NCERT Solutions for Class 10 Hindi: Ekanki Sanchay Chapter 01 Sanskar Aur Bhavna
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Practice Class 10 Hindi Solutions: Ekanki Sanchay Chapter 01 Sanskar Aur Bhavna
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प्रश्न क-i: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : अपराध और किसका है। सब मुझी को दोष देते हैं। मिसरानी कह रही थी बहू किसी की भी हो, पर अपने प्राण देकर उसने पति को बचा लिया। यहाँ पर किसके कौन-से अपराध की बात हो रही है?
Answer: यहाँ पर अतुल और अविनाश की माँ खुद के रुढ़िवादी विचारों तथा जात-पात के संस्कारों को मानने के अपराध की बात कर रही है।
In simple words: इस गद्यांश में, अविनाश की माँ अपने बेटे अतुल और अविनाश के प्रति अपने रुढ़िवादी सोच और जात-पात के भेदों को मानने के कारण हुए अपने ही अपराध का जिक्र कर रही हैं।
🎯 Exam Tip: गद्यांश आधारित प्रश्नों में, आपको दिए गए अंश को ध्यान से पढ़ना चाहिए और मुख्य विचारों तथा पात्रों की भावनाओं को पहचानना चाहिए।
प्रश्न क-ii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : अपराध और किसका है। सब मुझी को दोष देते हैं। मिसरानी कह रही थी बहू किसी की भी हो, पर अपने प्राण देकर उसने पति को बचा लिया। माँ ने अविनाश की बहू को क्यों नहीं अपनाया? समझाकर लिखिए।
Answer: माँ एक हिन्दू वृद्धा है। वे हिन्दू समाज की रूढ़िवादी संस्कारों से ग्रस्त हैं। वे संस्कारों की दास हैं। एक मध्यम परिवार में अपने पुराने संस्कारों की रक्षा करना धर्म माना जाता है। माँ भी वहीं करना चाहती थी। उसका बड़ा बेटा अविनाश अपनी माँ की इच्छा के विरुद्ध एक बंगाली लड़की से प्रेम-विवाह कर आया परन्तु माँ ने अपनी रूढ़िवादी मानसिकता के कारण विजातीय बहू को नहीं अपनाया।
In simple words: माँ ने अविनाश की बंगाली बहू को इसलिए नहीं अपनाया क्योंकि वे पुरानी रूढ़िवादी सोच और जातिगत भेदभाव में विश्वास रखती थीं, और बहू उनके जाति-धर्म से बाहर की थी।
🎯 Exam Tip: पात्रों के चरित्र और उनके फैसलों के पीछे की प्रेरणा को समझना महत्वपूर्ण है। यहाँ, माँ की रूढ़िवादी मानसिकता को स्पष्ट करना चाहिए।
प्रश्न क-iii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : अपराध और किसका है। सब मुझी को दोष देते हैं। मिसरानी कह रही थी बहू किसी की भी हो, पर अपने प्राण देकर उसने पति को बचा लिया। बहू ने किसे और किस बीमारी से प्राण देकर बचा लिया?
Answer: बहू ने अपने पति अविनाश को हैजे की बीमारी से प्राण देकर बचा लिया। हैजे की बीमारी को छुआ-छूत की बीमारी माना जाता है।
In simple words: बहू ने अपने पति अविनाश को हैजे की जानलेवा बीमारी से अपनी जान जोखिम में डालकर बचाया, क्योंकि उस समय हैजा एक छुआ-छूत की बीमारी मानी जाती थी।
🎯 Exam Tip: कहानी के महत्वपूर्ण मोड़ और पात्रों के बलिदान को याद रखना चाहिए। यह घटना बहू के निस्वार्थ प्रेम को दर्शाती है।
प्रश्न क-iv: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : अपराध और किसका है। सब मुझी को दोष देते हैं। मिसरानी कह रही थी बहू किसी की भी हो, पर अपने प्राण देकर उसने पति को बचा लिया। बहू किसकी, कौन और किस जाति की थी?
