Official GSEB Solutions for Class 11 Hindi: Chapter 04 गुरु पर्व
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Chapter-wise Solutions for Hindi: Chapter 04 गुरु पर्व
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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में लिखिए
Question 1. गुरु नानक देव ने लोगों को क्या शिक्षाएं दी?
Answer: गुरु नानक देव निराकार ईश्वर के उपासक थे। उन्होंने परिश्रम को अत्यधिक महत्व दिया और लोगों को कड़ी मेहनत से अपनी आजीविका कमाने की शिक्षा दी। उनका मानना था कि सभी मनुष्य समान हैं, और जाति के आधार पर समाज का विभाजन गलत है। वे सतीप्रथा के मुखर विरोधी भी थे।
In simple words: गुरु नानक देव ने लोगों को परिश्रम करने, सभी मनुष्यों को समान मानने और निराकार ईश्वर की पूजा करने की शिक्षा दी, साथ ही जातिभेद और सतीप्रथा का विरोध किया।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में गुरु नानक देव के मुख्य उपदेशों और सामाजिक विचारों को संक्षेप में स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. गुरु-पर्व किस प्रकार मनाया जाता है?
Answer: सिक्ख समुदाय गुरु नानक देव के जन्मोत्सव को गुरु-पर्व के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाता है। इस दिन गुरुद्वारों को विशेष रूप से सजाया जाता है, और भक्तजन गुरुवाणी के भजन गाते हैं। सुबह के समय प्रभातफेरियां निकाली जाती हैं, और शाम को एक भव्य जुलूस का आयोजन होता है। इस तरह, गुरु-पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
In simple words: गुरु-पर्व गुरु नानक देव का जन्मदिन है, जिसे गुरुद्वारे सजाकर, गुरुवाणी गाकर, प्रभातफेरियां निकालकर और जुलूस निकालकर श्रद्धा और उत्साह से मनाया जाता है।
🎯 Exam Tip: गुरु-पर्व मनाने की मुख्य रीतियों और भावनात्मक पहलुओं का उल्लेख करना आवश्यक है।
Question 3. नानक देव दुनियादारी के जीव नहीं थे - स्पष्ट कीजिए।
Answer: नानक देव अपने बचपन से ही ईश्वर की भक्ति में लीन रहते थे। जब बड़े हुए, तो उनके पिता ने उन्हें व्यवसाय के लिए पैसे दिए, लेकिन उन्होंने वह धन साधु-संतों की सेवा में व्यय कर दिया। इसके बाद, नवाब दौलत खाँ के यहाँ नौकरी करते हुए भी वे गरीबों की सेवा में लगे रहे। एक घटना के अनुसार, तेरह सेर आटा तौलते समय उन्होंने पूरा आटा एक गरीब व्यक्ति को दे दिया। ये सभी घटनाएँ यह प्रमाणित करती हैं कि नानक देव सांसारिक मोह-माया से परे एक विरक्त आत्मा थे।
In simple words: नानक देव ने सांसारिक धन और नौकरी को छोड़कर हमेशा परमात्मा की भक्ति और गरीबों की सेवा को प्राथमिकता दी, जिससे सिद्ध होता है कि वे दुनियादारी से विमुख थे।
🎯 Exam Tip: नानक देव के जीवन से जुड़े उदाहरणों का उल्लेख करके उनकी विरक्ति स्वभाव को प्रमाणित करना महत्वपूर्ण है।
Question 4. नानक देव ने शोषण के प्रति अपना विरोध किस प्रकार प्रकट किया?
