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Class 10 Hindi Chapter 14 एक कहानी यह भी GSEB Solutions PDF
प्रश्न-अभ्यास
प्रश्न 1. लेखिका के व्यक्तित्व पर किन-किन व्यक्तियों का किस रूप में प्रभाव पड़ा?
Answer: लेखिका मन्नू भंडारी के व्यक्तित्व पर दो लोगों का बहुत गहरा असर हुआ था:
पिता का प्रभाव: पिता के अनचाहे और अनजाने व्यवहार से लेखिका के मन में हीन भावना उत्पन्न हो गई थी। लेखिका का रंग साँवला था और उनके पिता को गोरा रंग ज्यादा पसंद था। जब उनकी तुलना अपनी बड़ी बहन से होती थी, तो उनके कामों की प्रशंसा की जाती थी। नतीजतन, लेखिका खुद को हीन समझने लगीं। यह भावना उनके अंदर इतनी गहराई से बैठ गई कि साहित्य के क्षेत्र में इतनी प्रसिद्धि, सम्मान और मान-सम्मान मिलने के बाद भी उन्हें अपनी सफलताओं पर विश्वास नहीं होता था। आजादी की अलख जगाने और राजनीतिक गतिविधियों के बारे में उन्हें अपने पिता के कारण ही पता चला था।
शीला अग्रवाल (हिंदी प्राध्यापिका): हिंदी की प्राध्यापिका शीला अग्रवाल का असर मन्नू के व्यक्तित्व में साफ दिखाई दिया। साहित्यिक क्षेत्र में उन्हें प्रवेश दिलाने का श्रेय भी इन्हीं को जाता है। इनके सानिध्य में रहकर उन्होंने कई साहित्यकारों की रचनाएँ पढ़ीं, उन पर चर्चा और विचार-विमर्श किया। बाद में उन्होंने कथा-लेखिका के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। शीला अग्रवाल की जोशीली बातों से उनके भीतर देश-प्रेम की भावनाएँ एक विशाल वृक्ष की तरह विकसित हो गईं। उनके प्रभाव में आकर उन्होंने कई आंदोलनों, हड़तालों, और भाषणों में सक्रिय रूप से भाग लिया। वे निडर होकर सभी कामों में शामिल होने लगीं। इस प्रकार, इन दोनों लोगों का लेखिका के व्यक्तित्व पर बहुत गहरा असर पड़ा।
In simple words: लेखिका मन्नू भंडारी के व्यक्तित्व पर उनके पिता और हिंदी प्राध्यापिका शीला अग्रवाल का बहुत प्रभाव पड़ा। पिता के व्यवहार ने उनमें हीन भावना पैदा की, जबकि शीला अग्रवाल ने उन्हें साहित्य और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय होने के लिए प्रेरित किया।
Exam Tip: जब भी व्यक्तित्व पर प्रभाव से जुड़ा प्रश्न आए, तो हर व्यक्ति का प्रभाव स्पष्ट रूप से अलग-अलग बिंदुओं में बताएं। इससे उत्तर व्यवस्थित और समझने में आसान रहता है।
प्रश्न 2. इस आत्मकथ्य में लेखिका के पिता ने रसोई को 'भटियारखाना' कहकर क्यों संबोधित किया है?
Answer: लेखिका के पिताजी रसोईघर को भटियारखाना कहते थे, क्योंकि उनके विचार में लड़की को रसोई तक सीमित रखना, उसकी प्रतिभा को कम करना और उसे खत्म कर देना था। पिताजी नहीं चाहते थे कि लेखिका रसोई तक ही सीमित रहे। यदि वह रसोई में काम करेगी, तो उसे अपनी प्रतिभा निखारने का समय नहीं मिलेगा। रसोई वह जगह है जहाँ भट्टी जलती रहती है और कुछ-न-कुछ बनता रहता है। इसलिए, पिताजी अपनी बेटी को भट्टी में झोंकना नहीं चाहते थे। वे चाहते थे कि मन्नू एक सामान्य स्त्री से अलग होकर अपने व्यक्तित्व का विकास करे और अपनी अलग पहचान बनाए।
In simple words: लेखिका के पिता रसोई को 'भटियारखाना' इसलिए कहते थे क्योंकि उनका मानना था कि रसोई में लड़की को सीमित रखने से उसकी प्रतिभा नष्ट हो जाती है और उसे विकसित होने का मौका नहीं मिलता।
Exam Tip: 'भटियारखाना' शब्द के प्रयोग को समझाते समय, पिता की मानसिकता और लेखिका के भविष्य के प्रति उनकी सोच को स्पष्ट करें।
प्रश्न 3. वह कौन-सी घटना थी जिसके बारे में सुनने पर लेखिका को न अपनी आंखो पर विश्वास हो पाया न कानों पर?
Answer: एक बार लेखिका के कॉलेज से प्रिंसिपल का पत्र उनके पिता के नाम आया, जिसमें लेखिका के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के बारे में बताया गया था और पिताजी को बुलाया गया था। पत्र पढ़ते ही वे बहुत क्रोधित हो गए। कॉलेज जाने पर उन्हें अपनी बेटी के नेतृत्व के बारे में पता चला। छात्रों में वह बहुत लोकप्रिय थीं और आजादी के आंदोलनों में बढ़-चढ़कर भाग लेती थीं। छात्राएँ उनके इशारों पर चलती थीं, जिससे प्रिंसिपल के लिए कॉलेज चलाना कठिन हो गया था। तब उनके पिता अपनी बेटी के काम से बहुत गर्व महसूस करने लगे। घर आने पर उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह तो देश की पुकार है, इसे कोई कैसे रोक सकता है? लेखिका को तब न तो अपनी आँखों पर भरोसा हुआ और न कानों पर। उन्हें लगा था कि पिताजी घर आकर बहुत डांटेंगे। ऐसा कुछ न होने पर और उनकी तारीफ होने पर लेखिका यकीन नहीं कर पाईं।
In simple words: प्रिंसिपल द्वारा पत्र मिलने के बाद लेखिका के पिता गुस्से में कॉलेज गए, लेकिन वहाँ उन्हें पता चला कि उनकी बेटी छात्रों की नेता है और आजादी के आंदोलन में शामिल है। यह सुनकर वे गर्व महसूस करने लगे, जिससे लेखिका को अपनी आँखों और कानों पर विश्वास नहीं हुआ।
Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय घटनाक्रम को क्रमबद्ध तरीके से बताएं, जिसमें पत्र मिलना, पिता की प्रतिक्रिया, कॉलेज जाकर सच्चाई का पता चलना और लेखिका का आश्चर्य शामिल हो।
रचना और अभिव्यक्ति
प्रश्न 4. लेखिका की अपने पिता से वैचारिक टकराहट को अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: लेखिका और उनके पिता के बीच विचारों में मतभेद था, जिसके कारण अक्सर टकराहट होती रहती थी। लेखिका के पिता शक्की स्वभाव के थे, इस कारण भी लेखिका उन पर गुस्सा हो जाती थीं। उनके पिता लेखिका को घर की चारदीवारी में रखकर देश और समाज के प्रति जागरूक तो बनाना चाहते थे, लेकिन एक निश्चित सीमा तक। वे नहीं चाहते थे कि लेखिका आंदोलनों में भाग ले, हड़ताल करे, भाषणबाजी करे, या लड़कों के साथ सड़क पर घूमे। शीला अग्रवाल के प्रभाव में आकर लेखिका और भी निडर हो गईं और वे सभी काम करतीं जो पिता को पसंद नहीं थे। इसलिए, पिता-पुत्री में अक्सर वैचारिक टकराहट होती रहती थी। जब लेखिका ने कथाकार राजेंद्र यादव से शादी की, तो भी उनके विचार टकराए थे।
In simple words: लेखिका और उनके पिता के विचारों में अक्सर मतभेद रहता था। पिता चाहते थे कि लेखिका घर की चारदीवारी में रहकर जागरूक रहें, लेकिन वे उनके आंदोलनों में भाग लेने, हड़ताल करने या लड़कों के साथ घूमने के सख्त खिलाफ थे।
Exam Tip: वैचारिक टकराहट को समझाते हुए, पिता की अपेक्षाओं और लेखिका के कार्यों के बीच के अंतर को स्पष्ट करें, साथ ही इसके पीछे के कारणों का उल्लेख भी करें।
प्रश्न 5. इस आत्मकथ्य के आधार पर स्वाधीनता आंदोलन के परिदृश्य का चित्रण करते हुए उसमें मन्नूजी को रेखांकित कीजिए।
Answer: सन् 1946-47 के आसपास स्वाधीनता आंदोलन अपनी चरम सीमा पर था। देश के हर कोने से युवा-वृद्ध सभी इसमें हिस्सा ले रहे थे। प्रभातफेरियां, हड़तालें, और भाषण हर जगह हो रहे थे। लेखिका के पिता ने उन्हें देश में चल रही गतिविधियों से परिचित तो करवाया, लेकिन वे नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी सक्रिय रूप से इसमें भाग ले। फिर भी, स्वाधीनता की अलख जगाने का काम उनकी हिंदी प्राध्यापिका शीला अग्रवाल ने किया। उनकी जोशीली बातों के प्रभाव में आकर लेखिका भी आंदोलन के मार्ग पर चल पड़ीं। वे हड़ताल, हुल्लड़, भाषण, जुलूस, और प्रभातफेरियों में निडर होकर हिस्सा लेने लगीं। लेखिका का सारे कॉलेज में दबदबा था। उनके एक इशारे पर छात्र आंदोलन पर उतर आते थे। अतः प्रिंसिपल ने अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए लेखिका के पिता को पत्र भी लिखा। इस प्रकार, लेखिका ने स्वाधीनता-आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।
In simple words: 1946-47 में स्वाधीनता आंदोलन अपने चरम पर था, जिसमें युवा और वृद्ध सभी भाग ले रहे थे। लेखिका के पिता ने उन्हें जागरूक किया, लेकिन उनकी हिंदी प्राध्यापिका शीला अग्रवाल ने उन्हें सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया, जिससे उन्होंने हड़ताल और भाषणों में बढ़कर हिस्सा लिया।
Exam Tip: स्वाधीनता आंदोलन का वर्णन करते समय, लेखिका के व्यक्तिगत योगदान और उन्हें प्रभावित करने वाले व्यक्तियों (पिता और शीला अग्रवाल) की भूमिका को स्पष्ट करें।
प्रश्न 6. लेखिका ने बचपन में अपने भाइयों के साथ गिल्ली डंडा तथा पतंग उड़ाने जैसे खेल भी खेले किन्तु लड़की होने के कारण उनका दायरा घर की चारदीवारी तक सीमित था। क्या आज भी लड़कियों के लिए स्थितियां ऐसी ही हैं, या बदल गई हैं, अपने परिवेश के आधार पर लिखिए।
