GSEB Class 9 Hindi Solutions Chapter 2 न्यायमंत्री

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Detailed Chapter 02 न्यायमंत्री GSEB Solutions for Class 9 Hindi

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Class 9 Hindi Chapter 02 न्यायमंत्री GSEB Solutions PDF

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए।

 

प्रश्न 1. शिशुपाल अपने घर का दरवाजा क्यों खोल दिया?
Answer: एक मेहमान को शाम के अंधेरे में आश्रय के लिए आता देखकर, शिशुपाल ने अपने घर का दरवाजा खोल दिया।
In simple words: शिशुपाल ने शाम के अँधेरे में आए एक अतिथि को सहारा देने के लिए अपने घर का दरवाजा खोल दिया।

Exam Tip: जब कोई प्रश्न 'क्यों' से शुरू हो, तो कारण को स्पष्ट और संक्षिप्त तरीके से बताएं, जैसा कि पाठ में दिया गया है।

 

प्रश्न 2. शिशुपाल किस अवसर की तलाश में था?
Answer: शिशुपाल यह दिखाने के अवसर की तलाश में था कि सच्चा न्याय कैसा होता है।
In simple words: शिशुपाल यह मौका खोज रहा था कि असली न्याय कैसा होता है।

Exam Tip: 'तलाश' वाले प्रश्नों में, उस विशिष्ट लक्ष्य या उद्देश्य पर ध्यान दें जिसे चरित्र प्राप्त करना चाहता था।

 

प्रश्न 3. न्याय के विषय में शिशुपाल के क्या विचार थे?
Answer: शिशुपाल यह मानता था कि न्याय ऐसा होना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति अन्याय या अपराध करने का साहस न कर सके।
In simple words: शिशुपाल सोचता था कि न्याय ऐसा हो कि कोई भी गलत काम करने की हिम्मत न कर पाए।

Exam Tip: किसी चरित्र के विचारों को स्पष्ट करते समय, उनकी मुख्य राय या सिद्धांत को सीधे बताएं।

 

प्रश्न 4. परदेशी कौन था ? उसने दूसरे दिन क्या किया ?
Answer: परदेशी स्वयं सम्राट अशोक थे। दूसरे दिन सुबह उठकर परदेशी ने शिशुपाल को धन्यवाद दिया और उनसे विदा ली।
In simple words: अजनबी खुद सम्राट अशोक थे। अगली सुबह, उन्होंने शिशुपाल का शुक्रिया अदा किया और चले गए।

Exam Tip: प्रश्नों के बहु-भागों का उत्तर देते समय, सुनिश्चित करें कि आप प्रश्न के प्रत्येक खंड का जवाब दें।

 

प्रश्न 5. सम्राट अशोक ने शिशुपाल को राजमुद्रा क्यों दी?
Answer: सम्राट अशोक ने शिशुपाल को न्यायमंत्री के पद पर नियुक्त करते हुए राजमुद्रा दी।
In simple words: सम्राट अशोक ने शिशुपाल को न्यायमंत्री बनाने के लिए शाही मुहर दी।

Exam Tip: किसी पुरस्कार या भेंट के कारण को बताते समय, उस विशिष्ट भूमिका या कार्य पर ध्यान दें जिसके लिए वह दिया गया था।

 

प्रश्न 6. राज्य में न्याय के विषय में परिस्थितियाँ कैसे बदल गई?
Answer: शिशुपाल के न्यायमंत्री बनते ही पूरे राज्य में पूरी तरह शांति रहने लगी, किसी को भी किसी प्रकार का डर नहीं रहा।
In simple words: शिशुपाल के न्यायमंत्री बनते ही राज्य में पूरी शांति आ गई, और कोई भी भयभीत नहीं हुआ।

Exam Tip: किसी घटना के बाद परिवर्तनों का वर्णन करते समय, प्रमुख परिणामों और उनके प्रभाव को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

प्रश्न 7. पहरेदार की हत्या होने पर शिशुपाल की स्थिति कैसी हो गई ?
Answer: पहरेदार की हत्या होने पर शिशुपाल की नींद उड़ गई और अपराधी का पता लगाने के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया।
In simple words: जब पहरेदार की हत्या हुई, शिशुपाल बहुत चिंतित हो गए और अपराधी को खोजने के लिए उन्होंने बहुत कोशिश की।

Exam Tip: किसी चरित्र की भावनाओं या प्रतिक्रियाओं का वर्णन करते समय, उनके कार्यों या आंतरिक स्थिति को दर्शाने वाले शब्दों का प्रयोग करें।

 

प्रश्न 8. अपराधी का पता चलने पर शिशुपाल ने क्या किया ?
Answer: अपराधी का पता चलने पर शिशुपाल ने सम्राट अशोक को गिरफ्तार करने का आदेश दिया।
In simple words: जब उन्हें अपराधी का पता चला, तो शिशुपाल ने सम्राट अशोक को पकड़ने का आदेश दे दिया।

Exam Tip: घटना-आधारित प्रश्नों में, घटना के तुरंत बाद हुई कार्रवाई को सीधे बताएं।

 

2. विस्तार से उत्तर दीजिए :

 

प्रश्न 1. सम्राट अशोक ने न्यायमंत्री की खोज कैसे की?
Answer: अपने राज्य को अपराध-मुक्त करने के लिए सम्राट अशोक को एक योग्य न्यायमंत्री की जरूरत थी। न्यायमंत्री की खोज के लिए उन्होंने एक अजनबी नौजवान का रूप धारण किया। घूमते-घूमते वे ब्राह्मण शिशुपाल के घर पहुंचे। शिशुपाल न्याय-प्रेमी थे और न्याय किसे कहते हैं, यह दिखाने के लिए एक अवसर की तलाश में थे। सम्राट अशोक ने उन्हें यह मौका दिया। हत्या का अपराध होने पर शिशुपाल ने निष्पक्ष व्यवहार किया। उन्होंने सम्राट को मृत्युदंड देने की घोषणा की। उनके इस साहस और निष्पक्ष आचरण से सम्राट बहुत खुश हुए। इस प्रकार सम्राट अशोक ने सही न्यायमंत्री को खोज निकाला।
In simple words: सम्राट अशोक ने अपने राज्य को अपराध से मुक्त करने के लिए एक अच्छे न्यायमंत्री को खोजने के लिए एक अजनबी का रूप धारण किया। वह शिशुपाल से मिले, जो न्याय को बहुत पसंद करते थे। जब शिशुपाल को न्याय करने का मौका मिला, तो उन्होंने ईमानदारी से काम किया और सम्राट को दोषी ठहराया, जिससे सम्राट बहुत खुश हुए और उन्हें सही न्यायमंत्री मिल गया।

Exam Tip: विस्तार से उत्तर देने वाले प्रश्नों में, कहानी के प्रमुख घटनाओं और चरित्रों की प्रेरणाओं को क्रम से बताएं।

 

प्रश्न 2. सम्राट अशोक ने न्यायमंत्री का पद देने हुए शिशुपाल को क्या दिया ?
Answer: सम्राट अशोक ने शिशुपाल को अपने दरबार में बुलाया। उन्होंने शिशुपाल से कहा कि, मैं आपको न्याय करने का अवसर देना चाहता हूँ। शिशुपाल भी इस मौके के लिए तैयार थे। यह जानकर सम्राट ने उन्हें न्यायमंत्री बनाया और पहचान के लिए उसे राजमुद्रा दी।
In simple words: सम्राट अशोक ने शिशुपाल को दरबार में बुलाया और उन्हें न्याय करने का मौका दिया। शिशुपाल के राजी होने पर, सम्राट ने उन्हें न्यायमंत्री बनाया और पहचान के लिए शाही मुहर भेंट की।

Exam Tip: किसी घटना के बाद दिए गए उपहार या पद के महत्व को स्पष्ट करने के लिए, उसके प्रतीकात्मक अर्थ को भी शामिल करें।

 

प्रश्न 3. सम्राट अशोक क्यों गद्गद हो गए?
Answer: सम्राट अशोक ने शिशुपाल को न्याय का असली रूप दिखाने का अवसर दिया था। उन्होंने देखा कि शिशुपाल न्याय की कसौटी पर पूरी तरह खरे उतरे थे। हत्यारे सम्राट के प्रति उन्होंने जरा भी नरम रुख नहीं अपनाया। उन्होंने अपराधी सम्राट को मृत्युदंड देने की घोषणा की। दंड देते समय शिशुपाल ने जरा भी हिचकिचाहट नहीं दिखाई। अपने साहसपूर्ण और निष्पक्ष व्यवहार से उन्होंने सम्राट का मन जीत लिया। इस प्रकार न्यायमंत्री के रूप में शिशुपाल को सफल होते देखकर सम्राट अशोक बहुत प्रसन्न हो गए।
In simple words: सम्राट अशोक ने देखा कि शिशुपाल ने न्याय करते समय बिल्कुल भी डर या पक्षपात नहीं दिखाया। उन्होंने अपराधी सम्राट को मृत्युदंड की सजा दी और अपने साहस और ईमानदारी से सम्राट का दिल जीत लिया, जिससे सम्राट बहुत खुश हुए।

Exam Tip: किसी की भावनात्मक प्रतिक्रिया (जैसे 'गद्गद होना') का वर्णन करते समय, उन विशिष्ट कार्यों या गुणों पर ध्यान केंद्रित करें जिनके कारण वह प्रतिक्रिया हुई।

 