Answer: गुरु नानक देव परिश्रम से जीविकोपार्जन के समर्थक थे। एक बार उन्होंने एक धनी व्यक्ति का निमंत्रण अस्वीकार कर दिया और एक बढ़ई के घर की सामान्य, रूखी-सूखी रोटी खाई। जब उस धनी व्यक्ति ने इसकी शिकायत की, तो नानक जी ने दोनों की रोटियों को निचोड़कर दिखाया। बढ़ई की रोटी से दूध की बूँदें निकलीं और धनी व्यक्ति की रोटी से खून की बूँदें टपकीं। इस प्रकार, नानक देव ने स्पष्ट रूप से शोषण के प्रति अपना विरोध प्रकट किया।
In simple words: नानक देव ने धनी शोषक की रोटी से खून और मेहनती बढ़ई की रोटी से दूध निकालकर यह दर्शाया कि शोषण से कमाए गए धन में हिंसा है, जबकि ईमानदारी की कमाई पवित्र होती है।
🎯 Exam Tip: इस उत्तर में रोटी निचोड़ने वाली घटना का सटीक विवरण और उसके निहितार्थ को स्पष्ट करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Question 5. नानक देवजी किन बातों के खिलाफ थे?
Answer: नानक देवजी निराकार ईश्वर में विश्वास रखते थे और मूर्तिपूजा का समर्थन नहीं करते थे। वे जाति-पाति के नाम पर समाज में व्याप्त भेदभाव के प्रबल विरोधी थे। उन्होंने स्वयं कमाकर खाने की शिक्षा दी और सतीप्रथा का भी खुलकर विरोध किया। इसके अतिरिक्त, नानक देव शोषण के खिलाफ थे। उन्होंने धनवान की रोटी से खून और बढ़ई की रोटी से दूध की बूँदें दिखाकर शोषण के प्रति अपना विरोध व्यक्त किया।
In simple words: नानक देव मूर्तिपूजा, जातिगत भेदभाव, सतीप्रथा और किसी भी प्रकार के शोषण के विरुद्ध थे, तथा निराकार ईश्वर और श्रम की गरिमा में विश्वास रखते थे।
🎯 Exam Tip: नानक देव द्वारा विरोध की गई मुख्य सामाजिक बुराइयों और धार्मिक कुरीतियों को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करना चाहिए।
Question 6. सिक्ख धर्म की क्या विशेषताएं हैं?
Answer: सिक्ख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव थे और उन्हें आदि गुरु माना जाता है। इस धर्म में कुल दस गुरु हुए, जिनमें अंतिम गुरु गोविंद सिंह थे। गुरुओं के जन्मोत्सव को गुरु-पर्व के रूप में बड़ी श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाता है। दसवें गुरु के बाद, गुरु ग्रंथ साहिब को इस धर्म में गुरु के समान दर्जा प्राप्त है। इसमें गुरु नानक के उपदेशों के अतिरिक्त संत कबीर तथा अन्य संतों की शिक्षाएं भी सम्मिलित हैं। सिक्ख धर्म में मूर्तिपूजा नहीं की जाती, यह निराकार ईश्वर को मानता है, जिसके कारण इसमें जातिप्रथा नहीं है।
In simple words: सिक्ख धर्म गुरु नानक देव द्वारा स्थापित है, जिसमें दस गुरु हुए, गुरु ग्रंथ साहिब को पवित्र ग्रंथ माना जाता है, निराकार ईश्वर की पूजा होती है, और यह मूर्तिपूजा तथा जातिप्रथा का विरोध करता है।
🎯 Exam Tip: सिक्ख धर्म के प्रमुख सिद्धांत, गुरु परंपरा, पवित्र ग्रंथ और सामाजिक मान्यताओं का संक्षिप्त और सटीक विवरण देना महत्वपूर्ण है।
गुरु-पर्व Summary in Hindi
विषय-प्रवेश :
गुरु नानक देव सिख धर्म के आदि गुरु हैं। उनके जन्मदिन को गुरु-पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस पाठ में गुरु पर्व पर मनाए जानेवाले धार्मिक समारोह तथा गुरु नानक देवजी के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है।