Answer: बहू अविनाश की पत्नी थी जो की विजातीय (बंगाली) महिला थी।
In simple words: बहू अविनाश की पत्नी थी और वह दूसरी जाति की एक बंगाली महिला थी, जिसके कारण परिवार ने उसे स्वीकार नहीं किया था।
🎯 Exam Tip: पात्रों की पहचान और उनके सामाजिक संदर्भ को समझना कहानी के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न ख-i: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : काश कि मैं निर्मम हो सकती, काश कि मैं संस्कारों की दासता से मुक्त हो पाती तो कुल धर्म और जाति का भूत मुझे तंग न करता और मैं अपने बेटे से न बिछुड़ती। स्वयं उसने मुझसे कहा था, संस्कारों की दासता सबसे भयंकर शत्रु है। कौन संस्कारों की दासता से मुक्त होने में विफल रहा और क्यों?
Answer: यहाँ पर अतुल और अविनाश की माँ हिन्दू समाज की रूढ़िवादी संस्कारों से ग्रस्त हैं। वे संस्कारों की दास हैं। एक मध्यम परिवार में अपने पुराने संस्कारों की रक्षा करना धर्म माना जाता है। इसलिए माँ संस्कारों की दासता से मुक्त होने में विफल रही।
In simple words: अविनाश की माँ अपनी पुरानी, रूढ़िवादी जातिगत परंपराओं से बंधी हुई थीं और वे इनसे मुक्त नहीं हो पाईं, जिस कारण उन्हें अपने बेटे से अलग रहना पड़ा।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न माँ के आंतरिक संघर्ष और सामाजिक मान्यताओं के प्रति उनकी अधीनता को उजागर करता है। उनकी असमर्थता के कारणों को स्पष्ट करें।
प्रश्न ख-ii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : काश कि मैं निर्मम हो सकती, काश कि मैं संस्कारों की दासता से मुक्त हो पाती तो कुल धर्म और जाति का भूत मुझे तंग न करता और मैं अपने बेटे से न बिछुड़ती। स्वयं उसने मुझसे कहा था, संस्कारों की दासता सबसे भयंकर शत्रु है। माँ ने अपने विचारों के प्रति क्या पश्चाताप किया है?
Answer: माँ ने अपने रूढ़ीवादी विचारों के कारण अपने बेटे-बहू से बिछड़ने का पश्चाताप किया है।
In simple words: माँ को इस बात का गहरा अफसोस है कि उनकी पुरानी सोच और जातिगत भेदभाव के कारण उन्हें अपने प्यारे बेटे और बहू से दूर रहना पड़ा।
🎯 Exam Tip: पात्रों के पश्चाताप को समझना उनकी भावनात्मक गहराई को दर्शाता है। यहाँ माँ के बदलते दृष्टिकोण को पहचाना जाना चाहिए।
प्रश्न ख-iii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : काश कि मैं निर्मम हो सकती, काश कि मैं संस्कारों की दासता से मुक्त हो पाती तो कुल धर्म और जाति का भूत मुझे तंग न करता और मैं अपने बेटे से न बिछुड़ती। स्वयं उसने मुझसे कहा था, संस्कारों की दासता सबसे भयंकर शत्रु है। अतुल और उमा माँ के किस निर्णय से प्रसन्न हैं?
Answer: जब माँ को अविनाश की पत्नी की बीमारी की सूचना मिलती है तब उसका हृदय मातृत्व की भावना से भर उठता है। उसे इस बात का आभास है कि यदि बहू को कुछ हो गया तो अविनाश नहीं बचेगा। माँ को पता है कि अविनाश को बचाने की शक्ति केवल उसी में है। इसलिए वह प्राचीन संस्कारों के बाँध को तोड़कर अपने बेटे के पास जाना चाहती है। इस प्रकार बेटे के घर वापसी के निर्णय से अतुल और उमा प्रसन्न हैं।
In simple words: जब माँ ने बहू की बीमारी के कारण अपने रूढ़िवादी विचारों को छोड़कर बेटे-बहू को अपनाने का निर्णय लिया, तो अतुल और उमा इस बात से बहुत खुश हुए, क्योंकि इससे परिवार फिर से एकजुट हो रहा था।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में, आपको परिवार के अन्य सदस्यों की भावनाओं और उनके प्रतिक्रियाओं को व्यक्त करना होगा, विशेषकर जब माँ अपने विचारों में परिवर्तन लाती है।
