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Detailed Chapter 13 महाप्रस्थान GSEB Solutions for Class 12 Hindi
For Class 12 students, solving GSEB textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 12 Hindi solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 13 महाप्रस्थान solutions will improve your exam performance.
Class 12 Hindi Chapter 13 महाप्रस्थान GSEB Solutions PDF
स्वाध्याय
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर उनके नीचे दिए गए विकल्पों से सही विकल्प चुनकर लिखिए :
Question 1. युधिष्ठिर ने मात्र शास्त्र-व्यवस्था के कारण ही क्या नहीं स्वीकारा?
(क) वानप्रस्थ
(ख) गृहस्थ
(ग) संन्यास
(घ) वृद्धत्व
Answer: (क) वानप्रस्थ
In simple words: युधिष्ठिर ने केवल धार्मिक नियमों के कारण वानप्रस्थ आश्रम को स्वीकार नहीं किया था।
🎯 Exam Tip: Multiple-choice questions often test knowledge of specific character actions or decisions within the text. Focus on understanding the reasons behind major choices made by characters.
Question 2. निम्न में से किसकी सीमाएँ निश्चित हैं?
(क) युद्ध की
(ख) साम्राज्य की
(ग) सम्बन्ध की
(घ) सभी की
Answer: (घ) सभी की
In simple words: युद्ध, साम्राज्य, और रिश्तों-नातों की सभी की एक तय सीमा होती है।
🎯 Exam Tip: Pay attention to broad concepts presented in the text, especially when questions ask about general principles or characteristics like 'limitations'.
Question 3. दुर्ग, प्रासाद, और स्मृतिभवन में किसकी प्रशस्तियाँ गूंजती रहती हैं?
(क) विचारहारा की
(ख) चारण की
(ग) सजन की
(घ) एक भी नहीं
Answer: (ख) चारण की
In simple words: दुर्गों, महलों, और यादगार इमारतों में चारणों की प्रशंसा भरी बातें हमेशा सुनाई देती हैं।
🎯 Exam Tip: Remember who typically performs specific actions or roles described in historical or literary contexts, such as bards (चारण) singing praises.
Question 4. युद्ध और आतंक किसके पर्याय हैं?
(क) वितृष्णा के
(ख) आतंक के
(ग) सामाजिकता के
(घ) मानसकिता के
Answer: (ग) सामाजिकता के
In simple words: युद्ध और डर एक तरह से समाज से जुड़े व्यवहार के ही दूसरे रूप माने जाते हैं।
🎯 Exam Tip: Understand the philosophical or thematic connections between key terms as presented in the chapter. Often, the text redefines common ideas within its context.
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए :
Question 1. आर्य शास्त्रव्यवस्था में मनुष्य जीवन के कितने आश्रम बताये गए हैं?
Answer: आर्य शास्त्र व्यवस्था के अनुसार, मनुष्य जीवन के चार आश्रम होते हैं- ब्रह्मचर्याश्रम (विद्यार्थी जीवन), गृहस्थाश्रम, वानप्रस्थ आश्रम और संन्यासाश्रम।
In simple words: आर्य शास्त्रों में मनुष्य के जीवन को चार मुख्य पड़ावों में बांटा गया है: ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, और संन्यास।
🎯 Exam Tip: For single-sentence answers, provide direct and concise information. Listing the four ashrams accurately is key here.
Question 2. शिलालेख पर क्या लिखा जाता है?
Answer: शिलालेख पर अक्सर झूठा इतिहास लिखा जाता है।
In simple words: पत्थरों पर बनी लिखावट में कभी-कभी गलत इतिहास लिखा जाता है।
🎯 Exam Tip: Focus on what the text explicitly states about objects or practices, even if it contradicts common knowledge or implies a critical view.
Question 3. जड़ किसका प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता?
Answer: जड़ वस्तुएँ चेतन का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकतीं।
In simple words: बेजान चीज़ें जीवित चीज़ों की जगह नहीं ले सकतीं।
🎯 Exam Tip: When dealing with philosophical concepts like 'jadd' (inert) and 'chetan' (conscious), define their distinct roles clearly as per the chapter's teaching.
