Step-by-Step Textbook Solutions for Class 10 Social Science Chapter 05 भारत विज्ञान और टेक्नोलॉजी की विरासत
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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए:
Question 1. प्राचीन भारत का धातु विद्या में योगदान समझाइए ।
Answer: **प्रस्तावना:** प्राचीन भारत में हमारे महान संतों ने विज्ञान के क्षेत्र में एक अनमोल विरासत दुनिया को दी है, जो हमारे लिए गर्व की बात है।
**धातुविद्या:**
- प्राचीन समय से ही भारत के लोग धातु विद्या का अपने रोज़मर्रा के जीवन में इस्तेमाल करते थे।
- प्राचीन भारत ने धातु विद्या के क्षेत्र में अद्भुत उपलब्धियाँ प्राप्त की थीं। उदाहरण के लिए, सिंधु घाटी से प्राप्त धातु की नर्तकी की प्रतिमा और तक्षशिला से प्राप्त चीज़ें इसमें शामिल हैं।
- कुषाण राजाओं के समय में भगवान बुद्ध की प्रतिमाएँ, चोल राजाओं के समय बनी धातु की कलाकृतियाँ और चेन्नई के संग्रहालय में रखी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध नृत्य कला की उत्कृष्ट मिसाल महादेव नटराज की मूर्ति हैं।
- एक और शिल्प, धनुषधारी श्रीराम की मूर्ति भी चेन्नई के संग्रहालय में रखी गई है।
- इसके अतिरिक्त, कलात्मक देवी-देवताओं, पशु-पक्षियों और सुपारी काटने की सरौंतियाँ जैसी चीज़ें भी बनाई जाती थीं। ये सभी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
- इन धातुओं को बनाने की यह परंपरा दसवीं से ग्यारहवीं सदी में शुरू हुई थी।
Exam Tip: धातु विद्या में भारत के योगदान को समझाते समय, ऐतिहासिक उदाहरणों जैसे सिंधु घाटी की नर्तकी या नटराज की मूर्ति का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. प्राचीन भारत में रसायनविद्या में साधी गयी प्रगति का वर्णन कीजिए ।
Answer: **प्रस्तावना:** पश्चिमी देशों ने भारत की आलोचना की थी कि यह धर्म और दर्शन में डूबा देश है। उनके अनुसार, इसमें आध्यात्मिक और पारंपरिक विचार तो थे, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण की कमी थी। हालाँकि, आधुनिक शोधों के बाद यह सिद्ध हो गया है, और पुराने आलोचक भी अब मानते हैं कि भारत ने गणितशास्त्र, खगोलशास्त्र, वैदिक विद्या, रसायनशास्त्र, खगोलशास्त्र, वास्तुशास्त्र जैसे कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति करके दुनिया को एक अमूल्य विरासत दी है।
**रसायन विद्या:**
- रसायन विज्ञान एक प्रायोगिक विज्ञान है। यह विद्या अलग-अलग खनिजों, पेड़ों, कृषि उत्पादों, विभिन्न धातुओं के निर्माण और उनके बदलाव, साथ ही स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी दवाओं के निर्माण में उपयोगी है।
- रसायनशास्त्रियों में नालंदा विद्यापीठ के आचार्य नागार्जुन को भारतीय रसायनशास्त्र के आचार्य के तौर पर माना जाता है।
- नागार्जुन ने 'रसरत्नाकर' और 'स्वास्थ्य मंजरी' जैसी किताबें लिखी थीं।
- आचार्य नागार्जुन ने जड़ी-बूटी वाली दवाओं के साथ रासायनिक दवाओं के इस्तेमाल की सलाह दी थी।
- उन्होंने पारे की भस्म बनाकर औषधि के रूप में उपयोग करने का तरीका शुरू किया था।
