GSEB Class 11 Hindi Solutions Chapter 15 बाज़ लोग

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Class 11 Hindi Chapter 15 बाज़ लोग GSEB Solutions PDF

स्वाध्याय

Question 1. निम्नलिखित दिए गये विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

प्रश्न 1.
बाज़ लोग झुण्ड बनाकर किसके पास बैठते हैं.?
(क) पानी
(ख) अलाव
(ग) मिट्टी के ढेर
(घ) पत्थर
Answer: (ख) अलाव
In simple words: बाज़ लोग अक्सर समूह में आग तापने के लिए अलाव के पास इकट्ठा होकर बैठते हैं।

🎯 Exam Tip: Identifying the correct context for collective activities of the 'बाज़ लोग' is key in such questions.

 

प्रश्न 2.
बाज़ लोग किसे आशिष देते हैं ?
(क) जल को
(ख) दूध को
(ग) आग को
(घ) बच्चों को
Answer: (ग) आग को
In simple words: कवि के अनुसार, बाज़ लोग उस आग को आशीर्वाद देते हैं जो उन्हें ठंड में ऊर्जा और गर्माहट प्रदान करती है।

🎯 Exam Tip: Understand the metaphorical meaning behind "आशीष देना" in the context of the poem's theme of resilience and sustenance.

 

प्रश्न 3.
बाज़ लोग फावड़ा कैसे चलाते हैं ?
(क) अकेले
(ख) झुंड में
(ग) धीरे-धीरे
(घ) रो-रोकर
Answer: (ख) झुंड में
In simple words: बाज़ लोग एकजुट होकर समूह में फावड़ा चलाते हैं, जिससे उनकी मेहनत की शक्ति और भी बढ़ जाती है।

🎯 Exam Tip: Note the collective effort and resilience of the 'बाज़ लोग' as a recurring theme in the poem.

 

प्रश्न 4.
बाज़ लोग के उबड़-खाबड़ पैरों तक धरती की गहराइयों से क्या उमड़ आते हैं ?
(क) पानी का सोते
(ख) तेल के सोते
(ग) दूध के सोते
(घ) बारिश के सोते
Answer: (क) पानी का सोते
In simple words: उनके कठोर परिश्रम के फलस्वरूप, धरती की गहराइयों से जल के स्रोत फूट पड़ते हैं, जो उनके संघर्ष का परिणाम हैं।

🎯 Exam Tip: This question highlights the profound impact of their labor on the environment and the emergence of vital resources.

 

2. निम्नलिखित प्रश्नों के एक-एक वाक्य में उत्तर दीजिए :

Question 1. कवयित्री किन्हें बाज़ लोग कहती है ?
Answer: कवयित्री उन गरीब, लाचार और अथक परिश्रम करने वाले श्रमिकों को 'बाज़ लोग' कहती हैं, जो अपनी मेहनत से कठिन कार्य संपन्न करते हैं, फिर भी समाज में उन्हें कोई महत्व प्राप्त नहीं होता।
In simple words: कवयित्री 'बाज़ लोग' उन मेहनती, वंचित मजदूरों को कहती हैं जिन्हें समाज में पहचान नहीं मिलती।

🎯 Exam Tip: Focus on the characteristics (poor, helpless, hardworking) and their societal status (undervalued) to define 'बाज़ लोग'.

 

Question 2. बाज़ लोग किसको आशिष देते हैं ?
Answer: बाज़ लोग अलाव में प्रज्वलित होती हुई और कड़ाके की ठंड में उन्हें ऊर्जा प्रदान करने वाली अग्नि को आशीर्वाद देते हैं।
In simple words: बाज़ लोग उस आग को आशीष देते हैं जो उन्हें भीषण ठंड में गरमी और शक्ति प्रदान करती है।

🎯 Exam Tip: The 'आशिष' given to fire symbolizes their gratitude for warmth and survival in harsh conditions.

 

Question 3. सारी बाजियाँ हाकर बाज़ लोग कैसे रहते हैं ?
Answer: समस्त बाधाओं और संघर्षों को झेलने के बावजूद, बाज़ लोग निश्चित और प्रसन्नचित्त बने रहते हैं।
In simple words: हर चुनौती हारने के बाद भी, बाज़ लोग शांत और बेफिक्र रहते हैं।

🎯 Exam Tip: Emphasize their unwavering spirit and peace of mind despite life's losses.

