GSEB Class 11 Hindi Aaroh Solutions Chapter 17 गज़ल

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Detailed Chapter 17 गज़ल GSEB Solutions for Class 11 Hindi

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Class 11 Hindi Chapter 17 गज़ल GSEB Solutions PDF

गज़ल के साथ

 

Question 1. आखिरी शेर में गुलमोहर की चर्चा हुई है। क्या उसका आशय एक खास तरह के फूलदार वृक्ष से है या उसमें कोई सांकेतिक अर्थ निहित है ? समझाकर लिखें।
Answer: आखिरी शेर में गुलमोहर की बात की गई है। यहाँ गुलमोहर का मतलब एक विशेष फूलदार पेड़ से नहीं है, बल्कि इसमें एक प्रतीकात्मक अर्थ छिपा है। यहाँ 'गुलमोहर' प्रेम, भाईचारे, मिठास, आजादी, बराबरी और खुशी का संकेत है। इन्हीं अच्छे भावों को असल में बदलने का सपना इस शेर में व्यक्त होता है। कवि की बस एक ही चाहत है कि अगर वह अपने बगीचे में, यानी अपने देश की धरती पर गुलमोहर (आजादी, समानता, भाईचारा आदि) के नीचे जिए और अगर दूसरों की गलियों में भी दम निकले, तो आखिरी इच्छा गुलमोहर की ही रहे।
In simple words: The last verse mentions Gulmohar. It doesn't mean a specific tree, but it symbolizes love, brotherhood, and freedom. The poet wishes to live and die for these values, seeing Gulmohar as their symbol.

Exam Tip: When analyzing symbolic meanings in poetry, always connect the symbol to broader human values or societal aspirations, as well as the poet's personal wishes.

 

Question 2. पहले शेर में चिराग शब्द एक बार बहुवचन में आया है और दूसरी बार एकवचन में। अर्थ एवं काव्य-सौंदर्य की दृष्टि से इसका क्या महत्त्व है ?
Answer: पहले शेर में कवि ने आजादी के बाद की मोह-भंग की स्थिति का बहुत ही वास्तविक और कलात्मक वर्णन किया है। यहाँ 'चिराग' शब्द पहली बार बहुवचन में प्रयोग हुआ है और दूसरी बार एकवचन में आया है। कवि ने यह मोह-भंग की तीखी अभिव्यक्ति के लिए किया है। पहले शेर में 'चिराग' शब्द का बहुवचन 'चिराग़ाँ' उपयोग हुआ है। यहाँ 'चिराग़ाँ' आम आदमी की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए है। इसका मतलब है कि आजादी के बाद हर घर में खुशहाली होगी। सभी को रोटी, कपड़ा, मकान मिलने वाला था। दूसरी बार 'चिराग' एकवचन में आया है, जो यह दिखाता है कि हमने जिन बुनियादी जरूरतों के सपने देखे थे, उनमें से बहुत कम ही पूरी हुई हैं। 'चिराग़ाँ' (बहुवचन) का उपयोग जनता के सपनों को दिखाता है और 'चिराग' (एकवचन) आजादी के बाद की निराशा की सच्चाई है। एक ही शब्द के प्रतीकात्मक और लाक्षणिक प्रयोग से अद्भुत काव्य सौंदर्य शामिल हो गया है।
In simple words: The word 'chirag' is used in both plural and singular forms in the first couplet. The plural 'chiragan' represents the hopes of prosperity for everyone after independence. The singular 'chirag' shows the harsh reality that only a few of those basic needs were met, depicting disillusionment. This dual usage adds poetic depth.

Exam Tip: Pay attention to the singular and plural usage of key words in poetry, as it often carries significant symbolic or thematic weight, highlighting contrasts or shifts in meaning.

 

Question 3. गज़ल के तीसरे शेर को गौर से पढ़ें। यहाँ दुष्यंत का इशारा किस तरह के लोगों की ओर है ?
Answer: व्यंग्य की गहरी धार देखिए। हमारे मौजूदा राजनेता देश की जनता से बहुत संतुष्ट हैं, क्योंकि वे बहुत ही सहनशील, बिना रुकावट और निरापद हैं। जीवन का सफर कमीज के बिना तय करने में सक्षम इस देश के लोग बहुत अच्छे और सही हैं। वे अपने नग्न शरीर को पाँवों से ही ढक लिया करते हैं। इस शेर में कवि ने देश की वर्तमान कमजोर और शक्तिहीन प्रजा पर भी तीखा व्यंग्य किया है जो सभी जुल्म सहकर भी उफ तक नहीं करती।
In simple words: Dushyant is subtly mocking the current political leaders who are content with the highly tolerant and submissive public. He is also criticizing the weak people who endure all injustices without complaint, even managing to cover themselves with their feet when they lack clothes.

Exam Tip: When asked to explain the poet's intent or reference, identify the target of their commentary and summarize the poet's critical observation about them.

 

Question 4. आशय स्पष्ट करें : तेरा निजाम है सिल दे जुबान शायर की, ये एहतियात जरूरी है इस बहर के लिए।
Answer: सन्दर्भ : ये पंक्तियाँ पाठ्यपुस्तक आरोह भाग-1 में शामिल गज़ल से ली गई हैं। यह गज़ल दुष्यंतकुमार ने रची है और उनके गज़ल संग्रह 'साये में धूप' से उठाई गई है।
व्याख्या : कवि का यह अटल विश्वास उस समय चरमसीमा तक पहुंचा हुआ दिखाई देता है जब वह कहते हैं कि हे मेरे देश के नेताओं! यह आपकी हुकूमत है, आप चाहें तो मेरी जुबान भी बंद कर सकते हैं, लेकिन मैं यह भी जानता हूँ कि आपके अत्याचार ही मेरी शायरी को क्रांतिकारी रूप देंगे, उसमें आग उगलने की ताकत पैदा करेंगे। शायर अपने लक्ष्य पर डटा हुआ है।
In simple words: These lines are from Dushyant Kumar's ghazal 'Saaye mein Dhoop'. The poet, with unwavering confidence, tells the rulers that even if they silence him, their injustices will only fuel his poetry, making it revolutionary. He remains firm in his purpose.

Exam Tip: For explaining couplets, first mention the context (source, poet) then provide a clear, concise interpretation of the meaning, including any symbolic or defiant messages.