- नालंदा विद्यापीठ में रसायन विज्ञान के अध्ययन और शोध के लिए अपनी खुद की रसायनशाला और भट्टियाँ थीं।
- रसायनशास्त्र के ग्रंथों में मुखरस, उपरस, दस प्रकार के विष, अलग-अलग क्षार और धातुओं की भस्म का वर्णन मिलता है।
- रसायन विज्ञान की सबसे बेहतरीन मिसाल भगवान बुद्ध की धातु की मूर्तियों में दिखती है।
- बिहार के सुल्तानगंज में भगवान बुद्ध की 7 1/2 फुट ऊँची और 1 टन वज़न वाली तांबे की मूर्ति मिली है।
- नालंदा से बुद्ध की 18 फुट ऊँची तांबे की मूर्ति भी मिली है।
**निष्कर्ष:** प्राचीन भारत के विज्ञान के ज्ञान को पूरी दुनिया में स्वीकार किया गया है। हमारी संस्कृति बहुत बड़ी और विविध है। इसमें धर्म और विज्ञान, पारंपरिक आदर्शों, व्यावहारिक ज्ञान और समाज का सुंदर तालमेल है, जो दुनिया के ज़्यादातर देशों में कम मिलता है।
In simple words: प्राचीन भारत में रसायन विज्ञान में बहुत प्रगति हुई। नागार्जुन जैसे वैज्ञानिकों ने जड़ी-बूटियाँ और धातुएँ मिलाकर दवाएँ बनाईं। लोहे का खंभा जो कभी ज़ंग नहीं खाता और बुद्ध की बड़ी धातु की मूर्तियाँ, ये सब रसायन विज्ञान की बेहतरीन मिसालें हैं।
Exam Tip: रसायन विज्ञान में नागार्जुन के योगदान और प्राचीन भारत की धातुकर्म कला के विशिष्ट उदाहरणों जैसे विजय स्तंभ या बुद्ध की मूर्तियों का उल्लेख करें।
Question 3. वैदिक विद्या और शैल्य चिकित्सा का प्राचीन भारत में महत्त्व समझाइए ।
Answer: **प्रस्तावना:** प्राचीन समय में भारत ने वैदिक विद्या और शैल्य चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत बड़ी सफलता प्राप्त की थी। भारतीय वैदिक विद्या के महान प्रणेता चरक और महर्षि सुश्रुत, साथ ही वाग्भट्ट ने अपने शोधों से वैदिक विद्या को ऊँचे स्तर पर पहुँचाया था।
**वैदिक विद्या और शैल्य चिकित्सा:**
- महर्षि चरक ने 'चरक संहिता' नामक ग्रंथ में 2000 वनस्पति औषधियों का वर्णन किया है।
- महर्षि सुश्रुत ने 'सुश्रुतसंहिता' में शैल्य चिकित्सा के नुकीले उपकरणों का वर्णन किया था। ये उपकरण इतने तेज़ थे कि एक खड़े बाल को चीरकर दो भागों में बाँट सकते थे।
- वाग्भट्ट का 'वाग्भट्टसंहिता' वैदिक विद्या का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
- हर वैद्य के लिए 'सुश्रुतसंहिता', 'चरकसंहिता' और 'वाग्भट्टसंहिता' का अध्ययन करना ज़रूरी था।
- प्राचीन भारत के हिन्दुओं के औषधशास्त्र में खनिजों, वनस्पतियों और प्राणियों से बनी दवाओं का एक बड़ा संग्रह है।
- दवाएँ बनाने की बारीक विधियों, दवाओं के वर्गीकरण और उनके उपयोग की जानकारी भी दी गई थी।
- शैल्य चिकित्सा करने के लिए कप के आकार की पट्टी बांधकर रक्त के प्रवाह को रोका जाता था।
- नाभिक, मूत्राशय, सारगांठ, मोतियाबिंद, पथरी, बवासीर, टूटी-मुड़ी हुई हड्डियाँ जोड़ने, शरीर में घुसे पदार्थों को बाहर निकालने जैसी सभी चीज़ों में भारतीय लोग कुशल थे।
- टूटे हुए नाक-कान का इलाज और 'प्लास्टिक सर्जरी' भी की जाती थी।
- मृत शरीर को चीर-फाड़कर और मोम के पुतलों के ज़रिये छात्रों को प्रत्यक्ष ज्ञान भी दिया जाता था।