 

Question 4. बाज़ लोग झुण्ड बनाकर कहाँ बैठते हैं ?
Answer: बाज़ लोग आग तापने के लिए समूह में अलावों के चारों ओर बैठते हैं।
In simple words: वे ठंड से बचने और आग तापने के लिए अलाव के आसपास झुंड बनाकर बैठते हैं।

🎯 Exam Tip: This question tests understanding of their communal behavior and primary need for warmth.

 

3. निम्नलिखित प्रश्नों के दो-दो वाक्यों में उत्तर दीजिए :

Question 1. प्रस्तुत कविता में किस वर्ग के समाज का वर्णन किया गया है?
Answer: यह कविता समाज के उस वर्ग का चित्रण करती है जिसमें गरीब, असहाय और कठोर परिश्रम करने वाले श्रमिक शामिल हैं, जिनका बड़ी-बड़ी परियोजनाओं और निर्माण कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान होता है, फिर भी वे उनके श्रम के वास्तविक श्रेय से वंचित रह जाते हैं। 'बाज़ लोग' नामक इस कविता में इसी सर्वहारा मजदूर वर्ग का वर्णन प्रस्तुत किया गया है।
In simple words: कविता में उन गरीब, मेहनती मजदूरों का वर्णन है जो बड़े काम करते हैं पर उन्हें पहचान या श्रेय नहीं मिलता।

🎯 Exam Tip: Focus on identifying the 'proletariat' or working-class theme and their contribution versus recognition disparity.

 

Question 2. 'जहाँ भी बची है, वह जीती रहे.' से क्या तात्पर्य है?
Answer: 'जहाँ भी बची है, वह जीती रहे' पंक्ति के माध्यम से कवयित्री ने अग्नि को संबोधित किया है, क्योंकि आग ऊर्जा और जीवन का प्रतीक मानी जाती है। गरीब और असहाय मजदूर आशावादी होते हैं और उन्हें 'राई में पर्वत' के दर्शन होते हैं। इसलिए, वे बुझती हुई आग के जीवित रहने और बने रहने की कामना करते हैं, क्योंकि मजदूरों का जीवन स्वयं ऊर्जा का पर्याय है।
In simple words: यह पंक्ति आग के जीवित रहने की कामना करती है, जो मजदूरों के लिए ऊर्जा और आशा का प्रतीक है, दर्शाती है कि उनका जीवन स्वयं ऊर्जा से भरपूर है।

🎯 Exam Tip: Explain the symbolic meaning of 'आग' (fire) as energy and hope for the working class, linking it to their resilient spirit.

 

Question 3. पानी के सोते कहाँ से निकलते हैं. ? कैसे ?
Answer: पानी के सोते धरती के भीतर बहुत गहराई में स्थित होते हैं। मजदूरों को फावड़ों से अथक परिश्रम करके धरती की गहराइयों तक पहुंचना संभव होता है। इस प्रकार, मजदूरों के प्रयासों से ही धरती की गहराई से पानी के सोते निकलते हैं।
In simple words: पानी के सोते धरती की गहराई से निकलते हैं, और मजदूर अपने कठिन परिश्रम से फावड़ा चलाकर उन तक पहुँचते हैं।

🎯 Exam Tip: Highlight the direct correlation between the intense labor of the workers and the extraction of natural resources.

 

4. निम्नलिखित प्रश्नों के पाँच-छः वाक्यों में उत्तर दीजिए :

Question 1. 'बाज़ लोग कहीं के नहीं होते' यह कहने के पीछे कवयित्री का आशय क्या है?
Answer: कवयित्री के इस कथन का आशय यह है कि गरीब, असहाय और कड़ी मेहनत करने वाले 'बाज़ लोगों' का अपना कोई स्थायी ठिकाना या पहचान नहीं होती। वे महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण करते हैं, लेकिन उनके कार्यों की प्रशंसा नहीं की जाती। उन्हें ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिलता जिसे वे अपना कह सकें। लोग केवल उनकी मेहनत से सरोकार रखते हैं, और कार्य पूरा होने के बाद उनका कोई उपयोग नहीं रह जाता। जिनके लिए उन्होंने अपना रक्त-पसीना बहाया, उनके लिए वे अस्तित्वहीन हो जाते हैं। इसीलिए कवयित्री कहती हैं कि बाज़ लोग कहीं के नहीं होते।
In simple words: 'बाज़ लोग कहीं के नहीं होते' का अर्थ है कि मेहनती मजदूरों का कोई अपना नहीं होता; वे महत्वपूर्ण काम करते हैं पर सराहना नहीं पाते, और काम खत्म होने पर उन्हें भुला दिया जाता है, जिससे उनकी कोई पहचान नहीं बचती।

🎯 Exam Tip: This question explores the theme of alienation and the lack of belonging experienced by the marginalized labor class, despite their significant contributions.