विशेष : उर्दू शब्दावली युक्त खड़ी बोली है।

गज़ल के आस-पास

 

Question 1. दुष्यंत की इस गज़ल का मिज़ाज बदलाव के पक्ष में है। इस कथन पर विचार करें।
Answer: निःसंदेह दुष्यंत की यह गज़ल बदलाव के पक्ष में है। आजादी के बाद की राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक शोषण और मूल्यहीनता के माहौल में जीना कठिन हो गया है। आम आदमी के सपने बिखर गए। प्रशासन, राजनैतिक कठमुल्ले, धार्मिक पाखंडी और तथाकथित समाजवादी आम आदमी के घर के चिराग बुझाते रहे हैं। ऐसी विद्रूपता और विडम्बनापूर्ण हरकतों को देखकर कवि की सहनशीलता की सीमा टूट जाती है। वह वर्तमान स्थिति को बदलना चाहते हैं। इस गज़ल में व्यक्त उनका आक्रोश और क्रांतिकारी विचार इस बात का सबूत है। वह क्रांति चाहते हैं, बदलाव चाहते हैं इसलिए वह जनता की आवाज में प्रभाव लाने के लिए बेचैन दिखते हैं। इस प्रकार कवि की सामाजिक चेतना केवल तीव्र ही नहीं, बल्कि मर्मस्पर्शी भी है।
In simple words: Dushyant's ghazal strongly advocates for change. Post-independence, political, social, and economic exploitation, along with a lack of values, made life difficult for the common person, shattering their hopes. The poet, observing this absurdity and irony, wants to transform the current situation, expressing his revolutionary ideas and a deep desire for the public's voice to bring about change.

Exam Tip: When analyzing the 'mood' or 'temperament' of a literary work, always provide specific examples from the text that support your claim, relating them to the broader societal context.

 

Question 2. हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन दिल के खुश रखने को गालिब ये ख्याल अच्छा है। दुष्यंत की गज़ल का चौथा शेर पढ़ें और बताएँ कि गालिब के उपर्युक्त शेर से वह किस तरह जुड़ता है ?
Answer: इस सवाल का सही जवाब देने के लिए, हमें पहले गालिब और दुष्यंत दोनों के शेर प्रस्तुत करने होंगे – हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन दिल के खुश रखने को गालिब ये ख्याल अच्छा है। खुदा नहीं, न सही, आदमी का ख्वाब सही, कोई हसीन नजारा तो है नज़र के लिए। भावों की समानता की दृष्टि से दुष्यंत कुमार का शेर गालिब के शेर से जुड़ता है। गालिब के शेर में 'जन्नत' (स्वर्ग) मन को बहलाने की एक सुंदर कल्पना है। वैसे ही दुष्यंत के शेर में खुदा (ईश्वर) मनुष्य की सभी चिंताओं का समाधान है। खुदा एक ऐसी सुंदर कल्पना है जो मनुष्य को हर तरह की मुसीबतों से बचाने वाली है। दोनों ही कल्पनाएँ मनुष्य को भरोसा देती हैं और उनमें आस्था जगाती हैं।
In simple words: To answer, both Ghalib's and Dushyant's couplets are presented. Ghalib's "heaven" is a pleasant thought to keep the heart happy, while Dushyant's "God" is a beautiful idea that resolves human worries. Both concepts offer comfort and inspire faith, connecting through their shared theme of finding solace in comforting illusions or beliefs.

Exam Tip: When asked to compare couplets, first quote both, then explain the thematic connection, highlighting how similar ideas are expressed through different metaphors or contexts.

 

Question 3. 'यहाँ दरख्तों के साये में धूप लगती है' यह वाक्य मुहावरे की तरह अलग-अलग परिस्थितियों में अर्थ दे सकता है मसलन, यह ऐसी अदालतों पर लागू होता है, जहाँ इंसाफ नहीं मिल पाता। कुछ ऐसी परिस्थितियों की कल्पना करते हुए निम्नांकित अधूरे वाक्यों को पूरा करें।
क. यह ऐसे नाते-रिश्तों पर लागू होता है.....

Answer:
क. जिनमें आपसी विश्वास नहीं होता।
ख. जहाँ विद्यालय के नाम पर अंधी लूट की जाती है।
ग. जहाँ सेवा (स्वास्थ्य) की जगह स्वार्थ हो।
घ. जहाँ रक्षक ही भक्षक हो।
In simple words: This phrase means that places or relationships expected to offer protection or fairness actually cause harm. For example, it applies to relationships without trust, schools that exploit students, hospitals driven by greed instead of care, and police systems where protectors become oppressors.

Exam Tip: When completing sentences for an idiom, think of situations where the expected source of comfort or protection turns out to be harmful or disappointing, aligning with the idiom's critical tone.

गज़ल के साथ

 

Question 1. 'मैं बेकरार हूँ आवाज में असर के लिए' – पंक्ति का मर्म स्पष्ट कीजिए।
Answer: जनता की आवाज में बहुत शक्ति होती है। जब आम लोग मिलकर अपनी आवाज उठाते हैं, तब बड़े-बड़े लोगों के होश उड़ जाते हैं। लोगों के विरोध और विद्रोह से सत्ता उलट जाती है। परंतु यह तभी संभव है जब लोगों में एकता, पूरा आत्मविश्वास और त्याग की भावना हो। इनके बिना लोगों की आवाज में आवश्यक प्रभाव नहीं आ सकता। कवि जनता की आवाज को प्रभावशाली बनाने के लिए बहुत कोशिश कर रहा है।
In simple words: The poet is eager for his voice to have an impact, understanding that a united public voice possesses great power to challenge authorities. For this to happen, people need unity, confidence, and a spirit of sacrifice. The poet is trying hard to make the public's voice effective.

Exam Tip: To explain the 'essence' of a line, identify the core emotion or message, and then elaborate on its significance within the broader context of the poem's themes.