प्रश्न ख-iv: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : काश कि मैं निर्मम हो सकती, काश कि मैं संस्कारों की दासता से मुक्त हो पाती तो कुल धर्म और जाति का भूत मुझे तंग न करता और मैं अपने बेटे से न बिछुड़ती। स्वयं उसने मुझसे कहा था, संस्कारों की दासता सबसे भयंकर शत्रु है। अविनाश की वधू का चरित्र-चित्रण कीजिए।
Answer: अविनाश की वधू बहुत भोली और प्यारी थी, जो उसे एक बार देख लेता उसके रूप पर मंत्रमुग्ध हो जाता। बड़ी-बड़ी काली आँखें उनमें शैशव की भोली मुस्कराहट उसके रूप तथा बड़ों के प्रति आदर के भाव ने अतुल और उमा को प्रभावित किया।
In simple words: अविनाश की पत्नी एक प्यारी, मासूम और आकर्षक महिला थी, जिसकी बड़ी काली आँखें और भोली मुस्कराहट सभी को प्रभावित करती थी, और वह बड़ों का सम्मान भी करती थी।
🎯 Exam Tip: किसी भी पात्र का चरित्र-चित्रण करते समय, उसके शारीरिक गुणों और आंतरिक स्वभाव दोनों का वर्णन करना चाहिए, जैसा कि यहाँ वधू की मासूमियत और आदर भाव को बताया गया है।
प्रश्न ग-i: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : जिन बातों का हम प्राण देकर भी विरोध करने को तैयार रहते हैं। एक समय आता है, जब चाहे किसी कारण से भी हो, हम उन्हीं बातों को चुपचाप स्वीकार कर लेते हैं। अविनाश का अपने परिवार वालों से किस बात पर विरोध था?
Answer: अविनाश ने एक विजातीय (बंगाली) कन्या से विवाह किया था। किसी ने इस विवाह का समर्थन नहीं किया। अविनाश की माँ ने इसका सबसे ज्यादा विरोध किया और उसको घर से निकाल दिया।
In simple words: अविनाश ने अपने परिवार की इच्छा के विरुद्ध एक दूसरी जाति (बंगाली) की लड़की से शादी की थी, जिस कारण परिवार, खासकर उसकी माँ, ने इसका कड़ा विरोध किया और उसे घर से बाहर कर दिया।
🎯 Exam Tip: गद्यांश में दिए गए संघर्ष के मुख्य बिंदु को पहचानना महत्वपूर्ण है। यहाँ, अंतर-जातीय विवाह परिवार के विरोध का कारण था।
प्रश्न ग-ii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : जिन बातों का हम प्राण देकर भी विरोध करने को तैयार रहते हैं। एक समय आता है, जब चाहे किसी कारण से भी हो, हम उन्हीं बातों को चुपचाप स्वीकार कर लेते हैं। माँ की मनोवृत्ति बदलने में अतुल और उमा ने क्या भूमिका निभाई?
Answer: अविनाश ने एक विजातीय (बंगाली) कन्या से विवाह किया था। अविनाश की माँ ने इसका सबसे ज्यादा विरोध किया और उसको घर से निकाल दिया। माँ की इस रुढ़िवादी मनोवृत्ति को बदलने में अतुल और उमा ने भरपूर प्रयास किया। उन दोनों ने अविनाश की पत्नी के गुणों तथा विचारों से माँ को अवगत करवाया अतुल ने ही अपनी माँ को अविनाश की बहू को अपनाने के लिए प्रेरित किया। अतुल ने के द्वारा ही माँ को पता चलता है कि किस प्रकार उनकी बहू ने अपने प्राणों की परवाह न करके अविनाश की जान बचाई और अब बहू स्वयं बीमार है। इसलिए जब माँ को अविनाश की पत्नी की बीमारी की सूचना मिलती है तब उसका हृदय मातृत्व की भावना से भर उठता है। उसे इस बात का आभास है कि यदि बहू को कुछ हो गया तो अविनाश नहीं बचेगा। इस प्रकार अतुल और उमा के सम्मिलित प्रयास से माँ अपनी बहू को अपना लेती है।
In simple words: अतुल और उमा ने लगातार माँ को बहू के अच्छे गुणों और विचारों से अवगत कराकर तथा बहू के अविनाश को बचाने के त्याग के बारे में बताकर उनकी रूढ़िवादी सोच को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न पात्रों के आपसी संबंधों और उनके प्रभाव को समझने पर केंद्रित है। अतुल और उमा की प्रेरणादायक भूमिका को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