प्रश्न 4. न्यायमंत्री ने अपराधी सम्राट के जीवन की रक्षा किस प्रकार की?
Answer: सम्राट अशोक ने एक राजकर्मचारी की हत्या की थी। इस अपराध के लिए न्यायमंत्री ने उन्हें मृत्युदंड देने की घोषणा की। परंतु अपराधी और कोई नहीं स्वयं सम्राट थे। शास्त्रों में राजा को ईश्वर का रूप माना गया है। इसलिए उसे केवल ईश्वर ही दंड दे सकता है। न्यायमंत्री ने सम्राट की जगह उनकी सोने की मूर्ति को फांसी पर लटका दिया। इस प्रकार न्यायमंत्री ने अपराधी सम्राट के जीवन को बचा लिया।
In simple words: न्यायमंत्री ने सम्राट अशोक को हत्या के लिए मृत्युदंड दिया, लेकिन क्योंकि शास्त्रों में राजा को भगवान माना जाता है, इसलिए उन्हें सीधे सजा नहीं दी जा सकती थी। तो, न्यायमंत्री ने सम्राट की सोने की मूर्ति को फांसी पर लटका कर उनके जीवन की रक्षा की।

Exam Tip: जटिल नैतिक निर्णयों या अद्वितीय समाधानों को स्पष्ट करते समय, अंतर्निहित नियमों या परंपराओं को समझाएं जो निर्णय को निर्देशित करते हैं।

 

प्रश्न 5. न्यायमंत्री निरुत्तर क्यों हो गए?
Answer: शिशुपाल न्यायमंत्री की कसौटी पर खरे उतरे थे। सम्राट अशोक ऐसे व्यक्ति को पाकर बहुत खुश हो गए। लोगों ने भी शिशुपाल का न्याय सुनकर उनकी जय-जयकार की। परंतु शिशुपाल को लगा कि न्यायमंत्री की यह जिम्मेदारी उनसे नहीं संभलेगी। उन्होंने सम्राट से राजमुद्रा वापस लेने की प्रार्थना की। परंतु अशोक ने कहा कि उन्होंने अपने न्यायपूर्ण व्यवहार से उनकी आंखें खोल दी हैं। यह जिम्मेदारी उनके सिवाय और कोई नहीं उठा सकता।
In simple words: शिशुपाल ने न्यायमंत्री के रूप में बहुत अच्छा काम किया, और सम्राट तथा लोगों ने उनकी बहुत प्रशंसा की। लेकिन शिशुपाल को लगा कि यह जिम्मेदारी बहुत बड़ी है और वह इसे संभाल नहीं पाएंगे, इसलिए उन्होंने राजमुद्रा वापस करने को कहा। सम्राट ने उन्हें बताया कि उनके न्यायपूर्ण व्यवहार ने उनकी आंखें खोल दी हैं और यह जिम्मेदारी वही उठा सकते हैं।

Exam Tip: किसी चरित्र की आंतरिक संघर्ष या अनिच्छा को बताते समय, उनके कारणों और परिणामों को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।

 

3. निम्नलिखित विधान कौन कहता है ? क्यों ?

 

प्रश्न 1. "यह मेरा सौभाग्य है ।"
Answer: यह वाक्य शिशुपाल अपने द्वार आए अजनबी युवक से कहते हैं, क्योंकि वह अतिथि का सत्कार करना अपना कर्तव्य समझते हैं।
In simple words: शिशुपाल यह बात आए हुए मेहमान से कहते हैं क्योंकि मेहमान की सेवा करना वह अपना फर्ज मानते थे।

Exam Tip: उद्धरणों को पहचानते समय, यह बताएं कि किसने कहा और उनके कहने का कारण क्या था।

 

प्रश्न 2. "दोष निकालना तो सुगम है. परंतु कुछ कर दिखाना कठिन है।"
Answer: यह वाक्य अजनबी युवक (सम्राट अशोक) शिशुपाल से कहते हैं, क्योंकि शिशुपाल उनसे सम्राट अशोक के राज्य में हो रहे अन्याय की शिकायत करते हैं।
In simple words: यह बात अजनबी (सम्राट अशोक) ने शिशुपाल से कही क्योंकि शिशुपाल राज्य में हो रहे गलत कामों की शिकायत कर रहे थे।

Exam Tip: एक प्रसिद्ध उद्धरण की पहचान करते समय, इसके संदर्भ को स्पष्ट करें और मुख्य पात्रों और उनकी बातचीत को इंगित करें।

 

प्रश्न 3. "ब्राह्मण के लिए कुछ भी कठिन नहीं। मैं न्याय का डंका बजाकर दिखा दूंगा।"
Answer: यह वाक्य शिशुपाल अजनबी नौजवान से कहते हैं, क्योंकि अजनबी नौजवान उनसे राज्य को अपराध-मुक्त करने का वचन लेना चाहता है।
In simple words: शिशुपाल ने अजनबी लड़के से कहा कि ब्राह्मण के लिए कुछ भी मुश्किल नहीं है और वह न्याय का झंडा फहरा कर दिखा देंगे।

Exam Tip: उद्धरणों को सही ढंग से पहचानते हुए, बोलने वाले और सुनने वाले दोनों को बताएं और उनके बीच बातचीत के कारण को भी स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 4. तो तुम अपराध स्वीकार करते हो?
Answer: यह वाक्य न्यायमंत्री शिशुपाल सम्राट अशोक से कहते हैं, क्योंकि उन्होंने पहरेदार की हत्या की थी।
In simple words: न्यायमंत्री शिशुपाल ने यह सम्राट अशोक से पूछा, क्योंकि सम्राट ने ही पहरेदार को मारा था।

Exam Tip: प्रश्न के पीछे की प्रेरणा को बताते समय, उस विशिष्ट घटना या कार्य पर ध्यान दें जिसके कारण प्रश्न पूछा गया था।

 

प्रश्न 5. महाराज! यह राजमुद्रा वापस ले लें, मुझसे यह बोझ नहीं उठाया जाएगा।
Answer: यह वाक्य न्यायमंत्री शिशुपाल सम्राट अशोक से कहते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वह न्यायमंत्री की जिम्मेदारी नहीं संभाल पाएंगे।
In simple words: न्यायमंत्री शिशुपाल ने सम्राट अशोक से कहा कि यह राजमुद्रा वापस ले लें, क्योंकि उन्हें लगा कि वह न्यायमंत्री का बड़ा काम नहीं कर पाएंगे।

Exam Tip: किसी चरित्र की अनिच्छा या इस्तीफे के कारण को बताते समय, उनके आंतरिक विचारों और भावनाओं को समझाएं।

 

4. विरोधी शब्द दीजिए :

 

प्रश्न 1.
Answer:
1. परदेशी - स्वदेशी
2. आदर - अनादर
3. अपराधी - निरपराधी
4. सुप्रबंध - कुप्रबन्ध
5. गिरफ्तार - रिहा
6. स्वीकार - अस्वीकार
In simple words: दिए गए शब्दों के विपरीत अर्थ वाले शब्द लिखें।

Exam Tip: विपरीत शब्द बताते समय, शब्द के मूल अर्थ के बिल्कुल विपरीत शब्द का उपयोग सुनिश्चित करें।

 

5. समानार्थी शब्द दीजिए :

 

प्रश्न 1.
Answer:
1. अतिथि - मेहमान
2. सुगम - सरल
3. कठिन - मुश्किल
4. हैरान - चकित
5. नि:स्तब्धता - शांति
6. निरुत्तर - खामोश
In simple words: दिए गए शब्दों के समान अर्थ वाले शब्द लिखें।

Exam Tip: समानार्थक शब्द देते समय, सुनिश्चित करें कि चुने गए शब्द का मूल शब्द के समान या बहुत करीब अर्थ हो।

 

6. सोचकर बताइए:

 

प्रश्न 1. अगर आप न्यायमंत्री होते तो क्या करते ?
Answer: अगर मैं न्यायमंत्री होता तो वही करता जो शिशुपाल ने किया।
In simple words: मैं न्यायमंत्री होता तो शिशुपाल जैसा काम करता।

Exam Tip: काल्पनिक प्रश्नों में, अपने उत्तर को कहानी के संदर्भ और पाठ में प्रस्तुत मूल्यों के अनुरूप रखें।

 

प्रश्न 2. सम्राट अशोक की आँखें किस कारण खुल गई ?
Answer: सम्राट अशोक की आंखें खुल गईं, क्योंकि शिशुपाल ने उन्हें दिखा दिया कि सच्चा न्याय किसे कहते हैं।
In simple words: शिशुपाल ने सम्राट अशोक को दिखाया कि सच्चा न्याय क्या होता है, इसलिए उनकी आँखें खुल गईं।

Exam Tip: किसी व्यक्ति की समझ या परिप्रेक्ष्य में बदलाव के पीछे के मुख्य कारण को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें।

 

प्रश्न 3. शिशुपाल के साहस की सम्राट अशोक. ने क्यों प्रशंसा की?
Answer: शिशुपाल ने सम्राट अशोक को पहरेदार की हत्या का अपराधी बताया। उसने सम्राट को मृत्युदंड देने में जरा भी संकोच नहीं दिखाया। उसकी इस निष्पक्षता और निडरता के कारण सम्राट अशोक ने उसके साहस की प्रशंसा की।
In simple words: शिशुपाल ने सम्राट अशोक को पहरेदार का हत्यारा बताया और उन्हें सजा देने में बिल्कुल नहीं हिचकिचाए। उनकी इस ईमानदारी और बहादुरी के लिए सम्राट अशोक ने उनकी तारीफ की।