 

Question 2. स्पष्ट कीजिए कि 'कहाँ तो तय था' शेर हमारी सामाजिक व्यवस्था के कटु सत्य को उजागर करती है।
Answer: 'कहाँ तो तय था' गज़ल में कवि ने हमारी मौजूदा सामाजिक व्यवस्था का दुखद चित्र दिखाया है। कवि के अनुसार देश की जनता ने आजादी से पहले जो सपने देखे थे, वे आजादी मिलने के इतने वर्षों के बाद भी पूरे नहीं हुए हैं। देश के लाखों घर आज भी बिजली के प्रकाश से वंचित हैं। शहरों के सभी घरों को भी पूरी बिजली नहीं मिल पाई है। देश में ऐसे बहुत से लोग हैं, जिनके पास अपना तन ढकने के लिए जरूरी कपड़े भी नहीं हैं। जो गाँव सुख-शांति का भंडार माने जाते थे, वहाँ अब शांति और सुरक्षा मुश्किल हो गई है। गाँव के लोग गाँव छोड़कर शहरों में रहने के लिए मजबूर हो रहे हैं। कहने को देश में लोकतंत्र है, फिर भी जनता की आवाज अनसुनी कर दी जाती है। लोग भी शिकायतें करते-करते थककर चुप बैठ जाते हैं। अधिकारी पत्थरदिल हो गए हैं। आम लोगों के दुःख-दर्द का उन पर कोई असर नहीं होता। कवियों तथा लेखकों को तरह-तरह के लालच देकर या डरा-धमकाकर उनकी जबान बंद कर दी जाती है। समाज में हर कोई अपने सुख की चिंता करता है। दूसरों के लिए त्याग और बलिदान का भाव सपना बन गया है।
In simple words: The couplet 'Kahan toh tay tha' exposes the harsh reality of our social system. Despite promises before independence, many homes lack basic necessities like electricity and clothes, and villages have lost their peace. The public's voice is ignored in this supposed democracy, and officials are indifferent. Poets and writers are silenced, and self-interest now dominates, making sacrifice for others a distant dream.

Exam Tip: When a couplet is stated to reveal a 'bitter truth', ensure your explanation covers the specific societal problems or hypocrisies it highlights, using details from the text.

 

Question 3. कवि के अनुसार जनता के साथ शासक वर्ग का व्यवहार कैसा होना चाहिए
Answer: कवि दुष्यंतकुमार को शिकायत है कि लोकतंत्र में जनता को उचित महत्त्व नहीं दिया जाता। चुनाव के बाद आम जनता की आशाओं और इच्छाओं को अनदेखा किया जाता है। कवि के अनुसार लोकतंत्र में सरकारी अधिकारियों को जनता की शिकायतों को अनसुना नहीं करना चाहिए। लोगों को ऐसा न लगे कि हमारा शासनतंत्र पत्थरदिल इंसानों से बना है। शासकीय अधिकारियों को लोगों के प्रति सहानुभूति दिखानी चाहिए। लेखक और कवि समाज के दुख-दर्द को गहराई से समझते हैं। उनकी आवाज जनता की आवाज होती है। उसे दबाना लोकतंत्र का गला घोंटना है। दबाने से वह अंदर-ही-अंदर सुलगकर एक दिन विद्रोह की आग बन जाती है। इसलिए हमारे शासक वर्ग का कर्तव्य है कि जो जनता उन्हें ऊंची कुर्सियों पर बिठाती है, उसकी वह उपेक्षा न करें।
In simple words: Dushyant Kumar believes that the ruling class should not ignore public grievances or disregard their hopes, as this undermines democracy. He asserts that officials should be empathetic, recognizing that the public's voice is crucial. Suppressing this voice can lead to internal unrest and eventual rebellion, so rulers must respect those who put them in power.

Exam Tip: For questions about ideal behavior, clearly state what the poet believes should be done and provide justifications from the text for why that behavior is necessary.

दो-तीन वाक्य में उत्तर दीजिए।

 

Question 1. कवि ने हसीन नजारा किसे कहा है ? क्यों ?
Answer: कवि ने खुदा को एक सुंदर नजारा कहा है। खुदा है या नहीं, यह अलग बात है, पर उसकी कल्पना लोगों को धैर्य और शांति देती है। इसलिए कवि ने खुदा की कल्पना को एक सुंदर नजारा कहा है।
In simple words: The poet calls God a beautiful sight because, regardless of God's actual existence, the idea of God gives people patience and peace. Thus, the poet considers the imagination of God a lovely spectacle.

Exam Tip: When asked 'why' a term is used, explain the reasoning behind the poet's choice, focusing on the emotional or psychological effect the concept has on people.

 

Question 2. शायर की जबान बंद करने के लिए क्या प्रबंध किया जाता है ?
Answer: शायर की जुबान बंद करने के लिए उसे तरह-तरह के लालच दिए जाते हैं। कभी-कभी उसे अपनी जुबान न खोलने के लिए डराने-धमकाने की कोशिशें भी की जाती हैं।
In simple words: To silence a poet, various temptations are offered, and sometimes threats and intimidation are also used to prevent them from speaking.

Exam Tip: When describing 'arrangements' or 'methods', list the specific actions taken, as detailed in the text, to achieve the stated objective.

 

Question 3. कवि बेकरार क्यों है ?
Answer: कवि लोगों की आवाज में प्रभाव (क्रांति) पैदा करने के लिए बेचैन है।
In simple words: The poet is restless because he wants to ignite a sense of revolution and create impact through people's voices.

Exam Tip: Briefly explain the poet's emotional state and the underlying reason, connecting it to their desire for social change.

 

Question 4. शायर की जबान सिलने से क्या होगा ?
Answer: शायर की जुबान बंद हो जाएगी, तो वह आम जनता की पीड़ा को दुनिया के सामने नहीं ला पाएगा।
In simple words: If the poet is silenced, he will not be able to bring the suffering of the common people to the attention of the world.

Exam Tip: Clearly state the direct consequence of the action (silencing the poet) as described in the poem, highlighting the loss of public voice.

 

Question 5. आजादी के पूर्व क्या तय हुआ था ?
Answer: आजादी से पहले नेताओं ने जनता को यह आश्वासन दिया था कि हर घर में सुख-सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।
In simple words: Before independence, leaders promised the public that every household would have access to comforts and facilities.

Exam Tip: State the specific promises or agreements made before the historical event, as mentioned in the text.

 

Question 6. 'पाँवों से पेट ढंकने' मुहावरे का अर्थ स्पष्ट करें।
Answer: इसका मतलब यह है कि गरीबी और शोषण के कारण लोगों में विरोध करने की क्षमता खत्म हो चुकी है। वे न्यूनतम वस्तुएँ उपलब्ध न होने पर भी अपना गुजारा कर लेते हैं।
In simple words: This idiom signifies that people are so impoverished and exploited that they have lost the ability to resist. They manage to survive even with minimal resources.

Exam Tip: When explaining idioms, provide a concise literal meaning and then explain its deeper, often metaphorical, implication within the context of the poem.

 

Question 7. आखिरी शेर में शायर की तमन्ना क्या है ?
Answer: शायर की तमन्ना है कि वह बगीचे में हमेशा गुलमोहर के नीचे रहे और मरते समय भी गुलमोहर के लिए दूसरों की गलियों में मरे। इसका मतलब है कि वह मानवीय मूल्यों को अपनाए रखे और उनकी रक्षा के लिए अपना बलिदान दे दे।
In simple words: The poet's desire in the last couplet is to live and die upholding human values, symbolized by Gulmohar, whether in his own garden or in the struggles of others.