- प्रसव के समय जोखिम भरे ऑपरेशन भी करते थे।
- वे बच्चों और महिलाओं के रोगों के विशेषज्ञ भी थे।
- रोगों के कारण, उनका निदान और रोग ठीक होने के बाद परहेज़ भी बताते थे।
- प्राचीन भारत में जानवरों के रोगों के शास्त्रों का भी विकास हुआ था।
- घोड़ों और हाथियों के रोगों पर भी ग्रंथ लिखे गए थे।
- इनमें 'हस्ती आयुर्वेद' और शालिहोम का अश्वशास्त्र बहुत प्रसिद्ध हैं।
- वेदशास्त्र के विद्वान वाग्भट्ट ने निदान के क्षेत्र में 'अष्टांगहृदय' जैसे ग्रंथों से महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
Exam Tip: वैदिक विद्या और शैल्य चिकित्सा के महत्व पर प्रकाश डालने के लिए चरक, सुश्रुत और वाग्भट्ट जैसे प्रमुख विद्वानों के योगदान और उनकी कृतियों का उल्लेख करें।
Question 4. प्राचीन भारत की विज्ञान के क्षेत्र में विरासतः
Answer: भारत के प्राचीन महान ऋषियों ने विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया को एक अनमोल विरासत दी है।
- धातु विद्या, रसायन विज्ञान, वैदिक विद्या, शैल्य चिकित्सा, गणितशास्त्र, खगोलशास्त्र, ज्योतिषशास्त्र, वास्तुशास्त्र, भौतिक शास्त्र जैसे विज्ञान के कई क्षेत्रों में हमारे ऋषियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जो हमारे लिए गर्व की बात है।
- भारत ने विभिन्न विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में भी अपना सबसे अच्छा योगदान दिया है।
- आधुनिक युग के शोधों से पता चलता है कि भारत आध्यात्मिक विचारों के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी रखता है।
- पश्चिमी देशों की ज़्यादातर वैज्ञानिक और तकनीकी खोजों में किसी न किसी तरह से प्राचीन भारत के विज्ञान का हिस्सा शामिल है।
Exam Tip: प्राचीन भारत की वैज्ञानिक विरासत का वर्णन करते समय विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों और उनके योगदान को सूचीबद्ध करें।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर मुद्दासर दीजिए:
Question 1. प्राचीन भारत ने गणितशास्त्र में साधी गयी प्रगति की जानकारी दीजिए ।
Answer: भारत ने गणितशास्त्र में महत्वपूर्ण खोजें की थीं। भारत ने शून्य (\(0\)) की खोज, दशमलव पद्धति, बीजगणित, बोधायन के प्रमेय, रेखागणित और वैदिक गणित जैसी खोजें दीं।
- आर्यभट्ट ने शून्य (\(0\)) की खोज की थी। गृत्समद नामक ऋषि ने शून्य को लगाकर अंकों में उपयोग करने का तरीका खोजा था।
- प्राचीन भारत के गणितज्ञों ने 1 (एक) के पीछे 53 (वेपन) शून्य लगाकर बनने वाली संख्या का नाम तय किया था।
- हड़प्पा और मोहन-जो-दड़ो के अवशेषों में मापने और तौलने के साधनों में 'दशांश पद्धति' पाई जाती है। मेघातिथि ने इसकी पहचान प्राचीन समय में की थी।
- ई.स. 1150 में भास्कराचार्य ने 'लीलावती गणित' और 'बीजगणित' नामक ग्रंथ लिखे थे। उन्होंने जोड़ (+) और घटाव (-) में भी सुधार किया था।
- ब्रह्मगुप्त ने समीकरण के प्रकार बताए थे।
- बोधायन का प्रमेय (त्रिकोणमिति) और आपस्तंभ ने शुल्बसूत्रों में (ई.स. 800 ईसा पूर्व) विभिन्न वैदिक यज्ञों के लिए ज़रूरी अलग-अलग वेदियों के माप तय करने के सिद्धांत दिए थे।