 

Question 2. सारी बाजियाँ हारकर भी बाज़ लोग अलमस्त क्यों कहलाते हैं ?
Answer: गरीब, असहाय और कठिन परिश्रम करने वाले 'बाज़ लोग' अपने श्रम से दुनिया में चमत्कार रचते हैं। अनेक महत्वपूर्ण वस्तुओं का निर्माण करने के बावजूद उनका श्रेय दूसरों को दे दिया जाता है। उन्हें अपने किसी भी निर्माण से न तो कोई लगाव होता है और न ही उस पर गर्व। वे अपने किसी भी कार्य का मालिक बनने की इच्छा नहीं रखते। अपनी मजदूरी के अलावा उन्हें और कुछ पाने की अभिलाषा नहीं होती। वे यह जानते हैं कि उन्हें अपना कहने वाला कोई नहीं है और काम खत्म होने के बाद कोई उनसे पूछताछ नहीं करेगा। इसलिए, अपने आत्मबल पर जीने वाले 'बाज़ लोग' सदैव अलमस्त रहते हैं।
In simple words: 'बाज़ लोग' सारी बाजियाँ हारकर भी अलमस्त रहते हैं क्योंकि वे अपनी मेहनत से चमत्कार करते हैं, पर उन्हें श्रेय या मालिकाना हक की परवाह नहीं होती, और वे जानते हैं कि उन्हें कोई अपना नहीं मानता।

🎯 Exam Tip: Focus on their detachment from the fruits of their labor, their lack of attachment to worldly possessions, and their self-reliance as reasons for their 'अलमस्त' (carefree) nature.

 

आशय स्पष्ट कीजिए:

Question 1. 'बाज़ लोग सारी बाजियाँ हारकर भी होते हैं. अलमस्त बाजीगर'
Answer: 'बाज़ लोग' कठोर परिश्रम और मजदूरी करके अपना जीवन बिताते हैं। वे अपनी मेहनत से बड़े-बड़े कार्य संपन्न करते हैं, जिनमें विशाल इमारतों और पुलों का निर्माण भी शामिल है। हालांकि, वे अपने किए गए कार्यों पर कभी गर्व नहीं करते। जब उनका श्रेय दूसरों को मिलता है, तो भी उन्हें कोई कष्ट नहीं होता। श्रेय न मिलने पर भी ये मजदूर बेफिक्र रहते हैं। उन्हें किसी बात की चिंता नहीं होती और वे हर परिस्थिति में आनंदित रहते हैं।
In simple words: यह पंक्ति बताती है कि 'बाज़ लोग' कठिन मेहनत से बड़े-बड़े काम करते हैं, पर जब उनका श्रेय दूसरों को मिलता है, तो भी वे बेफिक्र और प्रसन्नचित्त रहते हैं, क्योंकि उन्हें किसी बात की चिंता नहीं होती।

🎯 Exam Tip: Emphasize the paradox of their hard work and lack of recognition, contrasted with their inherent joyous and carefree spirit.

 

GSEB Solutions Class 11 Hindi बाज़ लोग Important Questions and Answers

व्याकरण

समानार्थी शब्द लिखिए :

• बेडौल - भद्दा
• आशीष - आशीर्वाद
• बाजी - खेल
• अलमस्त - बेफिक्र, मौजी
• बाजीगर - खेल दिखानेवाला

विरुद्धार्थी शब्द लिखिए :

• बेडौल × बाडौल, डौलदार
• आशीष × शाप
• हार × जीत

शब्दों में से उपसर्ग अलग कीजिए :

• बेडौल - बे
• आशीष - आ
• अलमस्त - अल
• विशिष्ट - वि
• निश्चिंत - निः
• बेफिक्र - बे
• निर्माण - नि

शब्दों में से प्रत्यय अलग कीजिए :

• गहराई - ई
• बाजीगर - गर
• खुरदरी - ई
• महत्त्व - त्व
• मौजी - इ
• खुदाई - ई
• महत्त्वपूर्ण - पूर्ण