प्रश्न ग-iii: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : जिन बातों का हम प्राण देकर भी विरोध करने को तैयार रहते हैं। एक समय आता है, जब चाहे किसी कारण से भी हो, हम उन्हीं बातों को चुपचाप स्वीकार कर लेते हैं। अतुल का चरित्र-चित्रण कीजिए।
Answer: अतुल एकांकी का प्रमुख पुरुष पात्र है। वह माँ का छोटा पुत्र है। वह प्राचीन संस्कारों को मानते हुए आधुनिकता में यकीन रखने वाला एक प्रगतिशील नवयुवक है। वह माँ का आज्ञाकारी पुत्र होते हुए भी माँ की गलत बातों का विरोध भी करता है। वह अपनी माँ से अपने बड़े भाई को विजातीय स्त्री से विवाह करने पर न अपनाने का भी विरोध करता है। अतुल संयुक्त परिवार में विश्वास रखता है। उसमें भ्रातृत्व की भावना है। वह अपने बड़े भाई का सम्मान करता है।
In simple words: अतुल एक प्रगतिशील, आज्ञाकारी लेकिन न्यायप्रिय युवक है जो अपनी माँ के पुराने विचारों का विरोध करता है, संयुक्त परिवार में विश्वास रखता है और अपने बड़े भाई का सम्मान करता है।
🎯 Exam Tip: पात्र का चरित्र-चित्रण करते समय, उसके प्रमुख गुणों, विचारों और रिश्तों को स्पष्ट करना चाहिए, जिससे उसकी व्यक्तित्व की पूरी तस्वीर सामने आ सके।
प्रश्न ग-iv: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : जिन बातों का हम प्राण देकर भी विरोध करने को तैयार रहते हैं। एक समय आता है, जब चाहे किसी कारण से भी हो, हम उन्हीं बातों को चुपचाप स्वीकार कर लेते हैं। एकांकी का सारांश लिखिए।
Answer: विष्णु प्रभाकर द्वारा रचित “संस्कार और भावना" एकांकी में भारतीय हिंदू परिवार के पुराने संस्कारों से जकड़ी हुई रूढ़िवादिता तथा आधुनिक परिवेश में पले बड़े बच्चों के बीच संघर्ष की चेतना को चित्रित किया गया है। अविनाश ने एक विजातीय (बंगाली) कन्या से विवाह किया था। किसी ने इस विवाह का समर्थन नहीं किया। अविनाश की माँ ने इसका सबसे ज्यादा विरोध किया और उसको घर से निकाल दिया। माँ अपने छोटे बेटे अतुल और उसकी पत्नी उमा के साथ रहती है पर बड़े बेटे से अलग रहना उसके मन को कष्ट पहुँचाता है। एक बार जब माँ को पता चला कि अविनाश को प्राणघातक हैजे की बीमारी हुई थी और बहू ने अपने पति अविनाश को प्राण देकर बचा लिया। अब वह खुद बीमार है परंतु अविनाश में उसे बचाने की ताकत नहीं है। जब माँ को अविनाश की पत्नी की बीमारी की सूचना मिलती है तब उसका हृदय मातृत्व की भावना से भर उठता है। उसे इस बात का आभास है कि यदि बहू को कुछ हो गया तो अविनाश नहीं बचेगा। तब पुत्र-प्रेम की मानवीय भावना का प्रबल प्रवाह रूढ़िग्रस्त प्राचीन संस्कारों के जर्जर होते बाँध को तोड़ देता है। माँ अपने बेटे और बहू को अपनाने का निश्चय करती है।
In simple words: “संस्कार और भावना" एकांकी एक ऐसे हिंदू परिवार की कहानी है जहाँ पुरानी रूढ़िवादिता और आधुनिक सोच के बीच संघर्ष दिखाया गया है। अविनाश के अंतर-जातीय विवाह के कारण उसकी माँ उसे घर से निकाल देती है, लेकिन जब बहू अविनाश की जान बचाती है और खुद बीमार पड़ जाती है, तब माँ का हृदय परिवर्तन होता है और वह पुत्र-प्रेम के कारण सभी पुराने संस्कारों को छोड़कर अपने बेटे और बहू को स्वीकार कर लेती है।
🎯 Exam Tip: एकांकी का सारांश लिखते समय, कहानी के मुख्य पात्रों, उनके संघर्षों, महत्वपूर्ण घटनाओं और अंत में हुए बदलाव को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना चाहिए।
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