- आर्यभट्ट के 'आर्य भट्टीयम' ग्रंथ में \( \pi \) (पाई) की कीमत 22/7 (3.14) बताई गई है। उन्होंने यह भी कहा था कि वृत्त का गुणोत्तर दर्शाने वाला एक स्थिर अंक है।
- भाग की आधुनिक पद्धतियाँ, गुणा, जोड़, वर्गमूल, घनमूल आदि की अष्टांग पद्धति की जानकारी आर्यभट्ट के ग्रंथों में दी गई है।
- आर्यभट्ट को गणितशास्त्र का पिता कहा जाता है, उन्होंने दशगीतिका और आर्यभट्टीयम जैसे ग्रंथ लिखे।
- आर्यसिद्धांत में ज्योतिषशास्त्र के मूल सिद्धांतों का संक्षेप में वर्णन है। उन्होंने बीजगणित, अंकगणित और रेखागणित की मूलभूत समस्याओं को हल किया।
- इसके अतिरिक्त, गणित के विभिन्न पहलुओं का वर्णन बोधायन, आपस्तंभ, कात्यायन, भास्कराचार्य और ब्रह्मगुप्त ने अपने-अपने ग्रंथों में किया है।
Exam Tip: गणितशास्त्र में भारत के योगदान का वर्णन करते समय आर्यभट्ट, भास्कराचार्य और बोधायन जैसे प्रमुख गणितज्ञों और उनकी खोजों (शून्य, दशमलव प्रणाली, प्रमेय आदि) का उल्लेख करें।
Question 2. प्राचीन भारत का खगोलशास्त्रः
Answer: खगोलशास्त्र शास्त्रों में सबसे पुराना खगोल विज्ञान है।
- खगोलशास्त्र से जुड़े कई ग्रंथ भारत में लिखे गए हैं, और इन सभी ग्रंथों का प्राचीन विश्वविद्यालयों में व्यवस्थित और गहराई से अध्ययन करवाया जाता था।
- ग्रहों और उनकी गति, नक्षत्रों तथा अन्य आकाशीय पिंडों की गणना करके खगोल और ज्योतिषशास्त्र का विकास किया गया था।
- ग्रहों के प्रभाव से ज्योतिष शास्त्र का विकास हुआ है।
- जिसके नाम पर भारत के पहले उपग्रह का नाम आर्यभट्ट रखा गया है, उस आर्यभट्ट का खगोलशास्त्र में सबसे महत्वपूर्ण योगदान है।
- आर्यभट्ट ने बताया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है और चंद्रग्रहण का असली कारण पृथ्वी की परछाई है। उन्हें विद्वान 'अजरमर' के नाम से जाना जाता था।
- ब्रह्मगुप्त ने ब्रह्मसिद्धांत ग्रंथ में गुरुत्वाकर्षण का नियम दिया था।
Exam Tip: खगोलशास्त्र में भारत के योगदान को समझाते समय आर्यभट्ट और ब्रह्मगुप्त जैसे विद्वानों के नाम और उनकी प्रमुख खोजों का उल्लेख करें।
Question 3. ज्योतिषशास्त्र में भारत के योगदान की जानकारी दीजिए ।
Answer: ग्रहों के फल के ज़रिये ज्योतिष शास्त्र का विकास हुआ है।
- ज्योतिषशास्त्र को 'तंत्र', 'होरा' और 'संहिता' इन तीन भागों में बाँटने वाले वराहमिहिर महान खगोलशास्त्री और ज्योतिषशास्त्री थे।
- वराहमिहिर ने 'बृहदसंहिता' नामक ग्रंथ की रचना की थी।
- इस ग्रंथ में मानव के भविष्य पर पड़ने वाले असर, मनुष्य के लक्षण, प्राणियों के प्रकार, विवाह का समय, तालाब, कुएँ, बगीचों, खेतों में बुवाई जैसे अवसरों के शुभ समय की जानकारी दी गई है।
- हमें गर्व महसूस होता है कि हमारे पूर्वज ज्योतिष विद्या में कितने कुशल थे।
Exam Tip: ज्योतिषशास्त्र में भारत के योगदान को दर्शाते समय वराहमिहिर के नाम और 'तंत्र', 'होरा', 'संहिता' जैसे तीन विभागों का उल्लेख करें।
Question 4. वास्तुशास्त्र में किस जानकारी का समावेश होता है ?