Question 4. श्रेष्ठ योद्धा के रूप में कौन जाना जाता है ?
Answer: श्रेष्ठ योद्धा के रूप में अर्जुन प्रसिद्ध हैं।
In simple words: अर्जुन को एक बहुत ही महान योद्धा के रूप में पहचाना जाता है।
🎯 Exam Tip: Identify key characters and their defining attributes. Questions about famous figures often test their primary associations.
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-दो वाक्यों में लिखिए :
Question 1. सत्य की प्राप्ति के बारे में युधिष्ठिर के विचार बताइए।
Answer: युधिष्ठिर का मानना है कि सच को जानने के लिए किसी और से पूछना नहीं पड़ता। सच पाने के लिए इंसान को खुद अपने अंदर ही खोज करनी होती है।
In simple words: युधिष्ठिर कहते हैं कि सच दूसरों से नहीं मिलता, बल्कि खुद की खोज से पता चलता है।
🎯 Exam Tip: When asked about a character's views, summarize their core philosophy concisely. Ensure you capture the essence of their statement.
Question 2. युधिष्ठिर ने वस्तुओं से हीन होने का क्या अर्थ बताया है ?
Answer: युधिष्ठिर ने समझाया है कि जब कोई व्यक्ति चीज़ों के प्रति लालच रखता है, तो यह उसके विकास को रोकता है। उनका कहना है कि वस्तुओं से मुक्त होने का मतलब है, व्यक्ति का स्वभाव और भी समृद्ध होना।
In simple words: युधिष्ठिर के अनुसार, चीज़ों का मोह इंसान के विकास में रुकावट है; चीज़ों से दूर रहने से व्यक्तित्व और बेहतर होता है।
🎯 Exam Tip: Look for how abstract concepts (like being 'devoid of things') are explained by characters, often linking them to personal growth or decline.
Question 3. युधिष्ठिर के मतानुसार अमानवीय कृत्यों का ऐतिहासिक निष्कर्ष क्या निकलेगा?
Answer: युधिष्ठिर के अनुसार, युद्ध और आतंक मानवता के खिलाफ काम हैं। इन क्रूर कामों का अंतिम ऐतिहासिक परिणाम यह होगा कि कोई भी योद्धा अर्जुन से श्रेष्ठ नहीं होगा और युधिष्ठिर ही अकेले चक्रवर्ती सम्राट माने जाएँगे।
In simple words: युधिष्ठिर मानते हैं कि युद्ध और आतंक जैसे बुरे काम दिखाते हैं कि अर्जुन जैसा कोई महान योद्धा नहीं है, और वे ही अकेले बड़े राजा हैं।
🎯 Exam Tip: Analyze how characters interpret historical outcomes, especially for actions like war. The focus should be on their unique perspective and conclusion.
4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पाँच-छ पंक्तियों में लिखिए :
Question 1. सफलता और अमरत्व के बारे में युधिष्ठिर के विचार सविस्तार बताइए।
Answer: युधिष्ठिर कहते हैं कि लोग युद्ध, राज-पाठ, धन-दौलत और रिश्तों जैसे जाल में फंसकर खुद को सफल मान लेते हैं। वे इस सफलता के दायरे में ही कैद रह जाते हैं। इसके साथ ही, वे चीज़ों और जीत के ज़रिए हमेशा अमर रहना चाहते हैं। लेकिन, किले, महल, यादगार भवन, चारणों की झूठी तारीफें और ऐतिहासिक पत्थर के लेख किसी को भी सच में अमर नहीं बना सकते।
In simple words: युधिष्ठिर मानते हैं कि लोग युद्ध, राज-पाट, धन और रिश्तों को सफलता मानते हैं, और चीज़ों से अमरता पाना चाहते हैं। पर वे कहते हैं कि महल या झूठी तारीफें किसी को हमेशा के लिए अमर नहीं बना सकतीं।
🎯 Exam Tip: For descriptive answers, ensure a comprehensive explanation of the character's thoughts, covering all aspects mentioned in the question (success and immortality). Use clear and connected sentences.
