ICSE Class 10 Hindi Sahitya Sagar Chapter 6.2 Bade Ghar Ki Beti Solutions

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Detailed Sahitya Sagar Chapter 6.2 Bade Ghar Ki Beti ICSE Solutions for Class 10 Hindi

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Class 10 Hindi Sahitya Sagar Chapter 6.2 Bade Ghar Ki Beti ICSE Solutions PDF

 

Question क-i: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
जसोदा हरि पालने झुलावै।
हलरावै, दुलराइ मल्हावै, जोइ-सोइ कछु गावै॥
मेरे लाल कौं आउ निंदरिया, काहे न आनि सुवावै।
तू काहैं नहिं बेगहिं आवै, तोकौं कान्ह बुलावै॥
कबहुँ पलक हरि मूँदि लेत हैं, कबहुँ अधर फरकावै।
सोवत जानि मौन है कै रहि, करि-करि सैन बतावै॥
इहिं अंतर अकुलाइ उठे हरि, जसुमति मधुरै गावै।
जो सुख सूर अमर-मुनि दुरलभ, सो नँद-भामिनि पावै॥
कौन किसको सुलाने का प्रयास कर रहा है?
Answer: प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने माता यशोदा का कृष्ण के प्रति प्यार को प्रदर्शित किया है। यहाँ पर माता यशोदा कृष्ण को सुलाने का प्रयास कर रही है।
In simple words: माता यशोदा अपने पुत्र कृष्ण को पालने में झुलाकर, पुचकारकर और लोरी गाकर सुलाने का प्रयास कर रही हैं।

🎯 Exam Tip: ऐसे पद्यांश-आधारित प्रश्नों में, मुख्य भाव और प्रमुख पात्रों के संबंधों को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण होता है।

 

Question क-ii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
जसोदा हरि पालने झुलावै।
हलरावै, दुलराइ मल्हावै, जोइ-सोइ कछु गावै॥
मेरे लाल कौं आउ निंदद्रिया, काहे न आनि सुवावै।
तू काहैं नहिं बेगहिं आवै, तोकौं कान्ह बुलावै॥
कबहुँ पलक हरि मूँदि लेत हैं, कबहुँ अधर फरकावै।
सोवत जानि मौन है कै रहि, करि-करि सैन बतावै॥
इहिं अंतर अकुलाइ उठे हरि, जसुमति मधुरै गावै।
जो सुख सूर अमर-मुनि दुरलभ, सो नँद-भामिनि पावै॥
यशोदा बालक कृष्ण को सुलाने के लिए क्या-क्या यत्न कर रही है?
Answer: यशोदा जी बालक कृष्ण को सुलाने के लिए पलने में झुला रही हैं। कभी प्यार करके पुचकारती हैं और लोरी गाती रहती है।
In simple words: यशोदा कृष्ण को सुलाने के लिए उन्हें पालने में झुलाती हैं, दुलारती हैं, और मधुर गीत गाती हैं।

🎯 Exam Tip: कविताओं के अर्थ को समझने के लिए पंक्तियों के सीधे अर्थ पर ध्यान दें और उसमें व्यक्त भावनाओं को पहचानें।

 

Question क-iii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
जसोदा हरि पालने झुलावै।
हलरावै, दुलराइ मल्हावै, जोइ-सोइ कछु गावै॥
मेरे लाल कौं आउ निंद्रिया, काहे न आनि सुवावै।
तू काहें नहिं बेगहिं आवै, तोकौं कान्ह बुलावै ॥
कबहुँ पलक हरि मूँदि लेत हैं, कबहुँ अधर फरकावै।
सोवत जानि मौन है कै रहि, करि-करि सैन बतावै॥
इहिं अंतर अकुलाइ उठे हरि, जसुमति मधुरै गावै।
जो सुख सूर अमर-मुनि दुरलभ, सो नँद-भामिनि पावै॥
कृष्ण को सोता हुआ जानकर यशोदा क्या करती हैं?
Answer: कृष्ण को सोते समझकर यशोदा माता चुप हो जाती हैं और दूसरी गोपियों को भी संकेत करके समझाती हैं कि वे सब भी चुप रहे।
In simple words: कृष्ण को सोते हुए देखकर यशोदा शांत हो जाती हैं और दूसरों को भी शांत रहने का इशारा करती हैं, ताकि उनकी नींद न टूटे।

