रूप में प्रयुक्त हुआ है।
(ii) प्रभा क्यों कह रही है कि 'निर्मम होकर रास्ते की बाधा की तरह मुझे छोड़कर अपने को अलग कर लेना'? इस कथन से उसके किस मनोभाव का पता चलता है? [2 Marks]
Answer:
1. प्रभा ऐसा इसलिए कह रही है क्योंकि वह समर के भविष्य और उसकी पढ़ाई-लिखाई को लेकर चिंतित है तथा उसे लगता है कि उसकी उपस्थिति समर पर बोझ बन रही है।
2. इस कथन से प्रभा के महान त्याग, परोपकार, समर्पण और अपनी गरिमा के प्रति सचेत होने के मनोभाव का पता चलता है।
Teacher's Note:
a) प्रभा के चरित्र की निष्कपटता और त्याग को रेखांकित करें।
b) समर के प्रति उसकी निःस्वार्थ भावना को स्पष्ट करें।
(iii) प्रभा के चरित्र की किन्हीं दो विशेषताओं का वर्णन कीजिए। [2 Marks]
Answer:
1. **सहिष्णुता और त्याग:** प्रभा हर प्रकार के पारिवारिक तानों और अपमान को चुपचाप सहती है और समर की खुशी के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार रहती है।
2. **स्वाभिमानी और समझदार:** वह परिस्थितियों से घबराती नहीं है बल्कि समझदारी से परिवार को जोड़ने और समर को समझने का प्रयास करती है।
Teacher's Note:
a) उपन्यास के आधार पर चरित्र की मुख्य विशेषताओं को बिंदुवार लिखें।
b) उदाहरण या प्रसंग का संकेत अवश्य दें।
(iv) इस गद्यांश के माध्यम से उपन्यासकार 'राजेंद्र यादव' समर और प्रभा के दांपत्य जीवन के किस निर्णायक मोड़ को चित्रित कर रहे हैं? विस्तार से स्पष्ट कीजिए। [5 Marks]
Answer:
1. इस गद्यांश के माध्यम से उपन्यासकार राजेंद्र यादव समर और प्रभा के दांपत्य जीवन के उस संवेदनशील और निर्णायक मोड़ को चित्रित कर रहे हैं जहाँ उनके बीच गलतफहमियाँ मिटने लगती हैं।
2. शुरुआती कड़वाहट और अजनबीपन के बाद अब दोनों एक-दूसरे की मजबूरियों और भावनाओं को समझने लगे हैं।
3. प्रभा का यह कथन उनके रिश्ते में उपजे गाढ़े प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति अगाध त्याग की पराकाष्ठा को दिखाता है।
4. समर जो अब तक प्रभा को अपने जीवन की रुकावट समझता था, उसके इस त्याग से झकझोर उठता है और उसके मन में प्रभा के प्रति सम्मान जगता है।
5. यह मोड़ उनके रूखे और तनावपूर्ण दांपत्य जीवन को एक नई परिपक्वता और मजबूती प्रदान करता है।
Teacher's Note:
a) उपन्यास के केंद्रीय संघर्ष और उसके समाधान की दिशा को स्पष्ट करें।
b) समर और प्रभा के विकासशील रिश्ते पर प्रकाश डालें।
Question 11
उपन्यास 'सारा आकाश' में रमा को लिखा गया प्रभा का पत्र केवल एक स्त्री के व्यक्तिगत सपने का नहीं, बल्कि हजारों भारतीय मध्यमवर्गीय महिलाओं की दबी हुई और अस्वीकृत आवाज़ का प्रतीक है। उपन्यास के माध्यम से इस कथन की पुष्टि कीजिए। [10 Marks]
Answer:
1. 'सारा आकाश' उपन्यास में प्रभा द्वारा रमा को लिखा गया पत्र केवल दो महिलाओं के बीच की बात नहीं है, बल्कि यह पुरुष-प्रधान समाज में पिस रही हर भारतीय मध्यमवर्गीय स्त्री की पीड़ा की अभिव्यक्ति है।
2. इस पत्र में एक ऐसी नारी की घुटन और छटपटाहट है जिसे परिवार और समाज में अपनी इच्छा व्यक्त करने की स्वतंत्रता नहीं मिलती।
3. समाज की रूढ़िवादिता और संयुक्त परिवार की घुटन भरी चक्की में कैसे एक पढ़ी-लिखी स्त्री के अरमान घुट जाते हैं, यह इस पत्र से झलकता है।
4. यह पत्र दबी हुई और अस्वीकृत आवाज का प्रतीक है जो चुपचाप सब कुछ सहने के बजाय आत्म-सम्मान के साथ जीने की छटपटाहट को दर्शाता है।