Question 2. युद्ध के परिणाम से जन्म लेनेवाली स्थिति पर अपने विचार स्पष्ट करें।
Answer: युद्ध को किसी समस्या को सुलझाने का आखिरी तरीका माना जाता है। भले ही इससे समस्या सुलझे या न सुलझे, इसके नतीजे बहुत बुरे होते हैं। युद्ध में कई सैनिक और आम लोग मारे जाते हैं। इससे बहुत सी औरतें विधवा हो जाती हैं। परिवार बिखर जाते हैं और कई बच्चे अनाथ हो जाते हैं। समाज में तरह-तरह की बुराइयाँ फैल जाती हैं। इसके भयानक परिणाम होते हैं। इसके अलावा, ज़रूरी चीज़ों की कमी हो जाती है और देश की अर्थव्यवस्था भी कमजोर पड़ जाती है।
In simple words: युद्ध से भले ही समस्या न सुलझे, पर इसके भयानक नतीजे होते हैं: सैनिक और नागरिक मरते हैं, परिवार उजड़ते हैं, बच्चे अनाथ होते हैं, समाज में बुराइयाँ फैलती हैं, ज़रूरी चीज़ों की कमी होती है, और देश की आर्थिक हालत बिगड़ जाती है।
🎯 Exam Tip: When explaining consequences, describe a range of impacts—social, economic, and personal. Structure your answer logically, moving from immediate to broader effects.
Question 3. “जड़, जड़ का ही प्रतिनिधित्व कर सकता है चेतन का नहीं" – विमर्श समझाइए ।
Answer: जड़ (बेजान) और चेतन (जीवित) में बहुत बड़ा अंतर होता है। एक बेजान चीज़ किसी दूसरी चीज़ का प्रतीक तो हो सकती है, पर वह कभी किसी जीवित चीज़ का प्रतीक नहीं बन सकती। जैसे, एक आदमी और उसकी सुंदर तस्वीर को लें। आदमी जीवित है, लेकिन उसकी तस्वीर बेजान है। तस्वीर चाहे कितनी भी सुंदर हो या उससे कितना भी लगाव हो, वह आदमी नहीं बन सकती। वह सिर्फ एक बेजान चीज़ को ही दिखाएगी, जीवित चीज़ को नहीं। इसी तरह, राज्य, साम्राज्य, धन, किले, महल और यादगार इमारतें भी बेजान हैं। वे जीवित नहीं हो सकतीं। इसलिए, बेजान चीज़ों पर घमंड करना बेकार है।
In simple words: बेजान चीज़ें सिर्फ बेजान चीज़ों को ही दिखा सकती हैं, जीवित चीज़ों को नहीं। जैसे एक तस्वीर आदमी नहीं बन सकती, वैसे ही राज्य या धन जैसी बेजान चीज़ें जीवित नहीं होतीं। इसलिए उन पर गर्व करना व्यर्थ है।
🎯 Exam Tip: For explanations of philosophical statements, clarify the meaning of key terms (jadd, chetan) and use a clear example to illustrate the concept. Conclude with the main message or implication.
GSEB Solutions Class 12 Hindi महाप्रस्थान Important Questions And Answers
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-दो वाक्यों में लिखिए :
Question 1. 'महाप्रस्थान' खण्ड-काव्य का विषय क्या है?