🎯 Exam Tip: काव्य के भीतर छिपे हुए सूक्ष्म भावों और माता के वात्सल्य को पहचानना उत्तर लिखने में सहायता करता है।

 

Question क-iv: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
जसोदा हरि पालने झुलावै।
हलरावै, दुलराइ मल्हावै, जोइ-सोइ कछु गावै॥
मेरे लाल कौं आउ निंदरिया, काहे न आनि सुवावै।
तू काहें नहिं बेगहिं आवै, तोकौं कान्ह बुलावै॥
कबहुँ पलक हरि मूँदि लेत हैं, कबहुँ अधर फरकावै।
सोवत जानि मौन है कै रहि, करि-करि सैन बतावै॥
इहिं अंतर अकुलाइ उठे हरि, जसुमति मधुरै गावै।
जो सुख सूर अमर-मुनि दुरलभ, सो नँद-भामिनि पावै॥
सूरदास के अनुसार यशोदा कौन-सा सुख पा रही हैं?
Answer: सूरदास जी कहते हैं कि जो सुख देवताओं तथा मुनियों के लिये भी दुर्लभ है, वही श्याम को बालरूप में पाकर लालन-पालन तथा प्यार करने का सुख यशोदा प्राप्त कर रही हैं।
In simple words: सूरदास के अनुसार, यशोदा वह अनुपम सुख प्राप्त कर रही हैं जो देवताओं और मुनियों के लिए भी दुर्लभ है, क्योंकि वे बाल कृष्ण का लालन-पालन और प्रेम कर रही हैं।

🎯 Exam Tip: कवि के नाम का उल्लेख करते हुए पद्यांश के मूल संदेश को स्पष्ट करना उत्तर को अधिक प्रभावी बनाता है।

 

Question ख-i: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
खीजत जात माखन खात।
अरुन लोचन, भौंह टेढ़ी, बार-बार जँभात॥
कबहुँ रुनझुन चलत घुटुरुनि, धूरि धूसर गात।
कबहुँ झुक के अलक खचत, नैन जल भरि जात॥
कबहुँ तोतरे बोल बोलत, कबहुँ बोलत तात।
सूर हरि की निरखि सोभा, निमिष तजत न मात॥
इस दोहे में सूरदास जी ने क्या वर्णन किया है?
Answer: इस दोहे में सूरदास जी ने श्रीकृष्ण के अनुपम बाल सौन्दर्य का वर्णन किया है।
In simple words: इस दोहे में सूरदास जी ने बाल कृष्ण के मनमोहक रूप और उनकी बाल लीलाओं का सुंदर चित्रण किया है।

🎯 Exam Tip: पद्यांश के केंद्रीय विषय या भाव को एक वाक्य में संक्षेप में प्रस्तुत करना अच्छे अंक दिलाता है।

 

Question ख-ii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
खीजत जात माखन खात।
अरुन लोचन, भौंह टेढ़ी, बार-बार जँभात॥
कबहुँ रुनझुन चलत घुटुरुनि, धूरि धूसर गात।
कबहुँ झुक के अलक खैचत, नैन जल भरि जात॥
कबहुँ तोतरे बोल बोलत, कबहुँ बोलत तात।
सूर हरि की निरखि सोभा, निमिष तजत न मात॥
बाल कृष्ण कैसे चलते हैं?
Answer: बाल कृष्ण घुटनों के बल चलते हैं। उनके पैरों में घुंघरुओं की आवाज़ आती है।
In simple words: बाल कृष्ण घुटनों के बल चलते हैं, जिससे उनके पैरों में बँधे घुँघरू मधुर ध्वनि करते हैं।

🎯 Exam Tip: पद्यांश में वर्णित क्रियाओं और वर्णनों पर ध्यान केंद्रित करके सटीक उत्तर दें।

 