Exam Tip: प्रशंसा के कारण को समझाते समय, विशिष्ट गुणों या कार्यों पर ध्यान केंद्रित करें जिनकी सराहना की गई थी।

 

7. न्यायमंत्री के रूप में शिशुपाल को घोषित करते हुए सम्राट अशोक ने राजमुद्रा दी इसका अर्थ है

 

प्रश्न 1.
(a) मैं आपसे प्रसन्न हूँ।
(b) आपके न्यायमंत्री होने की यह तनरूवाह है।
(c) यह मेरी ओर से पुरस्कार है।
(d) यह तुम्हारे, न्यायमंत्री होने की पहचान है।
Answer: (d) यह तुम्हारे, न्यायमंत्री होने की पहचान है।
In simple words: राजमुद्रा देने का मतलब था कि यह शिशुपाल के न्यायमंत्री होने का एक खास प्रतीक है।

Exam Tip: बहुविकल्पीय प्रश्नों में, सबसे सटीक और पूर्ण विकल्प चुनें जो प्रश्न के अर्थ को दर्शाता हो।

 

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पांच-छः वाक्यों में लिखिए :

 

प्रश्न 1. शिशुपाल के न्यायमंत्री बनते ही राज्य में न्याय के विषय में क्या परिवर्तन हुआ?
Answer: न्यायमंत्री बनते ही शिशुपाल ने अपनी योग्यता का परिचय दिया। उन्होंने राज्य को अपराध-मुक्त बनाना शुरू कर दिया। उनके अच्छे प्रबंधन का बढ़िया प्रभाव पड़ा। राज्य में पूरी तरह शांति बनी रहने लगी। किसी को किसी प्रकार का डर नहीं रहा। लोग अपने घर के दरवाजे खुले छोड़कर बाहर जाने लगे। चारों तरफ न्यायमंत्री के अच्छे प्रबंधन और न्याय की धूम मच गई। इस प्रकार शिशुपाल के न्यायमंत्री बनते ही राज्य की परिस्थितियाँ पूरी तरह बदल गईं।
In simple words: शिशुपाल के न्यायमंत्री बनने के बाद राज्य में शांति छा गई और अपराध कम हो गए। लोग अपने घरों को खुला छोड़ने लगे और उन्हें किसी बात का डर नहीं रहा। न्यायमंत्री के बेहतरीन प्रबंधन के कारण पूरे राज्य में न्याय और व्यवस्था का बोलबाला हो गया।

Exam Tip: दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में, अपने उत्तर को कई बिंदुओं में व्यवस्थित करें और प्रत्येक परिवर्तन के प्रभाव को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में लिखिए :

 

प्रश्न 1. परदेशी शिशुपाल की किस बात से सहमत नहीं हुआ?
Answer: शिशुपाल ने परदेशी से कहा कि सम्राट अशोक के शासन में चारों तरफ अन्याय हो रहा है। शिशुपाल की इस बात से परदेशी सहमत नहीं हुआ।
In simple words: परदेशी शिशुपाल की इस बात से सहमत नहीं थे कि सम्राट अशोक के राज में हर जगह अन्याय हो रहा था।

Exam Tip: जब सहमति या असहमति के बारे में पूछा जाए, तो उस विशिष्ट बिंदु को बताएं जिस पर असहमति थी।

 

प्रश्न 2. सम्राट अशोक ने शिशुपाल को दरबार में क्यों बुलाया?
Answer: सम्राट अशोक शिशुपाल को न्याय करने का अवसर देना चाहते थे। शिशुपाल को राज्य का न्यायमंत्री बनाने के लिए सम्राट अशोक ने उसे दरबार में बुलाया।
In simple words: सम्राट अशोक ने शिशुपाल को न्यायमंत्री बनाने और उन्हें न्याय करने का मौका देने के लिए दरबार में बुलाया।

Exam Tip: किसी चरित्र के कार्यों के पीछे की प्रेरणा को बताते समय, उनके इरादे और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें।

 

प्रश्न 3. न्यायमंत्री ने अंत में क्या निर्णय दिया?
Answer: न्यायमंत्री ने सम्राट को फांसी की सजा दी। परंतु उनके स्थान पर सोने की मूर्ति को फांसी पर लटका देने का आदेश दिया।
In simple words: न्यायमंत्री ने सम्राट को फांसी की सजा सुनाई, लेकिन असली सम्राट की जगह उनकी सोने की मूर्ति को फांसी पर लटकाने का आदेश दिया।

Exam Tip: किसी निर्णय का वर्णन करते समय, अंतिम परिणाम के साथ-साथ किसी भी महत्वपूर्ण विवरण या बदलाव को भी शामिल करें।

 

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए :

 

प्रश्न 1. सम्राट ने पहरेदार को मारने का क्या कारण बताया?
Answer: सम्राट ने पहरेदार को मारने का कारण बताते हुए कहा कि वह बहुत उददंड था।
In simple words: सम्राट ने बताया कि उन्होंने पहरेदार को मारा क्योंकि वह बहुत उद्दंड था।

Exam Tip: किसी कारण को बताते समय, उसे सीधे और संक्षिप्त रूप से व्यक्त करें, जैसा कि पाठ में उल्लेख किया गया है।

 

प्रश्न 2. शास्त्रों ने राजा को क्या बताया है?
Answer: शास्त्रों ने राजा को ईश्वर का रूप बताया है।
In simple words: धार्मिक ग्रंथों ने राजा को भगवान के समान माना है।

Exam Tip: धार्मिक या पारंपरिक संदर्भों से संबंधित प्रश्नों के लिए, सटीक जानकारी दें।

 

विभाग 1 : गद्यलक्षी

 

सही विकल्प चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :

 

प्रश्न 1.
Answer:
1. सम्राट के हाथों में **हथकड़ी** पड़ गई।
2. शास्त्रों ने राजा को **ईश्वर** के समान बताया है।
3. महाराज यह **राजमुद्रा** वापस ले लीजिए, मुझसे यह बोझ नहीं उठाया जाएगा।
4. **चेतावनी** देकर सम्राट को छोड़ दिया जाए।
5. मैं आपको **न्याय** करने का अवसर देना चाहता हूँ।
In simple words: खाली जगह में सही शब्द भरकर वाक्य को पूरा करें।

Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, प्रत्येक वाक्य के लिए सबसे उपयुक्त शब्द का चयन करें, जिसका अर्थ और संदर्भ सही हो।

 

निम्रलिखित विधान 'सही' है या 'गलत' यह बताइए :

 

प्रश्न 1.
Answer:
1. शिशुपाल न्याय की कसौटी पर खरा उतरा। **सही**
2. स्वयं सम्राट ही निरपराधी थे। **गलत**
3. शिशुपाल ने सम्राट से राजमुद्रा वापस लेने की प्रार्थना की। **सही**
In simple words: दिए गए वाक्यों को पढ़ें और बताएं कि वे सही हैं या गलत।

Exam Tip: सत्य/असत्य प्रश्नों में, प्रत्येक कथन की सटीकता को पाठ की जानकारी से सत्यापित करें।

 

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक शब्द में लिखिए :

 

प्रश्न 1.
Answer:
1. परदेशी युवक कौन था? **सम्राट अशोक**
2. सम्राट अशोक ने किसे न्यायमंत्री बनाया? **शिशुपाल को**
3. सम्राट अशोक ने किसकी हत्या की? **पहरेदार की**
4. न्यायमंत्री ने सम्राट को क्या सज़ा दी? **फांसी की**
In simple words: दिए गए प्रश्नों के उत्तर केवल एक शब्द में दें।

Exam Tip: एक-शब्द वाले उत्तरों के लिए, सीधे और संक्षिप्त उत्तर दें, कोई अतिरिक्त विवरण न जोड़ें।

 

सही वाक्यांश चुनकर निम्नलिखित विधान पूर्ण कीजिए :

 

प्रश्न 1. अवसर मिले तो दिखा दूं कि.........
(a) मंत्री कैसा होता है।
(b) अपराधी को कैसे पकड़ा जाए।
(c) न्याय किसे कहते हैं।
Answer: (c) न्याय किसे कहते हैं।
In simple words: खाली जगह भरें ताकि वाक्य पूरा हो जाए: अगर मुझे मौका मिले तो मैं दिखा दूंगा कि न्याय किसे कहते हैं।

Exam Tip: अधूरे वाक्यों को पूरा करने के लिए, पाठ के मुख्य संदेश के साथ सबसे अच्छा मेल खाने वाले वाक्यांश का चयन करें।

 

प्रश्न 2. शिशुपाल की नींद उड़ गई, क्योंकि ........
(a) किसी ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी।
(b) एक पहरेदार की हत्या हो गई थी।
(c) महाराज की ओर से उन्हें शीघ्र हाजिर होने का आदेश मिला था।
Answer: (b) एक पहरेदार की हत्या हो गई थी।
In simple words: खाली जगह भरें ताकि वाक्य पूरा हो जाए: शिशुपाल की नींद उड़ गई क्योंकि एक पहरेदार की हत्या हो गई थी।

Exam Tip: कारण वाले प्रश्नों में, घटना के पीछे के विशिष्ट और प्रत्यक्ष कारण को इंगित करें।

 