Exam Tip: Clearly state the poet's ultimate desire and explain its symbolic meaning, especially when it involves values or principles.

निम्नलिखित प्रत्येक काव्य-पंक्ति को दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प द्वारा पूर्ण कीजिए।

 

Question 1. कहाँ चिराग मयस्सर नहीं ...........
(a) हरेक घर के लिए
(b) शहर के लिए
(c) उम्र भर के लिए
Answer: (b) शहर के लिए
In simple words: The correct option to complete the poetic line is 'for the city', meaning that lamps or prosperity are not available even for the entire city.

Exam Tip: For completion questions, identify the word or phrase that maintains the poetic meter and contextual meaning of the original line.

 

Question 2. ये लोग कितने मुनासिब हैं, .....
(a) इस बहर के लिए
(b) गुलमोहर के लिए
(c) इस सफर के लिए
Answer: (c) इस सफर के लिए
In simple words: The correct option to finish the line is 'for this journey', implying how suitable these people are for the current path or struggle.

Exam Tip: Ensure your choice fits the lyrical flow and the central theme of the verse, often related to life's journey or struggles.

 

Question 3. ये एहतियात जरूरी है,
(a) इस बहर के लिए
(b) गुलमोहर के लिए
(c) उम्र भर के लिए
Answer: (a) इस बहर के लिए
In simple words: The accurate completion for the line is 'for this meter', indicating that a certain caution is essential for the poetic structure being used.

Exam Tip: When filling in poetic lines, consider how the chosen phrase relates to the craft of poetry itself, such as 'meter' or 'rhyme scheme'.

 

Question 4. मरें तो गैर की गलियों में .......
(a) उम्र भर के लिए
(b) गुलमोहर के लिए
(c) असर के लिए
Answer: (b) गुलमोहर के लिए
In simple words: The right option to complete the line is 'for Gulmohar', expressing a desire to die for the values symbolized by Gulmohar, even in foreign lands.

Exam Tip: Link the concluding phrase to the central symbols or values established in the poem, ensuring it aligns with the poet's intent.

योग्य विकल्प पसंद करके रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।

 

Question 1. दुष्यंत कुमार का जन्म सन्............ में राजपुर नवादा गाँव (उ. प्र.) में हुआ था।
(a) 1933
(b) 1934
(c) 1935
(d) 1936
Answer: (a) 1933
In simple words: Dushyant Kumar was born in the year 1933 in Rajpur Nawada village, Uttar Pradesh.

Exam Tip: For biographical questions, remember key dates like birth years and places, as they are fundamental facts.

 

Question 2. 'साये में धूप' गज़ल संग्रह के रचनाकार.........हैं।
(a) प्रसाद
(b) निराला
(c) दुष्यंत कुमार
(d) त्रिलोचन
Answer: (c) दुष्यंत कुमार
In simple words: The author of the ghazal collection 'Saaye mein Dhoop' is Dushyant Kumar.

Exam Tip: Associate important literary works with their respective authors. This demonstrates knowledge of literary history.

 

Question 3. दुष्यंत कुमार रचित................एक काव्य नाटक है।
(a) दुहरी जिंदगी
(b) आवाजों के घेरे
(c) मन के कोण
(d) एक कण्ठ विषपायी
Answer: (d) एक कण्ठ विषपायी
In simple words: 'Ek Kanth Vishpayi' is a poetic drama written by Dushyant Kumar.

Exam Tip: Identify the specific genre of each work by an author (e.g., ghazal collection, poetic drama) to show a deeper understanding of their oeuvre.

 

Question 4. दुष्यंत कुमार की मृत्यु सन्.............में हुई थी।
(a) 1974
(b) 1975
(c) 1976
(d) 1977
Answer: (b) 1975
In simple words: Dushyant Kumar passed away in the year 1975.

Exam Tip: Remember significant biographical facts such as death dates, as they are crucial for understanding an author's timeline.

 

Question 5. दुष्यंत कुमार की माता का नाम .............था।
(a) समकिशोरी
(b) राजेश्वरी
(c) देवकी
(d) सरस्वती
Answer: (a) रामकिशोरी
In simple words: Dushyant Kumar's mother's name was Ramkishori.

Exam Tip: Knowing family details like a parent's name shows thorough knowledge of the author's background.

 

Question 6. दुष्यंत कुमार के पिताजी का नाम .............था।
(a) भगवत सहाय
(b) भगवानदास
(c) रामदास
(d) किशोरी लाल
Answer: (a) भगवत सहाय
In simple words: Dushyant Kumar's father's name was Bhagwat Sahay.

Exam Tip: Recall and provide specific biographical information such as the names of important family members.

 

Question 7. दुष्यंत कुमार की पत्नी का नाम ............था।
(a) राजनंदनी
(b) राधिका
(c) शारदा
(d) राजेश्वरी
Answer: (d) राजेश्वरी
In simple words: Dushyant Kumar's wife's name was Rajeshwari.

Exam Tip: Accurate recall of personal details about authors, such as their spouse's name, helps demonstrate a comprehensive study.

 

Question 8. शायर............के साये में धूप लगने की बात करता है।
(a) दरख्तों
(b) फूलों
(c) फलों
(d) पौधों
Answer: (a) दरख्तों
In simple words: The poet talks about feeling sunny even in the shade of trees.

Exam Tip: When completing poetic lines, ensure the chosen word maintains the intended imagery and symbolism, as 'trees' here implies a false sense of protection.

 

Question 9. शायर कमीज के अभाव में..................से पेट ढंक लेने की बात करता है।
(a) सिर
(b) पाँवों
(c) हाथों
(d) कोई नहीं
Answer: (b) पाँवों
In simple words: In the absence of a shirt, the poet speaks of covering his stomach with his feet.

Exam Tip: Relate the fill-in-the-blank answer to the idiom's meaning, which in this case highlights extreme poverty and resignation.

 

Question 10. शायर आम जनता की आवाज में................. पैदा करने के लिए बेकरार है।
(a) मीठास
(b) खटास
(c) असर
(d) तीनों
Answer: (c) असर
In simple words: The poet is eager to create impact (revolution) in the voice of the common people.

Exam Tip: Choose the option that best reflects the poet's revolutionary intent and desire for the public voice to bring about change.

 

Question 11. शासक शायर की ........... सिल देना चाहते हैं।
(a) जुबान
(b) हाथ
(c) गला
(d) होठ
Answer: (a) जुबान
In simple words: The rulers wish to silence the poet's tongue.