Question ख-iii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
खीजत जात माखन खात।
अरुन लोचन, भौंह टेढ़ी, बार-बार जँभात॥
कबहुँ रुनझुन चलत घुटुरुनि, धूरि धूसर गात।
कबहुँ झुक के अलक खैचत, नैन जल भरि जात ॥
कबहुँ तोतरे बोल बोलत, कबहुँ बोलत तात।
सूर हरि की निरखि सोभा, निमिष तजत न मात॥
बाल कृष्ण के रूप सौंदर्य का वर्णन कीजिए?
Answer: बाल कृष्ण बहुत सुंदर हैं। उनके नेत्र सुंदर हैं, भौंहें टेढ़ी हैं तथा वे बार-बार जम्हाई ले रहे हैं। उनका शरीर धूल में सना है।
In simple words: बाल कृष्ण अत्यंत मनमोहक हैं; उनके लाल नेत्र, टेढ़ी भौंहें, बार-बार जम्हाई लेना और धूल से सना शरीर उनके सौंदर्य को बढ़ा रहा है।

🎯 Exam Tip: सौंदर्य वर्णन वाले प्रश्नों में पद्यांश से सीधे विशेषण और क्रियाएँ उठाकर उनका संयोजन करें।

 

Question ख-iv: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
खीजत जात माखन खात।
अरुन लोचन, भौंह टेढ़ी, बार-बार जँभात॥
कबहुँ रुनझुन चलत घुटुरुनि, धूरि धूसर गात।
कबहुँ झुक के अलक खचत, नैन जल भरि जात ॥
कबहुँ तोतरे बोल बोलत, कबहुँ बोलत तात।
सूर हरि की निरखि सोभा, निमिष तजत न मात॥
बाल कृष्ण कैसी जबान में बोलते हैं?
Answer: बाल कृष्ण तोतली जबान में बोलते हैं।
In simple words: बाल कृष्ण मधुर और अस्पष्ट, यानी तोतली भाषा में बात करते हैं।

🎯 Exam Tip: चरित्रों के संवाद शैली से संबंधित प्रश्नों में, सटीक वर्णन प्रदान करना आवश्यक है।

 

Question ग-i: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
मैया, मैं तौ चंद-खिलौना लैहौं।
जैहौं लोटि धरनि पर अबहीं, तेरी गोद न ऐहौं॥
सुरभी कौ पय पान न करिहौं, बेनी सिर न गुहैहौं।
है हौं पूत नंद बाबा को, तेरौ सुत न कहैहौं॥
आगैं आउ, बात सुनि मेरी, बलदेवहि न जनैहौं।
हँसि समुझावति, कहति जसोमति, नई दुलहिया दैहौं॥
तेरी सौ, मेरी सुनि मैया, अबहिं बियाहन जैहौं।
सूरदास है कुटिल बराती, गीत सुमंगल गैहौं॥
उपर्युक्त पद का प्रसंग स्पष्ट कीजिए?
Answer: उपर्युक्त पद महाकवि सूरदास द्वारा रचित है। इस पद में बाल कृष्ण अपनी यशोदा माता से चंद्रमा रूपी खिलौना लेने की हठ कर रहे हैं उसका वर्णन किया गया है।
In simple words: यह पद सूरदास द्वारा रचित है, जिसमें बाल कृष्ण माँ यशोदा से चाँद रूपी खिलौना पाने की ज़िद कर रहे हैं।

🎯 Exam Tip: पद्यांश के कवि और केंद्रीय विषय का उल्लेख करना प्रसंग स्पष्टीकरण के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question ग-ii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
मैया, मैं तौ चंद-खिलौना लैहौं।
जैहौं लोटि धरनि पर अबहीं, तेरी गोद न ऐहौं॥
सुरभी कौ पय पान न करिहौं, बेनी सिर न गुहैहौं।
है हौं पूत नंद बाबा को, तेरौ सुत न कहैहौं॥
आगैं आउ, बात सुनि मेरी, बलदेवहि न जनैहौं।
हँसि समुझावति, कहति जसोमति, नई दुलहिया दैहौं॥
तेरी सौ, मेरी सुनि मैया, अबहिं बियाहन जैहौं।
सूरदास है कुटिल बराती, गीत सुमंगल गैहौं॥
अपनी हठ पूरी न होने पर बाल कृष्ण अपनी माता को क्या-क्या कह रहे हैं?
Answer: अपनी हठ पूरी न होने पर बाल कृष्ण अपनी माता को कहते हैं कि जब तक उन्हें चाँद रूपी खिलौना नहीं मिल जाता तब तक वह न तो भोजन ग्रहण करेंगे, न चोटी गुँथवाएगे, न मोतियों की माला पहनेंगे, न उनकी गोद में आएँगे, न ही नंद बाबा और यशोदा माता के बेटे कहलाएँगे।
In simple words: चाँद का खिलौना न मिलने पर बाल कृष्ण अपनी माँ को धमकी देते हैं कि वे न खाएँगे, न चोटी गुँथवाएँगे, न माला पहनेंगे और न ही नंद बाबा-यशोदा के पुत्र कहलाएँगे।