प्रश्न 3. राजा को ईश्वर ही दंड दे सकता है, क्योंकि ........
(a) लोग उसे ईश्वर मानते हैं।
(b) शास्त्रों ने उसे ईश्वर का रूप माना है।
Answer: (b) शास्त्रों ने उसे ईश्वर का रूप माना है।
In simple words: खाली जगह भरें ताकि वाक्य पूरा हो जाए: राजा को केवल भगवान ही सजा दे सकते हैं क्योंकि धर्मग्रंथों में उन्हें भगवान का रूप माना गया है।

Exam Tip: किसी नियम या सिद्धांत के पीछे के आधार को समझाते समय, उस स्रोत या विश्वास प्रणाली का उल्लेख करें जिससे वह आता है।

 

प्रश्न 4. महाराज, यह राजमुद्रा वापस ले लें, क्योंकि......
(a) "मैं यह बोझ उठा न सकूँगा।”
(b) "मैं इसकी रक्षा न कर सकूँगा।"
(c) “मैं अब बूढ़ा हो चुका हूं।"
Answer: (a) "मैं यह बोझ उठा न सकूँगा।”
In simple words: खाली जगह भरें ताकि वाक्य पूरा हो जाए: महाराज, कृपया यह शाही मुहर वापस ले लें, क्योंकि मैं यह भारी जिम्मेदारी नहीं उठा पाऊंगा।

Exam Tip: सीधे उद्धरण वाले प्रश्नों में, पाठ से सटीक वाक्यांश चुनें जो कारण को सर्वोत्तम रूप से व्यक्त करता हो।

 

निम्नलिखित प्रश्नों के साथ दिए गए विकल्पों से सही विकल्प चुनकर उत्तर लिखिए :

 

प्रश्न 1. शिशुपाल के घर का दरवाज़ा खटखटानेवाला कौन था?
(a) भिखारी
(b) व्यापारी
(c) परदेशी
(d) पहरेदार
Answer: (c) परदेशी
In simple words: शिशुपाल के घर का दरवाज़ा खटखटाने वाला एक अजनबी था।

Exam Tip: पात्रों या घटनाओं की पहचान करने वाले एमसीक्यू के लिए, कहानी में उनकी पहली उपस्थिति पर ध्यान दें।

 

प्रश्न 2. परदेशी को क्या काटना था?
(a) दिन
(b) समय
(c) दोपहर
(d) रात
Answer: (d) रात
In simple words: अजनबी को रात बितानी थी।

Exam Tip: कहानी के संदर्भ को याद करें ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि पात्र क्या करना चाहता था।

 

प्रश्न 3. कुछ करके दिखाना कैसा है?
(a) सरल
(b) कठिन
(c) असंभव
(d) संभव
Answer: (b) कठिन
In simple words: कुछ करके दिखाना मुश्किल होता है।

Exam Tip: मुहावरों या सामान्य कहावतों पर आधारित प्रश्नों के लिए, उनके निहित अर्थ को समझें।

 

प्रश्न 4. कुछ दिनों के बाद शिशुपाल के घर कौन आया?
(a) नवयुवक
(b) सिपाही
(c) पहरेदार
(d) ब्राह्मण
Answer: (b) सिपाही
In simple words: कुछ दिनों बाद शिशुपाल के घर एक सिपाही आया।

Exam Tip: कहानी के कालक्रम का पालन करें और घटनाओं के क्रम को याद करें।

 

प्रश्न 5. शिशुपाल किसका डंका बजा देगा?
(a) ईमान का
(b) सत्य का
(c) न्याय का
(d) बुद्धि का
Answer: (c) न्याय का
In simple words: शिशुपाल न्याय का झंडा फहराएगा।

Exam Tip: चरित्र के मुख्य उद्देश्य या मिशन को स्पष्ट रूप से बताएं, जैसा कि कहानी में दिया गया है।

 

प्रश्न 6. सम्राट ने शिशुपाल को क्या पहना दो?
(a) टोपी
(b) अंगूठी
(c) कमीज़
(d) पगड़ी
Answer: (b) अंगूठी
In simple words: सम्राट ने शिशुपाल को एक अंगूठी पहनाई।

Exam Tip: उपहार या प्रतीक के महत्व को पहचानने के लिए कहानी के विवरणों पर ध्यान दें।

 

प्रश्न 7. सम्राट शिशुपाल को क्या देना चाहते थे?
(a) पुरस्कार
(b) सिंहासन
(c) न्याय का अवसर
(d) पद
Answer: (c) न्याय का अवसर
In simple words: सम्राट शिशुपाल को न्याय करने का एक मौका देना चाहते थे।

Exam Tip: चरित्र की इच्छा या इरादे को बताते समय, उनके मुख्य लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें।

 

प्रश्न 8. पहरेदार का हत्यारा कौन था?
(a) सम्राट अशोक
(b) ब्राह्मण
(c) नवयुवक
(d) न्यायप्रेमी
Answer: (a) सम्राट अशोक
In simple words: पहरेदार का हत्यारा सम्राट अशोक थे।

Exam Tip: कहानी के मुख्य अपराधी की पहचान करते समय, पाठ में दिए गए सीधे तथ्य को याद रखें।

 

प्रश्न 9. मरनेवाला पहरेदार कैसा था?
(a) सतर्क
(b) डरपोक
(c) उदंड
(d) अपराधी
Answer: (c) उदंड
In simple words: जिस पहरेदार को मारा गया था, वह बहुत उद्दंड था।

Exam Tip: चरित्रों की विशेषताओं का वर्णन करते समय, उनके प्रमुख गुणों को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

प्रश्न 10. क्या देकर सम्राट को छोड़ दिया जाय?
(a) चेतावनी
(b) शिक्षा
(c) दंड
(d) उपदेश
Answer: (a) चेतावनी
In simple words: सम्राट को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।

Exam Tip: किसी निर्णय के परिणाम को बताते समय, अंतिम क्रिया या शर्त को स्पष्ट करें।

 

विभाग 2 : व्याकरणलक्षी

 

निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए :

 

प्रश्न 1.
Answer:
1. अवस्था - दशा
2. उद्दंड - अविवेकी
In simple words: दिए गए शब्दों के समान अर्थ वाले शब्द लिखें।

Exam Tip: समानार्थक शब्द प्रदान करते समय, सुनिश्चित करें कि वे मूल शब्द के अर्थ से निकटता से मेल खाते हों।

 

निम्नलिखित शब्दों के विरोधी शब्द लिखिए :

 

प्रश्न 1.
Answer:
1. आरंभ × अंत
2. उद्दंड × विनम
In simple words: दिए गए शब्दों के विपरीत अर्थ वाले शब्द लिखें।

Exam Tip: विलोम शब्द लिखते समय, उस शब्द का चयन करें जो मूल शब्द के अर्थ के बिल्कुल विपरीत हो।

 

निम्नलिखित प्रत्येक वाक्य में से विशेषण पहचानकर लिखिए :

 

प्रश्न 1.
Answer:
1. उसने अपराधी सम्राट को मृत्युदंड देने की घोषणा की। - **अपराधी**
2. न्यायमंत्री राज्य की आंतरिक व्यवस्था ठीक करना चाहता था। - **आंतरिक**
3. न्यायमंत्री की न्याय देने की प्रक्रिया प्रशंसनीय थी। - **प्रशंसनीय**
4. शिशुपाल ने निर्भय होकर न्याय किया। - **निर्भय**
5. सम्राट के प्रति उसने जरा भी नरम रुख नहीं अपनाया। - **नरम**
In simple words: हर वाक्य से उन शब्दों को चुनें जो किसी संज्ञा की विशेषता बताते हैं।

Exam Tip: विशेषणों की पहचान करते समय, उन शब्दों पर ध्यान दें जो संज्ञाओं या सर्वनामों का वर्णन करते हैं या उनके बारे में अधिक जानकारी देते हैं।

 

निम्नलिखित प्रत्येक वाक्य में से कर्तृवाचक संज्ञा पहचानकर लिखिए :

 

प्रश्न 1.
Answer:
1. सम्राट ने पहरेदार को मारने का कारण बताया। - **पहरेदार**
2. न्यायमंत्री शिशुपाल सम्राट अशोक का सेवक था। - **सेवक**
3. मंत्री महोदय स्वयं निर्णायक नहीं हो सकते। - **निर्णायक**
4. वह सम्राट के सामने राजमुद्रा वापस लेने के लिए प्रार्थी बनकर खड़ा था। - **प्रार्थी**
5. उसने मूर्तिकार को बुलाकर सोने की मूर्ति बनवाई। - **मूर्तिकार**
In simple words: दिए गए हर वाक्य से वह शब्द पहचानें जो किसी काम को करने वाले व्यक्ति को बताता है।

Exam Tip: कर्तृवाचक संज्ञाओं की पहचान करते समय, उन शब्दों पर ध्यान दें जो किसी क्रिया को करने वाले व्यक्ति या वस्तु को दर्शाते हैं।

 

निम्नलिखित शब्दसमूह के लिए एक शब्द लिखिए :

 

प्रश्न 1.
Answer:
1. शासन की निशानी - **राजमुद्रा**
2. जिसकी आने की तिथि निश्चित नहीं है वह - **अतिथि**
3. अच्छी तरह से किया हुआ - **समुचित**
4. अच्छी व्यवस्था - **सुप्रबंध**
In simple words: शब्दों के समूह के लिए एक सही शब्द लिखें।

Exam Tip: शब्द-समूह के लिए एक शब्द देते समय, उस संक्षिप्त शब्द का चयन करें जो पूरे वाक्यांश के अर्थ को सटीक रूप से समाहित करता हो।

 

निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ देकर वाक्य में प्रयोग कीजिए :

  • डंका बजाना – सुप्रसिद्ध होना
    वाक्य : नए पुलिस कमिश्नर ने कुछ ही दिनों में राज्य में अपनी कर्तव्यनिष्ठा का डंका बजा दिया।
    In simple words: डंका बजाना का अर्थ है बहुत मशहूर होना। वाक्य: नए पुलिस कमिश्नर ने थोड़े ही दिनों में अपनी ईमानदारी से पूरे राज्य में अपना नाम कर लिया।
  • सहम जाना – भयभीत हो जाना
    वाक्य : अपने घर पर पुलिस को आई देखकर मैं सहम गया।
    In simple words: सहम जाना का अर्थ है डर जाना। वाक्य: घर पर पुलिस को देखकर मैं डर गया।
  • कलेजा धड़कना – चिंतित होना
    वाक्य : पड़ोस में गोलियों की आवाज़ सुनकर चौधरी का कलेजा धड़कने लगा।
    In simple words: कलेजा धड़कना का मतलब है बहुत परेशान होना। वाक्य: पड़ोस में गोली चलने की आवाज सुनकर चौधरी जी बहुत चिंता में पड़ गए।
  • धूम मचना – सुप्रसिद्ध हो जाना
    वाक्य : संगीत इतना मधुर था कि नौशाद के नाम की धूम मच गई।
    In simple words: धूम मचना का अर्थ है बहुत मशहूर हो जाना। वाक्य: नौशाद का गाना इतना मीठा था कि उनका नाम हर जगह फैल गया।
  • नींद उड़ जाना – बहुत चिंतित होना
    वाक्य : पुलिस के आने की खबर सुनकर सेठजी की नींद उड़ गई।
    In simple words: नींद उड़ जाना का मतलब है बहुत चिंता में पड़ जाना। वाक्य: पुलिस के आने की खबर सुनते ही सेठजी की रातों की नींद उड़ गई।
  • रात-दिन एक करना – कड़ी मेहनत करना
    वाक्य : परीक्षा में सफल होने के लिए उसने रात-दिन एक कर दिए।
    In simple words: रात-दिन एक करना का अर्थ है बहुत मेहनत करना। वाक्य: परीक्षा में पास होने के लिए उसने बहुत पढ़ाई की।
  • आश्चर्य का ठिकाना न रहना – बहुत आश्चर्य होना
    वाक्य : छोटे लड़के को संस्कृत के श्लोक बोलते देखकर मेरे आश्चर्य का ठिकाना न रहा।
    In simple words: आश्चर्य का ठिकाना न रहना का मतलब है बहुत हैरान होना। वाक्य: एक छोटे बच्चे को संस्कृत के श्लोक बोलते देख मैं बहुत चकित रह गया।
  • होठ काटना – क्षोभ प्रकट करना
    वाक्य : अपने सामने मुनीमजी को गुस्सा प्रकट करते देखकर सेठजी होंठ काटकर रह गए।
    In simple words: होठ काटना का अर्थ है गुस्सा या नाराजगी दिखाना। वाक्य: मुनीमजी को गुस्सा करते देखकर सेठजी होंठ चबाने लगे।
  • सिर झुकाना- लज्जित होना
    वाक्य : सबूत पेश करने पर अपराधी ने सिर झुका लिया।
    In simple words: सिर झुकाना का अर्थ है शर्मिंदा होना। वाक्य: जब सबूत दिखाए गए तो अपराधी ने शर्म से अपना सिर झुका लिया।
  • गद्गद् होना – भावविभोर होना
    वाक्य : बेटे को प्रथम पुरस्कार मिलने पर पिता का उदय गद्गद् हो गया।
    In simple words: गद्गद् होना का मतलब है बहुत भावुक या खुश होना। वाक्य: अपने बेटे को पहला इनाम मिलते देख पिता जी बहुत भावुक हो गए।
  • आँख खोल देना – सही परिस्थिति समझाना, सच्चाई का ज्ञान करा देना
    वाक्य : संत ने अपने प्रवचन से लोगों की आंखें खोल दी।
    In simple words: आँख खोल देना का अर्थ है किसी को सही बात समझाना या सच्चाई दिखाना। वाक्य: संत ने अपनी बातों से लोगों को असलियत दिखाई।

 

निम्नलिखित शब्दों के उपसर्ग पहचानकर लिखिए :

 

प्रश्न 1.
Answer:
1. अतिथि – अ + तिथि
2. स्वागत – सु + आगत
3. असाधारण – अ + साधारण
4. निष्पक्ष – निस् + पक्ष
5. अन्याय – अ + न्याय
6. खुशनसीबी – खुश + नसीबी
7. सुप्रबन्ध – सु + प्रबन्ध
8. समुचित – सम् + उचित
9. सुप्रसिद्ध – सु + प्रसिद्ध
10. प्रसिद्ध – प्र + सिद्ध
11. उपस्थित – उप + स्थित
12. अविवेक – अ + विवेक
13. परदेश – पर + देश
14. नि:स्तब्ध – नि: + स्तब्ध
15. सुगम - सु + गम
16. परदेशी – पर + देशी
17. निरपराध – नि: + अपराध
18. अस्वीकार – अ + स्वीकार
19. विनम्र – वि + नम्र
20. निर्भय – नि: + भय
In simple words: दिए गए शब्दों से उनके शुरुआती हिस्सों (उपसर्गों) को अलग करके लिखें।

Exam Tip: उपसर्गों की पहचान करते समय, शब्द के मुख्य भाग (मूल शब्द) और उससे पहले जोड़े गए अक्षर या शब्दांश (उपसर्ग) को अलग करें।

 

निम्नलिखित शब्दों के प्रत्यय पहचानकर लिखिए :

 

प्रश्न 1.
Answer:
1. अपराधी – अपराध + ई
2. पहरेदार – पहरा + दार
3. निष्पक्षता – निष्पक्ष + ता
4. शिशुपाल – शिशु + पाल
5. खुशनसीबी – खुशनसीब + ई
6. जिम्मेदारी – जिम्मेदार + ई; जिम्मा + दारी
7. अविवेकी – अविवेक + ई
8. निडरता – निडर + ता
9. प्रशंसनीय – प्रशंसा + ईय
10. आंतरिक – अंतर + इक
11. मूर्तिकार – मूर्ति + कार
12. प्रार्थी – प्रार्थी
In simple words: दिए गए शब्दों से उनके आखिरी हिस्सों (प्रत्ययों) को अलग करके लिखें।

Exam Tip: प्रत्ययों की पहचान करते समय, शब्द के मूल भाग (मूल शब्द) और उसके बाद जोड़े गए अक्षर या शब्दांश (प्रत्यय) को अलग करें।

 

न्यायमंत्री Summary in Hindi

 

विषय-प्रवेश :

 

श्री सुदर्शनजी हिंदी के पुराने और मंजे हुए कहानीकार थे। उनकी कहानियां हमेशा दिलचस्प होती हैं, साथ ही उनमें कोई-न-कोई महत्वपूर्ण संदेश भी छिपा रहता है। यह खास कहानी न्याय में निष्पक्षता का संदेश देती है।
In simple words: सुदर्शनजी एक पुराने और कुशल हिंदी कहानीकार थे जिनकी कहानियां मजेदार होती थीं और कोई न कोई सीख देती थीं। यह कहानी बताती है कि न्याय हमेशा निष्पक्ष होना चाहिए।

Exam Tip: परिचय खंडों को संक्षिप्त करें और मुख्य लेखक या विषय के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी को शामिल करें।

 

पाठ का सार :

 

शिशुपाल के घर एक युवक का आगमन : एक दिन शाम के अंधेरे में शिशुपाल ब्राह्मण के घर एक युवक आया। शिशुपाल ने अतिथि मानकर उसका स्वागत किया।
राज्य में फैले अन्याय की चर्चा : मेहमानदारी के बाद शिशुपाल ने राज्य में हर तरफ हो रहे अन्याय की चर्चा की। युवक इससे सहमत नहीं हुआ। उसने कहा, "गलतियां निकालना तो आसान है, लेकिन कुछ करके दिखाना बहुत कठिन है।" इस पर शिशुपाल ने कहा, "अगर मुझे मौका मिले तो दिखा दूंगा कि न्याय किसे कहते हैं।"
शिशुपाल का न्यायमंत्री बनना : वह युवक और कोई नहीं, खुद सम्राट अशोक थे। एक दिन उन्होंने शिशुपाल को अपने दरबार में बुलाया और अपनी शाही मुहर देकर उसे न्यायमंत्री बना दिया।
शिशुपाल को अवसर मिला : शिशुपाल को न्यायमंत्री बने अभी एक ही महीना हुआ था कि एक रात किसी ने एक पहरेदार की हत्या कर दी। शिशुपाल ने अपराधी का पता लगाने में दिन-रात एक कर दिया।
स्वयं सम्राट ही अपराधी : शिशुपाल को पता चला कि सम्राट अशोक ही पहरेदार की हत्या के अपराधी थे।
सम्राट की गिरफ्तारी : सम्राट को गिरफ्तार करना आसान नहीं था, परंतु शिशुपाल न्यायमंत्री थे। उन्हें तो बिना डरे न्याय करना था। उन्होंने सम्राट को गिरफ्तार करने का आदेश दिया। सिपाही ने सम्राट अशोक के हाथों में हथकड़ियाँ पहना दीं।
सोने की मूर्ति को फांसी : सम्राट अपराधी तो थे, परंतु उन्हें एक साधारण अपराधी की तरह सजा नहीं दी जा सकती थी। इसलिए शास्त्रों के आदेश के अनुसार सम्राट की सोने की मूर्ति को फांसी दी गई।
न्यायमंत्री की जय-जयकार : शिशुपाल के न्याय से लोग बहुत खुश हुए। सम्राट ने भी उनके न्याय की प्रशंसा की।
In simple words: एक शाम एक युवक शिशुपाल के घर आया। बातों में शिशुपाल ने राज्य में फैले अन्याय की शिकायत की, तो युवक ने कहा कि शिकायत करना आसान है, काम करना मुश्किल। शिशुपाल ने चुनौती स्वीकार की। वह युवक सम्राट अशोक थे, जिन्होंने शिशुपाल को न्यायमंत्री बनाया। एक पहरेदार की हत्या होने पर शिशुपाल ने जांच की और पाया कि सम्राट ही अपराधी थे। शिशुपाल ने सम्राट को गिरफ्तार करने का आदेश दिया, लेकिन शास्त्रों के अनुसार राजा को सीधे दंड नहीं दिया जा सकता था, इसलिए सम्राट की सोने की मूर्ति को फांसी दी गई। शिशुपाल के इस न्याय से लोग बहुत खुश हुए और सम्राट ने भी उनकी तारीफ की।