Answer: वास्तुशास्त्र ज्योतिषशास्त्र का ही एक महत्वपूर्ण अंग है, जिसकी गणना, महत्व और प्रशंसा कई देशों में स्वीकार की गई है।
- प्राचीन भारत में ब्रह्मा, नारद, बृहस्पति, भृगु, वशिष्ठ, विश्वकर्मा जैसे विद्वानों ने वास्तुशास्त्र में योगदान दिया था।
- वास्तुशास्त्र में रहने के स्थान, मंदिर, महल, घुड़साल, किला, शस्त्रागार, शहर आदि की रचना कैसे करनी चाहिए, किस दिशा में करनी चाहिए इसका वर्णन किया गया है। 'बृहदसंहिता' में भी वास्तुशास्त्र का उल्लेख है।
- पंद्रहवीं सदी में मेवाड़ के राणा कुंभा ने पहले के प्रकाशनों में सुधार करवाकर वास्तुशास्त्र का फिर से विकास करवाया था।
- वास्तुशास्त्र को 8 भागों में बाँटने वाले देवताओं में से पहले स्थापति विश्वकर्मा थे।
- वास्तुशास्त्र में स्थान की पसंद, विभिन्न आकार, रचना, ऊँचाई, वस्तुओं की व्यवस्था, देवमंदिर, ब्रह्मस्थान, भोजन कक्ष, शयन कक्ष आदि विभिन्न स्थानों की जानकारी दी गई है।
- वास्तुशास्त्र की दृष्टि में अब परिवर्तन आया है, जबकि अब इसे विदेशों में भी स्वीकृति मिल रही है।
Exam Tip: वास्तुशास्त्र में शामिल जानकारी का वर्णन करते समय, इसके विभिन्न पहलुओं जैसे स्थान चयन, डिज़ाइन, दिशा-निर्देश और प्रमुख विद्वानों का उल्लेख करें।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षिप्त में दीजिए:
Question 1. विज्ञान और टेक्नोलॉजी अर्थात् क्या ?
Answer: विज्ञान का अर्थ है व्यवस्थित ज्ञान और टेक्नोलॉजी का अर्थ है विज्ञान का व्यावहारिक उपयोग। विज्ञान और टेक्नोलॉजी, ये दोनों शब्द अलग होने के बावजूद आपस में जुड़े हुए हैं।
In simple words: विज्ञान का मतलब है सही जानकारी, और टेक्नोलॉजी का मतलब है उस जानकारी को इस्तेमाल करके कुछ बनाना। दोनों साथ काम करते हैं।
Exam Tip: विज्ञान को 'व्यवस्थित ज्ञान' और टेक्नोलॉजी को 'व्यवहारिक उपयोगिता' के रूप में परिभाषित करें ताकि उनकी परस्पर निर्भरता स्पष्ट हो।
Question 2. रसायनविद्या के क्षेत्र में नागार्जुन द्वारा दिया गया योगदान बताइए ।
Answer: रसायनशास्त्रियों में नालंदा विद्यापीठ के बौद्ध आचार्य नागार्जुन को भारतीय रसायनशास्त्र के आचार्य के तौर पर माना जाता है।
- उन्होंने 'रसरत्नाकर' और 'स्वास्थ्य मंजरी' जैसी किताबें लिखी थीं।
- आचार्य नागार्जुन ने जड़ी-बूटी वाली दवाओं के साथ रासायनिक दवाओं के उपयोग की सलाह दी थी।
- उन्होंने पारे की भस्म का औषधि के रूप में उपयोग करना शुरू किया था।
Exam Tip: नागार्जुन के योगदान का वर्णन करते समय, उनकी मुख्य कृतियों ('रसरत्नाकर') और पारे की भस्म के औषधीय उपयोग जैसे महत्वपूर्ण नवाचारों का उल्लेख करें।
Question 3. गणितशास्त्र में आर्यभट्ट द्वारा की गयी खोजों का वर्णन कीजिए ।
Answer: आर्यभट्ट ने शून्य (\(0\)) की खोज की थी, इसका वर्णन उन्होंने अपने ग्रंथ 'आर्यभट्टीयम' में किया है।
- आर्यभट्ट ने \( \pi \) (पाई) की कीमत 22/7 (3.14) बताई है, जिसका उल्लेख उनके ग्रंथ में है।
- उन्होंने यह भी बताया कि गोले (वृत्त) की परिधि और व्यास के अनुपात को दर्शाने के लिए एक स्थिर अंक है।
- भाग की आधुनिक पद्धति, गुणा, जोड़, भाग, वर्गमूल, घनमूल आदि की अष्टांग पद्धति की जानकारी आर्यभट्ट ने अपने ग्रंथों में दी है।