Exam Tip: This question highlights the common theme of censorship; recognize 'tongue' as a metaphor for freedom of speech.

अपठित पद्य

नीचे दी गई कविता का पढ़िए और उस पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
वह अभी तक सोचता है
कि तानाशाह बिल्कुल वैसा ही या
फिर उससे मिलता-जुलता ही होगा।
यानी मूंछ तितली-कट, नाक के नीचे
बिल्ले-तमगे और
भीड़ को सम्मोहित करने की वाक्पटुता
जब की अब होगा यह
कि वह पहले जैसा तो होगा नहीं
अगर उसने दुबारा पुरानी शक्ल और पुराने कपड़ों में
आने की कोशिश की वह मसखरा ही साबित होगा
भरी हो उसके हृदय में कितनी ही घृणा,
दिमाग में कितने ही खतरनाक इरादे
कोई भी तानाशाह ऐसा तो होता नहीं
कि वह तुरन्त पहचान लिया जाये
कि लोग फ़जीहत कर डालें उसकी
चिढ़ाएँ छुछुआएँ
यहाँ तक कि मौके-बेमौके बच्चे तक पीट डालें
अब तो वह आयेगा तो उसे पहचानना भी मुश्किल होगा
हो सकता है, वह कहता हुआ आये कि मैं इस
शताब्दी का सबसे ज्यादा छला गया व्यक्ति हूँ
और वह विनोबा भावे या संत तुकाराम के बारे में
बात करें या सफेद-सफेद कपड़े पहनकर
सफेद-सफेद कबूतर उड़ाये या निशस्त्रीकरण
की बात करे
उसका चेहरा सफाचट हो, चेहरे में झुर्रियाँ हों
और वह सेना और पुलिस के होने के ही खिलाफ़ हो
वह भाषणों में करता हो चिड़ियों
और बच्चों से बेतहाशा प्यार
कहीं उसने बनवा दिया हो अस्पताल,
कहीं खोल दी हो प्याऊ, कहीं कोई
धर्मशाला,
कोई नृत्यकेन्द्र,
कोई पुस्तकालय
संभव है
हमारे बीच में लोग हमसे बहस करें
और कहें
कि यह है प्रमाण उसकी संवेदनशीलता का
और यह भी संभव है
कि उस वक्त उसको शांति का नोबेल पुरस्कार
दिया जा चुका हो या उसका नाम
उस सूची में सबसे ऊपर हो।

 

Question 1. तानाशाह की रूढ़ पहचान क्या है ?
Answer: तानाशाह की पारंपरिक पहचान जर्मन तानाशाह हिटलर की है, जिसकी तितली-कट मूंछ थी, सैनिक पोशाक पर बिल्ले और तमगे थे, जिसमें भीड़ को सम्मोहित करने की वाक्पटुता थी।
In simple words: The typical image of a dictator is like Hitler: butterfly-cut mustache, military uniform with badges and medals, and a talent for captivating crowds.

Exam Tip: For questions about 'traditional' or 'stereotypical' characteristics, refer to historical figures commonly associated with those traits, as mentioned in the text.

 

Question 2. हमारे समय का तानाशाह कैसा हो सकता है ?
Answer: हमारे समय का तानाशाह खुद को सबसे अधिक शोषित-पीड़ित घोषित करेगा। वह निस्पृह-भक्ति की बात करेगा भले ही उसके दिल में कितनी भी नफरत, दिमाग में कितने भी खतरनाक इरादे क्यों न हों। वह शांतिदूत या लोक कल्याणकारी मुखौटे वाला होगा।
In simple words: A modern dictator might present themselves as a highly oppressed victim or a peace advocate, even if they harbor hatred and dangerous intentions. They would wear a facade of public welfare.

Exam Tip: When describing a contemporary version of a character type, focus on how their tactics or presentation might adapt to modern societal expectations, as depicted in the passage.

 

Question 3. तानाशाह का चेहरा कैसा हो सकता है ?
Answer: तानाशाह का चेहरा झुरींदार और सफाचट हो सकता है।
In simple words: A dictator's face could be wrinkled and clean-shaven.

Exam Tip: Extract specific physical descriptions from the text when asked about appearance, as these details often convey deeper meanings about transformation or disguise.

 

Question 4. लोग तानाशाह की संवेदनशीलता का क्या प्रमाण बतलाएँगे ?
Answer: लोग तानाशाह के द्वारा बनवाए गए अस्पताल, धर्मशाला, नृत्य केंद्र, पुस्तकालय इत्यादि को उसकी संवेदनशीलता का सबूत देंगे।
In simple words: People would point to institutions like hospitals, rest houses, dance centers, and libraries built by the dictator as proof of his sensitivity.

Exam Tip: When identifying 'proof' or 'evidence', list the concrete examples provided in the passage that others might use to support their claims.

 

Question 5. इस कविता का उचित शीर्षक दीजिए।
Answer: इस कविता का उचित शीर्षक 'तानाशाह की खोज' हो सकता है।
In simple words: A suitable title for this poem could be 'The Search for a Dictator'.

Exam Tip: A good title should be concise and reflect the main theme or central idea of the poem, often hinting at its core message.

गज़ल Summary in Hindi

कवि-परिचय :

नाम : दुष्यंत कुमार
जन्म : सन् 1933, राजपुर नवादा गाँव (उ. प्र.)
प्रमुख रचनाएँ -

काव्य :

  • सूर्य का स्वागत (कविता संग्रह)
  • आवाजों के घेरे (कविता संग्रह)
  • जलते हुए वन का बसंत (कविता संग्रह)
  • साये में धूप (गज़ल संग्रह)

उपन्यास :

  • छोटे-छोटे सवाल
  • आँगन, में एक वृक्ष
  • दुहरी जिंदगी

नाटक :

  • मसीहा मर गया
  • मन के कोण (एकांकी संग्रह)
  • एक कण्ठ विषपायी (काव्य-नाटक) आदि।

मृत्यु : सन् 1975

समीक्षकों के अनुसार हिन्दी साहित्य में आधुनिक युगबोध के सफल रचयिता, युवा कवि श्री दुष्यंतकुमार त्यागी का जन्म 27 सितम्बर, 1933 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के राजपुर नयादा गाँव के भूमिहर-कृषक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। आपकी जन्म-पत्रिका के अनुसार आपका नामकरण - संस्कार दुष्यंत नारायणसिंह त्यागी हुआ।