Answer: निःसंदेह आज की स्थिति पहले से पूरी तरह अलग है। आज लड़कियाँ घर की चारदीवारी से निकलकर अंतरिक्ष तक पहुँच गई हैं। हर क्षेत्र में लड़कियाँ आगे हैं, चाहे वह विज्ञान का क्षेत्र हो या अंतरिक्ष का, साहित्य का हो या टेक्नोलॉजी का। हर जगह लड़कियों ने अपनी पहचान बनाई है। अपनी इच्छा और रुचि के अनुसार लड़कियाँ क्षेत्र का चुनाव कर उसमें अपनी योग्यता साबित कर रही हैं। वे शिक्षा और खेल के लिए देश-विदेश में भी जाती हैं। अतः लड़कियों की स्थिति पहले से पूरी तरह भिन्न है।
In simple words: आज लड़कियों की स्थिति बहुत बदल गई है। अब वे घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं बल्कि हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं, शिक्षा, खेल और टेक्नोलॉजी में भी वे देश-विदेश तक जा रही हैं।
Exam Tip: ऐसे तुलनात्मक प्रश्नों में, अतीत की स्थिति का वर्णन करने के बाद, वर्तमान स्थिति को स्पष्ट और तार्किक रूप से बताएं, उदाहरणों के साथ अपने विचार व्यक्त करें।
प्रश्न 7. मनुष्य के जीवन में आस-पड़ोस का बहुत महत्त्व होता है। परंतु महानगरों में रहनेवाले लोग प्रायः पड़ोस कल्चर से वंचित रह जाते हैं। इस बारे में अपने विचार लिखिए।
Answer: महानगरों में रहने वाले लोग अकेला जीवन जीना पसंद करते हैं। जीवन में सब कुछ पाने की इच्छा उन्हें इतना व्यस्त रखती है कि आस-पड़ोस में क्या हुआ, इसकी कोई जानकारी नहीं रखते। फ्लैटों में रहने वाले लोग खुद को चारदीवारी के बीच कैद कर लेते हैं, दीवारों के उस पार क्या हो रहा है इसकी भी उन्हें खबर नहीं होती। नतीजतन, लोग अपने में ही सिमटते चले जा रहे हैं। शहर में रहने वाले हर इंसान की यही दशा है, अतः यहाँ के लोग पड़ोस के माहौल से वंचित रह जाते हैं।
In simple words: महानगरों में लोग इतने व्यस्त रहते हैं कि वे अपने पड़ोसियों के बारे में कुछ नहीं जानते। वे खुद को अपने घरों तक सीमित रखते हैं, जिससे वे पड़ोस के सामाजिक माहौल से दूर हो जाते हैं।
Exam Tip: इस तरह के सामाजिक प्रश्नों में, अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए शहरी जीवनशैली की विशेषताओं और उसके परिणामों का उल्लेख करें।
प्रश्न 8. लेखिका द्वारा पढ़े गए उपन्यासों की सूची बनाइए और उन उपन्यासों को अपने पुस्तकालय में खोजिए।
Answer: पाठ के अनुसार लेखिका ने निम्नलिखित उपन्यास पढ़े हैं, उनकी सूची इस प्रकार है:
1. सुनीता
2. शेखर : एक जीवनी
3. नदी के द्वीप
4. त्यागपत्र
5. चित्रलेखा
छात्र अपने विद्यालय के पुस्तकालय में उपरोक्त पुस्तकें खोजें और पढ़ें। पुस्तकें पढ़ने से साहित्यिक रुचि बढ़ती है। अपने हिंदी अध्यापक से साहित्यिक पुस्तकों की जानकारी प्राप्त करें।
In simple words: लेखिका ने 'सुनीता', 'शेखर: एक जीवनी', 'नदी के द्वीप', 'त्यागपत्र' और 'चित्रलेखा' जैसे उपन्यास पढ़े हैं। ये पुस्तकें साहित्य में उनकी रुचि बढ़ाने में मददगार रहीं।
Exam Tip: सूची वाले प्रश्नों में, सभी बिंदुओं को सही क्रम में और स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें। यदि कोई अतिरिक्त निर्देश हो, तो उसका भी पालन करें।
भाषा अध्ययन
प्रश्न 10. इस आत्मकथ्य में मुहावरों का प्रयोग करके लेखिका ने रचना को रोचक बनाया हैं। रेखांकित मुहावरों को ध्यान में रखकर कुछ और वाक्य बनाएं
(क) इस बीच पिताजी के एक निहायती दकियानुसी मित्र ने घर आकर अच्छी तरह पिताजी की लू उतारी।
(ख) वे तो आग लगाकर चले गए और पिताजी सारे दिन भभकते रहे।
Answer:
(क) घर पर देर से आने के कारण पिताजी ने मेरी अच्छी तरह से लू उतारी।
(ख) पड़ोसी आग लगाकर चले गए और डांट मुझे खानी पड़ी।
(ग) रामसेवक के बेटे की आचरणहीनता को देखकर लोग थू-थू करने लगे।
(घ) परीक्षा में कम अंक आने पर मेरे पिताजी आग बबूला हो उठे।
In simple words: दिए गए मुहावरों का उपयोग करके नए वाक्य बनाए गए हैं: 'लू उतारना' का प्रयोग देर से घर आने पर डांट पड़ने के संदर्भ में, 'आग लगाकर चले जाना' का प्रयोग दूसरों को भड़का कर खुद निकल जाने के संदर्भ में, 'थू-थू करना' का प्रयोग किसी के बुरे व्यवहार पर लोग द्वारा निंदा करने के संदर्भ में, और 'आग बबूला होना' का प्रयोग परीक्षा में कम अंक आने पर पिता के गुस्से को दिखाने के संदर्भ में।
Exam Tip: मुहावरों के प्रयोग से संबंधित प्रश्नों में, दिए गए मुहावरे का सही अर्थ समझते हुए उसे उचित संदर्भ में वाक्य में प्रयोग करें।
Hindi Digest Std 10 GSEB एक कहानी यह भी Important Questions and Answers
अतिरिक्त प्रश्नोत्तर
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में लिखिए :
प्रश्न 1. लेखिका के पिता का स्वभाव क्रोधी क्यों हो गया था ?
Answer: लेखिका के पिता को बहुत बड़ा आर्थिक झटका लगा था। इस कारण उनकी नवाबी इच्छाएं पूरी नहीं हो पाती थीं। उनकी बड़ी-बड़ी आकांक्षाएँ अधूरी रह गई थीं। समाज में प्रतिष्ठित होने के बाद वे बहुत ज्यादा उत्साहित रहने लगे थे। इन सभी कारणों से लेखिका के पिता का स्वभाव क्रोधी हो गया था।
In simple words: लेखिका के पिता का स्वभाव क्रोधी इसलिए हो गया था क्योंकि उन्हें एक बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ था, उनकी महत्वाकांक्षाएं अधूरी रह गई थीं और समाज में प्रतिष्ठित होने के बाद वे अधिक उत्तेजित रहने लगे थे।
Exam Tip: पिता के क्रोधी स्वभाव के कारणों को स्पष्ट रूप से बताएं और प्रत्येक कारण के प्रभाव को संक्षेप में उल्लेख करें।
प्रश्न 2. लेखिका के अवाक होने का क्या कारण था ?
Answer: कॉलेज के प्रिंसिपल ने लेखिका के पिता को अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए बुलाया था। लेखिका को लगा कि जब वे कॉलेज से लौटेंगे तो उन्हें बहुत डांट पड़ेगी। लेकिन, वहाँ से आने के बाद पिता ने उनकी प्रशंसा की, इसलिए लेखिका अवाक रह गईं।
In simple words: लेखिका को लगा था कि प्रिंसिपल के बुलाने पर पिता उन्हें डांटेंगे, लेकिन पिता ने लौटकर उनकी तारीफ की, जिससे वह हैरान रह गईं।
Exam Tip: लेखिका के अवाक होने के पीछे की अपेक्षा और वास्तविकता के बीच के अंतर को समझाना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 3. लेखिका ने बचपन में कौन-कौन से खेल खेले थे?
Answer: लेखिका ने बचपन में सत्तोलिया, लँगड़ी टाँग, पकड़म-पकड़ाई, और काली टोलों जैसे खेल खेले थे। इसके अलावा, उन्होंने गुड्डे-गुड़ियों के ब्याह रचाने का खेल भी खेला। वे अपने भाइयों के साथ गिल्ली-डंडा और पतंगें भी उड़ाती थीं।
In simple words: लेखिका बचपन में सत्तोलिया, लँगड़ी टाँग, पकड़म-पकड़ाई, काली टोलों, गुड्डे-गुड़ियों के ब्याह, गिल्ली-डंडा और पतंग उड़ाने जैसे खेल खेलती थीं।
Exam Tip: प्रश्नों में पूछे गए सभी खेलों का उल्लेख करें और यदि कोई विशेष विवरण दिया गया हो, तो उसे भी शामिल करें।
प्रश्न 4. लेखिका का अपने पिता के साथ संबंध कैसा था ?
Answer: लेखिका का अपने पिता के साथ संबंध मधुर नहीं बल्कि कड़वाहट भरा था। दोनों के विचारों में भिन्नता थी, जिसके कारण आए दिन उनमें वैचारिक टकराव हुआ करता था।
In simple words: लेखिका और उनके पिता का संबंध अच्छा नहीं था क्योंकि उनके विचारों में हमेशा मतभेद रहता था, जिससे अक्सर बहस होती थी।
Exam Tip: रिश्तों से संबंधित प्रश्नों में, संबंध की प्रकृति को स्पष्ट रूप से बताएं और उसके पीछे के मुख्य कारण को संक्षेप में समझाएं।
प्रश्न 5. इन्दौर में रहते हुए लेखिका के पिता का जीवन कैसा था ?
Answer: इंदौर में लेखिका के पिता एक प्रतिष्ठित व्यक्ति थे। वे समाज-सुधार के कार्यों में सक्रिय रूप से लगे रहते थे। वे सिर्फ उपदेश नहीं देते थे, बल्कि कई छात्रों को अपने घर रखकर पढ़ाते भी थे, जिनमें से कई ऊँचे-ऊँचे पदों पर कार्यरत हुए। उस समय उनकी उदारता के चर्चे भी बहुत थे।
In simple words: इंदौर में लेखिका के पिता एक सम्मानित व्यक्ति थे जो समाज सुधार के कामों में लगे रहते थे, कई छात्रों को पढ़ाते थे, और उनकी उदारता के लिए उनकी खूब चर्चा होती थी।
Exam Tip: किसी व्यक्ति के जीवनकाल का वर्णन करते समय, उसकी मुख्य विशेषताओं और कार्यों को संक्षेप में बताएं।
प्रश्न 6. 'मन्नू भंडारी की मा त्याग और धर्म की पराकाष्ठा थी-फिर भी लेखिका के लिए आदर्श न बन सकी।' क्यों ?