Answer: 'महाप्रस्थान' काव्य पांडवों के 'स्वर्गारोहण' की कहानी पर आधारित है। इस कविता में कवि नरेश मेहता युधिष्ठिर के ज़रिए अर्जुन को सच की पहचान, राज-पाट छोड़ने के कारण, राज-व्यवस्था की अत्यधिक शक्ति से पैदा हुई समस्याओं, इंसानियत को बचाने, युद्ध के नतीजों से सामने आने वाली जटिल मुश्किलों और कई अन्य ज़रूरी बातों के बारे में बताते हैं।
In simple words: 'महाप्रस्थान' पांडवों के स्वर्ग जाने की कहानी है, जहाँ युधिष्ठिर अर्जुन को सच्चाई, राज्य छोड़ने के कारण, सत्ता की समस्याओं, इंसानियत बचाने और युद्ध के बुरे परिणामों के बारे में बताते हैं।
🎯 Exam Tip: When asked about the theme of a literary work, provide a concise summary of its central ideas, key characters, and the messages conveyed through them.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए :
Question 1. एकमात्र चक्रवर्ती सम्राट कौन है?
Answer: युधिष्ठिर ही एकमात्र चक्रवर्ती सम्राट हैं।
In simple words: सिर्फ युधिष्ठिर ही एक बड़े और अकेले राजा हैं।
🎯 Exam Tip: Identify unique titles or roles assigned to specific characters in the text for direct recall questions.
Question 2. सत्य की प्राप्ति के लिए क्या करना होता है?
Answer: सच को पाने के लिए खुद से ही जानने की इच्छा रखनी पड़ती है।
In simple words: सच जानने के लिए हमें खुद ही अंदर से खोजना पड़ता है।
🎯 Exam Tip: Focus on the active steps or internal processes a character suggests for achieving a goal, like 'truth'.
Question 3. अर्जुन से किन लोगों के बारे में सोचने के लिए कहा गया है?
Answer: अर्जुन से उन लोगों के बारे में सोचने के लिए कहा गया है जिनकी भावनाओं को कोई महत्व नहीं दिया जाता और जिन्हें हमेशा अपमान सहना पड़ता है।
In simple words: अर्जुन को उन लोगों के बारे में सोचने को कहा गया है जिनकी कोई इज्जत नहीं करता और जो हमेशा बेइज्जत होते रहते हैं।
🎯 Exam Tip: Note specific groups or types of people mentioned in the context of moral or ethical discussions within the text.
Question 4. समाज में वर्णसंकरता कब बढ़ जाती है?
Answer: युद्ध के बाद समाज में वर्णसंकरता बहुत बढ़ जाती है।
In simple words: युद्ध के बाद समाज में अलग-अलग जातियों के मेल से बनी स्थिति बहुत ज़्यादा हो जाती है।
🎯 Exam Tip: Understand the societal consequences discussed in the text, especially those linked to major events like war.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों में से चुनकर लिखिए :
Question 1. वस्तुओं से हीन होते जाने का अर्थ है ....
A. व्यक्तित्व से सम्पन्न होते जाना
B. युद्ध और आतंक
C. समाज में संकीर्णता बढ़ जाना
D. अमानवीय हो जाना
Answer: A. व्यक्तित्व से सम्पन्न होते जाना
In simple words: चीज़ों का मोह छोड़ना यानी अपने आप में और बेहतर बनना होता है।
🎯 Exam Tip: For MCQ questions testing interpretation, choose the option that best reflects the philosophical or thematic meaning presented in the text, not just a literal interpretation.
Question 2. 'महाप्रस्थान' काव्य का प्रकार कौन-सा है?
A. खण्ड-काव्यांश
B. महाकाव्य
C. मुक्तक काव्य
D. संवेदना काव्य
Answer: A. खण्ड-काव्यांश
In simple words: 'महाप्रस्थान' एक तरह का छोटा काव्य-रूप है जो किसी बड़े काव्य का हिस्सा होता है।
🎯 Exam Tip: Knowledge of literary terms and the classification of literary works (e.g., epic, खंडकाव्य) is essential for such questions.