- इसलिए आर्यभट्ट को गणितशास्त्र का पिता कहा जाता है।
- उन्होंने 'दशगीतिका' और 'आर्यभट्टीयम' जैसे ग्रंथ लिखे हैं।
- गणित, अंकगणित और रेखागणित की मूलभूत समस्याओं का समाधान उन्होंने खोजा है।
Exam Tip: आर्यभट्ट की मुख्य खोजों पर ध्यान केंद्रित करें, जैसे शून्य (\(0\)) का आविष्कार, \( \pi \) का मान, और बीजगणित तथा अंकगणित में उनका योगदान।
Question 4. ज्योतिषशास्त्र के कितने विभाग किये गये है ? नाम लिखो ।
Answer: ज्योतिषशास्त्र के तीन विभाग किए गए हैं।
- तंत्र
- होरा और
- संहिता
Exam Tip: ज्योतिषशास्त्र के तीनों विभागों के नाम स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें।
Question 5. वास्तुशास्त्र के प्रणेता का नाम लिखो ।
Answer: प्राचीन भारत में ब्रह्मा, नारद, बृहस्पति, भृगु, वशिष्ठ, विश्वकर्मा जैसे विद्वान भारतीय वास्तुशास्त्र के प्रणेता थे।
In simple words: ब्रह्मा, नारद, बृहस्पति, भृगु, वशिष्ठ और विश्वकर्मा जैसे विद्वानों को वास्तुशास्त्र का जनक माना जाता है।
Exam Tip: वास्तुशास्त्र के प्रणेताओं के नाम याद रखें और उन्हें सूचीबद्ध करें।
4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर दीजिए:
Question 1. कला की दृष्टि से अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शिल्प कौन-सी है ?
(a) बुद्ध की
(b) नटराज की
(c) बुद्धगया की
(d) धनुर्धारी राम की
Answer: (b) नटराज की
In simple words: नटराज की मूर्ति को कला के लिए दुनिया भर में जाना जाता है।
Exam Tip: कला के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि प्राप्त भारतीय शिल्पों में नटराज की मूर्ति एक प्रमुख उदाहरण है।
Question 2. निम्न में से कौन-सा विधान सत्य नहीं है ?
(a) नागार्जुन को भारतीय रसायनशास्त्र का आचार्य माना जाता है ।
(b) पारे की भस्म करके औषधी के रूप में उपयोग की प्रथा नागार्जुन ने शुरू की।
(c) रसायनशास्त्र में प्रयोगात्मक विज्ञान नहीं है ।
(d) धातुओं की भस्म का वर्णन रसायनशास्त्र के ग्रंथों में पाया जाता है ।
Answer: (c) रसायनशास्त्र में प्रयोगात्मक विज्ञान नहीं है ।
In simple words: यह बात गलत है कि रसायन विज्ञान एक ऐसा विज्ञान नहीं है जिसमें प्रयोग किए जाते हैं। वास्तव में, रसायन विज्ञान पूरी तरह से प्रयोगों पर आधारित है।
Exam Tip: रसायन विज्ञान की प्रकृति को समझें; यह एक प्रयोगात्मक विज्ञान है। गलत कथन की पहचान के लिए प्रत्येक विकल्प का ध्यानपूर्वक विश्लेषण करें।
Question 3. महर्षि चरक : चरक संहिता, महर्षि सुश्रुत :
(a) सुश्रुतसंहिता
(b) चरकशास्त्र
(c) वागभट्ट संहिता
(d) सुश्रुतशास्त्र
Answer: (a) सुश्रुतसंहिता
In simple words: जिस प्रकार महर्षि चरक ने 'चरक संहिता' लिखी, उसी प्रकार महर्षि सुश्रुत ने 'सुश्रुतसंहिता' नामक ग्रंथ की रचना की थी।
Exam Tip: प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के प्रमुख ग्रंथकारों और उनकी रचनाओं को याद रखें।
Question 4. किसी विद्यालय में एक कक्षा के कुछ विद्यार्थी गणितशास्त्र के विषय में चर्चा करते है । इनमें से कौन सत्य बोलता है ?
