Get the most accurate GSEB Solutions for Class 10 Social Science Chapter 03 भारत की साँस्कृतिक विरासत शिल्प और स्थापत here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest GSEB textbooks for Class 10 Social Science. Our expert-created answers for Class 10 Social Science are available for free download in PDF format.
Detailed Chapter 03 भारत की साँस्कृतिक विरासत शिल्प और स्थापत GSEB Solutions for Class 10 Social Science
For Class 10 students, solving GSEB textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 10 Social Science solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 03 भारत की साँस्कृतिक विरासत शिल्प और स्थापत solutions will improve your exam performance.
Class 10 Social Science Chapter 03 भारत की साँस्कृतिक विरासत शिल्प और स्थापत GSEB Solutions PDF
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए:
प्रश्न 1. प्राचीन भारत की नगर आयोजना समझाइए ।
Answer: भारत प्राचीन समय से नगर नियोजन में कुशल था। पुरातत्वीय खुदाई से कई प्राचीन नगर मिले हैं। इन नगरों के मुख्य तीन प्रमुख हिस्से थे:
(1) शासक अधिकारियों का किला (सिटेडेल)
(2) अन्य अधिकारियों के रहने का उपनगर ।
(3) सामान्य नागरिकों के आवास वाला निचला नगर (निम्ननगर)
* शासक अधिकारियों के किले ऊँचाई पर बनाए जाते थे।
* ऊपर का नगर भी रक्षात्मक दीवारों से सुरक्षित रहता था। यहाँ दो से पाँच कमरों वाले मकान थे।
* निम्न नगर के मकान सामान्यतः हाथ से बनी ईंटों के बनाए गए थे।
* सिंधु घाटी की संस्कृति के लोग स्थापत्य के क्षेत्र में उस समय की सभी संस्कृतियों से मनमोहक और सुव्यवस्थित नगर विकसित किए थे।
In simple words: पुराने भारत में नगर योजना बहुत उन्नत थी। खुदाई में कई पुराने शहर मिले हैं, जिनके तीन मुख्य हिस्से थे: अधिकारियों का किला, अन्य अधिकारियों का उपनगर, और आम लोगों का निचला नगर। किले ऊंचाई पर होते थे और दीवारों से सुरक्षित थे। निचले नगर के मकान हाथ की ईंटों से बनते थे। सिंधु घाटी सभ्यता में सबसे सुंदर और व्यवस्थित शहर विकसित हुए थे।
Exam Tip: जब भी प्राचीन नगर नियोजन पर प्रश्न आए, उसके मुख्य तीन विभागों और उनकी विशेषताओं का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है। सिंधु घाटी सभ्यता के संदर्भ में इनकी महत्ता बताएँ।
नगर की व्यवस्था:
(1) नगर संरचना
(2) मार्ग
(3) गटर योजना
(4) सार्वजनिक मकान
(5) सार्वजनिक स्नानागार ।
प्रश्न 2. मोहें-जो-दड़ो की नगर रचना में मार्ग और गटर योजना की जानकारी दीजिए ।
Answer: ई.स. 1922 में सर जॉन मार्शल और कर्जन मेक के मार्गदर्शन में रखालदास बेनर्जी और दयाराम सहानी नामक भारतीय पुरातत्त्वविदों ने सिंध में खुदाई के आधार पर नीचे दिए गए नगर के तत्व मिले थे।
(1) मार्ग:
• इस नगर की रचना की मुख्य विशेषता यहाँ के मार्ग थे।