Answer: लेखिका की माँ में कई विशेषताएँ थीं, फिर भी वे अपनी माँ को अपना आदर्श नहीं मान सकीं क्योंकि लेखिका स्वयं स्वतंत्र विचारों वाली थीं। वे अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझती थीं। माँ पिताजी की हर ज्यादती को अपना नियति मानकर सहन करती थीं। माँ का असहाय त्याग और सहनशीलता लेखिका के लिए आदर्श नहीं बन सका।
In simple words: लेखिका की माँ त्याग और सहनशीलता की प्रतीक थीं, लेकिन लेखिका को वे आदर्श नहीं लगीं क्योंकि लेखिका स्वतंत्र विचारों वाली थीं और माँ की असहायता को वे आदर्श नहीं मानती थीं।
Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में जहाँ विरोधाभास हो, दोनों पक्षों को स्पष्ट करें - माँ की विशेषताएँ और लेखिका का दृष्टिकोण - और बताएं कि क्यों माँ लेखिका के लिए आदर्श नहीं बन पाईं।
प्रश्न 7. लेखिका के पिता का ध्यान लेखिका पर कब गया ?
Answer: जब लेखिका की बड़ी बहन की शादी हो गई, वे अपने ससुराल कोलकाता चली गईं और दोनों भाई पढ़ाई के लिए बाहर चले गए, तब लेखिका को अपने अस्तित्व का एहसास हुआ। उसी समय लेखिका के पिता का ध्यान उन पर गया।
In simple words: जब बड़ी बहन की शादी हो गई और दोनों भाई पढ़ने के लिए बाहर चले गए, तब लेखिका को अपने अस्तित्व का एहसास हुआ और उनके पिता ने उन पर ध्यान दिया।
Exam Tip: घटनाक्रम को स्पष्ट रूप से बताएं और बताएं कि किन परिस्थितियों के कारण लेखिका पर ध्यान गया।
प्रश्न 8. डॉ. अम्बालाल कौन थे ? उन्होंने लेखिका की तारीफ क्यों की ?
Answer: डॉ. अंबालाल लेखिका के पिता के अभिन्न और अंतरंग मित्र थे। वे अजमेर के अति सम्मानित और प्रतिष्ठित डॉक्टर थे। उन्होंने लेखिका के भाषण को सुना था, अतः अपने मित्र को बधाई देने के लिए आए और लेखिका की तारीफ की।
In simple words: डॉ. अंबालाल लेखिका के पिता के गहरे मित्र और एक सम्मानित डॉक्टर थे। उन्होंने लेखिका का भाषण सुनकर उन्हें बधाई दी और उनकी प्रशंसा की।
Exam Tip: व्यक्ति का परिचय और उसके कार्य या कथन का कारण दोनों स्पष्ट रूप से बताएं।
प्रश्न 9. कॉलेज ने लेखिका समेत दो-तीन छात्राओं को क्यों प्रवेश-निषिद्ध कर दिया ?
Answer: कॉलेज ने शीला अग्रवाल को लड़कियों को भड़काने और अनुशासन बिगाड़ने के आरोप में नोटिस दिया था। इस बात को लेकर हुड़दंग न मचे, इसलिए थर्ड इयर की क्लासेज बंद करके दो-तीन छात्राओं को प्रवेश निषेध कर दिया।
In simple words: कॉलेज ने शीला अग्रवाल पर लड़कियों को भड़काने का आरोप लगाया, और इस मामले में कोई हंगामा न हो इसलिए उन्होंने थर्ड ईयर की कक्षाएं बंद कर दीं और लेखिका सहित कुछ छात्राओं को कॉलेज में घुसने से मना कर दिया।
Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय, कॉलेज प्रशासन की कार्रवाई के पीछे के कारण और उसके तात्कालिक प्रभाव को स्पष्ट करें।
प्रश्न 10. लेखिका के जीत की खुशी और चिर प्रतीक्षित खुशी में क्या अन्तर था ?
Answer: लेखिका ने कॉलेज के बाहर रहकर इतना हुड़दंग मचाया कि कॉलेज वालों को थर्ड इयर की क्लास खोलनी पड़ी। यह लेखिका की जीत की खुशी थी। सन् 1947 में भारत अंग्रेजों से आजाद हुआ, यह चिर प्रतीक्षित खुशी थी।
In simple words: लेखिका की जीत की खुशी थी कॉलेज में आंदोलन से कक्षाएँ खुलवाना, जबकि चिर प्रतीक्षित खुशी भारत की 1947 में अंग्रेजों से मिली आजादी थी।
Exam Tip: दोनों प्रकार की खुशियों को अलग-अलग परिभाषित करें और उनके महत्व में अंतर को स्पष्ट करें।
प्रश्न 11. सन् 1946-47 में देश में परिस्थिति कैसी थी और क्यों ?
Answer: सन् 1946-47 के समय देश अत्यंत नाजुक स्थिति से गुजर रहा था। सभी भारतीय एकजुट होकर अंग्रेजों का सामना कर रहे थे। जगह-जगह प्रभात-फेरियां, हड़तालें, जुलूस और भाषण आदि हो रहे थे। युवा वर्ग पूरे जोश और उत्साह के साथ इसमें शामिल होता था। सभी शहरों में एक बड़ा बवंडर मचा हुआ था।
In simple words: 1946-47 में देश बहुत ही नाजुक दौर से गुजर रहा था, जहाँ सभी भारतीय एकजुट होकर अंग्रेजों का विरोध कर रहे थे, जिसमें प्रभात फेरियां, हड़तालें, जुलूस और भाषणों से हर जगह जोश का माहौल था।
Exam Tip: ऐतिहासिक संदर्भ वाले प्रश्नों में, उस समय की मुख्य घटनाओं और जनता की भावनाओं का उल्लेख करें।
दीर्घउत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. लेखिका की मां की क्या विवशता थीं ? अपने शब्दों में लिखिए।
अथवा
लेखिका ने अपनी माँ के बारे में क्या जानकारी दी ? अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: लेखिका ने अपनी माँ के विषय में बताते हुए कहा कि वे पिता के स्वभाव से बिलकुल विपरीत थीं। उनकी माँ पढ़ी-लिखी नहीं थीं। पिता द्वारा दी जा रही प्रताड़ना को चुपचाप सहती थीं। वे पिता की हर ज्यादती और अपने बच्चों की हर उचित-अनुचित फरमाइश और जिद को अपना कर्तव्य मानकर पूरा करती थीं। उनकी माँ ने जिंदगी भर अपने लिए कुछ नहीं मांगा। सबको हमेशा दिया ही। सभी भाई-बहन अपनी माँ से सहानुभूति रखते थे। माँ के प्रति उनका लगाव था, लेकिन लेखिका के अनुसार माँ की असहायता और मजबूरी में लिपटा उनका त्याग और सहनशीलता कभी भी लेखिका का आदर्श नहीं बन सका।
In simple words: लेखिका की माँ पढ़ी-लिखी नहीं थीं और पिता के विपरीत शांत स्वभाव की थीं। वे पिता की हर ज्यादती को चुपचाप सहती थीं और बच्चों की हर इच्छा पूरी करती थीं, लेकिन लेखिका को उनकी यह असहायता और सहनशीलता कभी आदर्श नहीं लगी।
Exam Tip: माँ की विवशता को समझाते हुए, उनके धैर्य, त्याग और सहनशीलता की विशेषताओं का वर्णन करें और लेखिका के दृष्टिकोण से उनकी स्थिति को स्पष्ट करें।
प्रश्न 2. दसवीं के बाद किताबों के सन्दर्भ में लेखिका में क्या बदलाव आया और क्यों ?