5. राजेंद्र यादव ने इसके माध्यम से नारी मुक्ति और उसके अधिकारों की मुखर पैरवी की है।
Teacher's Note:
a) उपन्यास के इस महत्वपूर्ण प्रसंग का सामाजिक और नारीवादी संदर्भ स्पष्ट करें।
b) मध्यमवर्गीय समाज की विसंगतियों को रेखांकित करें।
Question 12
'अम्मा के व्यवहार एवं स्वभाव की कटुता परिवार के आर्थिक अभाव तथा परंपरावादी सोच का परिणाम थी।' इस कथन के आलोक में 'अम्मा' का चरित्र - चित्रण कीजिए। [10 Marks]
Answer:
1. 'सारा आकाश' की 'अम्मा' उपन्यास की एक ऐसी पात्र हैं जिनका स्वभाव प्रारंभ में अत्यंत कठोर और कटु प्रतीत होता है, किंतु इसके पीछे उनका कड़ा संघर्षशील जीवन और तंगहाली जिम्मेदार है।
2. आर्थिक तंगी और बड़े परिवार की जिम्मेदारी के कारण अम्मा हमेशा चिंतित और चिड़चिड़ी रहती हैं, जिससे उनका व्यवहार परिवार के सदस्यों को चुभता है।
3. वे परंपरावादी सोच से ग्रसित हैं और पुराने रीति-रिवाजों को ही परिवार को जोड़े रखने का एकमात्र साधन मानती हैं।
4. परंतु अम्मा के दिल में परिवार के प्रति दुर्भावना नहीं है; वे अंदर से ममतामयी हैं, किंतु परिस्थितियों ने उन्हें कठोर बना दिया है।
5. उपन्यास के अंत तक आते-आते उनकी सोच में बदलाव भी दिखाई देता है, जो उनके चरित्र की यथार्थवादिता को सिद्ध करता है।
Teacher's Note:
a) अम्मा के चरित्र का मूल्यांकन करते समय सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को आधार बनाएं।
b) उनकी कठोरता और ममता दोनों पक्षों का संतुलित वर्णन करें।
आषाढ़ का एक दिन (Aashad Ka Ek Din)
Question 13
"मैंने इसलिए तुमसे यहाँ से जाने के लिए नहीं कहा था।... मैंने इसलिए भी नहीं कहा था कि तुम जाकर कहीं का शासन-भार संभालो। फिर भी जब तुमने ऐसा किया, मैंने तुम्हें शुभकामनाएँ दीं- यद्यपि प्रत्यक्ष तुमने वे शुभकामनाएँ ग्रहण नहीं कीं।"
(i) उक्त कथन के वक्ता और श्रोता कौन हैं? [1 Mark]
Answer:
वक्ता: मल्लिका
श्रोता: कालिदास
Teacher's Note:
a) नाटक के प्रमुख पात्रों की पहचान स्पष्ट होनी चाहिए।
b) यह संवाद मल्लिका और कालिदास के बीच का है।
(ii) उक्त कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए। [2 Marks]
Answer:
1. यह संदर्भ उस समय का है जब कालिदास उज्जैन चले जाते हैं, राजकवि बन जाते हैं और राजसत्ता से जुड़ जाते हैं।
2. मल्लिका उन्हें अपनी रचनात्मकता और प्रकृति से दूर जाने से रोकना चाहती थी, किंतु कालिदास महत्वाकांक्षा के वशीभूत होकर चले जाते हैं।
Teacher's Note:
a) नाटक की कथावस्तु के इस महत्वपूर्ण मोड़ को स्पष्ट करें।
b) कालिदास के कालिदास से राजकवि बनने की यात्रा का संदर्भ दें।
(iii) इन पंक्तियों के आधार पर वक्ता की मनःस्थिति का वर्णन कीजिए। [2 Marks]
Answer:
1. मल्लिका की मनःस्थिति अत्यंत व्यथित, आहत और अकेली है।
2. उसके मन में कालिदास के प्रति अगाध प्रेम है, किंतु उनके द्वारा राजमोह में फँसकर उसे और अपनी सृजनशीलता को पीछे छोड़ने का गहरा क्षोभ भी है।
Teacher's Note:
a) मल्लिका के आंतरिक दर्द और वियोग को समझें।
b) प्रेम और त्याग की उसकी मनोदशा को दर्शाएं।
(iv) "यद्यपि प्रत्यक्ष तुमने वे शुभकामनाएँ ग्रहण नहीं कीं।" वक्ता के मन में ये भाव किसके लिए और क्यों उत्पन्न हुए? समझकर लिखिए। [5 Marks]
Answer:
1. मल्लिका के मन में ये भाव कालिदास के लिए उत्पन्न हुए क्योंकि जब कालिदास उज्जैन की राजसत्ता और वैभव की ओर आकर्षित होकर जा रहे थे, तब मल्लिका ने भले ही उन्हें रोका न हो, परंतु उनकी सफलता की कामना की थी।