• यहाँ के मार्ग 9.75 मीटर चौड़े थे।
• छोटे-बड़े मार्ग समकोण पर मिलते थे।
• एक से ज़्यादा वाहन जा सकते थे, ये इतने चौड़े थे।
• रास्ते के आसपास रात में प्रकाश के लिए खंभे लगे होते थे।
• नगर के मार्ग सीधे और चौड़े थे, कहीं भी मोड़ नहीं थे।
• दो राजमार्ग थे। एक मार्ग उत्तर से दक्षिण और दूसरा पश्चिम की तरफ जाता था। दोनों मार्ग मध्य में समकोण पर मिलते थे।
(2) गटर योजना:
गटर योजना इस नगर की मुख्य पहचान थी।
• यह गटर योजना समकालीन सभ्यताओं में भूमध्य सागर के क्रीट नगर को छोड़कर कहीं नहीं थी।
• नगर में गंदे पानी के निकास के लिए गटर बनाए गए थे।
• प्रत्येक मकान में एक कुआँ होता था।
• ऐसी सुव्यवस्थित गटर योजना से लगता है कि उस समय सफाई की कुशल व्यवस्था थी।
• इसको देखकर लगता है कि उस समय प्रजा के स्वास्थ्य और सफाई का कितना ध्यान रखा जाता था।
In simple words: मोहें-जो-दड़ो की नगर रचना में सड़कें और नालियां बहुत अच्छी थीं। सड़कें 9.75 मीटर चौड़ी थीं और सीधी थीं, जिन पर कई वाहन एक साथ चल सकते थे। रात में रोशनी के लिए खंभे थे। नालियों की व्यवस्था इतनी बढ़िया थी कि यह समकालीन सभ्यताओं में अद्भुत थी, यह साफ-सफाई और स्वास्थ्य के प्रति लोगों की जागरूकता दर्शाती है।
Exam Tip: मोहें-जो-दड़ो की नगर योजना की विशेषताओं का वर्णन करते समय मार्ग और गटर योजना के प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान दें। उनकी चौड़ाई, सीधापन, समकोण पर मिलना और सफाई व्यवस्था का उल्लेख करें।
प्रश्न 3. गुजरात की गुफाओं की जानकारी दीजिए ।
Answer: गुजरात में निम्नलिखित गुफाएँ मिली हैं:
(1) जूनागढ़ गुफाएँ : जूनागढ़ में तीन गुफाओं का समूह मिला है।
(i) बावाप्यारा का गुफासमूह : यह गुफा बावाप्यारा के मठ के पास स्थित है। ये गुफाएँ तीन क्रम में और लगभग समकोण पर जुड़ी हैं। पहले क्रम में चार, दूसरे क्रम में सात और तीसरे क्रम में पाँच गुफाएँ मिली हैं। कुल 16 गुफाएँ हैं। ये ई. सन् के आरंभ की दूसरी-पहली सदी के दौरान बनाई गई हैं।
(ii) ऊपरकोट की गुफाएँ: ये गुफाएँ दो मंजिलें थीं, नीचे-ऊपर जाने की सीढ़ी की पंक्ति है। ऊपरकोट की गुफाएँ ई.स. दूसरी सदी के उत्तरार्द्ध से चौथी सदी के पूर्वार्द्ध तक बनाई गई हैं।
(iii) खापरा कोडिया की गुफाएँ – कुंड उपर की गुफाएँ : ये गुफाएँ मंजिलों वाली होती होंगी ऐसा प्राप्त अवशेषों से यह ज्ञात होता है। इन गुफाओं में कुल 20 स्तंभ हैं। इस गुफा का निर्माण ई.स. की तीसरी सदी में होने का अनुमान है।
(2) खंभालीडा गुफा: राजकोट से 70 कि.मी. दूर भावनगर जिले में ई.स. 1959 में ये गुफाएँ मिली थीं। इनमें तीन गुफाएँ मुख्य हैं। बीच की गुफा स्तूपयुक्त, चैत्याग्रह, प्रवेश मार्ग के दोनों ओर वृक्ष के सहारे खड़ी बौद्धिसत्व और कुछ उपासकों की बड़ी मूर्तियाँ दूसरी-तीसरी सदी की हैं।