आपकी माताजी का नाम श्रीमती रामकिशोरी था, जो दुष्यंतकुमार के पिता श्री भगवत सहाय (छोटे जमींदार) की दूसरी पत्नी थीं। दुष्यंत कुमार की पत्नी का नाम राजेश्वरी त्यागी (एम.ए., बी.एड.) भोपाल में हिंदी प्राध्यापिका रही हैं। आपका निधन 30 दिसम्बर, 1975 को भोपाल में हृदय-गति रुक जाने से हुआ था।

दुष्यंतकुमार ने प्रारंभिक शिक्षा राजपुर-नवादा, नजीबबाद एवं मुजफ्फरनगर से 7वीं कक्षा उत्तीर्ण करके जिला बिजनौर की 'नहटौर' तहसील से माध्यमिक शिक्षा और सन् 1948 में 'चंदौसी इंटर कालेज' से हायर सेकेंडरी परीक्षा (11वीं कक्षा) उत्तीर्ण की। फिर एम.ए., बी.टी. (हिंदी में) प्रयाग विश्वविद्यालय से 1954 में उत्तीर्ण हुए।

डॉ. रामकुमार वर्मा, डॉ. धीरेन्द्र वर्मा तथा डॉ. रसाल आपके गुरु रहे हैं। आपके सहपाठियों में मार्कण्डेय, कमलेश्वर, अजितकुमार और रवीन्द्रनाथ त्यागी के नाम उल्लेखनीय हैं। दुष्यंतकुमार ने आकाशवाणी के विभिन्न पदों पर काम किया। तत्पश्चात् हिंदी के प्राध्यापक के रूप में भी कुछ साल तक काम किया। बाद में वेलफेयर डायरेक्टर की सरकारी नौकरी में रहे।

तत्पश्चात् मध्यप्रदेश सरकार के भोपाल में भाषा विभाग में सहायक निर्देशक रहे और फिर अनेक शहरों में नौकरी करते रहे। कविवर दुष्यंतजी बचपन से ही स्वाभिमानी तथा शरारती थे। वे मस्तमौला, हंसमुख, रोमांटिक एवं साहसी भी रहे हैं। किशोरावस्था से ही आपका रोमांस-काल शुरू हो गया था। मात्र 44 वर्ष की जिंदगी में बहुत कुछ अनुभव किया था। उनके गिने-चुने मित्रों में कुछ लड़कियाँ भी थीं।

उनकी सशक्त सम्मोहन शक्ति, पुरुषोचित सौंदर्य, बात करने का सलीका तथा अनुभवों और अभिव्यक्ति की समृद्धि थी, जिसके जादुई प्रभाव से प्रभावित होकर नटहौर तहसील के एक त्यागी परिवार की कन्या और

दुष्यंतजी प्रेम-रंग में इतने रंग गए कि विवाह का निर्णय भी दोनों ने कर लिया।

दुष्यंतजी उसके रूप-सौंदर्य पर न्यौछावर हो चुके थे, परन्तु माता-पिता और अन्य प्रकार की मर्यादाओं के कारण उनका सपना पूरा न हो सका। जिसकी एक कचोट-पीड़ा उनके दिल में लंबे समय तक बनी रही। अपनी एक गज़ल में वे लिखते हैं -

तुमको निहारता हूँ सुबह से ऋतुम्बरा,
अब शाम हो रही है मगर मन नहीं भरा।

दुष्यंत जी जहाँ प्रेम-प्रसंगों में अपनी भावुकता का परिचय देते, वहीं अन्य मुद्दों पर बौद्धिक तटस्थता और गंभीरता से चिंतन भी करते। उनके जीवन में यह विरोधी तात्विक संयोग ही, उनके व्यक्तित्व के संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दे सकता और शायद इसीलिए दुष्यंतजी के छोटे भाई प्रेमजी के अनुसार उनका व्यक्तित्व काँच-सा पारदर्शी लगता, कभी भूलभुलैया-सा दुर्गम।

दुष्यंतजी पार्टियों-महफिलों के शौकीन व्यक्ति होने के साथ ही सुरा-सुन्दरी में डूबनेवालों में से थे। वे परिवर्तन के लिए हमेशा बेचैन रहनेवाले गहन अनुभूतियों के संवेदनशील कवि के उपरांत - कर्मवादी प्राध्यापक एवं मानवतावादी उपन्यासकार तथा नाटककार भी थे। कम उम्र में ही उनका निधन हो गया, किंतु इस छोटे जीवन की साहित्यिक उपलब्धियाँ कुछ छोटी नहीं हैं।

गज़ल की विधा को हिंदी में प्रतिष्ठित करने का श्रेय अकेले दुष्यंत को ही जाता है। उनके कई शेर साहित्यिक एवं राजनीतिक जमावड़ों में कहावतों की तरह दोहराए जाते हैं। साहित्यिक गुणवत्ता से समझौता न करते हुए भी दुष्यंत ने लोकप्रियता के नए मानक स्थापित किए हैं। 'एक कंठ विषपायी' - शीर्षक गीतिनाट्य हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण एवं बहुत प्रशंसित कृति है।

गज़ल एक ऐसा साहित्यिक स्वरूप है जिसमें सभी शेर अपने आप में पूरे और स्वतंत्र होते हैं। गज़ल में तुक का निर्वाह और कथ्य के स्तर पर मिजाज का निर्वाह जरूरी है। जैसे कि यहाँ पहले शेर की दो पंक्तियों का तुक मिलता है और उसके बाद सभी शेरों की दूसरी पंक्ति में उस तुक का निर्वाह होता है।

सामान्य तौर से गज़ल के शेरों में कविता की तरह केन्द्रीय भाव का होना जरूरी नहीं है। लेकिन प्रस्तुत गज़ल में ऐसा लगता है कि गज़लकार ने किसी खास मनःस्थिति में यह गज़ल लिखी है। तभी इसमें समाज की विसंगतियों पर हमला और उसे दूर करने का भाव इस गज़ल का मुख्य विषय बन गया है। अतः दुष्यंत की यह गज़ल अपने आप में एक महत्वपूर्ण गज़ल बन गई है।

प्रस्तुत गज़ल दुष्यंतकुमार के प्रसिद्ध गज़ल संग्रह 'साये में धूप' से ली गई है। कविता या कहानी की तरह गज़लों में शीर्षक देने की कोई प्रणाली नहीं है। इसलिए यहाँ भी कोई शीर्षक नहीं दिया गया है। प्रस्तुत गज़ल आजादी के बाद के मोह भंग की स्थितियों का बयान करती है और आम जनता की स्वतंत्रता और खुशहाली की मांग करती है।

गज़ल का भावार्थ:

कहाँ तो तय था चिरागाँ हरेक घर के लिए, कहाँ चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए।