Exam Tip: पाठ का सार लिखते समय, केवल मुख्य बिंदुओं और महत्वपूर्ण घटनाओं को क्रम से बताएं।

 

न्यायमंत्री Summary in English

 

Arrival of a young man to Shishupal's house: One day in the evening a young man came to Shishupal Brahmin's house. Shishupal welcomed him as a guest.
Discussion of Injustice spread in the state : Shishupal welcomed the guest and then he told about the injustice spread everywhere in the state. The young man did not agree with him. He said, "It is easy to find fault but it is difficult to do something well. Hearing this Shishupal said, “If I get a chance, I will show you what justice is.”
Shishupal became the minister of Justice : The young man was no other man, but emperor Ashok himself. One day he called Shishupal to his court and appointed him the minister of Justice by giving him his national symbol.
Shishupal got a chance : Shishupal became the minister of justice. Then in a month somebody murdered a police at night. Shishupal made a great effort to find out the murderer.
The emperor himself was the murderer: Shishupal came to know that the emperor Ashok was the murderer of the police.
Arrest of the emperor : It was not an easy task to arrest the emperor, but Shishupal was the minister of justice. He had to give judgement fearlessly. He summoned to arrest the emperor. The police tied emperor Ashok with handcuffs.
Gallows to the statue of gold: The emperor was the criminal, but he cannot be given punishment as to a common man criminal is given. So the gold statue of the emperor was hanged as the direction in the scripture.
Congratulations to the minister of justice : People became happy by the justice of Shishupal. The emperor too praised him for his justice.
In simple words: One evening, a young man visited Shishupal's home. Shishupal shared his concerns about the widespread injustice in the state. The visitor argued that criticism is easy, but action is hard. Shishupal accepted the challenge, stating he could show what true justice was if given an opportunity. The visitor was Emperor Ashok, who later appointed Shishupal as the minister of justice, giving him a royal symbol. When a guard was murdered, Shishupal investigated and discovered the Emperor himself was the killer. Despite the difficulty, Shishupal ordered the Emperor's arrest. However, as scriptures prevented direct punishment for a king, a golden statue of the Emperor was executed instead. Shishupal's fair justice delighted the people and earned the Emperor's admiration.

Exam Tip: English सारांश के लिए, मूल कहानी के सभी मुख्य बिंदुओं को सरल और स्पष्ट भाषा में शामिल करें, क्रम बनाए रखें।

 

न्यायमंत्री Summary in Gujarati

 

ગુજરાતી ભાવાર્થ :

 

શિશુપાલના ઘરમાં એક યુવકનું આગમન : એક દિવસ સાંજના અંધારામાં શિશુપાલ બ્રાહ્મણના ઘરે એક યુવક આવ્યો. શિશુપાલે તેને મહેમાન માનીને સ્વાગત કર્યું.
રાજ્યમાં ફેલાયેલા અન્યાયની ચર્ચા : અતિથિ-સત્કાર પછી શિશુપાલે રાજ્યમાં ચારેય બાજુ ફેલાયેલા અન્યાયની ચર્ચા કરી. યુવક આ વાતથી સહમત ન થયો. તેણે કહ્યું, “દોષ કાઢવો સહેલો છે, કંઈક કરી બતાવવું મુશ્કેલ છે.” આ સાંભળી શિશુપાલે કહ્યું, “જો અવસર મળે, તો હું બતાવી દઈશ કે ન્યાય કોને કહેવાય.”
શિશુપાલ ન્યાયમંત્રી બન્યા : તે યુવક બીજું કોઈ નહીં, સ્વયં સમ્રાટ અશોક હતા. એક દિવસ તેમણે શિશુપાલને પોતાના દરબારમાં બોલાવીને પોતાની રાજમુદ્રા આપીને ન્યાયમંત્રી બનાવી દીધા.
શિશુપાલને અવસર મળ્યો : શિશુપાલને ન્યાયમંત્રી બન્યાને એક મહિનો જ થયો હતો કે, એક રાત્રે કોઈએ એક સિપાઈની હત્યા કરી. શિશુપાલે અપરાધીની તપાસ કરવામાં દિવસ-રાત એક કરી દીધા.
સ્વયં સમ્રાટ જ અપરાધી : શિશુપાલને ખબર પડી કે સમ્રાટ અશોક જ સિપાઈની હત્યાના અપરાધી હતા.
સમ્રાટની ધરપકડ : સમ્રાટની ધરપકડ કરવી એ સહેલું કામ ન હતું, પરંતુ શિશુપાલ ન્યાયમંત્રી હતા. તેમણે તો નિર્ભય થઈને ન્યાય કરવાનો હતો. તેમણે સમ્રાટની ધરપકડ કરવાનો આદેશ આપ્યો. સિપાઈએ સમ્રાટ અશોકના હાથમાં હાથકડીઓ પહેરાવી દીધી!
સોનાની મૂર્તિને ફાંસી : સમ્રાટ અપરાધી તો હતા; પરંતુ તેમને સાધારણ અપરાધીની જેમ સજા ન આપી શકાય. એટલે શાસ્ત્રની આજ્ઞા અનુસાર સમ્રાટની સોનાની મૂર્તિને ફાંસી આપવામાં આવી.
ન્યાયમંત્રીનો જયજયકાર : શિશુપાલના ન્યાયથી લોકો ખૂબ પ્રસન્ન થયા. સમ્રાટે પણ તેમના ન્યાયની પ્રશંસા કરી.
In simple words: એક સાંજે એક યુવાન શિશુપાલના ઘરે આવ્યો. શિશુપાલે રાજ્યમાં ફેલાયેલા અન્યાય વિશે વાત કરી. યુવાન સંમત ન થયો અને કહ્યું કે દોષ શોધવો સરળ છે, પણ કંઈક કરવું મુશ્કેલ છે. શિશુપાલે જવાબ આપ્યો કે જો તક મળે તો તે બતાવશે કે ન્યાય શું છે. તે યુવાન બીજું કોઈ નહીં પણ સમ્રાટ અશોક પોતે હતા. સમ્રાટે શિશુપાલને દરબારમાં બોલાવીને તેને ન્યાયમંત્રી બનાવ્યા અને રાજમુદ્રા આપી. એક રાત્રે સિપાઈની હત્યા થઈ. શિશુપાલે તપાસ કરી અને જાણવા મળ્યું કે સમ્રાટ પોતે અપરાધી હતા. ન્યાયમંત્રી શિશુપાલે સમ્રાટની ધરપકડનો આદેશ આપ્યો. પરંતુ, શાસ્ત્રો અનુસાર રાજાને સામાન્ય ગુનેગારની જેમ સજા આપી શકાતી ન હોવાથી, સમ્રાટની સોનાની મૂર્તિને ફાંસી આપવામાં આવી. શિશુપાલના ન્યાયથી લોકો ખૂબ ખુશ થયા અને સમ્રાટે પણ તેના ન્યાયની પ્રશંસા કરી.

Exam Tip: ગુજરાતી ભાવાર્થ લખતી વખતે, મૂળ પાઠના મુખ્ય મુદ્દાઓને સરળ અને સુલભ ભાષામાં પ્રસ્તુત કરો, ક્રમનું ધ્યાન રાખો.