Answer: दसवीं या उससे पहले लेखिका लेखकों की रचनाओं के विषय में न जानते हुए भी उनकी पुस्तकें पढ़ती थीं। सन् 1947 में लेखिका जब कॉलेज गईं तो वहाँ उनकी मुलाकात हिंदी की प्राध्यापिका शीला अग्रवाल से हुई। उन्होंने लेखिका को साहित्य जगत में प्रवेश कराया। चुनकर पुस्तकें पढ़ने को दीं। साहित्यिक विचार-विमर्श कराया। पढ़ी हुई किताबों पर विचार-विमर्श किया। इस प्रकार प्राध्यापिका शीला अग्रवाल ने साहित्यिक अभिरुचि की ओर प्रेरित कर चुनाव करके पढ़ने की ओर प्रेरित किया। नतीजतन, लेखिका ने किसी भी पुस्तक को न पढ़कर चुनी हुई किताबों को पढ़ना शुरू किया। इसके बाद तो उनका साहित्यिक दायरा बढ़ता गया, प्रेमचंद, जैनेंद्र, यशपाल, अज्ञेय, भगवती चरण वर्मा की किताबों को पढ़ा। इस प्रकार लेखिका का साहित्यिक दायरा बढ़ता गया और चुनी हुई किताबों को पढ़ने की ओर प्रेरित हुई।
In simple words: दसवीं के बाद कॉलेज में शीला अग्रवाल के संपर्क में आने से लेखिका की किताबों के प्रति रुचि बदल गई। उन्होंने चुन-चुनकर किताबें पढ़ीं, साहित्यिक चर्चाएँ कीं, और उनका साहित्यिक ज्ञान बढ़ा, जिससे वे प्रेमचंद जैसे लेखकों को पढ़ने लगीं।
Exam Tip: लेखिका की साहित्यिक यात्रा में परिवर्तन के कारणों (शीला अग्रवाल का प्रभाव) और उसके परिणामों (विभिन्न लेखकों को पढ़ना) को स्पष्ट करें।
प्रश्न 3. 'एक कहानी यह भी' लेखिका के जीवन-संघर्ष और सफलता की कहानी है। स्पष्ट कीजिए।
Answer: लेखिका अपने ही घर में पिता द्वारा हीन भावना का शिकार होती थीं। स्वयं लेखिका साँवली थीं। उनकी बड़ी बहन गोरी और स्वस्थ थीं। पिताजी हमेशा बड़ी बहन की तारीफ करते थे। इस कारण लेखिका के मन में हीन भावना घर कर गई थी। पिताजी की पारंपरिक निष्ठाओं के कारण वे पिता के विरोध और क्रोध का सामना करती थीं। उन्हें अपने अस्तित्व का एहसास तब हुआ जब उनकी बहन ससुराल चली गईं और दोनों भाई पढ़ने के लिए बाहर चले गए। लेखिका और उनके पिता के बीच विचारों में मतभेद होने के कारण आए दिन टकराव होता था। लेखिका के सफल होने की कहानी कॉलेज की हिंदी प्राध्यापिका के संपर्क में आने से शुरू हुई। अध्यापिका ने ही उनकी साहित्यिक समझ को बढ़ाया, जिसके कारण वे चुनी हुई किताबों को पढ़ने की ओर प्रेरित हुईं और बाद में एक प्रतिष्ठित कथा लेखिका बन सकीं। हिंदी अध्यापिका की जोशीली वाणी से प्रेरित होकर, उन्होंने अपने कॉलेज में वर्चस्व स्थापित किया, स्वाधीनता आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। वे प्रभातफेरी, हुड़दंग, हड़ताल, और भाषण आदि में बढ़-चढ़कर भाग लेती थीं। यहाँ भी लेखिका का टकराव अपने पिता से होता था। वे चाहते थे कि बेटी स्वाधीनता के विषय में, राजनीतिक उलटफेर के विषय में जाने, लेकिन घर की चारदीवारी में रहकर। लेखिका को यह मंजूर नहीं था। डॉ. अंबालाल जैसे अंतरंग मित्र से अपनी पुत्री की तारीफ सुनकर पिता गौरवान्वित होते हैं। इस प्रकार 'एक कहानी यह भी' में लेखिका ने अपने आत्म-संघर्ष और सफलता की कहानी कही है।
In simple words: 'एक कहानी यह भी' में लेखिका ने पिता द्वारा मिली हीन भावना, विचारों में मतभेद, और व्यक्तिगत संघर्षों के बावजूद अपनी हिंदी प्राध्यापिका शीला अग्रवाल की प्रेरणा से साहित्यिक और राजनीतिक क्षेत्रों में सफलता पाई। यह पाठ उनके आत्म-संघर्ष और सफल लेखिका बनने की पूरी कहानी बताता है।
Exam Tip: लेखिका के जीवन-संघर्ष और सफलता को स्पष्ट करते समय, उनके व्यक्तिगत जीवन (पिता का प्रभाव, हीन भावना) और सार्वजनिक जीवन (शीला अग्रवाल का प्रभाव, स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदारी) दोनों पहलुओं को शामिल करें।
प्रश्न 4. लेखिका के पिताजी के स्वभाव पर प्रकाश डालिए।
Answer: लेखिका के पिताजी अति महत्वाकांक्षी और अहंवादी थे। वे यश और प्रतिष्ठा के भूखे थे। समाज में अपनी अलग पहचान बनाना चाहते थे। वे अपनी धुन के पक्के थे। इसी महत्वाकांक्षा के कारण धन के अभाव में भी उन्होंने शब्दकोश का काम पूरा किया। अपने ही व्यक्तियों द्वारा विश्वासघात होने पर वे शक्की स्वभाव के हो गए थे। उनके इसी शक्की स्वभाव के कारण लेखिका को कई बार वैचारिक टकराहट भी हुई थी। अपना क्रोध वे अपनी पत्नी पर निकालते थे। वे अपने बच्चों की शिक्षा के प्रति सजग थे। दोनों लड़कों को पढ़ने के लिए उन्होंने बाहर भेजा था। मन्नू अर्थात् लेखिका की एक अलग पहचान बने, इसलिए वे नहीं चाहते थे कि वह रसोई में जाकर खाना बनाए और अपनी प्रतिभा को नष्ट करे।
In simple words: लेखिका के पिताजी महत्वाकांक्षी, अहंवादी और यश के भूखे थे। वे अपनी धुन के पक्के और शक्की स्वभाव के थे, जो अक्सर अपनी पत्नी पर गुस्सा करते थे। वे बच्चों की शिक्षा के प्रति सजग थे, लेकिन नहीं चाहते थे कि लेखिका रसोई तक सीमित रहकर अपनी प्रतिभा बर्बाद करे।
Exam Tip: पिता के स्वभाव के विभिन्न पहलुओं (सकारात्मक और नकारात्मक) को स्पष्ट रूप से बताएं और उदाहरणों से उनकी विशेषताओं को समझाएं।
प्रश्न 5. लेखिका के पिता अपनी बेटी पर क्यों आग बबूला हो गए ?
अथवा
भण्डारीजी के मित्र ने ऐसी क्या बात कह दी कि वे आग बबूला हो गए ?
Answer: उस समय आजाद हिंद फौज के मुकदमों का सिलसिला चल रहा था। सभी कॉलेजों, स्कूलों और दुकानों के लिए हड़ताल का माहौल था। छात्रों का समूह जगह-जगह जाकर हड़तालें करवा रहा था। युवा छात्र भाषणबाजी द्वारा इस काम को अंजाम दे रहे थे। शाम को अजमेर का पूरा विद्यार्थी वर्ग चौपड़ पर इकट्ठा हुआ और घर आकर उन्होंने शिकायत की कि 'उस मन्नू की तो मति मारी गई है… वह पता नहीं कैसे उलटे-सीधे लड़कों के साथ हड़तालें करवाती, हुड़दंग मचाती फिर रही है। हमारे-आपके घरों की लड़कियों को यह सब शोभा देता है? कोई मान-मर्यादा, इज्जत-आबरू का ख्याल भी रह गया है आपको या नहीं?' यह सुनकर लेखिका के पिता आग बबूला हो गए और पूरे दिन इसी आग में जलते रहे।
In simple words: आजाद हिंद फौज के मुकदमों के कारण पूरे शहर में हड़ताल का माहौल था। एक मित्र ने लेखिका के पिता से शिकायत की कि उनकी बेटी लड़कों के साथ मिलकर हड़तालें और हुड़दंग मचा रही है, जिससे उनकी इज्जत खराब हो रही है। यह सुनकर पिता बहुत गुस्सा हो गए।
Exam Tip: घटना के कारण (आजाद हिंद फौज के मुकदमे) और पिताजी के मित्र द्वारा की गई शिकायत के मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट रूप से बताएं, जिससे उनके क्रोध का कारण स्पष्ट हो सके।
प्रश्न 6. 'अध्यापक छात्र के चरित्र-निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।' इस कथन के आलोक में विचार स्पष्ट कीजिए।
अथवा
'छात्र-जीवन में गुरु का विशेष महत्त्व होता है।' पाठ के सन्दर्भ में अपने विचार स्पष्ट कीजिए।
Answer: छात्रों के जीवन में गुरु या अध्यापक का बहुत योगदान होता है। चाणक्य जैसे गुरु ने एक साधारण से बालक को मगध का सम्राट बना दिया, यह हम अच्छी तरह से जानते हैं। लेखिका की हिंदी प्राध्यापिका शीला अग्रवाल एक ऐसी ही अध्यापिका थीं, जिन्होंने लेखिका के व्यक्तित्व को गढ़ने का प्रयास किया। शीलाजी ने न केवल अपने छात्रों को हिंदी विषय पढ़ाया, बल्कि उनकी साहित्यिक समझ को परिष्कृत किया। उन्हें सही दिशा दिखाई। पुस्तकों का चुनाव करके पढ़ने के लिए प्रेरित किया। पढ़ी हुई पुस्तकों पर विचार-विमर्श करना सिखाया। इससे लेखिका की साहित्यिक परिधि का फैलाव हुआ। प्रेमचंद, जैनेंद्र, यशपाल, अज्ञेय, भगवतीचरण वर्मा जैसे विख्यात लेखकों की पुस्तकों को पढ़ा। आलोचनात्मक दृष्टि का विकास हुआ। इस प्रकार आगे चलकर लेखिका हिंदी की सुप्रसिद्ध कथाकार बनीं। अनेक देश-विदेश के पुरस्कारों से सम्मानित हुईं। इतना ही नहीं, शीला अग्रवाल ने स्वाधीनता आंदोलन के लिए भी लेखिका को प्रेरित किया, उनके जोशीले भाषण के प्रभाव में आकर स्वयं लेखिका इस आंदोलन में कूद गईं। प्रभात फेरी, हड़ताल, जुलूस, और भाषणबाजी में भी सक्रिय भूमिका निभाई। अतः अध्यापक छात्र के चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: अध्यापक छात्रों के चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जैसे चाणक्य ने चंद्रगुप्त को सम्राट बनाया। लेखिका की हिंदी प्राध्यापिका शीला अग्रवाल ने उन्हें साहित्यिक समझ दी, पढ़ने के लिए प्रेरित किया, और स्वाधीनता आंदोलन में शामिल होने के लिए भी उत्साहित किया, जिससे वे एक सफल लेखिका बन सकीं।
Exam Tip: गुरु के महत्व को समझाते हुए, पाठ से उदाहरण (शीला अग्रवाल और लेखिका) प्रस्तुत करें, और बताएं कि कैसे गुरु छात्र के व्यक्तित्व, सोच और कार्यों को प्रभावित कर सकते हैं।
अर्थबोध सम्बन्धी प्रश्न :
प्रश्न 1. लेखिका का जन्म कहाँ हुआ था ?
Answer: लेखिका का जन्म मध्यप्रदेश के भानपुरा गाँव में हुआ था।
In simple words: लेखिका का जन्म मध्यप्रदेश के भानपुरा गाँव में हुआ था।
Exam Tip: सीधा जवाब दें और स्थान का सही उल्लेख करें।
प्रश्न 2. घर के ऊपरी मंजिले में पिताजी क्या करते रहते थे ?
Answer: घर के ऊपरी मंजिल में जहाँ पिताजी का साम्राज्य था, वहाँ वे अव्यवस्थित ढंग से फैली-बिखरी पुस्तकों - पत्रिकाओं और अखबारों के बीच या तो पढ़ते रहते या फिर 'डिक्टेशन' देते रहते थे।
In simple words: पिताजी घर की ऊपरी मंजिल पर अव्यवस्थित रूप से फैली पुस्तकों और अखबारों के बीच या तो पढ़ते रहते थे या 'डिक्टेशन' देते थे।
Exam Tip: पिताजी की गतिविधियों का सटीक वर्णन करें जैसा कि पाठ में उल्लेख है।
प्रश्न 3. लेखिका की माँ की विशेषता क्या थीं?
Answer: लेखिका की माता अनपढ़ और व्यक्तित्वविहीन थीं। सवेरे से शाम तक सबकी इच्छाओं और पिताजी की आज्ञा का पालन करने के लिए तत्पर रहती थीं।
In simple words: लेखिका की माँ अनपढ़ और सरल स्वभाव की थीं, जो दिनभर पिताजी और परिवार की इच्छाओं का पालन करती रहती थीं।
Exam Tip: माँ की मुख्य विशेषताओं को स्पष्ट और संक्षेप में बताएं।
प्रश्न 4. ओहदा और सिलसिला शब्द का अर्थ लिखिए।
Answer: पद और क्रमवार
In simple words: 'ओहदा' का अर्थ 'पद' है, और 'सिलसिला' का अर्थ 'क्रमवार' है।
Exam Tip: दोनों शब्दों के अर्थ को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से प्रस्तुत करें।
प्रश्न 5. लेखिका के पिता अजमेर से पहले कहाँ रहते थे ?