पाठ का सार :
गुरु-पर्व : गुरु नानक देव सिक्ख धर्म के आदि गुरु हैं। हर कार्तिक पूर्णिमा को अक्तूबर-नवंबर के महीने में गुरु नानक देव का जन्मदिवस गुरु-पर्व के रूप में मनाया जाता है। गुरु-पर्व को गुरुद्वारों को खूब सजाया जाता है। उनके भक्त गुरुवाणी गीत के रूप में गाते हैं। इस दिन प्रभातफेरियां निकाली जाती है और शाम को बहुत बड़ा जुलूस निकाला जाता है। सारे रास्ते गुरु ग्रंथ साहब का पाठ होता रहता है।
गुरु नानक देव का बचपन : गुरु नानक देव का जन्म लाहौर से कुछ दूर एक गांव में सन् 1429 में हुआ था। नानक देवजी बचपन से ही बहुत बुद्धिमान और धार्मिक विचारों के थे। अपनी गहरी सोच के कारण वे संस्कृत, अरबी, फारसी के बड़े विद्वान बन गए।
साधु-संतों और गरीबों की सेवा : बचपन में नानक देवजी परमात्मा की भक्ति में डूबे रहते थे। बड़े होने पर उनके पिताजी ने उनको कुछ पैसे व्यवसाय के लिए दिए, तो उन्होंने वह धन साधु-संतों की सेवा में खर्च कर दिया। अठारह साल की उम्र में उन्हें नवाब दौलत खों के यहां नौकरी मिली, तो वहाँ भी वे गरीबों की सेवा में लगे रहे। इसके कारण वे नौकरी से हटा दिए गए।
पारिवारिक जीवन : गुरु नानक देव की शादी सुलक्षणा देवी से हुई थी। उनके दो बेटे लक्ष्मीदास और श्रीचंद पैदा हुए।
वैराग : गुरु नानक देव का मन गृहस्थाश्रम में नहीं लगा। दुनियादारी से जी ऊब जाने के कारण तीस वर्ष की आयु में उन्होंने वैराग ले लिया। वे निराकार ईश्वर के भक्त थे और मेहनत से रोजी-रोटी कमाने का पाठ देते थे। वे कहते थे कि सारे मनुष्य बराबर हैं। उनके कथन, वचन गुरुग्रंथ साहब में इकट्ठा किए गए हैं, जो सिक्खों का पवित्र ग्रंथ है।
यात्राएँ : कहा जाता है, गुरु नानकजी मक्का और बगदाद भी गए थे, जहाँ खलीफा ने उनका बहुत स्वागत किया था। फिर वे ईरान होते हुए बुखारा पहुंचे। देश लौटकर वे गुरुदासपुर के गाँव करतारपुर में बस गए। सन् 1539 ईस्वी को आप अपने ईश्वर से जा मिले। गुरु नानक देव को माननेवाले लोग सिक्ख कहलाते हैं।
गुरु गोविंद सिंह : गुरु गोविंद सिंह सिक्खों के दसवें और अंतिम गुरु थे। गुरु गोविंद सिंह का जन्मदिन भी गुरु-पर्व कहलाता है। यह पूस अर्थात् दिसंबर-जनवरी में आता है। यह भी गुरु नानक के जन्मदिन की तरह मनाया जाता है। गुरु गोविंद सिंह का जन्म पटना में हुआ था। इस दिन गुरुद्वारा पटनासाहब में दर्शन करनेवालों की भीड़ होती है। इस अवसर पर अखंड पाठ होता है।
गुरु-पर्व शब्दार्थ :
मवेशी - पशु।
सेर - वजन करने का पुराना माप।
बैराग - संन्यास।
रईस - धनवान।
खलीफा - पैगंबर का उत्तराधिकारी।
प्रभातफेरी - सवेरे दल बांधकर गाते, नारे लगाते शहर का चक्कर लगाना।
लंगर - बहुत लोगों का भोजन एकसाथ बनाने का स्थान।
खालसा - सिक्खों का एक प्रमुख पंथ।
सूफी - इस्लाम धर्म में प्रेममार्ग की शाखा।
अनुयायी - अनुगामी, किसी के पीछे चलनेवाला।
अखंड - (यहाँ) लगातार, निरंतर।
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Hindi Class 11 Curriculum Solutions: Chapter 04 गुरु पर्व
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