व्याकरण
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची (समानार्थी) शब्द लिखिए :
- निष्कर्ष - सारांश
- संपदा - संपत्ति
- कुचक्र - षड़यंत्र
- दुर्ग - किला
- प्रासाद - महल
- विवशता - लाचारी
- अभ्यस्त - आदी, प्रवीण
- बाध्य - विवश
- अनाथ - असहाय
- उत्तरदायी - जिम्मेदार
- आतंक - भय
निम्नलिखित शब्दों के विलोम (विरुद्धार्थी) शब्द लिखिए :
- व्यवस्था × अव्यवस्था
- सत्य × असत्य
- प्रश्न × उत्तर
- सफलता × असफलता
- अपमानित × सम्मानित
- स्वत्व × परायापन
- अभ्यस्त × अनभ्यस्त
- विधवा × सधवा
- कठोर × कोमल
- आदिम × अर्वाचीन
- युद्ध × शांति
- श्रेष्ठ × निकृष्ट
- मानवता × दानवता
- गहरा × उपला
निम्नलिखित तद्भव शब्दों के तत्सम रूप लिखिए :
- आम - आम्र
- तुरत - त्वरित
- चोंच - चंचु
- कागज - कागद
- पलंग - पर्यक
निम्नलिखित शब्दों में से प्रत्यय अलग कीजिए :
- व्यक्तित्व = व्यक्ति + त्व (प्रत्यय)
- अमरता = अमर + ता (प्रत्यय)
- विवशता = विवश + ता (प्रत्यय)
- वर्णसंकरता = वर्णसंकर + ता (प्रत्यय)
- अपमानित = अपमान + इत (प्रत्यय)
- स्वत्व = स्व + त्व (प्रत्यय)
- दिशाहीन = दिशा + हीन (प्रत्यय)
- कुष्ठता = कृष्ठ + ता (प्रत्यय)
- अमानवीय = अमानव + ईय (प्रत्यय)
- दीप्तित = दीप्त + इत (प्रत्यय)
- उत्तरदायी = उत्तर + दायी (प्रत्यय)
- नारीत्व = नारी + त्व (प्रत्यय)
- कवित्व = कवि + त्व (प्रत्यय)
निम्नलिखित शब्दों में से उपसर्ग अलग कीजिए :
- परित्याग = परि (उपसर्ग) + त्याग
- निष्कर्ष = निस् (निः) (उपसर्ग) + कर्ष
- महाप्रस्थान = महा (उपसर्ग) + प्रस्थान
- कुचक्र = कु (उपसर्ग) + चक्र
- परिवृत्त = परि (उपसर्ग) + वृत्त
- विवश = वि (उपसर्ग) + वश
- अपमान = अप (उपसर्ग) + मान
- अपहरण = अप (उपसर्ग) + हरण
- विधवा = वि (उपसर्ग) + धवा
- अनाथ = अ (उपसर्ग) + नाथ
- सुदूर = सु (उपसर्ग) + दूर
- अमानवीय = अ (उपसर्ग) + मानवीय
निम्नलिखित वाक्यों में से विशेषण पहचानिए :
Question 1.
1. अर्जुन श्रेष्ठ योद्धा है।
2. युधिष्ठिर भारत का चक्रवर्ती सम्राट था।
3. ताजमहल ऐतिहासिक इमारत है।
Answer:
1. श्रेष्ठ
2. चक्रवर्ती
3. ऐतिहासिक
In simple words: वाक्यों में 'श्रेष्ठ', 'चक्रवर्ती' और 'ऐतिहासिक' शब्द विशेषण हैं, जो संज्ञा की खासियत बताते हैं।
🎯 Exam Tip: To identify adjectives (विशेषण), look for words that describe or modify a noun's quality, quantity, or characteristic.