(क) भोपाल
(ख) इन्दौर
(ग) गोपालगंज
(घ) उदयपुर
Answer: (ख) इन्दौर
In simple words: लेखिका के पिता अजमेर आने से पहले इंदौर में रहते थे।
Exam Tip: बहुविकल्पीय प्रश्नों में, सही विकल्प का अक्षर और उसका पूरा पाठ दोनों लिखें।
प्रश्न 1. लेखिका के पिता का अहं किस बात की अनुमति नहीं देता था ?
Answer: लेखिका के पिता का अहं इस बात की अनुमति नहीं देता था कि वे कम से कम अपने बच्चों को तो अपनी आर्थिक विषमताओं का भागीदार बनाएँ।
In simple words: लेखिका के पिता का अहंकार उन्हें यह अनुमति नहीं देता था कि वे अपने बच्चों को अपनी आर्थिक कठिनाइयों में शामिल करें।
Exam Tip: पिता के अहंकार का स्पष्ट रूप से उल्लेख करें और बताएं कि किस बात में यह अहंकार उन्हें रोकता था।
प्रश्न 2. लेखिका के पिता अपनी पत्नी पर क्रोध क्यों करते थे ?
Answer: लेखिका के पिता अपनी नवाबी आदतें, अधूरी महत्वाकांक्षाएँ और हमेशा शीर्ष पर रहने के बाद किनारे पर सरकने के कारण अपनी पत्नी पर क्रोध करते थे।
In simple words: लेखिका के पिता अपनी नवाबी आदतों, अधूरी इच्छाओं और शीर्ष से नीचे आने के कारण अपनी पत्नी पर गुस्सा करते थे।
Exam Tip: पिता के क्रोध के मुख्य कारणों को सूचीबद्ध करें और प्रत्येक कारण को संक्षेप में समझाएं।
प्रश्न 3. लेखिका के पिता बाद में शक्की क्यों हो गए?
Answer: अपनों के हाथों विश्वासघात की गहरी चोटें लगने के कारण लेखिका के पिता का स्वभाव शक्की हो गया था।
In simple words: लेखिका के पिता अपने करीबियों द्वारा धोखा दिए जाने से बहुत दुखी हुए थे, जिसके कारण उनका स्वभाव शक्की हो गया था।
Exam Tip: शक्की स्वभाव के पीछे के मूल कारण को स्पष्ट रूप से बताएं।
प्रश्न 4. लेखिका के पिता अपना क्रोध किस पर उतारते थे ?
(क) लेखिका पर
(ख) उसके भाइयों पर
(ग) पड़ोस के लोगों पर
(घ) लेखिका की माँ पर
Answer: (घ) लेखिका की मां पर
In simple words: लेखिका के पिता अपना गुस्सा अक्सर उनकी माँ पर निकालते थे।
Exam Tip: बहुविकल्पीय प्रश्नों में, सही विकल्प का अक्षर और उसका पूरा पाठ दोनों लिखें।
प्रश्न 5. 'महत्त्वाकांक्षा' शब्द का संधि-विच्छेद हैं :
(क) महत्त्वा + कांक्षा
(ख) महत्त्व + कांक्षा
(ग) महत्त्व + आकांक्षा
(घ) महत्त्व + अकांक्षा
Answer: (ग) महत्त्व + आकांक्षा
In simple words: 'महत्वाकांक्षा' शब्द का सही संधि-विच्छेद 'महत्व + आकांक्षा' होता है।
Exam Tip: संधि-विच्छेद के प्रश्नों में, सही विकल्प को सावधानी से चुनें और उसे स्पष्ट रूप से बताएं।
प्रश्न 1. बचपन में लेखिका कैसी थीं?
Answer: बचपन में लेखिका दुबली और मरियल थीं।
In simple words: बचपन में लेखिका पतली और कमजोर थीं।
Exam Tip: सीधे प्रश्न का सीधा और संक्षिप्त उत्तर दें।
प्रश्न 2. लेखिका के पिताजी की क्या कमजोरी थी ?
Answer: गोरा रंग लेखिका के पिता की कमजोरी थी।
In simple words: लेखिका के पिता को गोरा रंग बहुत पसंद था, यही उनकी कमजोरी थी।
Exam Tip: प्रश्न में पूछी गई कमजोरी को स्पष्ट रूप से बताएं।
प्रश्न 3. किन कारणों से लेखिका के मन में हीन भावना पैदा हो गई ?
Answer: लेखिका से दो साल बड़ी उनकी बहन सुशीला थीं, जो गोरी, स्वस्थ और हंसमुख थीं। हर बात में उनकी तुलना बहन सुशीला से होती थी, फिर उनकी ही तारीफ होती थी। इन कारणों से लेखिका के मन में हीन भावना पैदा हो गई।
In simple words: लेखिका से बड़ी बहन सुशीला गोरी और स्वस्थ थीं, और हर बात में उन्हीं की तारीफ होती थी, जिससे लेखिका के मन में हीन भावना आ गई।
Exam Tip: हीन भावना के पीछे के मुख्य कारणों (तुलना और प्रशंसा) को स्पष्ट रूप से उल्लेख करें।
प्रश्न 4. लेखिका अपनी उपलब्धियों पर भरोसा क्यों नहीं कर पाती थीं ?
Answer: अचेतन मन में दबी हीन भावना के कारण ही लेखिका अपनी उपलब्धियों पर भरोसा नहीं कर पाती थीं।
In simple words: लेखिका को अपनी उपलब्धियों पर भरोसा नहीं होता था क्योंकि उनके मन में बचपन से ही हीन भावना दबी हुई थी।
Exam Tip: लेखिका के आत्म-संदेह के पीछे के गहरे मनोवैज्ञानिक कारण को बताएं।
प्रश्न 5. 'लेखकीय' शब्द में प्रत्यय हैं :
(क) कीय
(ख) इय
(ग) ईय
(घ) य
Answer: (ग) ईय
In simple words: 'लेखकीय' शब्द में 'ईय' प्रत्यय का इस्तेमाल किया गया है।
Exam Tip: प्रत्यय के प्रश्नों में, मूल शब्द से प्रत्यय को सही ढंग से अलग करने पर ध्यान दें।
प्रश्न 1. सबसे बड़ी बहन की शादी में लेखिका कितने साल की थी ?
Answer: सबसे बड़ी बहन की शादी में लेखिका सात साल की थीं।
In simple words: लेखिका अपनी सबसे बड़ी बहन की शादी के समय सात साल की थीं।
Exam Tip: सीधे प्रश्न का सीधा और संक्षिप्त उत्तर दें।
प्रश्न 2. लेखिका द्वारा बचपन में खेले गए खेल कौन-कौन से हैं?
Answer: लेखिका द्वारा बचपन में खेले गए खेल हैं – सतोलिया, लँगड़ी टाँग, पकड़म-पकड़ाई, काली टोलों और गुड्डे-गुड़ियों का खेल। इसके अतिरिक्त, गिल्ली डंडा का खेल खेला और पतंगें भी उड़ाईं।
In simple words: लेखिका बचपन में सतोलिया, लँगड़ी टाँग, पकड़म-पकड़ाई, काली टोलों, गुड्डे-गुड़ियों का खेल, गिल्ली डंडा और पतंग उड़ाने जैसे खेल खेलती थीं।
Exam Tip: सभी खेलों के नाम स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें।
प्रश्न 3. लेखिका के समय में घर की दीवारें कहाँ तक फैली थीं ?
Answer: लेखिका के समय में घर की दीवारें घर तक नहीं, बल्कि पूरे मुहल्ले तक फैली थीं। इसलिए, मुहल्ले के किसी भी घर में जाने की पाबंदी नहीं थी।
In simple words: लेखिका के बचपन में घर की सीमाएँ केवल घर तक नहीं थीं, बल्कि पूरे मुहल्ले तक फैली थीं, जिससे वे किसी भी घर में बिना रोक-टोक जा सकती थीं।
Exam Tip: घर की दीवारों का अर्थ स्पष्ट करें और बताएं कि यह सामाजिक बंधन के बजाय एक खुलेपन का प्रतीक था।
Question 4. भाई-बहन और गिल्ली-डंडा में कौन-सा समास हैं?
Answer: 'भाई-बहन' शब्द 'भाई और बहन' से बना है और यह 'द्वन्द्व समास' का एक उदाहरण है। इसी तरह, 'गिल्ली-डंडा' शब्द 'गिल्ली और डंडा' से बना है, जो भी 'द्वन्द्व समास' कहलाता है।
In simple words: ये दोनों शब्द, "भाई-बहन" और "गिल्ली-डंडा", "द्वन्द्व समास" के प्रकार हैं. "द्वन्द्व समास" तब होता है जब दो शब्द 'और' से जुड़े हों.
Exam Tip: द्वन्द्व समास की पहचान है कि इसमें दोनों पद प्रधान होते हैं और 'और' या 'एवं' जैसे संयोजक शब्द से जुड़े होते हैं, जिनका लोप कर दिया जाता है.
Question 1. लेखिका के परिवार में लड़की के विवाह के लिए अनिवार्य योग्यता क्या थी ?
Answer: लेखिका के परिवार में, उस समय लड़की के विवाह के लिए जरूरी योग्यता यह थी कि उसकी उम्र सोलह साल हो और उसने मैट्रिक तक पढ़ाई पूरी की हो।
In simple words: लेखिका के परिवार में, लड़की की शादी के लिए सोलह साल की उम्र और मैट्रिक तक की पढ़ाई होना जरूरी था.
Exam Tip: उत्तर लिखते समय, प्रश्न में दी गई जानकारी को सीधे और स्पष्ट रूप से बताना महत्वपूर्ण है, जैसे कि उम्र और शिक्षा की शर्त.
Question 2. लेखिका को अपने वजूद का एहसास कब हुआ?
Answer: लेखिका को अपनी पहचान का अहसास तब हुआ जब उनकी बहन सुशीला का विवाह हो गया और वह कोलकाता चली गईं, और उनके दोनों बड़े भाई भी आगे की पढ़ाई के लिए बाहर चले गए।
In simple words: जब लेखिका की बहन की शादी हुई और भाई पढ़ाई के लिए बाहर गए, तब उन्हें अपनी पहचान का अहसास हुआ.
Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों के उत्तर में मुख्य घटनाओं का उल्लेख करें जिन्होंने व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव लाए.
Question 3. लेखिका के पिताजी रसोई को भटियारखाना क्यों कहते थे ?
Answer: लेखिका के पिता मानते थे कि रसोई में खाना बनाना अपनी क्षमता और प्रतिभा को बर्बाद करने जैसा था, इसीलिए वे रसोई को 'भटियारखाना' कहते थे।
In simple words: लेखिका के पिता रसोई को भटियारखाना कहते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि वहाँ काम करना अपनी प्रतिभा को नष्ट करने जैसा है.