बाज़ लोग Summary in Hindi

विषय-प्रवेश :

इस कविता में उन गरीब, लाचार और कठोर परिश्रम करनेवाले मजदूरों का चित्रण किया गया है, जो अपने श्रम से दुष्कर कार्य कर दिखाते हैं, पर समाज में उन्हें कोई महत्त्व नहीं दिया जाता। हर ओर से उन्हें ठुकराया जाता है। फिर भी वे निश्चिंत होकर निष्ठापूर्वक सृजन कार्य में जुटे रहते हैं।

कविता का सरल अर्थ :

बाज़ लोग ................. कहीं के नहीं होते।

गरीब, असहाय और कड़ी मेहनत करनेवाले मजदूर जैसे 'बाज़' (कुछ) लोग अपने परिश्रम के बल पर भले ही विभिन्न प्रकार की महत्वपूर्ण चीजों का निर्माण करते हों, पर उनके कार्यों की सराहना करनेवाला कोई भी नहीं होता। उन्हें ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिलता, जिसे वे अपना कह सकें। लोगों को केवल उनकी मेहनत से वास्ता होता है। इसके बाद लोगों के लिए उनका कोई उपयोग नहीं रह जाता - इसलिए वे बेचारे कहीं के नहीं होते।

झुंड बनाकर ....... कहीं के नहीं होते।

मेहनत, मजदूरी करनेवाले ये मजदूर फुर्सत के क्षणों में जाड़े के मौसम में कभी-कभी समूह में आग तापने के लिए अलाव के चारों ओर गोलाई में बैठ जाते हैं। वे अलाव की बुझती आग तक अपनी भद्दी, खुरदरी हथेलियाँ फैलाकर आग तापते रहते हैं। कवयित्री कहती हैं कि बुझते अलावों के पास उन मजदूरों के बैठे रहने से ऐसा लगता है, मानो वे आग नहीं ताप रहे हों, बल्कि वे आग को जैसे आशीर्वाद दे रहे हों कि वह हमेशा-हमेशा बनी रहे।

अलाव हो या अन्य कोई स्थान, आग सदा बनी रहे, जीवित रहे और लोगों को ऊर्जा प्रदान करती रहे। गरीब, लाचार और कड़ी मेहनत करनेवाले कुछ लोग (मजदूर) ऐसे होते हैं कि उनका अपना (सहारा) कोई नहीं होता। उन बेचारों का अपना कोई अस्तित्व नहीं होता और वे कहीं के नहीं होते।

झुंड बनाकर ....... अलमस्त बाजीगर।

ये मेहनतकश मजदूर झुंड के झुंड फावड़े चलाते हैं और धरती का सीना खुदाई करते हुए उस गहराई तक पहुँच जाते हैं, जहाँ से उमड़ पड़ते हैं, शीतल जल के सोते। पर अपने इस पराक्रम का गर्व वे नहीं करते। (क्योंकि उन सोतों से प्राप्त होनेवाली विपुल जल संपदा के मालिक वे नहीं, सोतों के मालिक होते हैं। इनका अपने हिस्से में कोई श्रेय न आने पर भी ये मेहनतकश मजदूर बेफिक्र रहते हैं। इन्हें किसी बात की परवाह नहीं होती।

बाज़ लोग शब्दार्थ :

• बाज़ लोग - कुछ विशिष्ट लोग, कोई-कोई।
• जिनका कोई - जिनका कोई सहारा न हो।
• जो कोई - जिनकी कोई गणना न हो।
• अलाव - तापने की आग।
• बेडौल - भद्दा।
• खुरदरी - जो चिकना न हो।
• अश्ववस्त्र - घोड़ों की पीठ पर कसने की जीन।
• पसारना - फैलाना।
• आग तापना - आग की लौ से हाथ सेंकना।
• आशीष - आशीर्वाद।
• आग जिए - आग बनी रहे।
• झुंड - बहुत से मनुष्यों का समूह।
• ऊबड़-खाबड़ - ऊँचा-नीचा, जो समतल न हो।
• उमड़ना - द्रववस्तु का अधिकता के कारण ऊपर उठना।
• सोता - प्राकृतिक रूप से निरंतर बहती रहनेवाली जल की धारा।
• बाजियाँ - शर्ते, दौव।
• अलमस्त - मतवाला, मौजी।
• बाजीगर - जादूगर।

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