श्रेया: भास्कराचार्य ने 'लीलावती गणित' और 'बीजगणित' के ग्रन्थ लिखे थे ।
यश: दशांशपद्धति के खोजकर्ता बोधायन थे ।
मानसी: आर्यभट्ट को 'गणितशास्त्र के पिता' के रूप में पहचाना जाता है ।
हार्द: शून्य (\(0\)) की खोज भारत ने की थी।
(a) यश
(b) हार्द
(c) श्रेया
(d) श्रेया, मानसी, हार्द
Answer: (d) श्रेया, मानसी, हार्द
In simple words: श्रेया, मानसी और हार्द तीनों सही बातें कह रहे हैं। भास्कराचार्य ने 'लीलावती' लिखी, आर्यभट्ट को गणित का पिता कहते हैं और भारत ने ही शून्य (\(0\)) को खोजा था।
Exam Tip: प्राचीन भारतीय गणितज्ञों के योगदान और उनकी प्रमुख खोजों को याद रखना महत्वपूर्ण है ताकि ऐसे बहु-कथन प्रश्नों को सही ढंग से हल किया जा सके।
Question 5. ब्राभ्रव्य पांचात रचित ग्रंथ ................................. है।
(a) चिकित्सासंग्रह
(b) प्रजननशास्त्र
(c) कामसूत्र
(d) यंत्र सर्वस्व
Answer: (b) प्रजननशास्त्र
In simple words: ब्राभ्रव्य पांचाल ने 'प्रजननशास्त्र' नामक ग्रंथ लिखा था।
Exam Tip: प्राचीन भारतीय साहित्य और उनके रचनाकारों के नाम याद रखें।
Question 6. प्राचीन भारत में गुरुत्वाकर्षण का नियम प्रचलित करती प्रणाली ब्रह्मसिद्धांत की रचना किसने की थी ?
(a) ब्रह्मगुप्त
(b) वात्स्यायन
(c) गृत्समद
(d) महामुनि पातंजलि
Answer: (a) ब्रह्मगुप्त
In simple words: ब्रह्मगुप्त ने 'ब्रह्मसिद्धांत' नामक प्रणाली बनाई थी, जिसमें गुरुत्वाकर्षण का नियम समझाया गया था।
Exam Tip: 'ब्रह्मसिद्धांत' ग्रंथ और गुरुत्वाकर्षण के नियम से जुड़े ब्रह्मगुप्त का नाम याद रखें।
Question 7. मंदिर, महल, अश्वशाला, किला इत्यादि की रचना किस तरह करनी इसके सिद्धांत दर्शानेवाला शास्त्र निम्न में से कौन-सा है ?
(a) गणितशास्त्र
(b) रसायनशास्त्र
(c) वैदकशास्त्र
(d) वास्तुशास्त्र
Answer: (d) वास्तुशास्त्र
In simple words: वास्तुशास्त्र वह विज्ञान है जो सिखाता है कि मंदिर, महल और किलों जैसी इमारतों को कैसे बनाया जाए।
Exam Tip: वास्तुशास्त्र की परिभाषा और इसके दायरे को समझें, जिसमें इमारतों के निर्माण और डिज़ाइन से जुड़े सिद्धांत शामिल हैं।
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Social Science Class 10 Curriculum Solutions: Chapter 05 भारत विज्ञान और टेक्नोलॉजी की विरासत
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