Exam Tip: जब भी किसी कथन का कारण पूछा जाए, तो मूल विचार या धारणा को स्पष्ट करें जिस पर वह कथन आधारित है.
Question 4. 'कुशल' तथा 'सुघड़' शब्द का विलोम शब्द लिखिए।
Answer: 'कुशल' का विलोम 'अकुशल' है, और 'सुघड़' का विलोम 'अनगढ़' है। ये दोनों विपरीतार्थी शब्द हैं।
In simple words: 'कुशल' का उल्टा 'अकुशल' होता है, और 'सुघड़' का उल्टा 'अनगढ़' होता है.
Exam Tip: विलोम शब्द लिखते समय ध्यान रखें कि वे शब्द के मूल अर्थ के ठीक विपरीत हों, और वर्तनी भी सही होनी चाहिए.
Question 1. लेखिका को साहित्य की दुनिया में प्रवेश कराने का श्रेय किसे जाता है ?
Answer: लेखिका को साहित्य की दुनिया में लाने का श्रेय उनकी पहली साल की प्राध्यापिका शीला अग्रवाल को मिलता है।
In simple words: लेखिका को साहित्य की दुनिया में लाने का काम उनकी पहली साल की प्राध्यापिका शीला अग्रवाल ने किया.
Exam Tip: किसी व्यक्ति की प्रेरणा या प्रभाव से संबंधित प्रश्नों में, प्रेरणा देने वाले व्यक्ति का नाम और उसका विशिष्ट योगदान स्पष्ट रूप से बताएं.
Question 2. शीला अग्रवाल ने लेखिका की साहित्यिक समझ को कैसे विकसित किया ?
Answer: शीला अग्रवाल ने लेखिका की पढ़ने की आदत को बदल दिया। उन्होंने उसे केवल पढ़ने के बजाय किताबें चुनने और उन पर चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस तरह, लेखिका की साहित्यिक समझ धीरे-धीरे बढ़ती गई।
In simple words: शीला अग्रवाल ने लेखिका को केवल पढ़ने के बजाय किताबें चुनने और उन पर बात करने के लिए प्रेरित किया, जिससे उनकी साहित्यिक समझ विकसित हुई.
Exam Tip: जब किसी प्रक्रिया या विकास के बारे में पूछा जाए, तो विभिन्न चरणों या विधियों का वर्णन करें जिनसे वह विकास हुआ.
Question 3. लेखिका ने उस समय किन-किन साहित्यकारों को पढ़ा ?
Answer: लेखिका ने उस अवधि में शरत, प्रेमचंद, जैनेंद्र, अज्ञेय, यशपाल, और भगवती चरण वर्मा जैसे कई साहित्यकारों की रचनाएँ पढ़ीं।
In simple words: लेखिका ने शरत, प्रेमचंद, जैनेंद्र, अज्ञेय, यशपाल, और भगवती चरण वर्मा जैसे लेखकों को पढ़ा.
Exam Tip: नाम सूची वाले प्रश्नों में, सभी महत्वपूर्ण नामों को सटीक रूप से लिखें ताकि कोई भी जानकारी छूटे नहीं.
Question 4. बाकायदा शब्द में से उपसर्ग अलग कीजिए।
Answer: 'बाकायदा' शब्द में 'बा' उपसर्ग के रूप में उपयोग हुआ है।
In simple words: 'बाकायदा' शब्द में 'बा' एक उपसर्ग है.
Exam Tip: उपसर्ग और प्रत्यय से संबंधित प्रश्नों में, शब्द के मूल रूप और उसमें जुड़े हुए उपसर्ग या प्रत्यय को स्पष्ट रूप से दर्शाएं.
Question 1. लेखिका के पिता की क्या दुर्बलता थीं ?
Answer: लेखिका के पिता की सबसे बड़ी कमजोरी उनकी यश की चाह थी। उनके जीवन का मुख्य सिद्धांत यह था कि व्यक्ति को समाज में नाम, सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त करके कुछ खास बनना चाहिए।
In simple words: लेखिका के पिता की सबसे बड़ी कमजोरी यश पाने की इच्छा थी. वे चाहते थे कि हर इंसान कुछ खास करे ताकि समाज में उसका नाम और सम्मान हो.
Exam Tip: किसी व्यक्ति की दुर्बलता या कमजोरी का वर्णन करते समय, उसके पीछे के कारणों या सिद्धांतों को भी स्पष्ट करें.
Question 2. लेखिका के पिता को कॉलेज के प्रिंसिपल ने पत्र क्यों लिखा ?
Answer: कॉलेज के प्रिंसिपल ने लेखिका के पिता को पत्र इसलिए लिखा क्योंकि वे लेखिका की गतिविधियों के कारण उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करना चाहते थे।
In simple words: प्रिंसिपल ने लेखिका के पिता को पत्र भेजा क्योंकि वे लेखिका के खिलाफ अनुशासन संबंधी कार्रवाई करना चाहते थे.
Exam Tip: कारण बताने वाले प्रश्नों में, सीधे और सटीक कारण का उल्लेख करें, अनावश्यक विवरणों से बचें.
Question 3. पत्र पढ़ते ही क्रोधित पिता ने लेखिका के विषय में क्या कहा ?
Answer: जब पिता ने पत्र पढ़ा तो वे बहुत गुस्से में आ गए और बोले, 'यह लड़की मेरा सिर शर्म से झुका देगी। पता नहीं मुझे वहाँ जाकर क्या-क्या सुनना पड़ेगा! चार बच्चों को पहले भी पढ़ाया है, लेकिन ऐसा दिन कभी नहीं देखा।'
In simple words: पत्र पढ़कर पिता गुस्सा हो गए और बोले कि लेखिका उन्हें शर्मिंदा करेगी और ऐसी बातें सुनने को मिलेंगी जो पहले कभी नहीं मिलीं.
Exam Tip: किसी पात्र के संवाद को उद्धृत करते समय, उसके मूल भाव और शब्दों को बनाए रखने का प्रयास करें, और उसे यथासंभव सटीक रूप से प्रस्तुत करें.
Question 4. दुर्बलता तथा विशिष्ट शब्द का विलोम लिखिए।
Answer: 'दुर्बलता' का विलोम 'सबलता' है और 'विशिष्ट' का विलोम 'सामान्य' है। ये दोनों शब्द अपने अर्थ में विपरीत हैं।
In simple words: 'दुर्बलता' का उल्टा 'सबलता' है, और 'विशिष्ट' का उल्टा 'सामान्य' है.
Exam Tip: विलोम शब्दों का चयन करते समय, मूल शब्द के लिंग और वचन का ध्यान रखें, हालांकि 'दुर्बलता-सबलता' जैसे कुछ अपवाद भी हो सकते हैं.
Question 1. घर लौटने पर लेखिका के पिताजी के साथ कौन बैठा था ?
Answer: लेखिका के घर लौटने पर, उनके पिता के साथ उनके बहुत खास और गहरे दोस्त, अजमेर के जाने-माने और सम्मानित डॉ. अंबालालजी बैठे हुए थे।
In simple words: जब लेखिका घर लौटीं, तो उनके पिता के बहुत करीबी दोस्त, डॉ. अंबालालजी, वहाँ बैठे थे.
Exam Tip: पात्रों के विवरण में उनके रिश्तों और सामाजिक स्थिति को भी शामिल करें ताकि उत्तर अधिक पूर्ण लगे.
Question 2. लेखिका को देखते ही अंबालालजी ने क्या किया?
Answer: लेखिका को देखते ही, अंबालालजी ने उत्साहपूर्वक उनका स्वागत किया और कहा, "आओ, आओ मन्नू! मैंने चौपड़ पर तुम्हारा भाषण सुना और तुरंत भंडारी जी को बधाई देने आया। मुझे तुम पर बहुत गर्व है।"
In simple words: अंबालालजी ने लेखिका का बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया और कहा कि उन्हें उस पर बहुत गर्व है, क्योंकि उन्होंने उसका भाषण सुना था.
Exam Tip: पात्रों की प्रतिक्रियाओं का वर्णन करते समय, उनके शब्दों और व्यवहार दोनों को शामिल करें, जिससे घटना का सजीव चित्रण हो.
Question 3. बेटी की तारीफ सुनकर लेखिका के पिता में क्या बदलाव आया?
Answer: लेखिका के पिता बहुत क्रोधित थे, लेकिन जब उनके खास दोस्त ने मन्नू की प्रशंसा की, तो उनका गुस्सा धीरे-धीरे कम हो गया। उनके चेहरे पर संतोष के भाव दिखने लगे और वह धीरे-धीरे गर्व में बदलने लगे।
In simple words: लेखिका के पिता का गुस्सा तब शांत हो गया जब उनके दोस्त ने उनकी बेटी की तारीफ की, और उनका संतोष गर्व में बदल गया.
Exam Tip: किसी पात्र के भावनात्मक बदलाव का वर्णन करते समय, भावनाओं के क्रमिक परिवर्तन को स्पष्ट रूप से दर्शाएं.
Question 4. 'अंतरंग' और 'संतोष' का विलोm शब्द लिखिए।
Answer: 'अंतरंग' का विलोम 'बहिरंग' है और 'संतोष' का विलोम 'असंतोष' है। ये दोनों शब्द अपने विपरीत अर्थ दर्शाते हैं।
In simple words: 'अंतरंग' का उल्टा 'बहिरंग' होता है, और 'संतोष' का उल्टा 'असंतोष' होता है.
Exam Tip: विलोम शब्द लिखते समय, एक शब्द के विभिन्न अर्थों पर विचार करें ताकि आप सबसे उपयुक्त विपरीत शब्द चुन सकें.
Very Short Answer Questions (With Options)
Question 1. लेखिका के पिता इन्दौर से अजमेर क्यों आ गए थे?
(क) तबादला होने के कारण
(ख) शौख के कारण
(ग) आर्थिक झटके के कारण
(घ) पैतृक सम्पत्ति के कारण
Answer: (ग) आर्थिक झटके के कारण
In simple words: लेखिका के पिता आर्थिक समस्या के कारण इंदौर से अजमेर आ गए थे.
Exam Tip: बहुविकल्पीय प्रश्नों में, सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ें और सुनिश्चित करें कि आपका चुना हुआ विकल्प प्रश्न के सबसे सटीक उत्तर से मेल खाता हो.
Question 2. अधूरी महत्त्वाकांक्षाओं, बढ़ती अभावग्रस्तता का क्रोध किस पर उतरता था ?
(क) लेखिका की बहन पर
(ख) लेखिका की मां पर
(ग) लेखिका के भाइयों पर
(घ) लेखिका पर
Answer: (ख) लेखिका की मां पर
In simple words: अधूरी इच्छाओं और गरीबी का गुस्सा लेखिका की माँ पर आता था.