 

न्यायमंत्री शब्दार्थ :

  • सौभाग्य – खुशनसीबी। (अच्छी किस्मत)
  • अतिथि – मेहमान । (मेहमान)
  • अवस्था – दशा, हालत। (स्थिति, हालत)
  • दोष – गलती। (गलती)
  • सहमत – राजी, संमत। (सहमत)
  • सुगम – आसान, सरल। (आसान)
  • अवसर – मौका। (मौका)
  • दंड – सजा। (सजा)
  • राजमुद्रा – शासन की निशानी (अंगूठी)। (शाही मुहर, प्रतीक)
  • समुचित – अच्छी तरह। (उचित रूप से, ठीक तरह से)
  • सुप्रबंध – अच्छी व्यवस्था। (अच्छा प्रबंधन)
  • हैरान – आश्चर्यचकित। (हैरान)
  • स्वयं – खुद। (खुद)
  • उपस्थित – हाजिर। (मौजूद)
  • संकेत – इशारा। (इशारा)
  • नि:स्तब्धता – शांति। (खामोशी)
  • हथकड़ी – अपराधी के हाथों में पहनाई जानेवाली लोहे की जंजौर। (हथकड़ी)
  • उददंड – अविवेकी। (उद्दंड)
  • बोझ – भार, (यहाँ) जिम्मेदारी। (भार, जिम्मेदारी)

निम्नलिखित शब्दों के उपसर्ग पहचानकर लिखिए :

 

Question 1. निम्नलिखित शब्दों के उपसर्ग पहचानकर लिखिए :
1. अतिथि
2. स्वागत
3. असाधारण
4. निष्पक्ष
5. अन्याय
6. खुशनसीबी
7. सुप्रबन्ध
8. समुचित
9. सुप्रसिद्ध
10. प्रसिद्ध
11. उपस्थित
12. अविवेक
13. परदेश
14. नि:स्तब्ध
15. सुगम
16. परदेशी
17. निरपराध
18. अस्वीकार
19. विनम्र
20. निर्भय
Answer:
1. अतिथि – अ + तिथि
2. स्वागत – सु + आगत
3. असाधारण – अ + साधारण
4. निष्पक्ष – निस् + पक्ष
5. अन्याय – अ + न्याय
6. खुशनसीबी – खुश + नसीबी
7. सुप्रबन्ध – सु + प्रबन्ध
8. समुचित – सम् + उचित
9. सुप्रसिद्ध – सु + प्रसिद्ध
10. प्रसिद्ध – प्र + सिद्ध
11. उपस्थित – उप + स्थित
12. अविवेक – अ + विवेक
13. परदेश – पर + देश
14. नि:स्तब्ध – नि: (निस्) + स्तब्ध
15. सुगम – सु + गम
16. परदेशी – पर + देशी
17. निरपराध – नि: + अपराध
18. अस्वीकार – अ + स्वीकार
19. विनम्र – वि + नम्र
20. निर्भय – नि: + भय
In simple words: Here is a list of words where the beginning part (prefix) is separated from the main word to show how they are formed. Each entry shows the prefix followed by the base word.

Exam Tip: Remember that prefixes always come at the beginning of a word and change its meaning. Practice identifying common prefixes to improve your vocabulary.

निम्नलिखित शब्दों के प्रत्यय पहचानकर लिखिए :

 

Question 1. निम्नलिखित शब्दों के प्रत्यय पहचानकर लिखिए :
1. अपराधी
2. पहरेदार
3. निष्पक्षता
4. शिशुपाल
5. खुशनसीबी
6. जिम्मेदारी
7. अविवेकी
8. निडरता
9. प्रशंसनीय
10. आंतरिक
11. मूर्तिकार
12. प्रार्थी
Answer:
1. अपराधी – अपराध + ई
2. पहरेदार – पहरा + दार
3. निष्पक्षता – निष्पक्ष + ता
4. शिशुपाल – शिशु + पाल
5. खुशनसीबी – खुशनसीब + ई
6. जिम्मेदारी – जिम्मेदार + ई; जिम्मा + दारी
7. अविवेकी – अविवेक + ई
8. निडरता – निडर + ता
9. प्रशंसनीय – प्रशंसा + ईय
10. आंतरिक – अंतर + इक
11. मूर्तिकार – मूर्ति + कार
12. प्रार्थी – प्रर्थ + ई
In simple words: This list breaks down words by showing their root word and the ending part (suffix). Each entry displays the base word, then the suffix that joins to it.

Exam Tip: Pay close attention to how suffixes are added to root words, as they can change the word's part of speech or meaning. Identifying them correctly is key.

न्यायमंत्री Summary In Hindi

विषय-प्रवेश :

श्री सुदर्शनजी हिन्दी के पुराने और मंजे हुए कहानीकार थे। इनकी कहानियाँ बहुत अच्छी होती हैं, साथ ही उनमें कोई-न-कोई संदेश भी छिपा रहता है। यह कहानी न्याय में निष्पक्षता का संदेश देती है।
In simple words: Sudarshanji was an experienced Hindi storyteller. His stories are always interesting and carry an important message. This particular story teaches us about being fair in justice.

Exam Tip: When reading summaries, focus on the main theme and moral of the story, as these are often tested in exams.

पाठ का सार :

शिशुपाल के घर एक युवक का आगमन : एक दिन शाम के अंधेरे में एक युवक ब्राह्मण शिशुपाल के घर आया। शिशुपाल ने उस व्यक्ति को अतिथि मानकर उसका स्वागत किया।
In simple words: One evening, a young man came to the Brahmin Shishupal's house, and Shishupal welcomed him as a guest.

Exam Tip: Note the setting and the initial interaction to understand the beginning of the story's plot.

राज्य में फैले अन्याय की चर्चा : अतिथि-सत्कार के बाद शिशुपाल ने राज्य में चारों तरफ हो रहे अन्याय की चर्चा की। युवक इस बात से सहमत नहीं हुआ। उसने कहा, “दोष ढूँढना तो सरल है, परंतु कुछ करके दिखाना कठिन है।" इस पर शिशुपाल ने कहा, "यदि अवसर मिले तो दिखा दूँगा कि न्याय किसे कहते हैं।"
In simple words: After welcoming the guest, Shishupal talked about the unfairness in the kingdom. The young man disagreed, saying finding fault is easy, but fixing it is hard. Shishupal then offered to show what justice means if given a chance.

Exam Tip: Understand the characters' initial views on justice and injustice, as this sets the stage for the story's main conflict.

शिशुपाल का न्यायमंत्री बनना : वह युवक और कोई नहीं, स्वयं सम्राट अशोक थे। एक दिन उन्होंने शिशुपाल को अपने दरबार में बुलाया और अपनी राजमुद्रा देकर उसे न्यायमंत्री बना दिया।
In simple words: The young guest was actually Emperor Ashok. One day, he invited Shishupal to his court and made him the minister of justice, giving him the royal seal.

Exam Tip: Identify the turning point where Shishupal gets his new role and the significance of the royal seal.

शिशुपाल को अवसर मिला : शिशुपाल को न्यायमंत्री बने अभी एक ही महीना हुआ था कि एक रात किसी ने एक पहरेदार की हत्या कर दी। शिशुपाल ने अपराधी का पता लगाने में दिन-रात एक कर दिया।
In simple words: Shishupal became the justice minister. Only a month later, a guard was murdered at night. Shishupal worked very hard to find the killer.

Exam Tip: Recognize that this event provides Shishupal with a crucial opportunity to demonstrate his abilities as a justice minister.

स्वयं सम्राट ही अपराधी : शिशुपाल को पता चला कि सम्राट अशोक ही पहरेदार की हत्या के अपराधी थे।
In simple words: Shishupal found out that Emperor Ashok himself was the one who killed the guard.

Exam Tip: This is a key plot twist; remember the identity of the murderer for questions about the climax.

सम्राट की गिरफ्तारी : सम्राट को गिरफ़्तार करना आसान न था, परंतु शिशुपाल न्यायमंत्री था। उसे तो निर्भय होकर न्याय करना था। उसने सम्राट को गिरफ्तार करने का आदेश दिया। सिपाही ने सम्राट अशोक के हाथों में हथकड़ियाँ पहना दी।
In simple words: Arresting the Emperor was difficult, but Shishupal, as the justice minister, had to do his duty bravely. He ordered Ashok's arrest, and soldiers put handcuffs on him.

Exam Tip: Highlight Shishupal's courage and impartiality in performing his duty, even when the accused was the Emperor.

सोने की मूर्ति को फांसी : सम्राट अपराधी तो थे, परंतु उन्हें साधारण अपराधी की तरह दंड नहीं दिया जा सकता था। इसलिए शास्त्र की आज्ञा के अनुसार सम्राट की सोने की मूर्ति को फांसी दी गई।
In simple words: The Emperor was guilty, but he could not be punished like an ordinary criminal. So, according to the scriptures, his gold statue was hanged instead.

Exam Tip: Note the unique solution found to uphold justice while respecting the Emperor's status, showing a blend of law and tradition.

न्यायमंत्री की जय-जयकार : शिशुपाल के न्याय से लोग बहुत प्रसन्न हुए। सम्राट ने भी उसके न्याय की प्रशंसा की।
In simple words: People were very happy with Shishupal's fair justice, and even the Emperor praised his actions.

Exam Tip: Focus on the outcome and the public's reaction, indicating the success of Shishupal's tenure as justice minister.

न्यायमंत्री Summary In English

Arrival of a young man to Shishupal's house: One day in the evening, a young man came to Shishupal Brahmin's house. Shishupal welcomed him as a guest.
In simple words: A young man visited Shishupal's house one evening, and Shishupal welcomed him warmly.

Exam Tip: This initial meeting is crucial as it sets up the interaction between the two main characters.

Discussion of Injustice spread in the state: Shishupal welcomed the guest and then he told about the injustice spread everywhere in the state. The young man did not agree with him. He said, "It is easy to find fault but it is difficult to do something well. Hearing this Shishupal said, “If I get a chance, I will show you what justice is.”
In simple words: Shishupal spoke about the injustice in the kingdom. The young man argued that finding fault is easy, but acting on it is hard. Shishupal then offered to demonstrate true justice if given an opportunity.

Exam Tip: Pay attention to the philosophical debate about justice, as it highlights the core themes of the story.