2. कालिदास ने उस प्रेम और शुभकामना को सीधे तौर पर स्वीकार नहीं किया क्योंकि वे अपने अहम् और महत्वाकांक्षा के जाल में उलझ चुके थे।
3. मल्लिका यह जानती थी कि राजसत्ता का यह आकर्षण कालिदास की असली सर्जक आत्मा को मार देगा।
4. यह कथन मल्लिका के त्याग और उस टूटे हुए विश्वास को दर्शाता है जो कालिदास के बदलने से उपजा था।
5. इससे नाटककार मोहन राकेश ने प्रेम और राजसत्ता के संघर्ष को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से चित्रित किया है।
Teacher's Note:
a) नाटक के केंद्रीय द्वंद्व (प्रेम बनाम सत्ता) को ध्यान में रखकर उत्तर लिखें।
b) मल्लिका की पीड़ा और कालिदास की उदासीनता का विश्लेषण करें।
Question 14
'मल्लिका जहाँ एक ओर निःस्वार्थ, भावुक और आदर्श प्रेमिका के रूप में उभरती है, वहीं दूसरी ओर परिस्थितियों से संघर्ष करती हुई एक स्वाभिमानी स्त्री भी दिखाई देती है।' इस कथन के आधार पर मल्लिका का चरित्र - चित्रण कीजिए। [10 Marks]
Answer:
1. मोहन राकेश रचित नाटक 'आषाढ़ का एक दिन' की नायिका मल्लिका भारतीय नारी के त्याग, समर्पण और अगाध प्रेम की प्रतिमूर्ति है।
2. वह कालिदास से निस्वार्थ प्रेम करती है और उनकी कविताओं की प्रेरणा स्रोत है, बिना किसी अधिकार की लालसा के उनके उत्थान की कामना करती है।
3. किंतु वह केवल एक कमज़ोर प्रेमिका नहीं है; कठिन परिस्थितियों और माता अम्बिका के ताने सुनने के बावजूद वह एक स्वाभिमानी स्त्री के रूप में जीवन जीती है।
4. कालिदास के जाने के बाद भी वह अपने आत्मसम्मान को बनाए रखती है और विकट परिस्थितियों में भी टूटती नहीं है।
5. उसका चरित्र प्रेम और स्वाभिमान का एक अनूठा संगम है, जो पाठकों के मन में गहरी सहानुभूति जगाता है।
Teacher's Note:
a) मल्लिका के चरित्र के दोनों पक्षों (प्रेमिका और स्वाभिमानी नारी) को समान महत्व दें।
b) नाटक के संवादों और घटनाओं के आधार पर उत्तर को पुष्ट करें।
Question 15
'आषाढ़ का एक दिन' नाटक में प्रेम और राजसत्ता के बीच के द्वंद्व को किस प्रकार चित्रित किया गया है? इस द्वंद्व में कालिदास की त्रासदी को स्पष्ट कीजिए। [10 Marks]
Answer:
1. 'आषाढ़ का एक दिन' नाटक का केंद्रीय संघर्ष प्रेम और राजसत्ता के बीच का है, जहाँ एक तरफ प्रकृति, कला और सहज प्रेम है तो दूसरी तरफ सत्ता, वैभव और महत्वाकांक्षा है।
2. कालिदास जो प्रकृति की गोद में रहकर महान सर्जक बनते हैं, उज्जैन जाकर राजसत्ता के आकर्षण में फँस जाते हैं और उनकी रचनात्मकता कुंठित हो जाती है।
3. कालिदास की त्रासदी यह है कि वे राजसत्ता के पद और सम्मान को तो प्राप्त कर लेते हैं, किंतु अपनी सर्जक आत्मा, अपनी मौलिकता और मल्लिका के सच्चे प्रेम को खो देते हैं।
4. वे दोनों दुनिया (ग्राम्य जीवन और राजदरबार) के बीच त्रिशंकु बन जाते हैं - न वे राजा के रूप में पूर्ण हो पाते हैं और न ही कवि के रूप में।
5. यह नाटक इस सत्य को उजागर करता है कि सत्ता और भौतिक सुख-सुविधाएँ मनुष्य की अंतरात्मा और सृजनधर्मिता को नष्ट कर देती हैं।
Teacher's Note:
a) नाटक के दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक पक्ष को गहराई से समझकर लिखें।
b) कालिदास की आंतरिक विफलता और त्रासदी के कारणों को स्पष्ट करें।
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