Exam Tip: कहानी के प्रमुख पात्रों के भावनात्मक व्यवहार और उनके कारणों को याद रखना बहुविकल्पीय प्रश्नों में मदद कर सकता है.
Question 3. लेखिका की माँ उसके पिता के ठीक विपरीत थीं, का आशय क्या है ?
(क) उनके स्वभाव और गुणों में बहुत अंतर था।
(ख) बच्चों की पढ़ाई पर वे एकमत न थे।
(ग) अजमेर में रहते हुए वे झगड़ते थे।
(घ) दोनों के स्वभाव मेल नहीं खाते थे।
Answer: (क) उनके स्वभाव और गुणों में बहुत अंतर था।
In simple words: इसका अर्थ है कि माँ और पिता के स्वभाव और गुणों में काफी फर्क था.
Exam Tip: 'विपरीत' जैसे शब्दों का अर्थ स्पष्ट रूप से समझना महत्वपूर्ण है ताकि आप सही आशय को पहचान सकें.
Question 4. लेखिका की माँ अपना कर्तव्य किसे समझती थीं?
(क) बच्चों की जरूरतें पूरी करना
(ख) बच्चों को अच्छी शिक्षा देना
(ग) बच्चों का पालन-पोषण करना
(घ) बच्चों की अच्छी-बुरी मांग और जिद् को पूरी करना
Answer: (घ) बच्चों की अच्छी बुरी माँग और जिद को पूरी करना
In simple words: लेखिका की माँ अपने बच्चों की हर छोटी-बड़ी इच्छा और जिद पूरी करना अपना कर्तव्य मानती थीं.
Exam Tip: पात्रों के चरित्र चित्रण से संबंधित प्रश्नों में, उनके व्यवहार और सोच को ध्यान में रखकर उत्तर दें.
Question 5. शेखर : एक जीवनी किसकी रचना है?
(क) जैनेन्द्र
(ख) अज्ञेय
(ग) प्रेमचंद
(घ) यशपाल
Answer: (ख) अज्ञेय
In simple words: 'शेखर : एक जीवनी' अज्ञेय की लिखी हुई पुस्तक है.
Exam Tip: साहित्यिक रचनाओं और उनके लेखकों के नाम याद रखना साहित्य से संबंधित प्रश्नों के लिए आवश्यक है.
Separate Prefixes And Suffixes:
- अव्यवस्थित - अ - इत - व्यवस्था
- संवेदनशील - सम् - शील - वेदना
- सकारात्मक - स - आकार - आत्मक
Do Sandhi-Vichchhed:
- सकारात्मक - सकार \( + \) आत्मक
- महत्त्वाकांक्षा - महत्त्व \( + \) आकांक्षा
- किशोरावस्था - किशोर \( + \) अवस्था
- अंतविरोध - अंत: \( + \) विरोध
- युवावस्था - युवा \( + \) अवस्था
State Compound Types With Explanation:
- पितृ-गाथा - पितृ (पूर्वजों) की गाथा - तत्पुरुष समास
- हीन-भाव - हीनता का भाव - तत्पुरुष समास
- पैतृत-पुराण - पितृ (पूर्वजों) की गाथा - तत्पुरुष समास
- भाव-भंगिमा - भाव और भंगिमा - द्वंद्व समास
- पाक-शास्त्री - पाकशास्त्र में निपुण - तत्पुरुष समास
- पाप-पुण्य - पाप और पुण्य - द्वंद्व समास
- सही-गलत - सही या गलत - द्वंद्व समास
- नैतिक-अनैतिक - नैतिक या अनैतिक - द्वंद्व समास
- प्रभात-फेरियाँ - प्रभात में की जानेवाली फेरियाँ - तत्पुरुष समास
- यश-कामना - यश की कामना - तत्पुरुष समास
- यश-लिप्सा - यश की लिप्सा - तत्पुरुष समास
- डाँट-डपटकर - डाँट और डपटकर - द्वंद्व समास
- जो-जो-जो और जो - अव्ययी भाव
- धीरे-धीरे - धीरे और धीरे - अव्ययी भाव
- विद्यार्थी-वर्ग-विद्यार्थियों का वर्ग - तत्पुरुष समास
- मान-मर्यादा - मान और मर्यादा - द्वंद्व समास
- इज्जत-आबरू -इज्जत और आबरू - द्वंद्व समास
- सहनशक्ति - सहन करने की शक्ति - तत्पुरुष समास
Make Adjectives:
- खुशहाली - खुशहाल
- दरियादिली - दरियादिल
- विश्वासघात - विश्वासघाती
- लेखक - लेखकीय
- भिन्नता - भिन्न
- फरमाइश - फरमाइशी
- असहायता - असहाय
- सहिष्णुता - सहिष्णु
- सीमा - सीमित
- पाकशास्त्र - पाकशास्त्री
- राजनीति - राजनैतिक
- जोश - जोशीला
- अनुशासन - अनुशासित
- प्रतीक्षा - प्रतीक्षित
Write Antonyms:
- बेखबर \( \times \) खबरदार
- मान \( \times \) अपमान
- आधुनिकता \( \times \) परंपरागत/प्राचीनता
- उपस्थिति \( \times \) अनुपस्थिति
- नैतिक \( \times \) अनैतिक
- विरोध \( \times \) समर्थन
- सुखद \( \times \) दुःखद
- आरंभिक \( \times \) अंतिम
- खंडित \( \times \) अखंड
- विस्फारित \( \times \) संकुचित
- खुशहाली \( \times \) बदहाली
- अव्यवस्थित \( \times \) व्यवस्थित
- संवेदनशील \( \times \) संवेदनहीन
- सकारात्मक \( \times \) नकारात्मक
- आर्थिक \( \times \) अनार्थिक
- अव्यवस्थित \( \times \) व्यवस्थित
- मित्रता \( \times \) अमित्रता
- अचेतन \( \times \) चैतन्य
Ek Kahani Yeh Bhi Summary In Hindi
Author - Introduction:
हिन्दी साहित्य की सुप्रतिष्ठित लेखिका मन्नू भण्डारी का जन्म सन् 1931 में भानपुरा गाँव, जिला मंदसौर (म.प्र.) में हुआ। राजस्थान के अजमेर शहर में इन्होंने इंटर तक की शिक्षा प्राप्त की। इन्होंने बनारस विश्वविद्यालय से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। हिन्दी में एम.ए. करने के बाद दिल्ली में मिरांडा हाउस में अध्यापन कार्य किया। वहाँ से अवकाश प्राप्त करने के पश्चात् ये स्वतंत्र रूप से लेखनकार्य कर रही हैं। कुछ समय तक इन्होंने प्रेमचंद सृजनपीठ की निर्देशिका के पद पर भी काम किया।
मन्नूजी कहानी और उपन्यास दोनों ही विधाओं में समान रूप से लिखती रही हैं। इन्होंने नारी-जीवन की विभिन्न समस्याओं और उनसे जुड़े अनछुए पहलुओं को अपनी रचनाओं में उद्घाटित किया है। स्त्री-पुरुष संबंधों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण उनकी रचनाओं में स्पष्ट झलकता है। 'एक प्लेट सैलाब', 'मैं हार गई,', 'यही सच है,' 'त्रिशंकु' इनके प्रमुख कहानी संग्रह हैं तो 'आपका बंटी' और 'महाभोज' इनके प्रसिद्ध उपन्यास हैं।
मन्नू भण्डारी को उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए हिन्दी अकादमी के शिखर सम्मान सहित कई पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं जिनमें, भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता, राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के पुरस्कार शामिल हैं। नई कहानी आन्दोलन में इनकी प्रमुख भूमिका रही है। इनकी रचनाओं में सड़ी-गली, परम्पराओं के विरुद्ध विद्रोह के स्वर सुनाई देते हैं।
इनके कथा साहित्य में भाषा और शिल्प की ताजगी व प्रामाणिक अनुभूति मिलती है। प्रस्तुत पाठ 'एक कहानी यह भी' मन्नूजी की आत्मकथा का अंश है। इसमें लेखिका ने किशोर मन से जुड़ी घटनाओं के साथ उनके पिताजी और उनकी प्राध्यापिका शीला अग्रवाल के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला है। इनके लेखकीय व्यक्तित्व के निर्माण में इन दोनों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है।
लेखिका ने एक सामान्य लड़की से प्रतिष्ठित लेखिका बनने के विभिन्न पड़ावों को प्रकट किया है। सन् 1946-47 की आजादी की आँधी ने इनके व्यक्तित्व को प्रभावित किया। उन्होंने आजादी की लड़ाई में भी सक्रिय भूमिका निभाई । प्रस्तुत पाठ में मन्नूजी का उत्साह, ओज, नेतृत्व क्षमता और विरोधी प्रकृति देखने को मिलता है।
Chapter Summary (Theme):
बचपन की यादें : लेखिका के अनुसार उनका जन्म मध्य प्रदेश के भानपुरा गाँव में हुआ था। अजमेर की यादें ताजा करते हुए वे बताती हैं कि जहाँ उनके पिता रहते थे, वहाँ अव्यवस्थित रूप से फैली पुस्तकों-पत्रिकाओं के बीच उनके पिता कुछ न कुछ पढ़ते रहते थे या डिक्टेशन देते रहते थे। पिताजी की आज्ञाओं और सबकी इच्छाओं का पालन करती हुई उनकी बेपढ़ी माँ रहती थी।
अजमेर से पहले इन्दौर में जहाँ उनके पिता रहते थे, वहाँ उनकी बड़ी प्रतिष्ठा थी। वे कोंग्रेस के साथ सुधार कार्यों में लगे रहते थे। वे केवल शिक्षा के उपदेश न देकर विद्यार्थियों को अपने घर पढ़ाया करते थे। इस तरह उनके उदार दिल की चर्चा होती थी। वे एक ओर कोमल और संवेदनशील थे तो दूसरी ओर अत्यंत क्रोधी और अहंवादी थे।
पिता की बिगड़ती आर्थिक स्थिति : आर्थिक संकट के कारण लेखिका के पिताजी इन्दौर से अजमेर आ गए। यहाँ आकर उन्होंने अंग्रेजी-हिन्दी शब्दकोश (विषयवार) के अधूरे कार्य को पूरा किया, जिससे पिताजी को यश-प्रतिष्ठा में बहुत वृद्धि हुई किन्तु अर्थ (पैसा) नहीं मिला । बिगड़ती हुई आर्थिक स्थिति ने उन्हें हाशिए पर ला दिया।
फिर भी वे इस बात का ध्यान रखते कि आर्थिक विषमता का प्रभाव बच्चों पर न पड़े। दूसरी ओर अभावों की ओर खिसकते जाने के कारण उत्पन्न क्रोध माँ पर बरसता । अपनों के कारण धोखा खाने के बाद पिताजी का स्वभाव शक्की हो गया था। इतना शकी की उसकी चपेट में स्वयं लेखिका भी आ जाती थीं।