Shishupal became the minister of Justice: The young man was no other man, but emperor Ashok himself. One day he called Shishupal to his court and appointed him the minister of Justice by giving him his national symbol.
In simple words: The young man was Emperor Ashok. He later called Shishupal to his court and made him the minister of justice, giving him the royal seal as a symbol.

Exam Tip: This moment reveals Ashok's true identity and Shishupal's elevation to a position of power and responsibility.

Shishupal got a chance: Shishupal became the minister of justice. Then in a month somebody murdered a police at night. Shishupal made a great effort to find out the murderer.
In simple words: Soon after Shishupal became justice minister, a police officer was killed. Shishupal worked tirelessly to discover the killer.

Exam Tip: This event serves as the first major test of Shishupal's abilities and commitment to justice.

The emperor himself was the murderer: Shishupal came to know that the emperor Ashok was the murderer of the police.
In simple words: Shishupal discovered that Emperor Ashok was the one who killed the police officer.

Exam Tip: This revelation is the climax, testing Shishupal's resolve to deliver justice impartially.

Arrest of the emperor: It was not an easy task to arrest the emperor, but Shishupal was the minister of justice. He had to give judgement fearlessly. He summoned to arrest the emperor. The police tied emperor Ashok with handcuffs.
In simple words: Arresting the Emperor was challenging, but Shishupal, as justice minister, gave his verdict bravely. He ordered the Emperor's arrest, and the police put handcuffs on him.

Exam Tip: Focus on Shishupal's unwavering commitment to his duty, regardless of the person involved.

Gallows to the statue of gold: The emperor was the criminal, but he cannot be given punishment as to a common man criminal is given. So the gold statue of the emperor was hanged as the direction in the scripture.
In simple words: Since the Emperor could not be punished like an ordinary criminal, his gold statue was hanged instead, following the rules written in the scriptures.

Exam Tip: This solution demonstrates how ancient laws balanced justice with the unique status of a ruler.

Congratulations to the minister of justice: People became happy by the justice of Shishupal. The emperor too praised him for his justice.
In simple words: The people were pleased with Shishupal's fair decisions, and even the Emperor commended his work.

Exam Tip: Note the positive outcome and the widespread approval of Shishupal's actions, confirming his role as a true justice minister.

न्यायमंत्री Summary In Gujarati

ગુજરાતી ભાવાર્થ :

શ્રી સુદર્શનજી હિન્દીના જૂના અને અનુભવી વાર્તાકાર હતા. તેમની વાર્તાઓ રસપ્રદ હોય છે, સાથે જ તેમાં કોઈને કોઈ સંદેશ પણ છુપાયેલો હોય છે. આ વાર્તા ન્યાયમાં નિષ્પક્ષતાનો સંદેશ આપે છે.
In simple words: Sudarshanji was an old and experienced Hindi storyteller. His stories are always interesting and also contain some message. This story gives a message of impartiality in justice.

Exam Tip: The introduction helps to understand the author's style and the central theme of the story, which is crucial for overall comprehension.

શુશુપાલના ઘરે એક યુવકનું આગમન : એક દિવસ સાંજના અંધારામાં એક યુવક શિશુપાલ બ્રાહ્મણના ઘરે આવ્યો. શિશુપાલે તેને મહેમાન માનીને તેનું સ્વાગત કર્યું.
In simple words: One evening, a young man came to Shishupal's house. Shishupal welcomed him as a guest.

Exam Tip: The beginning sets the scene for the interaction, so remember the context of the initial meeting.

રાજ્યમાં ફેલાયેલા અન્યાયની ચર્ચા : શિશુપાલે મહેમાનનું સ્વાગત કર્યા પછી રાજ્યમાં ચારેબાજુ ફેલાયેલા અન્યાય વિશે વાત કરી. યુવક આ વાતથી સહમત ન થયો. તેણે કહ્યું, "દોષ કાઢવો સરળ છે, કંઈક કરીને બતાવવું મુશ્કેલ છે." આ સાંભળીને શિશુપાલે કહ્યું, "જો અવસર મળશે, તો હું બતાવી દઈશ કે ન્યાય કોને કહેવાય."
In simple words: After welcoming the guest, Shishupal discussed the injustice in the state. The young man disagreed, saying finding fault is easy, but proving yourself is hard. Shishupal responded by saying he would show what justice is if given the chance.

Exam Tip: This dialogue highlights the contrasting views on justice, which is central to the story's development.

શિશુપાલ ન્યાયમંત્રી બન્યા : તે યુવક બીજું કોઈ નહીં, સ્વયં સમ્રાટ અશોક હતા. એક દિવસ તેમણે શિશુપાલને પોતાના દરબારમાં બોલાવ્યા અને પોતાની રાજમુદ્રા આપીને તેને ન્યાયમંત્રી બનાવી દીધા.
In simple words: The young man was Emperor Ashok himself. One day, he called Shishupal to his court and made him the justice minister by giving him the royal seal.

Exam Tip: This is a crucial turning point, so remember Ashok's true identity and Shishupal's new role.

શિશુપાલને અવસર મળ્યો : શિશુપાલને ન્યાયમંત્રી બન્યાને એક મહિનો જ થયો હતો કે એક રાત્રે કોઈએ એક સિપાઈની હત્યા કરી. શિશુપાલે અપરાધીની તપાસ કરવામાં દિવસ-રાત એક કરી દીધા.
In simple words: A month after Shishupal became justice minister, a soldier was murdered. Shishupal worked tirelessly day and night to find the culprit.

Exam Tip: This event serves as Shishupal's first big test in his new position, demonstrating his dedication.

સ્વયં સમ્રાટ જ અપરાધી : શિશુપાલને ખબર પડી કે સિપાઈની હત્યાના અપરાધી સ્વયં સમ્રાટ અશોક હતા.
In simple words: Shishupal found out that Emperor Ashok himself was the murderer of the soldier.

Exam Tip: This revelation forms the climax of the story, emphasizing the challenge of judging the most powerful.

સમ્રાટની ધરપકડ : સમ્રાટની ધરપકડ કરવી એ સહેલું કામ નહોતું, પરંતુ શિશુપાલ ન્યાયમંત્રી હતા. તેમણે તો નિર્ભય થઈને ન્યાય કરવાનો હતો. તેમણે સમ્રાટની ધરપકડ કરવાનો આદેશ આપ્યો. સિપાઈઓએ સમ્રાટ અશોકના હાથમાં હાથકડીઓ પહેરાવી દીધી!
In simple words: Arresting the Emperor was not easy, but Shishupal, as justice minister, had to deliver justice bravely. He ordered Ashok's arrest, and soldiers handcuffed the Emperor.

Exam Tip: This part showcases Shishupal's courage and commitment to impartial justice, even against the highest authority.

સોનાની મૂર્તિને ફાંસી : સમ્રાટ અપરાધી તો હતા; પરંતુ તેમને સાધારણ અપરાધીની જેમ સજા ન આપી શકાય. એટલે શાસ્ત્રની આજ્ઞા અનુસાર સમ્રાટની સોનાની મૂર્તિને ફાંસી આપવામાં આવી.
In simple words: The Emperor was guilty, but he could not be punished like a common criminal. Therefore, as per the scriptures, his gold statue was hanged instead.

Exam Tip: This unique resolution highlights the blend of legal justice and traditional respect for a ruler, ensuring justice without disrespecting the throne.

ન્યાયમંત્રીની જય-જયકાર : શિશુપાલના ન્યાયથી લોકો ખૂબ પ્રસન્ન થયા. સમ્રાટે પણ તેમના ન્યાયની પ્રશંસા કરી.
In simple words: People were very happy with Shishupal's fair justice, and even the Emperor praised his decisions.

Exam Tip: The story concludes by emphasizing the impact of Shishupal's justice and the positive reception from both the public and the Emperor.

न्यायमंत्री शब्दार्थ :

  • सौभाग्य – खुशनसीबी।
    In simple words: Good fortune, luck.
  • अतिथि – मेहमान ।
    In simple words: A guest, someone visiting.
  • अवस्था – दशा, हालत।
    In simple words: Condition, state.
  • दोष – गलती।
    In simple words: A fault, a mistake.
  • सहमत – राजी, संमत।
    In simple words: Agreeable, consented.
  • सुगम – आसान, सरल।
    In simple words: Easy, simple.
  • अवसर – मौका।
    In simple words: Opportunity, chance.
  • दंड – सजा।
    In simple words: Punishment, penalty.
  • राजमुद्रा – शासन की निशानी (अंगूठी)।
    In simple words: Royal seal, a symbol of rule (a ring).
  • समुचित – अच्छी तरह।
    In simple words: Properly, in a good manner.
  • सुप्रबंध – अच्छी व्यवस्था।
    In simple words: Good management, good system.
  • हैरान – आश्चर्यचकित।
    In simple words: Surprised, astonished.
  • स्वयं – खुद।
    In simple words: Oneself, personally.
  • उपस्थित – हाजिर।
    In simple words: Present, available.
  • संकेत – इशारा।
    In simple words: Hint, gesture.
  • नि:स्तब्धता – शांति।
    In simple words: Silence, calm.
  • हथकड़ी – अपराधी के हाथों में पहनाई जानेवाली लोहे की जंजौर।
    In simple words: Handcuffs, iron chains for a criminal's hands.
  • उददंड – अविवेकी।
    In simple words: Arrogant, imprudent.
  • बोझ – भार, (यहाँ) जिम्मेदारी।
    In simple words: Burden, (here) responsibility.

Exam Tip: Understanding these key vocabulary words is essential for comprehending the story and answering questions accurately.

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