(3) तलाजा गुफा: शेत्रुंजी नदी के मुख के पास भावनगर जिले में तलाजा का पर्वत मौजूद है। यह 'ध्वजगिरि' तीर्थधाम के रूप में प्रसिद्ध है। पत्थरों को खोदकर 30 गुफाओं की रचना की गई है। इन गुफाओं की स्थापत्य कला में विशाल द्वार है। सभाखंड और चैत्यगृह सुरक्षित और स्थापत्य की दृष्टि से उत्कृष्ट है। बौद्ध धर्म के स्थापत्यों से इन गुफाओं का निर्माण ईसवी की तीसरी सदी में हुआ था।
(4) साणा गुफा – गिर सोमनाथ जिले के उना तालुके के बांकीया गाँव के पास रूपेण नदी पर साणाना पर्वतों पर ये गुफाएँ स्थित हैं। साणा पर्वत पर मधपुड़ा की तरह 62 गुफाएँ हैं।
(5) ढांक गुफा: राजकोट जिले में उपलेटा तालुका के ढांक गाँव में ढंकगिरि आया हुआ है। ढांक की गुफाएँ चौथी सदी के पूर्वार्द्ध की हैं।
(6) झींझुरीझर: ढांक के पश्चिम में सात किमी के अंतर में सिदसर के पास झींझुरीझर की घाटी में कुछ बौद्ध गुफाएँ हैं। ई.स. की पहली और दूसरी सदी में ये बनी थीं।
(7) कच्छ की खापरा कोडिया की गुफाएँ: कच्छ के लखतर तालुका में जूना पाटगढ के पास पर्वत में ये गुफाएँ स्थित हैं। इसमें कुल दो गुफाएँ हैं। के. का. शास्त्री ने ई.स. 1967 में इन गुफाओं को खोजा था।
(8) कंडिया पर्वत गुफा : भरूच जिले के चट्टान में से जघडीया तालुके में कडिया पर्वत की तीन गुफाएँ मिली हैं: ये गुफाएँ बौद्ध धर्म की हैं। एक ही पत्थर में तराशकर 11 फूट गहरा एक सिंह स्तंभ है। स्तंभ के सिरे वाले भाग में दो शरीर वाली और एक मुँह वाली सिंह वाली आकृति है।
In simple words: गुजरात में कई गुफाएँ मिली हैं, जैसे जूनागढ़ की 16 गुफाएँ (बावाप्यारा, ऊपरकोट, खापरा कोडिया), खंभालीडा की 3 गुफाएँ, तलाजा की 30 गुफाएँ, साणा की 62 गुफाएँ, ढांक की गुफाएँ, झींझुरीझर में बौद्ध गुफाएँ, कच्छ की खापरा कोडिया की 2 गुफाएँ, और कंडिया पर्वत की 3 बौद्ध गुफाएँ। ये गुफाएँ विभिन्न सदियों में बनी थीं और अलग-अलग स्थापत्य कला दर्शाती हैं, जिनमें बौद्ध धर्म से जुड़ी आकृतियाँ और स्तंभ भी हैं।
Exam Tip: गुजरात की गुफाओं के बारे में लिखते समय, प्रत्येक गुफा का नाम, उसकी स्थिति (जिला/तालुका), मुख्य विशेषताएँ (जैसे गुफाओं की संख्या, मंजिला होना, निर्माण काल) और संबंधित धर्म (बौद्ध, जैन) का उल्लेख करें।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर मुद्दासर दीजिए:
प्रश्न 1. धोलावीरा की जानकारी दीजिए ।
Answer: भुज से लगभग 140 कि.मी. दूर भचाऊ तालुके के बड़े रेगिस्तान में खरीदभेट के धोलावीरा गाँव से दो किमी दूर हड़प्पा सभ्यता का समकालीन एक बड़ा व्यवस्थित और प्राचीन नगर मिला है।
• गुजरात के राज्य पुरातत्त्व विभाग ने, आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया के अधिकारियों ने शोध किया।
• ई.स. 1990 में रविन्द्रसिंह विस्त के मार्गदर्शन में विशेष खुदाई हुई।
• धोलावीरा के किले, महल तथा नगर की मुख्य दीवारों को सफेद रंग किया गया होगा उसके अवशेष मिले हैं।
• नगर की किलेबंदी की मजबूत सुरक्षा प्रणाली है। यह दीवार मिट्टी, पत्थर और ईंटों से बनी है।