निम्नलिखित शब्दसमूहों के लिए एक-एक शब्द लिखिए :
- 1. जानने की इच्छा - जिज्ञासा
- 2. संपूर्ण त्याग - परित्याग
- 3. वह व्यवस्था जिसमें मनुष्य के वन में जाकर रहने का विधान है - वानप्रस्थ
- 4. पत्थर पर खुदा हुआ प्राचीन लेख - शिलालेख
- 5. जिसका अपमान किया गया हो - अपमानित
- 6. जिनकी भावनाओं का कोई महत्त्व न हो - विचारहारा
- 7. बलपूर्वक हरण करना या ले जाना - अपहरण
- 8. युद्ध में स्थिर रहनेवाला - युधिष्ठिर
- 9. जिसका कोई उद्देश्य न हो - निरुद्देश्य, दिशाहीन
- 10. जो दायें और बाएँ दोनों हाथों से बाण चलाने में समर्थ हो - सव्यसाची
- 11. दो भिन्न जातियों के स्त्री-पुरुष द्वारा संतान होने की स्थिति - वर्णसंकरता
- 12. भवन आदि बनाने से पहले नींव में पत्थर रखने की क्रिया - शिलान्यास
निम्नलिखित अशुद्ध वाक्यों को शुद्ध करके फिर से लिखिए :
Question 1.
1. मैं तुम्हारे सहारे से हूँ।
2. मेरा भविष्य अच्छा था।
3. हम लोग उनको मिलने गये।
4. सभापति का चुनाव में मैं था।
5. मेरा प्राण निकल गया।
Answer:
1. मैं तुम्हारे सहारे पर हूँ।
2. मेरा भविष्य अच्छा है।
3. हम लोग उनसे मिलने गये।
4. मैं सभापति के चुनाव में था।
5. मेरे प्राण निकल गये।
In simple words: वाक्यों को सही रूप में लिखा गया है, जिसमें शब्दों का सही उपयोग और व्याकरण की गलतियों को सुधारा गया है।
🎯 Exam Tip: When correcting sentences, focus on common grammatical errors such as prepositions, tense consistency, and proper usage of pronouns to ensure clarity and correctness.
निम्नलिखित कहावतों का अर्थ लिखिए :
Question 1. जैसी करनी वैसी भरनी अथवा कर भला होगा भला
Answer: अर्थ: अपने कर्मों के अनुसार ही हमें फल मिलता है।
In simple words: इसका मतलब है कि आप जैसा काम करेंगे, वैसा ही नतीजा मिलेगा।
🎯 Exam Tip: For proverbs, provide a straightforward explanation of their underlying message or moral, avoiding complex phrasing.
Question 2. साँच को आंच नहीं
Answer: अर्थ: जो लोग सच्चाई पर चलते हैं, उन्हें किसी बात का डर नहीं होता।
In simple words: यदि आप सच्चे हैं, तो आपको किसी भी मुश्किल या डर का सामना नहीं करना पड़ेगा।
🎯 Exam Tip: Explain the meaning of a proverb in a way that shows its application to real-life situations or character traits.
महाप्रस्थान Summary In Hindi
विषय-प्रवेश :
'महाप्रस्थान' काव्य पांडवों के 'स्वर्गारोहण' की कहानी पर आधारित है। इस कविता में कवि नरेश मेहता युधिष्ठिर के ज़रिए अर्जुन को सच की पहचान, राज-पाट छोड़ने के कारण, राज-व्यवस्था की अत्यधिक शक्ति से पैदा हुई समस्याओं, इंसानियत को बचाने, युद्ध के नतीजों से सामने आने वाली विभिन्न जटिल मुश्किलों और कई अन्य ज़रूरी बातों के बारे में बताते हैं।
कविता का सरल अर्थ :
युधिष्ठिर अर्जुन से पूछते हैं - क्या तुम प्रश्न और किसी बात को जानने की इच्छा, यानी जिज्ञासा के बीच का अंतर समझते हो, पार्थ? फिर वे खुद ही जवाब देते हैं कि सच की जानकारी दूसरों से सवाल करके नहीं मिल सकती। इसे खुद से जानने की कोशिश करनी चाहिए। वे कहते हैं, चाहे सुख का समय हो या दुख का, उन्हें हमेशा जानने की इच्छा रही है। मैंने राज्य छोड़ दिया, इससे तुम लोगों को बुरा ज़रूर लगा होगा। वे कहते हैं कि उन्होंने राज्य को सिर्फ़ धार्मिक नियमों की वजह से वानप्रस्थ आश्रम स्वीकार नहीं किया था, बल्कि यह फ़ैसला बहुत सोच-समझकर लिया था।
अर्जुन पूछते हैं - कौन-सा निर्णय!