🎯 Exam Tip: बाल हठ का वर्णन करते समय सभी मुख्य बिन्दुओं को सूचीबद्ध करना महत्वपूर्ण है ताकि कोई भी शर्त छूटे नहीं।

 

Question ग-iii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
मैया, मैं तौ चंद-खिलौना लैhौं।
जैहौं लोटि धरनि पर अबहीं, तेरी गोद न ऐहौं॥
सुरभी कौ पय पान न करिहौं, बेनी सिर न गुहैहौं।
है हौं पूत नंद बाबा को, तेरौ सुत न कहैहौं॥
आगैं आउ, बात सुनि मेरी, बलदेवहि न जनैहौं।
हँसि समुझावति, कहति जसोमति, नई दुलहिया दैहौं॥
तेरी सौ, मेरी सुनि मैया, अबहिं बियाहन जैहौं॥
सूरदास है कुटिल बराती, गीत सुमंगल गैहौं॥
यशोदा माता श्रीकृष्ण को मनाने के लिए क्या कहती है?
Answer: यशोदा माता श्रीकृष्ण को मनाने के लिए उनके कान में कहती है, तुम ध्यान से सुनो। कहीं बलराम न सुन ले। तुम तो मेरे चंदा हो और मैं तुम्हारे लिए सुंदर दुल्हन लाऊँगी।
In simple words: यशोदा कृष्ण को समझाते हुए कान में कहती हैं कि वे उनके चाँद हैं और वे उनके लिए सुंदर दुल्हन लाएंगी, इस बात को बलराम से छुपाने का इशारा भी करती हैं।

🎯 Exam Tip: माँ के वात्सल्य और मनावन की युक्ति को स्पष्ट और संक्षिप्त शब्दों में व्यक्त करें।

 

Question ग-iv: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
मैया, मैं तौ चंद-खिलौना लैहौं।
जैहौं लोटि धरनि पर अबहीं, तेरी गोद न ऐहौं॥
सुरभी कौ पय पान न करिहौं, बेनी सिर न गुहैहौं।
है हौं पूत नंद बाबा को, तेरौ सुत न कहैहौं॥
आगैं आउ, बात सुनि मेरी, बलदेवहि न जनैहौं।
हँसि समुझावति, कहति जसोमति, नई दुलहिया दैहौं॥
तेरी सौ, मेरी सुनि मैया, अबहिं बियाहन जैहौं॥
सूरदास है कुटिल बराती, गीत सुमंगल गैहौं॥
माँ यशोदा की बात सुनकर श्रीकृष्ण की क्या प्रतिक्रिया हुई?
Answer: माँ यशोदा की बात सुनकर श्रीकृष्ण कहते हैं माता तुझको मेरी सौगन्ध। तुम मुझे अभी ब्याहने चलो।
In simple words: यशोदा की बात सुनकर श्रीकृष्ण कहते हैं कि उन्हें अपनी माँ की कसम है और वे अभी शादी करने चलना चाहते हैं।

🎯 Exam Tip: पात्रों की प्रतिक्रिया को सटीक रूप से व्यक्त करें, खासकर जब वे किसी प्रस्ताव पर सहमत हों या कोई नई मांग रखें।

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ICSE Solutions Class 10 Hindi Sahitya Sagar Chapter 6.2 Bade Ghar Ki Beti

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