• यहाँ पीने के पानी को शुद्ध और साफ रखने की ऐसी व्यवस्था बनाई गई थी जो आज के आधुनिक युग में भी हम नहीं कर सकते।
• पानी की शुद्धीकरण की यह व्यवस्था अद्भुत है।
In simple words: धोलावीरा एक बहुत पुराना और अच्छी तरह से योजनाबद्ध हड़प्पा शहर है, जो गुजरात में भुज से लगभग 140 किलोमीटर दूर है। यहां के किले, महल और दीवारें सफेद रंग की थीं, और इनकी सुरक्षा मजबूत थी। शहर में पीने के पानी को साफ रखने की एक शानदार व्यवस्था थी, जो आज भी काफी आधुनिक मानी जा सकती है।
Exam Tip: धोलावीरा के बारे में लिखते समय, इसकी भौगोलिक स्थिति, खुदाई का समय और प्रमुख खोजकर्ताओं का उल्लेख करें। नगर की प्रमुख विशेषताओं जैसे जल प्रबंधन और सुरक्षा प्रणाली पर विशेष जोर दें।
प्रश्न 2. लोथल भारत का महत्त्वपूर्ण बन्दरगाह था ।
Answer: लोथल अहमदाबाद के धोलका तहशील में भोगावो और साबरमती दो नदियों के बीच के इलाके में है।
• यह खंभात की खाड़ी से 18 कि.मी. दूर है।
• इसमें मानव बसावट के तीन स्तर मिले हैं।
• नगर के पूर्व छोर में नीचे भाग में ज्वार के समय रोकने के लिए बड़ा डोकयार्ड बनाया गया था। यह लोथल की खासियत है।
• यह डोकयार्ड गोदी, दुकानें, आयात-निर्यात के सबूत आदि दर्शाते हैं।
• लोथल उस समय भारत का समृद्ध बन्दरगाह था। गुजरात के लिए यह गौरव की बात है।
In simple words: लोथल, गुजरात में अहमदाबाद के पास, भोगावो और साबरमती नदियों के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण प्राचीन बंदरगाह था। यह खंभात की खाड़ी से 18 किलोमीटर दूर था और यहाँ बस्तियों के तीन स्तर मिले हैं। इसकी सबसे खास बात एक बड़ा डॉकयार्ड था, जहाँ ज्वार के पानी को रोका जाता था, जिससे व्यापार और माल की आवाजाही आसान होती थी। यह डॉकयार्ड गोदामों और दुकानों के साथ आयात-निर्यात का प्रमाण देता है, जिससे पता चलता है कि लोथल एक समृद्ध व्यापार केंद्र था।
Exam Tip: लोथल के महत्व को बताते समय, उसकी भौगोलिक स्थिति, डॉकयार्ड की विशेषता (ज्वार को रोकने का तंत्र), और व्यापारिक गतिविधियों के प्रमाणों पर प्रकाश डालें। यह भी बताएँ कि यह उस समय का एक समृद्ध बंदरगाह था।
प्रश्न 3. स्तंभलेखों पर की कला की जानकारी दीजिए ।
Answer: स्तंभलेख एक ही शिला पर बनाए जाते थे।
• सम्राट अशोक की धर्माज्ञाओं के खोदकर बनाए गए स्तंभलेख, शिलाकला के उत्तम उदाहरण हैं।
• एक ही पत्थर को खोदकर, घिसकर चमक दी जाती थी।
• ऐसे स्तंभ अंबाला, मेरठ, इलाहाबाद, बिहार में लोरिया के पास नंदनगढ़, साँची, काशी, पटना और बुद्धगया में बोद्धिवृक्ष के पास स्थापित किए गए थे।
• इनकी लिपि ब्राह्मी लिपि थी।
• सारनाथ का स्तंभ भारत की शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
• सारनाथ भगवान बुद्ध के उपदेशों का स्थान होने से सिंह के नीचे चारों तरफ चार धर्मचक्र अंकित किए गए हैं।
• इस पर हाथी, घोड़ा और बैल की आकृति मौजूद है।