युधिष्ठिर कहते हैं कि चीज़ों से मुक्त होना ही व्यक्तित्व के बेहतर होने की निशानी है। हे पार्थ! युद्ध, राज्य, साम्राज्य, संपत्ति, संबंध - इन सबकी सीमाएँ होती हैं। ये सभी चीज़ें एक जाल की तरह हैं। इन्हें कोई व्यक्ति अपने चारों ओर बुन लेता है। इसके बाद वह कभी भी इस सफलता के जाल से बाहर नहीं निकलना चाहता। एक दिन ऐसा आता है, जब वह इन चीज़ों और सफलताओं के नाम से ही जाना जाने लगता है। और पार्थ! तुम चीज़ों और सफलताओं के बल पर अमर हो जाने को ही पुरुषार्थ और पक्का इरादा कहते हो!
पार्थ! ये किले, ये विशाल भवन, किसी की याद में बनाए गए ये महल, चारणों द्वारा किए गए स्तुतिगान और झूठे इतिहास वाले शिलालेख क्या व्यक्ति को अमर बना सकते हैं? हे पार्थ! जो बेजान है, जिसमें जीवन नहीं है, वह बेजान का ही प्रतिनिधित्व कर सकता है। वह जीवित, यानी चेतन का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता। पार्थ! तुम्हें बार-बार यह सोचकर दुख होता है कि तुम्हें अपमान सहना पड़ा है। तुम्हारे अपनेपन पर हमला किया गया है। न्याय पाने के लिए तुम्हें संघर्ष करना पड़ा है। इन चीज़ों से तुम्हें दुख होता है। पर हे पार्थ! तुम उन सामान्य लोगों के बारे में तो सोचो, जिन्हें सोचने लायक़ भी नहीं छोड़ा गया है, जिन्हें हमेशा अपमान सहना पड़ता है, जिनके अपनेपन को छीन लेनेवाले हमारे चमकते हुए साम्राज्य हैं। ये साधारण लोग अन्याय सहने के आदी हो गए हैं। इन्हें यह पता नहीं है कि न्याय नाम की कोई चीज़ होती है। हर युद्ध के बाद एक राज्य बनता है, पर इस युद्ध में कई लोग मारे जाते हैं, जिससे बहुत सी स्त्रियाँ विधवा हो जाती हैं और कई बच्चे अनाथ हो जाते हैं। वे बेचारे जीवन के संघर्ष में दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर हो जाते हैं।
युधिष्ठिर ने अर्जुन से कहा कि हे सव्यसाची! तुम्हारे कृष्ण ने ही यह बात कही थी कि जब कोई युद्ध होता है, तो उसके बाद समाज में बुराइयाँ आती हैं, वर्णसंकरता की वृद्धि होती है। हे अर्जुन! क्या तुम उस दिन की कल्पना कर सकते हो, जब युद्ध के परिणाम स्वरूप इस धरती पर चारों ओर कुल-गोत्र का नामोनिशान मिट जाएगा और हर जगह वर्णसंकरता का बोलबाला होगा। हे पार्थ, सोचो, उस समय इस ऐतिहासिक विद्रूपता का ज़िम्मेदार कौन होगा? कौन होगा इस स्थिति का ज़िम्मेदार!