प्रस्तुत गज़ल दुष्यंत के गज़ल-संग्रह 'साये में धूप' से ली गई है। इसमें कुल मिलाकर सात शेर हैं। इस गज़ल की एक खास और सबको पसंद आने वाली बात यह है कि इसका हर शेर पहले-बाद के संबंध से आज़ाद रहता है और अपने विषय में पूरी तरह आज़ाद होता है। फिर भी, जहाँ तक दुष्यंत की इस गज़ल की बात है, सब मिलाकर यह कहा जा सकता है कि यह सामाजिक सोच से भरी हुई गज़ल है और इसमें समय की गहरी समझ को दिखाया गया है।

इस गज़ल में कवि ने आजादी के बाद देश में फैली राजनैतिक, सामाजिक और आर्थिक लूट की बात की है। उन्होंने गिरते हुए मूल्यों वाले भारतीय समाज पर बहुत गुस्सा दिखाया है।

कवि दिखाता है कि कैसे लोगों के सपने टूट गए हैं और जीना कितना मुश्किल हो गया है - वह बताता है कि कैसे सरकार, राजनेता, धार्मिक ढोंगी और तथाकथित समाजवादी लोग आम आदमी के घरों की खुशियां छीन रहे हैं। कवि इन सभी गलत और अजीब कामों का हिसाब देते हुए कहते हैं:

आजादी मिलते समय यह तय था कि हर घर में खुशी और समझ का दीपक जलेगा, यानी सबको सुख-सुविधा मिलेगी। पर आज स्थिति ऐसी है कि पूरे शहर में ही रोशनी नहीं है। पूरा शहर ही उजाले के लिए तरस रहा है। इसका मतलब है कि पूरा मध्यम और निम्न वर्ग बहुत गरीबी, शोषण, दुख और अन्याय झेल रहा है। गज़लकार ने पहली पंक्ति में 'चिरागाँ' (बहुवचन) शब्द का उपयोग किया है। इससे उनका मतलब है कि आजादी के समय हमारे नेताओं ने देश के लोगों से यह कहा था कि हर घर में खुशियों के दीपक जलेंगे, जिसका अर्थ है कि आम लोगों को रोटी, कपड़ा और मकान जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी।

हमारे नेताओं और शासकों ने हर उस व्यक्ति से एक बेहतर जीवन देने का वादा किया था जिसने ऐसा सपना देखा था। दूसरी पंक्ति में गज़लकार ने 'चिराग' (एकवचन) शब्द इस्तेमाल किया है। इससे उनका मतलब है कि आजादी के बाद आम जनता का एक अच्छे जीवन का सपना टूट गया है।

आज सिर्फ एक घर में नहीं, बल्कि पूरे शहर में अंधेरा फैला है - यह निराशा का अंधेरा है। आम आदमी का जीवन पूरी तरह अभावों से घिरा है। वह रोटी, कपड़ा और मकान जैसी बुनियादी जरूरतों से भी वंचित है। दुष्यंत जी ने इन पंक्तियों में इस स्थिति को बहुत अच्छी तरह समझाया है।

यहाँ दरख्तों के साये में धूप लगती है, चलो यहाँ से चलें और उम्र भर के लिए।

कवि को पेड़ों की छाया में भी धूप लगती है, जिससे शरीर जलता है। इसका मतलब है कि यहाँ रक्षक ही लोगों को नुकसान पहुँचा रहे हैं। नेता जैसे लोग ही सारा सुख-चैन छीन रहे हैं। कवि जीवन भर के लिए ऐसी पेड़ों की छाया छोड़कर, ऐसे लुटेरे संरक्षकों से आज़ाद होकर कहीं और खुली हवा में जाने की बात करता है।

कवि का मतलब यह है कि बड़े-बड़े अमीर लोग, राजनेता और झूठे समाजसेवक-धर्मगुरु, जो बड़े पेड़ों जैसे हैं, अब बेकार हो गए हैं। आम लोगों को उनसे अब कोई उम्मीद नहीं है, बल्कि उन्हें दुख और तकलीफें झेलनी पड़ रही हैं। जो लोग जनता की समस्याओं को दूर करने और उनकी जरूरतों को पूरा करने का वादा करते हैं, वे ही उनका शोषण करते हैं और उन पर बहुत बुरा अत्याचार करते हैं।

जिनसे आम लोगों को अपने अधिकारों की सुरक्षा की उम्मीद होती है, वही लोग उनके अधिकार छीनते हैं। कवि ऐसे शोषण करने वाले, लुटेरों, अमीर लोगों और भ्रष्ट माहौल से जीवन भर के लिए दूर चले जाना चाहते हैं।

न हो कमीज़ तो पाँवों से पेट बैंक लेंगे, ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफ़र के लिए।

कवि आम आदमी के बारे में बताते हैं कि वे गरीबी और शोषण भरा जीवन जीने को मजबूर हैं। इस देश के लोग बिना कमीज के भी अपनी जिंदगी का सफ़र तय करने में सक्षम हैं। वे अपने नंगे शरीर को पैरों से ही ढक लेते हैं। कवि इन पंक्तियों से ऐसे लोगों की बात कर रहे हैं जिन्होंने अपनी बहुत खराब जिंदगी से समझौता कर लिया है।

कितनी भी बुरी स्थिति हो, चाहे भुखमरी हो, तन ढकने के लिए कपड़े न हों, या सर पर छत न हो, वे खुद को इन हालात के हिसाब से ढाल लेते हैं। वे अपने हक के लिए आवाज़ नहीं उठाते और अपने अधिकारों के लिए इस भ्रष्ट शासन व्यवस्था से लड़ते नहीं हैं। वे बस चुपचाप इस असहनीय दर्द और अपमान भरी जिंदगी को जीते रहते हैं।

इसलिए कवि कहते हैं कि आज आम आदमी की हालत यह है कि यदि उन्हें कमीज न मिले तो वे गरीब लोग पैर सिकोड़कर अपने भूखे और पिचके पेट को ढकने की कोशिश करते हैं। इसका मतलब है कि आर्थिक शोषण ने आम आदमी को नग्नता, भुखमरी और अपमान के सबसे निचले स्तर पर धकेल दिया है। उनके अंदर विरोध करने की भावना खत्म हो चुकी है।

कवि ने ऐसी कमजोर और शक्तिहीन जनता पर भी तीखा व्यंग्य किया है जो सभी अत्याचारों को सह लेती है और 'उफ्' तक नहीं करती। ऐसे लोग ही शासकों के लिए सही हैं क्योंकि इनकी वजह से उनका शासन शांति से चलता है। यहाँ कवि जीवन के अगले पड़ाव में क्रांति चाहते हैं - विरोध का एक गतिशील विकास चाहते हैं।