In simple words: स्तंभलेख एक बड़े पत्थर से बनाए जाते थे। सम्राट अशोक के स्तंभलेख पत्थरों पर कला के बहुत अच्छे उदाहरण हैं। इन पत्थरों को तराश कर चमकाया जाता था। ये स्तंभ अंबाला, मेरठ, इलाहाबाद और बिहार जैसे कई स्थानों पर स्थापित थे। सारनाथ का स्तंभ भारतीय कला का बेहतरीन उदाहरण है, जिस पर चार धर्मचक्र, हाथी, घोड़ा और बैल की आकृतियाँ बनी हैं।
Exam Tip: स्तंभलेखों की कला का वर्णन करते समय, सम्राट अशोक के स्तंभलेखों का उल्लेख करें। उनकी बनावट (एकल शिला), पॉलिश, स्थान और प्रतीकों (धर्मचक्र, पशु आकृतियाँ) पर ध्यान केंद्रित करें।
प्रश्न 4. मोढ़ेरा के सूर्यमंदिर की जानकारी दीजिए ।
Answer: गुजरात के मोढ़ेरा में आया हुआ सूर्यमंदिर (ई.स. 1026 में) सोलंकी राजा भीमदेव प्रथम के शासनकाल में बनाया गया था।
• इस मंदिर का पूर्व दिशा में प्रवेशद्वार इस प्रकार से बना है कि सूर्य की पहली किरण सीधे मंदिर के अंदर गर्भगृह में सूर्य प्रतिमा के मुकुट की मणि पर पड़ती थी।
• इससे पूरा मंदिर प्रकाश से चमक उठता था और पूरे वातावरण में जैसे दिव्यता दिखाई देती थी।
• इस मंदिर में सूर्य की विविध 12 मूर्तियाँ अंकित हैं और आज भी मौजूद हैं।
• इस मंदिर का नक्काशी कार्य ईरानी शैली में है।
• मंदिर के बाहर जलकुण्ड के चारों ओर छोटे-बड़े कुल 108 मंदिर हैं।
• ऊषा और संध्याकाल में प्रकट होती दीपमाला के कारण एक नयनरम्य दृश्य उत्पन्न होता है।
In simple words: मोढ़ेरा का सूर्य मंदिर, जो गुजरात में है, राजा भीमदेव प्रथम ने 1026 ई. में बनवाया था। इसका प्रवेश द्वार इस तरह बना है कि सूरज की पहली किरण सीधे मूर्ति के मुकुट पर पड़ती है, जिससे पूरा मंदिर चमक उठता है। मंदिर में सूर्य की 12 मूर्तियां हैं और इसकी नक्काशी ईरानी शैली में है। मंदिर के बाहर एक कुंड है जिसके चारों ओर 108 छोटे मंदिर हैं। सुबह और शाम को जलने वाले दीपक बहुत सुंदर लगते हैं।
Exam Tip: मोढ़ेरा के सूर्य मंदिर के बारे में लिखते समय, इसके निर्माण का समय, निर्माता, और सबसे महत्वपूर्ण विशेषता (सूर्य की किरणें गर्भगृह में पड़ना) का उल्लेख करें। मंदिर की मूर्तियों, शैली और बाहर के जलकुंड की जानकारी भी दें।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षिप्त में दीजिए:
प्रश्न 1. शिल्प अर्थात् क्या ?
Answer: कलाकार (शिल्पी) द्वारा अपने कौशल और क्षमता से छेनी-हथोड़े के द्वारा विविध प्रकार के मन के भाव पत्थर, लकड़ी या धातु पर उकेरने की कला अर्थात् शिल्पकला।
In simple words: शिल्प का अर्थ है, किसी कलाकार द्वारा अपनी कला से पत्थर, लकड़ी या धातु जैसी चीजों पर छेनी-हथोड़े का उपयोग करके सुंदर आकृतियां बनाना।
Exam Tip: शिल्प की परिभाषा देते समय, कलाकार के कौशल, उपयोग किए जाने वाले औजार (छेनी-हथोड़ा), माध्यम (पत्थर, लकड़ी, धातु) और इसका उद्देश्य (मन के भाव उकेरना) को शामिल करें।
प्रश्न 2. स्थापत्य अर्थात् क्या ?