हे अर्जुन, आनेवाले दिनों में ये राज्य राजा से भी ज़्यादा निष्ठुर हो जाएँगे। और ज्यों-ज्यों समय बीतता जाएगा, दूर भविष्य में राज्य की व्यवस्थाएँ राज्य से भी ज़्यादा अमानवीय हो जाएँगी (अत्याचार बढ़ जाएगा)। युद्ध और आतंक राज्य-व्यवस्थाओं के मूलभूत स्तंभ हैं। इनका जन्म मनुष्य की पुरानी आदतों से हुआ है। एक दिन ऐसा आएगा, जब युद्ध और आतंक को ही सामाजिकता माना जाने लगेगा। अर्जुन, हमने कौरवों से युद्ध करके उन्हें हराया और तुमने आतंक के द्वारा पांडवों के साम्राज्य के खज़ाने में वृद्धि की।
युधिष्ठिर अर्जुन से कहते हैं कि हे अर्जुन! हमने जो अमानुषिक कार्य किए, उनके ऐतिहासिक निचोड़ ये निकले कि अर्जुन से श्रेष्ठ कोई वीर नहीं है और युधिष्ठिर ही एकमात्र चक्रवर्ती सम्राट हैं। हे अर्जुन, मनुष्यता अंधकार के गर्त में जा रही है। अर्जुन, तुम्हें इस बात का अंदाज़ा नहीं है कि संकट और गहरा हो गया है।
महाप्रस्थान शब्दार्थ :
- जिज्ञासा - कोई बात जानने की इच्छा।
- पार्थ - अर्जुन।
- परित्याग - त्याग देना।
- शास्त्र-व्यवस्था - शास्त्र के अनुसार व्यवस्था।
- वानप्रस्थ - वह व्यवस्था जिसमें मनुष्य के वन में जाकर रहने का विधान है।
- निष्कर्ष - सारांश, निचोड़।
- हीन - रहित।
- व्यक्तित्व - व्यक्ति का गुण या भाव।
- साम्राज्य - वह बड़ा राज्य, जो एक सम्राट के शासन में हो।
- संपदा - संपत्ति, धन-दौलत।
- कुचक - षड़यंत्र, छल-प्रपंच, चाल, साज़िश।
- बुनना - (यहाँ अर्थ) घेरा बना लेना।
- परिवृत्त - घेरा। पर्याय - प्रकार, ढंग।
- अमरता - चिर जीवन।
- पुरुषार्थ - पुरुष के प्रयत्न का कार्य।
- संकल्प - पक्का इरादा। दुर्ग-गढ़, कोट, किला।
- प्रासाद - महल, विशाल भवन।
- स्मृति-भवन - यादगार भवन, किसी की याद में बना भवन।
- चारण-प्रशस्तियाँ - चारणों के द्वारा किया गया स्तुतिगान।
- शिलालेख - पत्थर पर खुदा हुआ प्राचीन लेख।
- जड़ - चेतना रहित, निश्चेष्ट।
- चेतन - प्राणयुक्त।
- विवशता - लाचारी, असहाय अवस्था।
- अपमानित - जिसका अपमान किया गया हो, तिरस्कृत। स्वत्व-अपनापन।
- संघर्ष - होड़, द्वेष।
- विचारहारा - जिनकी भावनाओं का कोई महत्त्व न हो।
- अपहरण - छीनकर या बलपूर्वक ले लेना।
- दीप्तित - चमकदार, शोभायुक्त।
- अभ्यस्त - आदी, जिनको आदत हो गई हो।
- विधवा - वह स्त्री, जिसका पति मर चुका हो।
- अनाथ - असहाय।
- जीवन-संघर्ष - जीवित रहने के लिए किया जानेवाला संघर्ष।
- दिशाहीन - जिसका कोई उद्देश्य न हो।
- बाध्य - विवश।
- सव्यसाची - जो बाएं हाथ से भी बाण चलाने में समर्थ हो, अर्जुन।
- उपरांत - पश्चात।
- कुल-गोत्र हीन - जिसका कुल-गोत्र न हो।
- वर्णसंकरता - दो भिन्न जातियों के स्त्री-पुरुष द्वारा संतान होने की स्थिति।
- विचरण - घूमना-फिरना।
- कुष्ठता - कोढ़ की स्थिति।
- उत्तरदायी - ज़िम्मेदार।
- सुदूर - बहुत दूर।
- अमानवीय - जो मनुष्य के लिए न हो।
- शिलान्यास - भवन आदि बनाने से पहले नींव में पत्थर .. रखने की क्रिया।
- आतंक - भय।
- राजकोष - राजा का ख़ज़ाना।
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