खुदा नहीं, न सही, आदमी का ख्वाब सही, कोई हसीन नज़ारा तो है नज़र के लिए।

भगवान है या नहीं, यह बात बहस का विषय है। लेकिन कवि भगवान को आदमी के सपने या ख्वाब के रूप में स्वीकार करते हैं, क्योंकि यहाँ के आम आदमी को भगवान के रूप में एक सुंदर नज़ारा देखने को मिल जाता है। अगर ऐसा न हो तो देश में हर तरफ खून-खराबा, पत्थरबाजी, आगजनी, लूटपाट, छल-कपट जैसे खराब दृश्य ही दिखाई देंगे।

कवि का अर्थ यह है कि आज आम जनता के लिए न्याय पाना और सुनना एक सपना बन गया है। वे शोषण से आज़ाद जीवन का सपना देखते हैं। वे सोचते हैं कि उनके घर में भी रोशनी होगी, तन ढकने के लिए कपड़े होंगे, सर पर छत होगी। खाने को रोटी, शिक्षा, अस्पताल जैसी सभी सुविधाएं उन्हें मिलेंगी।

लोग भ्रष्ट शासकों के अत्याचारों, उनकी धोखेबाजी, लूट और अपने फायदे के लिए लोगों को आपस में लड़वाकर उनका खून बहाते हैं। वे ऐसे धूर्त राजनेताओं के चंगुल से आज़ाद होने का सपना ही देखते हैं। क्योंकि हकीकत में आम लोगों का एक खुशहाल, समृद्ध और स्वस्थ, शोषण-मुक्त जीवन हो ही नहीं सकता।

वे मुतमइन हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता, मैं बेकरार हूँ आवाज़ में असर के लिए।

देश के आज के सत्ताधीशों या राजनेताओं को अपने पत्थर जैसे कठोर दिल पर पूरा यकीन है कि वह किसी भी हाल में नरम नहीं होगा। जनता की दुखभरी पुकार का भी उनके बेदर्द दिल पर कोई असर नहीं होता। लेकिन जनता का प्रतिनिधि, हमारा गज़लकार, अपने आत्मविश्वास पर टिका हुआ है; वह अपनी आवाज़ में ऐसा प्रभाव लाने के लिए बेचैन है जो एक न एक दिन पत्थरों को भी पिघला देगा।

कवि का मतलब यह है कि शोषण करने वाले यह विश्वास रखते हैं कि पत्थर कभी नरम नहीं हो सकता और वे संवेदनशील नहीं बन सकते। लेकिन कवि अपनी आवाज़ से नया जोश जगाने, पीड़ितों को उठाने और शोषक वर्ग को पूरी तरह खत्म करने के लिए जो क्रांति भरे गीत गा रहा है, उसका असर आम आदमी पर देखने के लिए बेचैन और उम्मीद से भरा है।

तेरा निज़ाम है सिल दे जुबान शायर की, ये एहतियात ज़रूरी है इस बहर के लिए।

कवि का यह मजबूत आत्मविश्वास उस समय अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाता है जब वह कहते हैं कि, 'ऐ मेरे देश के नेताओं! यह तुम्हारी सरकार है, तुम चाहो तो मेरी ज़ुबान भी बंद कर सकते हो, लेकिन मैं यह भी जानता हूँ कि तुम्हारे अत्याचार और अन्याय ही मेरी शायरी को क्रांतिकारी रूप देंगे। वे मेरी कविताओं में आग उगलने की शक्ति पैदा करेंगे।"

कवि की आवाज़ को चुप कराने के लिए उसे कई तरह के लालच दिए जाते हैं। कभी-कभी तो उसे अपनी बात न कहने के लिए डराया-धमकाया भी जाता है। कवि का मतलब यह है कि शासक ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जहाँ शायर अपनी ज़ुबान न खोले, ताकि वह लोगों के दुख-दर्द को दुनिया के सामने न ला सके। यदि शासक अपनी संतुष्टि के लिए ऐसी सावधानी बरतना चाहते हैं, तो वे ऐसा कर सकते हैं।

कवि अपने लक्ष्य पर अटल है। वह शोषण करने वालों की हर चाल की ओर इशारा करते हैं - यहाँ तक कि प्रेस सेंसर-शिप के नाम पर पूरा सरकारी तंत्र कवि की आवाज़ बंद करना चाहता है। लेकिन शायर भी पूरी तरह जागरूक है - वह अपना गुस्सा और बात कहने के लिए पूरी तरह तैयार है।

जिएँ तो अपने बगीचे में गुलमोहर के तले, मरें तो गैर की गलियों में गुलमहोर के लिए।

कवि केवल गुलमोहर के मीठे, खुशी भरे और शांति देने वाले सच को ही पाना चाहते हैं और दूसरों को भी वह खुशी देना चाहते हैं। उनकी एक ही इच्छा है कि अगर वे जीवित रहें तो अपने बगीचे में - यानी अपने देश की जमीन पर गुलमोहर के नीचे रहें और अगर उनकी मृत्यु हो तो दूसरों की गलियों में भी प्रेम, भाईचारे, मिठास और खुशी के प्रतीक गुलमोहर के लिए ही हो।

कवि का अर्थ यह है कि हम अपने देश में अपने जीवन के तय किए गए उद्देश्य के साथ ही जिएंगे। और अगर हमें दूसरे देशों में जाना पड़े और किसी कारण से हमारी जान न जाए तो भी हमारे दिल में देशप्रेम और हर आम आदमी के भले का वही जीवन-उद्देश्य बना रहेगा। यहाँ गुलमोहर जीवन के उद्देश्य का प्रतीक है। कवि का यह मजबूत इरादा भी इस शेर में दिखाया गया है।

शब्दार्थ:

  • मयस्सर - उपलब्ध
  • मुतमइन - इतमीनान से, आश्वस्त
  • निज़ाम - राज, शासन, शासक
  • बहर - छंद
  • चिराग - दीपक
  • उम्रभर - जीवन भर
  • सफर - रास्ता
  • हसीन - सुंदर
  • सिल दे - बंद कर देना
  • दरख्त-पेड़
  • बेकरार - बेचैन, आतुर
  • एहतियात - सावधानी
  • तय - निश्चित
  • साया - छाया
  • मुनासिब - अनुकूल, उपयुक्त
  • ख्वाब - सपना
  • नजारा - दृश्य

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