Answer: स्थापत्य का सीधा मतलब निर्माण कार्य है। संस्कृत भाषा में स्थापत्य के लिए 'वास्तु' शब्द का प्रयोग होता है। इस अर्थ में मकान, नगर, कुएँ, किले, मीनारों, मंदिरों, मस्जिदों, मकबरों आदि का निर्माण कार्य स्थापत्य कहलाता है।
In simple words: स्थापत्य का मतलब होता है इमारतें बनाना। यह 'वास्तु' शब्द से आता है और इसमें घर, शहर, कुएं, किले, मीनार, मंदिर और मस्जिद जैसी सभी इमारतों का निर्माण शामिल है।
Exam Tip: स्थापत्य की परिभाषा में 'वास्तु' शब्द के साथ उसके व्यापक अर्थ को समझाएँ, जिसमें विभिन्न प्रकार के निर्माण कार्य शामिल हों जैसे मकान, नगर, मंदिर आदि।
प्रश्न 3. मोहें-जो-दड़ो का अर्थ समझाकर उसके मार्ग की जानकारी दीजिए ।
Answer: मोहें-जो-दड़ो का अर्थ 'मृतकों का टीला' है। मार्ग – 'मोहें-जो-दड़ो' के मार्ग 9.75 मीटर चौड़े थे। छोटे मार्ग मुख्य मार्ग को समकोण पर मिलते थे। ये इतने चौड़े थे कि एक साथ एक से अधिक वाहन आवागमन कर सकते थे। रास्तों के पास रात्रि प्रकाश के लिए खंभे लगे होते थे। मार्ग सीधे थे, कहीं भी मोड़ नहीं थे। राजमार्ग भी थे जिसे अन्य मार्ग समकोण पर मिलते थे।
In simple words: मोहें-जो-दड़ो का मतलब 'मृतकों का टीला' है। इस शहर की सड़कें 9.75 मीटर चौड़ी थीं और सीधी थीं, जहाँ कोई मोड़ नहीं था। छोटी सड़कें मुख्य सड़कों से समकोण पर मिलती थीं। रात में रोशनी के लिए खंभे भी लगे थे, जिससे आवागमन आसान होता था।
Exam Tip: मोहें-जो-दड़ो का अर्थ स्पष्ट करने के बाद, उसके मार्गों की चौड़ाई, सीधी संरचना, समकोण पर मिलने की प्रणाली, और रात्रि प्रकाश व्यवस्था का उल्लेख करें।
प्रश्न 4. स्तूप की जानकारी दीजिए ।
Answer: स्तूप अर्थात् भगवान बुद्ध की देहावशेषों को एक पात्र में रखकर उस पर अर्द्धगोलाकार इमारतें बनाई जाती थीं। स्तूप के चार भाग होते थे।
1. हार्मिक – स्तूप के अंडाकार भाग के चारों ओर लगी रेलिंग को हार्मिका कहते हैं।
2. मेघि – स्तूप के चारों ओर घुमावदार मार्ग को मेघि कहते हैं।
3. परिक्रमा पथ – मंदिर के चारों ओर समतल ऊँचे रास्ते को परिक्रमा कहते हैं।
4. प्रवेशद्वार – प्रवेशद्वार अर्थात् दो ऊँचे खंभे। उसके ऊपर के हिस्से पर एक तिरछा कलात्मक प्रतीक होता है। उसके अंदर से होकर श्रद्धालु जन समुदाय प्रवेश करते हैं।
In simple words: स्तूप भगवान बुद्ध के शरीर के अवशेषों पर बनी अर्द्धगोलाकार इमारतें हैं। इसके चार मुख्य हिस्से होते हैं: हार्मिका (अंडाकार भाग के चारों ओर की रेलिंग), मेघि (स्तूप के चारों ओर का घुमावदार रास्ता), परिक्रमा पथ (मंदिर के चारों ओर चलने का रास्ता), और प्रवेशद्वार (दो ऊँचे खंभे जिनके ऊपर कलात्मक प्रतीक होता है, जहाँ से लोग अंदर आते हैं)।
Exam Tip: स्तूप की परिभाषा देते हुए उसके चार मुख्य भागों (हार्मिक, मेघि, परिक्रमा पथ, प्रवेशद्वार) का स्पष्ट विवरण दें, जिससे उसकी संरचना और कार्यप्रणाली समझाई जा सके।
4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर दीजिए:
प्रश्न 1. संस्कृत भाषा में स्थापत्य के लिए दूसरे किस शब्द का उपयोग होता है ?
(a) वास्तु
(b) नक्कासी
(c) मंदिर
(d) खंडहर
Answer: (a) वास्तु
In simple words: संस्कृत में 'स्थापत्य' शब्द के लिए 'वास्तु' शब्द का प्रयोग किया जाता है, जो भवन निर्माण कला को दर्शाता है।
Exam Tip: स्थापत्य कला से संबंधित शब्दों को याद रखें और संस्कृत में उनके पर्याय भी जानें।
प्रश्न 2. लोथल में वाहन गुजारने के लिए क्या बांधा जाता था ?