लेखिका के व्यक्तित्व पर पिता की छाप : लेखिका बताती हैं कि पिताजी के अनजाने, अनचाहे व्यवहार ने मेरे अंदर हीन ग्रंथियों को जन्म दे दिया। गोरा रंग पिताजी की कमजोरी थी। मैं काली थी और मुझसे दो साल बड़ी, खूब गोरी, बहिन सुशीला से मेरी हर बात में तुलना करते हुए उसकी प्रशंसा करते थे, जिससे लेखिका के मन में हीन भाव की ग्रंथि पैदा हो गई ।
नाम, सम्मान, प्रतिष्ठा पाने के बावजूद वे आज तक इससे ऊपर नहीं पाईं । यही कारण है कि हीन भावना के रहते अपनी किसी उपलब्धि पर वे भरोसा नहीं कर पाईं। आज भी शक्की स्वभाव की झलक वे अपने भीतर महसूस कर सकती हैं। वह अतीत आज भी भीतर जड़ जमाए बैठा है।
लेखिका और उनकी माँ : लेखिका की माँ उनके पिता के स्वभाव से एकदम विपरीत थी । उनमें धैर्य और सहनशक्ति अपेक्षा से अधिक थी। पिताजी की हर ज्यादती को अपना भाग्य व बच्चों की हर उचित-अनुचित फरमाइश और जिद को सहजभाव से पूरा करती थीं। उन्होंने जिंदगी भर अपने लिए कुछ नहीं मांगा और न चाहा, केवल दिया ही । सभी भाई-बहनों का लगाव सहानुभूति के कारण उन्हीं के प्रति था। इतने पर भी उनका त्याग, उनकी सहिष्णुता लेखिका का आदर्श न बन सका।
पड़ौस कल्चर : लेखिका याद करती हैं कि उनके समय में घर की दीवारें पड़ोस तक फैली रहती थीं। सभी परिवार के हिस्से होते थे। बचपन में खेले जानेवाले खेल की सीमा परिवार की दीवारें थीं और यह सीमा सम्पूर्ण पड़ोस तक जाती थी। अपने बचपन के समय के पड़ोस कल्चर को याद कर महानगरों के फ्लेट कल्चर को देख वे पहले के समय के पड़ोस कल्चर को अच्छा बताती हैं। उनकी अपनी कहानियों के पात्र वे ही हैं जिनके साथ
किशोरावस्था की यादें जुड़ी हैं। इतने वर्ष बीत जाने पर भी उनकी भाव-भंगिमा, उनकी भाषा बिना किसी प्रयास के सहज भाव से कहानियों में उतरते चले गए । लेखिका बताती हैं कि उस समय के दो साहब 'महाभोज' में इतने वर्षों के बाद कैसे एकाएक जीवित हो उठे, यह मेरे लिए आश्चर्य का विषय था।
अपने वजूद का एहसास : लेखिका बताती हैं कि बड़ी बहन की शादी हो जाने तथा दोनों बड़े भाइयों के पढ़ाई के लिए बाहर चले जाने पर उसे अपने वजूद का एहसास हुआ। पिताजी का ध्यान पहली बार उन पर केन्द्रित हुआ। लड़कियों को जिस उम्र में स्कूली शिक्षा के साथ-साथ सुघड़ गृहिणी और कुशल पाक-शास्त्री बनने के नुस्खे जुटाए जाते थे, उनके पिता का आग्रह रहता कि वे रसोई से दूर रहें।
घर में आए दिन राजनैतिक पार्टियों के जमावड़े होते थे और जमकर बहसें होती थीं । लेखिका जब वहाँ चाय-पानी देने जाती तो पिताजी का आग्रह रहता कि वे वहीं बैठें। उस समय लेखिका को विभिन्न राजनैतिक पार्टियों की नीतियाँ, उनके आपसी विरोध या मतभेद की समझ नहीं थीं पर क्रांतिकारियों और देशभक्त शहीदों के रोमानी आकर्षण, उनकी कुबानियों से जरूर मन आक्रांत रहता था।
प्राध्यापिका शीला अग्रवाल से मिली प्रेरणा : कॉलेज के प्रथम वर्ष में लेखिका की मुलाकात शीला अग्रवाल से हुई। इन्होंने ही साहित्य-संसार में प्रवेश करने की प्रेरणा दी। इसके बाद लेखिका एक के बाद एक शरत्, प्रेमचंद्र, जैनेंद्र, अज्ञेय यशपाल, भगवती चरणवर्मा के साहित्य को पढ़ती गई और शीला अग्रवाल से बहस (साहित्य चर्चा) करती हुई उस उम्र में जितना समझ सकती थीं, उन्होंने समझा।
देश की स्थितियों को जानने समझने का जो सिलसिला पिताजी ने शुरू किया था उसे शीला अग्रवालजी ने सक्रिय भागीदारी में बदल दिया। वैसे भी सन् 46-47 के दिनों में घर बैठे रहना संभव न था। प्रभात फेरियां, हड़तालें, जुलूस, भाषण हर शहर का चित्र था और पूरे दमखम के साथ इनसे जुड़ना हर युवा का उन्माद था ।
लेखिका भी उस समय युवा थी अतः शीला अग्रवाल की जोशीली बातों ने रगों में बहते हुए खून को लावे में बदल दिया । एक ओर शहर में बवंडर मचा हुआ था वहीं दूसरी ओर लेखिका के घर में भी। वे हड़ताल करवाती, नारे लगवाती, सड़कें नापती, यह सब उनके पिताजी को अच्छा नहीं लगता था, वे पिताजी के क्रोध की चिंता किए बिना उनसे बहस करती, फिर यह सिलसिला हो गया। राजेन्द्र से शादी करने तक यह सिलसिला चलता रहा।
अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए पत्र : लेखिका के कॉलेज से पिताजी के नाम पत्र आया कि वे आकर मिलें और बताएं कि मेरी गतिविधियों के कारण अनुशासनात्मक कार्यवाही क्यों न की जाए ? पत्र पढ़ते ही पिता आग बबूला हो गए। कहने लगे यह लड़की मुझे कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ेगी। गुस्से से भनभनाते हुए गए थे। लेखिका डर के कारण पड़ोस के घर में जाकर बैठ गई थीं। लौटकर आए तो खुश थे।
कहाँ तो पिताजी जाते समय मुंह दिखाने से घबरा रहे थे और कहाँ बड़े गर्व से कहकर आए कि यह तो पूरे देश की आवाज है... इस पर कोई कैसे रोक लगा सकता है। बैहंद गद्गद् होकर पिताजी सुनाते रहें और वे (लेखिका) अवाक् थीं। उन्हें अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था।
पिताजी के दो मित्र और चर्चा के केन्द्र में मैं लेखिका बताती हैं कि एक बाबू आज़ाद हिंद फौज के मुकदमें के सिलसिले में कॉलेजों, स्कूलों, दुकानों के लिए हड़ताल का आह्वान था। छात्रों का एक समूह लोगों को हड़ताल के लिए प्रेरित कर रहा था। अजमेर के चौपड़ बाजार पर विद्यार्थी इकट्ठे होकर भाषणबाजी कर रहे थे। इसी बीच पिताजी के एक दकियानूस मित्र ने आकर उनसे मेरे बारे में कुछ बातें – 'मन्नू की मत मारी गई हैं, हड़ताले करवा कर हुड़दंग मचा रही है...' कहकर चले गए। वे तो आग लगाकर चले गए।
पिताजी सारे-सारे दिन क्रोधित होते रहे। इस सबसे बेखबर मैं घर लौटी तो पिताजी के बेहद अंतरंग मित्र और अजमेर के सबसे प्रतिष्ठित और सम्मानित डॉ. अंबालालजी बैठे थे, उन्होंने मेरा गर्मजोशी से स्वागत किया। मैं तो चौपड़ बाजार में तुम्हारा भाषण सुनते ही भण्डारीजी को बधाई देने चला आया था।' वे धुंआधार तारीफ करते जा रहे थे, पिताजी के चेहरे पर गर्व के भाव आते जा रहे थे । भीतर जाने पर माँ ने गुस्सेवाली बात बताई तो मैंने राहत की सांस ली।
शिला अग्रवाल के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही : कॉलेज प्रशासन ने एक ओर लड़कियों को भड़काने और कॉलेज का अनुशासन बिगाड़ने के आरोप में शीला अग्रवाल को मह 47 में नोटिस थमा दिया तो दूसरी ओर कॉलेज में हुड़दंग न मचे इसलिए जुलाई में थर्ड इयर की क्लासेज बंद करके दो-तीन छात्राओं का प्रवेश निषिद्ध कर दिया। फिर तो कॉलेज के बाहर रहकर उड़दंग मचाया । कॉलेजवालों ने अगस्त में थर्ड इयर खोल दिया । जीत की खुशी हुई परन्तु चिर प्रतीक्षित खुशी के सामने यह खुशी कम थी। चिर प्रतीक्षित खुशी थी- 15 अगस्त, 1947 की खुशी।
Word Meanings And Notes:
- सिलसिला - क्रमानुसार
- निहायत - एकदम
- ओहदा - पद
- अहंवादी - घमंडी
- भग्नावशेष - खंडहर (टूट-फूटे हिस्से)
- दरियादिली - दयालु, परोपकार की भावना
- बल-बते - सामर्थ्य
- विस्फारित - और अधिक फैलना
- हाशिए पर - किनारे पर
- ग्रंथि - गांठ
- हीनभाव - अपने को छोटा समझना
- तुक्का से - भाग्य या संयोग से
- भन्ना जाना - क्रोधित होना
- व्यथा - कष्ट
- आसन्न - अति समीप
- ज्यादती - अत्याचार
- फरमाइश - इच्छा
- दायरा - सीमा
- विच्छिन्न - अलग-अलग करना
- दमखम - पूरी ताकत
- निषिद्ध - प्रवेश न देना
- वर्चस्व - दबदबा
- दकियानूसी - पुराने विचारों का समर्थक
- अंतरंग - आत्मीय
- चिर प्रतीक्षित - लम्बे समय से जिसका इंतजार हो
- बिला जाना - खो जाना
Meanings Of Idioms:
- आग बबूला होना - अत्यधिक गुस्सा होना।
- विश्वासघात करना - धोखा देना।
- थू-थू करना - अनुचित काम करने पर थित्कारना
- आग लगाकर - भड़का कर, झगड़ा लगाना
Sentence Usage:
- रमेश के परीक्षा में कम अंक आने पर उसके पिता आग बबूला हो उठे।
- नौकर मालिक के साथ विश्वासघात करके नौ लाख रुपये लेकर भाग गया।
- राजनरंजन की करनी पर सारा गाँव थू-थू करने लगा।
- जबसे बुआजी ने आग लगाई, दोनों भाइयों के बीच दरार बढ़ती जा रही है।
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