(a) खीला
(b) खंभा
(c) धकका
(d) जाली
Answer: (c) धकका
In simple words: लोथल में वाहनों को निकालने के लिए एक तरह का अवरोध या 'धकका' इस्तेमाल किया जाता था, ताकि आवागमन नियंत्रित रहे।
Exam Tip: लोथल की विशेषताओं से संबंधित तथ्यों को ठीक से याद करें, खासकर बंदरगाह के संचालन से जुड़े उपकरण।
प्रश्न 3. स्तंभलेख किस लिपी में खुदे हुए है ?
(a) हिन्दी
(b) ब्राह्मी
(c) उर्दू
(d) उड़ीया
Answer: (b) ब्राह्मी
In simple words: स्तंभलेखों पर लिखी गई लिपि को ब्राह्मी लिपि कहा जाता है, जो उस समय की एक महत्वपूर्ण प्राचीन भारतीय लिपि थी।
Exam Tip: प्राचीन भारतीय लिपियों और शिलालेखों से संबंधित तथ्यों को सटीक रूप से याद करें, खासकर अशोक के स्तंभलेखों की लिपि के बारे में।
प्रश्न 4. गुजरात के .............. में सूर्यमंदिर है ।
(a) मोढ़ेरा
(b) वड़नगर
(c) खेरालु
(d) विजापुर
Answer: (a) मोढ़ेरा
In simple words: गुजरात में मोढ़ेरा नामक स्थान पर एक प्रसिद्ध सूर्यमंदिर स्थित है, जो अपनी स्थापत्य कला और सूर्य के संरेखण के लिए जाना जाता है।
Exam Tip: गुजरात के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों और उनके महत्व को याद रखें, विशेषकर मोढ़ेरा के सूर्य मंदिर जैसी महत्वपूर्ण संरचनाओं को।
प्रश्न 5. अहमदाबाद में तीन दरवाजा के पास कौन-सी मस्जिद है ?
(a) जामा मस्जिद
(b) जुम्मा मस्जिद
(c) सिप्री की मस्जिद
(d) मस्जिदे नगीना
Answer: (a) जामा मस्जिद
In simple words: अहमदाबाद के तीन दरवाजा के पास जामा मस्जिद स्थित है, जो शहर के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों में से एक है।
Exam Tip: अहमदाबाद के ऐतिहासिक स्थलों, विशेषकर प्रसिद्ध मस्जिदों और उनके स्थानों को याद रखें।
Free study material for Social Science
GSEB Solutions Class 10 Social Science Chapter 03 भारत की साँस्कृतिक विरासत शिल्प और स्थापत
Students can now access the GSEB Solutions for Chapter 03 भारत की साँस्कृतिक विरासत शिल्प और स्थापत prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 10 Social Science textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest GSEB syllabus.
Detailed Explanations for Chapter 03 भारत की साँस्कृतिक विरासत शिल्प और स्थापत
Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 10 Social Science chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 10 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these GSEB Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Social Science Class 10 Solved Papers
Using our Social Science solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 10 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 03 भारत की साँस्कृतिक विरासत शिल्प और स्थापत to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated GSEB Class 10 Social Science Solutions Chapter 3 भारत की साँस्कृतिक विरासत शिल्प और स्थापत is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 10 Social Science are as per latest GSEB curriculum.
Yes, our experts have revised the GSEB Class 10 Social Science Solutions Chapter 3 भारत की साँस्कृतिक विरासत शिल्प और स्थापत as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Social Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using GSEB language because GSEB marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our GSEB Class 10 Social Science Solutions Chapter 3 भारत की साँस्कृतिक विरासत शिल्प और स्थापत will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 10 Social Science. You can access GSEB Class 10 Social Science Solutions Chapter 3 भारत की साँस्कृतिक विरासत शिल्प और स्थापत in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire GSEB Class 10 Social Science Solutions Chapter 3 भारत की साँस्कृतिक विरासत शिल्प और स्थापत in printable PDF format for offline study on any device.